शुक्रवार, 23 मई 2014

मुसहर समुदाय को अनुसूचित जन जाति की श्रेणी में शामिल करने की मांग


गया। नव निर्वाचित मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को बधाई! राष्ट्रीय मुसहर-भूइया विकास परिषद और मुसहर विकास मंच के सदस्यों ने आशा व्यक्त किए हैं, कि सूबे के 35 वें मुख्यमंत्री, व्यक्ति में 23 वें और महादलित में तीसरे मुख्यमंत्री के तौर पर सत्तासीन होने वाले मुख्यमंत्री विवेक से कार्य करके लोगों का कल्याण और विकास करने में पीछे नहीं रहेंगे। खुद मुख्यमंत्री के ही बिरादरी आजादी के 66 साल तक दूसरों की तकदीर और तस्वीर बनाने में जुटे रहे। अब मुख्यमंत्री को अवसर मिला है कि मुसहर समुदाय के विकास करने में कौताही नहीं बरतेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास माथा पटककर हार जाने वाले मुसहर समुदाय के नेतृत्व करने वालों को बल मिला गया है। बहुत ही जल्द मुख्यमंत्री के समक्ष मुसहर समुदाय को अनुसूचित जाति की श्रेणी से निकालकर अनुसूचित जन जाति की श्रेणी में शामिल करने की मांग करेंगे। इस संदर्भ में राष्ट्रीय मुसहर-भूइया विकास परिषद के संयोजक उमेश मांझी और सचिव अजय मांझी ने कहा कि बिहार में मुसहर समुदाय की  40 लाख और देशभर में 66 लाख की संख्या है। हमलोगों की स्थिति बद से बदतर है। मात्रः वोट बैंक समझकर व्यवहार किया गया। हालांकि केन्द्र और राज्य सरकार ने योजना बना रखी है। जो जन्म लेने से पहले और मरने के बाद भी लागू रहती है। इन योजनाओं से सीधे लाभ मुसहर समुदाय को नहीं मिला। अगर लाभ मिला भी तोदलालसेंधमारी करने लगे। इंदिरा आवास योजना अधूरा ही बनकर रह गया। शौचालय निर्माण करने वाले सही ढंग से शौचालय बनाए ही नहीं। हमलोग बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। इसके आलोक में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महादलित आयोग बनाया। यह सोचकर कि समाज के किनारे रह जाने वालों का विकास करेंगे। वह भी राजनीति के बलिवेदी पर चढ़ गया। केवल रामविलास पासवान के बिरादरीपासवानको छोड़कर शेष सभी दलितों को महादलित आयोग में शामिल कर लिया। इसके कारण पूर्व मुख्यमंत्री की सोच का पर्दाफाश हो गया।
इस संदर्भ में राष्ट्रीय मुसहर-भूइया विकास परिषद के संयोजक उमेश मांझी ने आगे कहा कि हमलोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को स्मार-पत्र देकर मांग कर दिए कि अगर सच में आप मुसहर समुदाय के कल्याण और विकास करना चाहते हैं तो आप वर्तमान में अनुसूचित जाति की श्रेणी से निकालकर मुसहर समुदाय को अनुसूचित जन जाति की श्रेणी में शामिल कर लें। अगर उनके द्वारा स्मार-पत्र में उल्लेखित मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिए। अब बिहार की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन हो गया है। हमलोग चाहेंगे कि इस ओर बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी कदम उठाकर मुसहर समुदाय की मांग पूर्ण कर दें।एक सवाल के जवाब में श्री मांझी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कथनी का समर्थन किया कि मांझी ने थाम ली राज्य की पतवार को खेंवने में माहिर हैं। वह रिमोट कंट्रोल से नहीं चलने वाले हैं। अपने विवेक से राज्य चलाएंगे।
आलोक कुमार

