शनिवार, 17 जून 2023

संत पापा का लैपरोटोमी और पेट की दीवार का ऑपरेशन

  संत पापा को 09 दिनों के बाद ए जेमेली विश्वविद्यालय अस्पताल से छुट्टी रोम में रहने वाले 83 साल के संत पापा फ्राँसिस बीमार थे.बुधवार 07 जून की सुबह आम दर्शन समारोह के अंत में संत पापा फ्राँसिस को रोम के ए जेमेली विश्वविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां दोपहर में उनका ऑपरेशन किया गया. इस अस्पताल में संत पापा का लैपरोटोमी और पेट की दीवार का ऑपरेशन किया गया. संत पापा को 09 दिनों के बाद ए जेमेली विश्वविद्यालय अस्पताल से छुट्टी मिल गयी.अपनी हर्निया से संबंधित सर्जरी के बाद संत पापा शुक्रवार की सुबह संत मारिया मेजर महागिरजाघर में (सालुस पोपोली रोमानी) रोम वासियों की संरक्षिका माता मरिया की प्रतिमा के सामने प्रार्थना करने के बाद वाटिकन लौट आए. मालूम हो कि संत पापा 1 अप्रैल 2023 को ब्रोंकाइटिस के लिए ए जेमेली विश्वविद्यालय अस्पताल में भर्ती होने के बाद और 14 जुलाई 2021 को अपने कोलन सर्जरी के बाद, वाटिकन लौटते समय संत पापा इसी तरह रोम वासियों की संरक्षिका माता मरिया का दर्शन करने गये थे. आज सुबह शुक्रवार को कृतज्ञता की अभिव्यक्ति के रूप में संत पापा ने पूरी ऑपरेटिंग टीम जिसमें डाक्टर, नर्स, चिकित्सा कर्मचारी, सामाजिक और स्वास्थ्य कार्यकर्ता और सहायक कर्मचारी शामिल थे.जिन्होंने 7 जून को ऑपरेशन के दौरान किसी भी तरह से उनकी मदद की. आलोक कुमार

शुक्रवार, 16 जून 2023

झूठे केस में जेल भेजने के विरोध में ईसाई आदिवासी महासभा का धरना-प्रदर्शन

 * बालाछापर के निर्दाेषों को झूठे केस में जेल भेजने के विरोध में ईसाई आदिवासी महासभा का धरना-प्रदर्शन.असली दोषियों को सजा दिलाने की मांग उठी. 7 दिन के भीतर गिरफ्तारी करें, अन्यथा उग्र आंदोलन की  चेतावनी........

जशपुरनगर.जशपुर जिले में बुधवार को रणजीता स्टेडियम के पास बालाछापर के निर्दाेष लोगों को झूठे केस में गिरफ्तार कर जेल भेजने के विरोध में ईसाइयों ने एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन किया.इस दौरान बालाछापर कांड के असली गुनहगारों और दोषी पुलिस अधिकारी को सजा दिलाने की मांग उठी. साथ ही 7 दिनों के भीतर उपद्रव मचाने वालों की गिरफ्तारी नहीं की जाती है तो ईसाई आदिवासी महासभा ने उग्र आन्दोलन करने की चेतावनी दी है. धरने के बाद ईसाई आदिवासी महासभा के पदाधिकारी कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपे.

       मालूम हो कि जशपुर के बालाछापर गांव में 6 जून 2023 को ग्राम बालाछापर की हीरामुनी बाई पति स्व. सोहन के घर में उसकी बेटी सिस्टर विभा बाई उर्फ विभा केरकेट्टा के कैथोलिक ईसाई नन बनकर प्रथम बार अपने घर आने पर शाम 6 बजे से ईसाई धर्म विधि अनुसार पवित्र मिस्सा (यूख्रीस्तीय प्रार्थना सभा) का आयोजन किया गया, यह अनुष्ठान जशपुर शांतिभवन के कैथोलिक प्रीस्ट के द्वारा सम्पन किया गया, जो लगभग 45 मिनट तक चला. इसमें वही धर्मविधि सम्पन्न की गई जो सभी कैथोलिक गिरजाघरों में प्रत्येक रविवार को एवं अन्य सामान्य अवसरों पर की जाती है.

