शुक्रवार, 15 मार्च 2013

ईसा मसीह के प्रतिनिधित्व के रूप में पोप कार्यशील

                                                     ईसा मसीह के प्रतिनिधित्व के रूप में पोप कार्यशील

 
ईसा मसीह के प्रतिनिधित्व के रूप में पोप कार्यशील होते हैं। इस लिहाज से दुनियाभर के रोमन कैथोलिकों के धर्मगुरू भी हो गये हैं।  इनको इटली सरकार के भी मान्यता प्रदान की है। इटली सरकार ने 1929 में 109 एकड़ जमीन पर पसरा वेटिकन सिटी को स्वतंत्र रूप से संचालन करने वाले पोप ही होते हैं। पोप के द्वारा कार्डिनलों को राजदूत के रूप में बहाल करते हैं। जो पोप के चयन में अहम भूमिका अदा करते हैं। जो सदियों से होता चला रहा है। इस बार भी चला। उनका चयन कार्डिनल लोग कई दौर की प्रार्थना करने के बाद ही पोप को चुनने में सर्मथ हो पाते हैं। जौर्ज मारियो बेर्गोगलिया पादरी, बिशप, कार्डिनल और अब पोप बन गये हैं। प्रार्थना के बल पर पोप फ्रांसिस वन बन सके ।

बुधवार 13.03.2013 की रात 11:45 मिनट दुनियाभर के 1.2 अरब रोमन कैथोलिकों के लिए हर्ष लेकर आया। इस ऐतिहासिक दिवस पर रोमन कैथोलिक समुदाय को नए पोप मिल गये हैं। पहली बार यूरोप से बाहर के होने वाले पोप अर्जेन्टीना के कार्डिनल जौर्ज मारियो बेर्गोगलिया हैं। इनको पोप फ्रांसिस वन के नाम से जाना जाएगा। पोप के रूप में चुने जाने के बाद केवल 8 मिनट के अंदर ही पोप सबसे पहले ऐतिहासिक सेंट पीटर्स बैसिलिका की बालकनी में आकर हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों को दर्शन दिए और लोगों को संबोधित किये। उस समय प्राकृतिक की ओर खुशी मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रखा उसने हल्की वर्षा की बौंछार दे दिये। नए पोप पाकर लोग हर्षित हो उठे। कुल मिलाकर 266 वें पोप  के सम्मान में चर्च के घंटे घनघना उठे।

  17 दिसंबर 1936 में पोप फ्रांसिस वन ( जौर्ज मारियो बेर्गोगलिया ) का जन्म हुआ है। 21 साल की अवस्था में पादरी बने। इस बीच बहुत जोर से बीमार भी पड़े। 1962 में बिशप बने थे। 1978 में कार्डिनल बनाये गये। व्यूनस आयर्स के आर्च बिशप हैं। 2005 में पोप का चुनाव वक्त पोप का प्रबल दावेदार थे। परन्तु सफल नहीं हो सके। मगर इस बार दुनियाभर के 48 देशों के 115 कार्डिनलों ने मिलकर पोप का चुनाव किया। भारत से भी 5 कार्डिनल इस प्रक्रिया में शामिल थे। झारखंड के कार्डिनल तेलेस्फोर पी. टोप्पों भी गये थे। किसी भी लैटिन अमेरिकी देश से पहली बार कोई व्यक्ति पोप बना है। पोप को दो तिहाई बहुमत से चुना गया। नए पोप की उम्र की 76 साल है। इस तरह उनका पोप बनने का सपना साकार हो। कार्डिनलों के द्वारा दो तिहाई बहुमत वोट यानी 77 पड़ने के बाद ही नए पोप बन सके।

    1.2 अरब रोमन कैथोलिकों के नेतृत्व करने वाले नए पोप चुनाव 115 कार्डिनलों ने 5 चक्र वोट डालने के बाद वैटिकन सिटी में नए पोप का चुनाव हो गया है। अर्जेन्टीना के कार्डिनल जौर्ज मारियो बेर्गोगलिया बने नए पोप। इन्हें पोप फ्रांसिस वन के नाम से जाना जाएगा। पोप के रूप में चुने जाने के बाद सबसे पहले ऐतिहासिक सेंट पीटर्स बैसिलिका की बालकनी में आकर उन्होंने दर्शन दिए। इस मौके पर पोप फ्रांसिस ने लोगों को संबोधित भी किया। पोप को दो तिहाई बहुमत से चुना गया। नए पोप की उम्र की 76 साल है।
  पोप का चुनाव 8 चरणों में होता है। इसके लिए 3 दल बनाया जाता है। जो चुनाव संबंधी प्रक्रियों को मूर्त रूप देता है। जब तक निर्णायक चुनाव नहीं होता है तो उस निर्वाचन वोटर पेपर में राशायनिक डालकर जलाया जाता है। ऐसा करने से वैटिकन में सिस्टीन चैपल की चिमनी से काला धुआं निकलने लगता है। काला धुआं निकलने का मतलब होता है कि पोप का चुनाव नहीं हो सका है। 2 दिन की प्रक्रिया के बाद नए पोप का चुनाव किया गया। तब दो तिहाई बहुमत प्राप्त हो जाता है तो उन पेपरों को सीधे जलाया जाता है।ऐसा होने से चिमनी से सफेद धुआं निकलने लगता है। तो यह संकेत दे देता है कि पोप का चुनाव हो गया है। सफेद धुंआ निकलते ही वैटिकन के सेंट पीटर्सबर्ग स्क्वेयर पर मौजूद लोग खुशी से झूम उठे। गिरिजाघरों का घंटा बजने लगा। लोग एक दूसरे को बधाई देने लगे। यह देखना गया कि काला धुंआ निकलने के बाद एक पक्षी आकर चिमनी पर बैठ गयी। इसे ईसाई समुदाय पवित्र आत्मा कहने लगे। इसके तत्क्षण बाद ही पोप का चुनाव संपन्न हो गया।