मंगलवार, 15 अप्रैल 2014

राष्ट्रीय महिला बैठक में बिहार से चार नेत्री शिरकत करेंगी


पटना। राष्ट्रीय महिला बैठक में एक साथ एकता परिषद के संस्थापक पी.व्ही.राजगोपाल, एकता परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष रनसिंह परमार, एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप प्रियदर्शी और राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य रमेश शर्मा नजर आएंगे। राष्ट्रीय महिला बैठक में शामिल होने बिहार से मंजू डूंगडूंग, सिंधु सिन्हा, देवन्ती देवी और मीना देवी जा रही हैं। बिहार की सभी नेत्री 26 अप्रैल की शाम अथवा 27 अप्रैल की सुबह रिसोर्स सेंटर, ग्वालियर, मध्यप्रदेश में प्रवेश कर जाएंगी। 27 से 29 अप्रैल तक राष्ट्रीय बैठक की जाएगी।
विख्यात गांधीवादी और एकता परिषद के संस्थापक पी.व्ही.राजगोपाल के द्वारा मूल रूप से अहिंसात्मक आंदोलन पर ध्यान केन्द्रित कर प्रशिक्षण देंगे। अंहिसात्मक आंदोलन क्या है। यह क्यों जरूरी है। कहां से शुरू और कहां पर अंत किया जा सकता है। यह अंहिसात्मक आंदोलन किसके लिए किया जाएगा। इसके बाद स्वयं के जीवन एवं सामाजिक जीवन में अहिंसा का महत्व क्या है? इसके पहले 27 अप्रैल को आगत अतिथियों का स्वागत पुष्पा सिंह करेंगी और बैठक का उद्देश्य श्रद्धा कश्यप पेश करेंगी।
राष्ट्रीय महिला बैठक के दूसरे दिन 28 अप्रैल को राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य रमेश शर्मा के द्वारा एकता परिषद रजत जयंती वर्ष में महिलाओं की भूमिका एवं कार्यक्रमों पर फोकस डालेंगे। उसके बाद वनाधिकार अधिनियम 2006 एवं भूमि मुद्दे पर चर्चा करेंगे। एकता परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष रनसिंह परमार सक्रिय एवं द्वितीय स्तर के लीडरषीप को तैयार करने की प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे। राष्ट्रीय महिला बैठक के तीसरे दिन 29 अप्रैल को एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप प्रियदर्शी एकता परिषद के संगठनात्मक कार्यों में आने वाली समस्याएं,उनके समाधान और विकल्पों पर चर्चा करेंगे।
बिहार से राष्ट्रीय महिला बैठक में शामिल होने जा रही मंजू डूंगडूंग ने कहा कि  एकता महिला मंच का पुर्नगठन एवं भावी स्वरूप, जन संगठन का भावी स्वरूप, ग्राम वापसी अभियान एवं महिला आर्थिक समूह को सशक्त बनाने पर चर्चा होगी। इसके अलावे 5 वर्षों की क्रमबद्ध योजना बनायी जाएगी। इसके आलोक में अन्तरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन की तैयारियों पर भी चर्चा की जाएगी।

आलोक कुमार

बुधवार, 5 मार्च 2014

आम चुनाव की शंखनाद , बिहार में 6 चरणों में होगा चुनाव



बुधवार को चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा कर दी गयी। इसके साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गयी है। बिहार में 10 अप्रैल से चुनाव होगा। अंतिम 12 मई को चुनाव होगा।

बिहार में कुल चालीस सीट के लिए चुनाव होगा। इसमें 6 सीट आरक्षित है। आरक्षित है। सासाराम , गया , जमुई , समस्तीपुर , सारण और गोपालगंज है। आरक्षित सीट पर 10 अप्रैल को सासाराम , गया और जमुई , 30 April at the Samastipur , 5 मई को हाजीपुर और 12 मई को गोपालगंज में चुनाव होगा।

लोकसभा की निवर्तमान अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार सासाराम सीट से विजयी हुई है। उनको कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है। वहीं सेक्युलरिज्म के चादर उतारने वाले रामविलास पासवान को भाजपा की गोद में बैठकर कमल को खिलाना होगा। पैरवी करने के लिए रकम की मांग करने वाले हरि मांझी को सीट बचाने में खासा मुश्किल होने की संभावना है। सिने कलाकार शत्रुध्न सिन्हा को जीत हासिल करने के लिए जोर लगाना पड़ेगा। पटना साहिब की जनता नाराज चल रहे हैं।


Alok Kumar

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