       इस धार्मिक कार्यक्रम में सिस्टर विभा बाई उर्फ विभा केरकेट्टा के सगे संबंधी ईश्वर को धन्यवाद देने के लिए उपस्थित थे, साथ ही गांव के कुछ लोग उत्सुकतावश भी कार्यक्रम देखने के लिए आए थे.एकत्र लोगों की संख्या लगभग 40-50 रही होगी.पवित्र मिस्सा के बाद सिस्टर विभा वाई उर्फ विभा केरकेट्टा के सम्मान में स्वागत कार्यक्रम हुआ.

        उपस्थित कुछ लोगों ने अपने सम्बोधन में विभा बाई उर्फ विभा केरकेट्टा को बधाईयाँ और शुभकामनाएँ दीं. सिस्टर विभा बाई उर्फ विभा केरकेट्टा ने उपस्थित लोगों को अपना आभार प्रकट किया. यह कार्यक्रम भक्तिमय और शांत माहौल में सम्पन्न हुआ. उसके बाद सबके लिए भोजन परोसा गया और भोजन करने के बाद परिवार के सदस्यों के अलावा बाकी सभी लोग वापस चले गए. 

        अतिथियों के वहाँ से जाने के बाद रात्रि 9 बजे के लगभग रायमुनी भगत (अध्यक्ष जिला पंचायत), कृपाशंकर भगत ( पूर्व जिला पंचायत सदस्य), गंगाराम भगत (सरपंच ग्राम पंचायत पुरनानगर), दुर्गा देवी पति गंगाराम भगत पुरनानगर, अरविन्द भगत, पप्पू सिन्हा, पप्पू ओझा, वेद प्रकाश तिवारी निवासी जशपुर सहित लगभग 30 लोग चारपहिया वाहन और मोटर सायकलों में वहाँ आए और धर्मान्तरण का आरोप लगाकर शोर मचाने लगे.

        उन्होंने विभा बाई उर्फ विभा केरकेट्टा के परिवार वालों से कहा कि, चंगाई सभा करने के लिए किससे परमिशन लिया था. उन्होंने पवित्र वेदी ( पूजा टेबल) पर रखे सामानों को भी छितरा दिया और तोडफ़ोड़ किया. विभा बाई उर्फ विभा केरकेट्टा के दृष्टिबाधित मामा दिनेश को धमकी देते हुए कहा कि वह तो स्वयं ईसाई बन गया है, अब क्यों दूसरों को ईसाई बना रहा है, अगर उसने ऐसा करना नहीं छोड़ा तो उसके हाथ-पैर तोड़ देंगे और जान से भी मार कर फेंक देंगे.

 रायमुनी भगत ने हीरामुनी बाई पर हमला कर धक्का-मुक्की करते हुए उसका गला दबाया, थप्पड़ मारा और गले की रोजरी माला को तोड़ दिया. रायमुनी भगत ने विभा बाई उर्फ विभा केरकेट्टा के क्रूस वाले चेन को खींचा और गंदी-गंदी गाली देते हुए नन के परिधान वाली साड़ी के संबंध में उससे अपमानजनक रूप से कहा कि उसने विधवाओं वाली सफेद साड़ी क्यों पहन रखी है. उन्होंने परिवार के राशन कार्ड छीन लिए और कहा कि, उन्हें शासन से सुविधाएँ नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि वे ईसाई बन गए हैं. उन्होंने सिस्टर विमा . बाई उर्फ विभा केरकेट्टा को घेरकर एक घंटे तक उल्टे-सीधे सवाल पूछ कर और गंदी गंदी गाली देकर प्रताड़ित किया.

         इतना करने के बाद उन्होंने पुलिस को बुला लिया. पुलिस वहाँ रात लगभग 10 बजे आयी. पुलिस दल में कोई भी महिला पुलिस नहीं थी. रात लगभग 12 बजे सिस्टर विभा बाई उर्फ विभा केरकेट्टा, सिस्टर विभा की माँ हीरामुनी बाई, सिस्टर विभा के मामा दिनेश, फूलवती विश्वकर्मा और सचिन राम को पुलिस वैन में बैठाकर जशपुर थाना ले जाया जाकर उन्हें लॉकअप में डाल दिया गया. उन्हें पूरी रात लॉकअप में रखा गया. जिन्होंने बालाछापर जाकर उधम मचाया था, वे लोग थाना परिसर में चक्कर लगाते हुए निगरानी कर रहे थे.

