रविवार, 16 फ़रवरी 2014

बिहार का जायका बेबी कोर्न और मशरूम बन गया




पटना। भाई जी प्रोटीन से लबालब बेबी कोर्न और मशरूम है। आपको बोरिंग रोड चौराहा जाना पड़ेगा। यहां पर पॉकेट में बेबी कोर्न और मशरूम मिलता है। जरा होशियारी से बेबी कोर्न और मशरूम खरीदे। रंग पर गौर करें। सफेद रंग वाले स्वच्छ और ताजा होता है। अगर हल्कापन पीला हो जाए, तो समझ लें कि ताजा और स्वच्छ नहीं है।
आज बोरिंग रोड चोराहे पर एक पॉकेट बेबी कोर्न की कीमत 35 रूपए बताया गया। उसी तरह मशरूम की भी कीमत व्यक्त की गयी। एक पॉकेट का वजन 200 ग्राम का है। अगर आपको 1 किलोग्राम खरीदना है तो 175 रू. जेब से व्यय करने के लिए तैयार रहें।

इसका लुफ्त उठाने वाले संजय कुमार सिन्हा ने कहा कि ताजा और बासी देखना चाहिए। अगर ताजा-ताजा है। तो बिक्रीकर्ता स्वतः कीमत कम करके बेचता है। इसका वास्तविक कीमत एक पॉकेट की 40 रू. है। वजन 200 ग्राम ही रहेगा। अगर आप एक किलोगा्रम लेते हैं तो कीमत 200 रू. होता है। इसे बेहतर ढंग से बनाने से मुर्गा भी फेल हो जाता है। बेबी कोर्न और मशरूम स्वादिष्ट और प्रोटीनयुक्त सब्जी है। अब सब्जी के शौकिन बढ़ गये हैं। यह बिहार का जायका बेबी कोर्न और मशरूम बन गया है।

आलोक कुमार

रविवार, 26 जनवरी 2014

हिन्दी अखबार के आगमन पर काफी बवाल मचाया


पटना बिहार में अंग्रेजी अखबारों के आगमन पर हंगामा नहीं मचाया जाता है। मगर हिन्दी अखबार के आगमन पर काफी बवाल मचाया जाता है। इस लिए यह सब होता है ताकि हिन्दी जुबान वाले पर दबदबा कायम कर सके। अभी सूबे में नम्बर 1 अखबार बनने को लेकर दावा प्रति दावा हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण वाले कर रहे हैं। अभी-अभी बिहार में कदम रखने वाले दैनिक भास्कर मौन है।
राजधानी पटना में अखबार की कीमत कमः अभी समूचे बिहार की प्रतिनिधित्व करने वाली अखबार नहीं है। जिले-जिले की अखबार बन गयी है। संपूर्ण अखबार का मतबल सभी जिलों में एक समान अखबार से है। अभी तो अखबार गया, भागलपुर,मुजफ्फरपुर और पटना से प्रकाशित करायी जाती है। बिहार के अखबार तो क्षेत्रीय अखबार बनकर रह गयी है। दैनिक भास्कर ने अखबार की अधिक कीमत अधिक होने की बात उठायी थी। तो सभी अखबार के मालिकों ने अखबार की कीमत ढाई रू. कर दिये। पटना में ही अखबार की कीमत में कमी की गयी है। शेष सभी जिलों में पूर्ववत कीमत ही वसूली जा रही है। जहानाबाद जिले नागेन्द्र कुमार, भोजपुर जिले की सिंधु सिन्हा, गया जिले के अनिल पासवान,दरभंगा जिले के वीके सिंह आदि ने कहा कि अखबारों की कीमत 4 से 5 रू. तक वसूली जाती है।
लोकतंत्र के चतुर्थ स्तंभ पत्रकारिता सब्जी दुकान परः आज राष्ट्र 65 वें गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। विधायिका,कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद पत्रकारिता को चतुर्थ स्तंभ कहा जाता है। चारों बेहतर ढंग से कार्य कर रहे हैं। वर्तमान समय में आम आदमी की अहमियत बढ़ गयी है। सभी लोग आम लोगों के पास ही जाना पंसद कर रहे हैं। एक आम आदमी सब्जी के साथ अखबार भी बेचना शुरू कर दिया है। अखबार की कीमत घटने के कारण अगर को थैला नहीं लाते हैं। तो अखबार में ही समान लपेटकर देने लगता है। यह दुकान दीघा थानान्तर्गत रामजीचक मोहल्ला में स्थित है। दुकानदार अखबार पढ़ते हैं। आसपास के लोग भी अखबार पढ़ लेते हैं। इसके बाद अखबार को हॅाकर वापस भी कर देते हैं।
आलोक कुमार