 गौरतलब है कि पिछले महीने पोप बेनेडिक्ट 16वें ने खराब सेहत का हवाला देते हुए अपना पद छोड़ दिया था, जिसके बाद नए पोप को चुनने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। बेनेडिक्ट 16वें ने ऐसे समय में पोप का पद छोड़ा था जब कैथोलिक चर्च बाल यौन शोषण और वैटिकन में करप्शन के आरोपों से जूझ रहा है।  पोप के बारे में कहा जाता है कि रूढ़ीवादी और सुधारवादी के मिश्रण हैं। सादगी की प्रतिमूर्ति हैं। अपने क्षेत्र के स्लम एरिया में हरेक दिन विजिट करने जाते थे। खुद ही भोजन बनाकर खाते थे। चर्च के बगल में साधारण भवन में रहते थे। हवाई सफर के दौरान कम कीमत वाली टिकट लिया करते थे।
अब देखना है कि संसारभर में प्रसार भ्रष्टाचार और बढ़ते अपराधों पर पोप का क्या नजरिया रहता है। अन्तर धार्मिक संवाद को किस तरह बढ़ावा दे रहे हैं। वहीं लोकधर्मियों के द्वारा चर्च की व्यवस्था संभालने एवं सभी क्षेत्र में नेतृत्व करने में सक्षम होने पर लोकधर्मियों को किस तरह चर्च के कार्यों में भागीदारी करवाने में सहायक सिद्ध हो पा रहे हैं।



गुरुवार, 14 मार्च 2013


Patna Dharmprantiy prayer meeting
Kuerjee church in the event

 आजकल ईसाईयों का दुःखभोग चल रहा है। ईसाई धर्मावलम्बियों ने 13 फरवरी को राख बुधवार मनाया। इस दिन चर्च के पुरोहितों के द्वारा विश्वासियों की ललाट पर पवित्र राख से क्रूस का चिन्ह बनाकर स्मरण दिलवाते हैं कि हे ! मनुष्य तुम मिट्टी हो और मिट्टी में मिल जाओंगे। इस दिन उपवास और परहेज का दिन होता है। शाम के समय उपवास तोड़ा जाता है।

    पवित्र दुःखभोग की अवधि में ईसाई समुदाय उपवास और परहेज रखते हैं। हालांकि इसमें माता कलीसिया ने 18 साल से नीचे और 60 साल से ऊपर वालों को छूट दे रखी है। बहरहाल ईसाई समुदाय शिद्ददत से ईसा मसीह के दुःखभोग में स्वयं को शामिल कर रहे हैं। उपवास और परहेज रखते हैं। बुधवार और शुक्रवार के दिन में चर्च जाते हैं और ईसा मसीह के दुःखों पर आधारित 14 मुकाम में बड़ी भक्ति से शामिल होते हैं। इसके बाद पवित्र धार्मिक अनुष्ठान में सशरीर उपस्थित होकर परमप्रसाद ग्रहण करते हैं।

  इस बीच चालीस अवधि को गमगीन और प्रार्थनामय बनाने के उद्देश्य से प्रेरितों की रानी ईश मंदिर , कुर्जी चर्च में दो दिवसीय पटना धर्मप्रांतीय प्रार्थना सभा 14 और 15 मार्च को आयोजित की गयी है। 14 मार्च को सुबह 8 बजे से प्रार्थना सभा शुरू कर दी जाएगी। पंजीयन शुल्क 30 रूपये रखा गया है। इस शुल्क से भोजनादि उपलब्ध कराया जाएगा। आगामी 24 मार्च को खजूर रविवार है। इसके बाद पवित्र सप्ताह शुरू हो जाएगा। पवित्र सप्ताह के दौरान चर्च में भीड़ उभरनी शुरू हो जाएगी।


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