         दूसरे दिन अर्थात् 7 जून को भी उन्हें पुलिस लॉकअप में ही रखा गया. शाम लगभग 5 बजे उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया. सिस्टर विभा के मामा दिनेश को दृष्टिबाधित होने के कारण जमानत दे दी गई और बाकी लोगों को जेल भेज दिया गया.

         ईसाई आदिवासी महासभा का कहना है कि पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई अनेक सवाल खड़े करती है. प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का समय 6 जून  को शाम 8.55 बजे अंकित किया गया है. यदि उसी समय प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हुआ तो पुलिस को उसके वाद बालाछापर जाकर विवेचना करनी चाहिए थी और आगे की कार्रवाई होनी थी, लेकिन पुलिस के पहुँचने के पहले वहाँ भीड़ ने जाकर उत्पात मचाया और उसके बाद उनके बुलाने पर पुलिस वहाँ आई. 

          छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में ईसाईयों द्वारा अपने विश्वास एवं आस्था अनुसार किसी निजी स्थान पर प्रार्थना सभा आयोजित किए जाने पर एक धर्म विशेष के तथाकथित ठेकेदारों के उत्पात मचाने पर उनके दबाव में आकर पुलिस द्वारा इन्हीं धाराओं के तहत झूठे आपराधिक केस दर्ज कर ईसाई धर्मावलम्बियों को जेल भेज देती है जो कि कानून का दुरुपयोग और भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 का घोर उल्लंघन है. 

      इस बीच बालाछापर में हीरामुनी बाई के घर में उपद्रव मचाने वाले रायमुनी भगत (अध्यक्ष जिला पंचायत) और उनके साथियों के विरुद्ध 12 जून को एक प्रथम सूचना रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया है, लेकिन अब तक पुलिस के द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट प्रस्तुत रिपोर्ट दर्ज नहीं किया गया है.

       नन बनी विभा बाई उर्फ विभा केरकेट्टा को सशर्त जमानत मिल गई है, साथ ही 3 अन्य को भी जमानत मिली है। इन सभी के साथ ही एक नेत्रहीन पर धार्मिक भावना भडक़ाने के आरोप में कोतवाली थाने में जुर्म दर्ज है.

       ईसाई आदिवासी महासभा के ज्ञापन में उल्लेख है कि बालाछापर, थाना व जिला जशपुर में हाल ही में घटित घटना की ओर आकृष्ट किया जा रहा है. बालाछापर में उपद्रव मचाने वालों के विरुद्ध पुलिस द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर 7 दिन के भीतर गिरफ्तार नहीं किया जाता है तो ईसाई आदिवासी महासभा उग्र आन्दोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसका जिम्मेदार शासन-प्रशासन होगा. ज्ञापन की प्रतिलिपि गृह मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़, रायपुर, पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज अम्बिकापुर को भी भेजी जाए.

     एस.के.लॉरेन्स ने एक सुझाव दिया है कि कट्टरवादियों के द्वारा इन दिनों किये जा रहे नकारत्मक आक्रमण को ध्यान में रखते हुए अगर कोई ईसाई(मसीही) व्यक्ति,पास्टर (पुरोहित) या धर्म बहनें किसी जगह कोई विशेष धार्मिक कार्यक्रम करते हैं.तो सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से वहाँ के डी.एम. या एस.डी.ओ. या थाना को इसकी सूचना देने का प्रयास कर सकते हैं.ताकि किसी नकारात्मक अनहोनी से बचाव किया जा सके.साथ ही उस वक्त के कार्यक्रम का वीडियो भी बना लें।ताकि जरुरत पड़ने पर लगाए जाने वाले किसी झूठे इल्जाम के खिलाफ अपने निर्दाेष होने का सबूत प्रस्तुत कर सकें तथा सम्भवतरू आक्रमणकारियों पर कार्यवाही हो सके.