हार्दिक शुभकामनायें

गणतंत्र दिवस के पावन शुभ अवसर पर आप सभी 

को हार्दिक शुभकामनायें !! 

 है प्रीत जहाँ की रीत सदा मैं गीत वहाँ के गाती हूँ 

भारत का रहने वाली हूँ भारत की बात सुनाती हूँ

 इतनी ममता नदियों को भी जहाँ माता कहके बुलाते 

है इतना आदर इन्सान तो क्या पत्थर भी पूजे जातें है  
इस धरती पे मैंने जनम लिया ये सोच के मैं इतराती 

हूँ भारत का रहने वाली हूँ भारत की बात सुनाती हूँ है 

प्रीत जहाँ की रीत सदा मैं गीत वहाँ के गाती हूँ भारत की रहने वाली हूँ भारत की बात सुनाती हूँ

पटना के जिलाधिकारी के पास माण्डवी देवी ने दिया आवेदन


बिहटा। पटना के जिलाधिकारी के पास माण्डवी देवी ने आवेदन लिखा है। उसमें स्पष्ट रूप से दबंग पिता और दो पुत्र का नामजद किया है। इसके बावजूद भी जिला प्रशासन के द्वारा किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गयी है। इसको लेकर माण्डवी देवी में आक्रोश व्याप्त है।
मामला यह है कि माण्डवी देवी पति चन्द्रदेव रविदास, ग्राम नेऊरी,थाना बिहटा जिला पटना की निवासी है। माण्डवी देवी महादलित हैं और जाति की रविदास महिला हैं।।
आवेदन में उल्लेख है कि 20 वर्षों से गैरमजरूआ जमीन पर उत्पन्न गड्ढा को भरकर झोपड़ी  बना रहती हैं। इस जमीन का प्लाट 0 1263, थाना . 46 और मौजा नेऊरी है। उसे इंदिरा आवास योजना के तहत मकान निर्माण करवाने  हेतु राशि स्वीकृत की गयी है। स्वीकृति के साथ-साथ ही दिनांक 28.12.2013  को प्रखंड स्तर से राशि भी प्रदान कर दी गयी। इस राशि से बालू, छड़ी, सिमेंट, छड़  भी गिरा चुकी है। लेकिन गांव के ही दबंग राजदेव राय, पिता रामप्यारे राय और उनके दो लड़के उमेश राय और सुनील राय ने मकान बनवाने वाली उस जमीन पर रोक लगा दी है। इस समय माण्डवी देवी काफी भयभीत हैं। इसके आलोक में श्रीमान् जिलाधिकारी महोदय के शरण में आई हैं। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि कोई ठीक नहीं कि कब और किसके द्वारा खून खराबा कर दिया जा सकता है? ऐसे लोग जानलेवा हमला करने से नहीं चूकेंगे। अन्त में श्रीमान् से आग्रह किया गया है कि जानमाल की रक्षा करते हुए इंदिरा आवास योजना के तहत उस जमीन पर मकान निर्माण कराने का आदेष निर्गत करके समस्या का निराकरण कर दें।
आलोक कुमार