  छत्तीसगढ़ के जशपुर ज़िले है.जशपुर में बहुत धर्मांतरण हो रहे हैं. जशपुर धर्मांतरण का एक गढ़ है. जशपुर एक ट्राइबल एरिया है, पिछड़ा एरिया है. यहाँ ज़्यादा षड्यंत्रकारी शक्तियां काम करती हैं. बाक़ी बॉर्डर पर झारखण्ड है. वहां भी बहुत धर्म परिवर्तन हुए हैं. काफ़ी हिन्दू कन्वर्ट हुए हैं. इस पूरे क्षेत्र में सालों से लोगों को हिन्दू धर्म में वापस लाने का एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है जिसमें आर्य समाज, बीजेपी, आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और संघ परिवार के कई दूसरे संगठन शामिल हैं.

आलोक कुमार

गुरुवार, 15 जून 2023

बृजभूषण शरण सिंह पर से पॉक्सो हटाने की दिल्ली पुलिस की सिफारिश शर्मनाक है

* महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़क, कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह की गिरफ्तारी के लिए आंदोलन जारी रहेगा

पटना. ऐपवा झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के शहादत दिवस के अवसर पर 17 -18 जून को बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर हर जगह बड़ा आंदोलन करेगा.इस बात की जानकारी राज्य सचिव अनीता सिन्हा ने दी है.

इस बीच ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि नाबालिग महिला पहलवान व अन्य पहलवानों के यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी बृजभूषण शरण सिंह पर से पॉक्सो हटाने की दिल्ली पुलिस की सिफारिश निराशाजनक है. उन्होंने कहा कि आज जो चार्ज शीट दाखिल की गई है उससे स्पष्ट है कहा कि  पहलवानों के पक्ष में महिलाओं और किसानों के बढ़ते आंदोलन से   घबराकर सरकार ने 15 जून तक का जो समय लिया था दरअसल वह समय बृजभूषण शरण सिंह को बचाने के लिए पुख्ता तैयारी के लिए ही था.

 उन्होंने कहा कि पिछले 6 महीने से सरकार बृजभूषण सिंह के बचाव में पूरी मुस्तैदी से अपने तंत्रों का इस्तेमाल करती रही है. एफ आई आर के बाद भी ना तो उसकी  गिरफ्तारी हुई और ना ही 45 दिनों तक कोई  पूछताछ की गई और बृजभूषण शरण सिंह को बयान देने रैली करने और शिकायत कर्ताओं को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष ढंग से डराने- धमकाने, जांच को प्रभावित करने की पूरी मोहलत दे दी गई. नाबालिग लड़की के पिता पर दबाव बनाकर बयान बदलवाया गया और अब उसके  आधार पर पॉक्सो हटाने की सिफारिश की गई है.

  मोदी सरकार महिला पहलवानों के दमन और एक यौन अपराधी को संरक्षण देने में पूरे तंत्र का इस्तेमाल करती रही है और जांच के नाम पर महिला पहलवानों के सम्मान को ठेस पहुंचाने, सबूत मांगने से लेकर पॉक्सो कानून को बेअसर करने की कोशिश की गई है. इससे एक बार फिर कार्यस्थलों पर महिलाओं की यौन हिंसा से सुरक्षा का  सवाल एक बड़े सवाल के रूप में सामने आ गया है. महिला पहलवानों के न्याय का मुद्दा पूरे देश की महिलाओं का मुद्दा बन चुका है और इस पर महिलाओं  का आंदोलन और आगे बढ़ेगा. 

ऐपवा झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के शहादत दिवस के अवसर पर 17 -18 जून को बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर हर जगह बड़ा आंदोलन करेगा.

                     

आलोक कुमार

53 हज़ार से अधिक को अपना घर छोड़ना पड़ा

  

मणिपुर.मणिपुर में हिंदू मैतेई और ईसाई कुकी समुदायों के बीच हिंसा 03 मई 2023 से जारी है. कुकी और मैतेई समुदाय के बीच होने वाले हिंसा में इन 46 दिनों में अब तक 115 से अधिक लोग मारे गए हैं और 53 हज़ार से अधिक को अपना घर छोड़ना पड़ा है.      

   मणिपुर में 46 दिन से जारी हिंसा में अब तक 115 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. 320 घायल हैं और 53 हजार से ज्यादा लोग 272 राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं. वहीं, 10 जून को राज्य के 11 अफसरों का तबादला कर दिया गया. इनमें आईएएस और आईपीएस अफसर शामिल हैं.

     इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह इस महीने की शुरुआत में 4 दिन के दौरे पर यहां आए थे. इस दौरान राज्य के डीजीपी पी. डोंगल को हटा दिया गया था. उनकी जगह राजीव सिंह को कमान सौंपी गई है.

   केंद्र सरकार ने 10 जून को मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए राज्यपाल की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी. कमेटी के सदस्यों में मुख्यमंत्री, राज्य सरकार के कुछ मंत्री, सांसद, विधायक और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं.समिति में पूर्व सिविल सेवक, शिक्षाविद्, साहित्यकार, कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न जातीय समूहों के प्रतिनिधि भी शामिल किए गए हैं.

  मणिपुर में हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए सीएम एन बीरेन सिंह ने हर संभव मदद का एलान किया. सीएम ने विस्थापितों को घर देने और बच्चों की शिक्षा का आश्वासन दिया. कार्यालय रिकॉर्ड के अनुसार हिंसा के चलते करीब 47,000 लोगों ने घर छोड़ा है. सरकार इन्हें घर मुहैया कराएगी.दो कमरों का घर बनेगा.

   बताया गया कि मैतै या मणिपुरी पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य का बहुसंख्यक समुदाय है. वे मणिपुर के मूल निवासी हैं इसलिए उन्हें मणिपुरी भी कहा जाता है.धार्मिक दृष्टि से अधिकतर मैतै हिन्दू हैं. उनकी मान्यताओं में ‘सनमाही‘ नामक विश्वास-पद्धति भी शामिल है जिसमें ओझा प्रथा के कुछ तत्व हैं.

 बताया गया कि सीए सोपिट के अनुसार, मणिपुर के संबंध में, ‘पुरानी कुकी‘ के बारे में पहली बार 16वीं शताब्दी में सुना गया था, जबकि ‘नई कुकी‘ 19वीं शताब्दी के पहले छमाही के दौरान ही मणिपुर में स्थानांतरित हो गई थी. उत्तर पूर्व भारत में कुकी जनजातियों में 20 से अधिक उप-जनजातियां शामिल हैं. 1956 तक, इस जनजाति को भारत सरकार द्वारा किसी भी कुकी जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त है.कुकी मंगोली नस्ल की एक वनवासी जाति है जो असम और अराकान के बीच लुशाई और का चार जिले में रहती है. इनको चिन, जोमी, मिजो (मिज़ोरम में) भी कहते हैं. कूकी लोग भारत के उत्तरपूर्वी राज्यों, उत्तरी म्याँआर, बंगलादेश के चित्तग्राम पहाड़ियों पर निवास करते हैं.

   इस बीच इम्फाल में संदिग्ध आदिवासियों और नागरिकों के बीच गोलीबारी हुई. इस फायरिंग में सोमवार को एक कुकी की मौत हो गई.10 लोग घायल हो गए.हिंसा के चलते राज्य में इंटरनेट पर 15 जून तक बैन बढ़ा.हिंसा प्रभावित मणिपुर में इंफाल ईस्ट जिले के खामेनलोक क्षेत्र में उग्रवादियों और ग्रामीण स्वयंसेवकों के बीच सोमवार देर रात तक हुई गोलीबारी में नौ और लोग घायल हो गए.पुलिस ने बताया कि पहले तीन लोगों के घायल होने की खबर थी.हालांकि दोनों पक्षों की ओर से गोलीबारी जारी रहने के कारण घायलों की संख्या बढ़ गई.अब दोनों ही पक्ष पीछे हट गए हैं. गांव के स्वयंसेवकों ने उग्रवादियों की ओर से बनाए गए कुछ अस्थायी बंकर और एक ‘वॉच-टॉवर’ में आग लगा दी थी. 