रविवार, 1 दिसंबर 2013

पुरूष प्रधान देश में पुरूष प्रधान खेत भी है



पटना। सर्वविदित है कि भारत पुरूष प्रधान देश है। वहीं पुरूष प्रधान खेत भी हो गया है। वहां पर कार्यरत व्यक्ति को किसान कहते हैं। राजा के बदले रानी है। मगर किसान के बदले में क्या शब्द है? इसी लिए हम लोग खेत की आड़ी से भोजन की थाली तक अहम किरदार अदा करने वाली वीरांगनाओं को महिला किसान कहते हैं। इन महिलाओं का उत्पादन से वितरण में योगदान रहता है। वहीं 200 से 400 वर्ष पहले तक घर के तमाम सम्पति को पारिवारिक सम्पति कहा जाता था। इस लिए जमीन पर महिलाओं का अधिकार ही नहीं रहा। मगर महिलाओं की मजबूत कंधे पर पूजा पाठ और नेतृत्व की जिम्मेवारी रख दिया गया। इस तरह की अवधारणाओं को कल्याणकारी राज्य की सरकार के द्वारा बदलाव किया जा रहा है। अब महिलाओं को मान-सम्मान,पहचान और अधिकार दिये जा रहे हैं। इंदिरा आवास योजना के तहत मकान बनाते समय और जमीन का पर्चा देते समय महिला और पुरूष के नाम से संयुक्त नाम से वितरण किया जा रहा है।
 योजना एवं विकास विभाग के प्रधान सचिव विजय प्रकाश ने महिला किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए आगे कहा कि यदि हम राज्य में महिला किसानों की संख्या पर गौर करते हैं तो पाते हैं कि 1961 में 16 प्रतिशत,1971 में 2 प्रतिशत,2001 में 5 प्रतिशत और 2011 में 7 प्रतिशत महिला किसान हैं। कुल मिलाकर 30 लाख महिला किसान है। वहीं किसानों की कुल संख्या 1 करोड़ 61 लाख है।
महिला किसानों की आंकड़ाबाजी करते-करते प्रधान सचिव सरकार के द्वारा महिलाओं के पक्ष में किये कार्यों को गिनाने लगे। त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत में 50 प्रतिशत, शिक्षिकाओं की बहाली में 50 प्रतिशत, पैक्स में 50 प्रतिशत और पुलिस विभाग के इंस्पेक्टर की बहाली में 35 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दे रहे हैं। समेकित बाल विकास परियोजना महिलाओं के ही जिम्मे हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र में 90 लाख सेविका और 90 लाख सेविका सेवारत हैं। इसमें सीडीपीओ भी महिला ही हैं। अभी स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों की संख्या 64 लाख 61 हजार है। अभी 1 लाख 10 हजार स्वयं सहायता समूह है। इसे 5 साल में बढ़ाकर 10 हजार कर देना है। तबतक 1 करोड़ सदस्य भी हो जाएंगे। इस दिशा में मेजर परिवर्तन हो रहा है। सरकार सचेत होकर कार्यशील है।
शिक्षा के संदर्भ में जिक्र करते हुए आगे कहा कि 2001-11 तक 20 प्रतिशत साक्षरता दर में वृद्धि हुई है। 53 प्रतिशत से 73 प्रतिशत साक्षरता दर में इजाफा हुई है। वहीं समाज के किनारे रहने वाले महादलित मुसहर समुदाय के बारे में कहा कि 1961 में ढाई प्रतिशत से बढ़क 2001 में 9 प्रतिशत साक्षरता दर हो सकी है। इस समुदाय में साक्षरता दर की रफ्तार काफी धीमी है। अगर इसी तरह का हाल रहा तो 500 साल में साक्षर हो सकेंगे। सभागार में बैठे महिला किसानों से कहा कि महिला किसान होने का हक लेने के साथ शिक्षा का अधिकार भी लेने की जरूरत है। तब जाकर अधिकार मिलेगा। हम तो शिक्षा के क्षेत्र में लड़का और लड़की की संख्या में समानता के डगर पर है। इसी तरह खेत में पुरूष और महिला को समान अधिकार समान पहचान की दिशा में कारगर कार्य करने की जरूरत है।
आलोक कुमार

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