     यह इलाका मैतेई-बहुल इंफाल ईस्ट जिले और आदिवासी बहुल कांगपोकपी जिले की सीमाओं से लगा है. हिंसा को रोकने के लिए इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल की तैनाती की गई है.मंगलवार की रात कांग फोकी जिले में गोलीबारी में 9 लोगों की मौत हो गई. साथ ही इस घटना में दर्जन भर लोगों के घायल होने की खबर है. कांगपोकी मैतई बहुल जिला है. पुलिस के मुताबिक आधी रात को कांगपोकी के करीब एक गांव खामेलोक और इंफाल पूर्वी जिले में अत्याधुनिक हथियारों से लैस उग्रवादियों ने हमला कर दिया. इस घटना में मारे गए सभी लोग खामेलोक गांव के निवासी थे.

     इससे पहले कल विष्णुपुर जिले में भी हिंसा हुई थी. यहां कुकी समुदाय के लोग मैतेई समुदाय के क्षेत्र में बंकर बनाने की कोशिश कर रहे थे जिसके बाद दोनों समुदाय के लोगों के बीच झड़प हो गई. इसके बाद कुकी उग्रवादियों और सुरक्षाबलों के बीच गोलीबारी भी हुई.

      मणिपुर में जारी हिंसा में अब तक 115 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 50 हजार से अधिक लोगों को विस्थापित होना पड़ा है. राज्य में लगभग 350 से अधिक विस्थापित कैंप चल रहे हैं जिसमें लोगों को रखा गया है. 3 मई को शुरू हुई हिंसा में अब तक हजारों लोग घायल हो चुके हैं.इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हिंसाग्रस्त मणिपुर का दौरा किया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने राज्य में शांति कायम करने के लिए एक शांति समिति बनाई थी.

 इस बीच बैंगलोर मेट्रोपॉलिटन के महाधर्माध्यक्ष पीटर मचाडो ने मणिपुर से आये युवाओं की बातें सुनी और विस्थापित छात्रों को चौतरफा मदद दी. उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि वे बंगलौर के महाधर्मप्रांत में धर्मप्रांत और धार्मिक शिक्षण संस्थानों में मुफ्त में अपनी शिक्षा जारी रख सकते हैं और साथ ही उन्हें छात्रावास की सुविधा भी प्रदान करेंगे.उन्होंने कहा कि बंगलौर शिक्षा के लिए एक उत्कृष्ट स्थान है. महाधर्माध्यक्ष मचाडो ने मणिपुर के प्रभावित और विस्थापित लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की और इन विस्थापित व्यक्तियों की देखभाल के लिए पूरे महाधर्मप्रांत की तत्परता से अवगत कराया.

    मणिपुर के जेसुइट फादर जेम्स ने राज्य में जातीय और सांप्रदायिक तनाव के बीच मणिपुर में ख्रीस्तियों और अन्य लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया. उन्होंने मणिपुर के ख्रीस्तीय बहुल जिलों में वर्तमान सामाजिक स्थिति पर प्रकाश डाला और छात्रों को बैंगलोर लाने के अपने कार्यों को साझा किया.चूंकि पूजा स्थल, संस्थान और घर हमलों की चपेट में हैं, इसलिए फादर जेम्स ने उन्हें बैंगलोर में स्थानांतरित करना आवश्यक समझा जहां वे अधिक सुरक्षित होंगे और जहां उनके कुछ रिश्तेदार और दोस्त हैं.

   उन्होंने छात्रों का स्वागत करने और उन्हें आश्रय, शिक्षा और सहायता प्रदान करने के लिए महाधर्माध्यक्ष मचाडो का आभार व्यक्त किया. मणिपुर की एक युवा महिला लूनी, जो अब बैंगलोर में काम करती है, मणिपुर में हाल की उथल- पुथल की गंभीरता का वर्णन करते हुए कहा कि यह किसी भी नागरिक संघर्ष से बढ़कर है जिसे उसने पहले देखा था। उन्होंने बंगलौर पहुंचने के बाद से राहत और सुरक्षा की भावना व्यक्त की, जहां लोगों ने उनका स्वागत किया है. 

     चर्चा के दौरान, फादर एडवर्ड थॉमस, एसडीबी, जो बैंगलोर में ड्रीम इंडिया नेटवर्क की देखरेख करते हैं, ने जरूरत पड़ने पर अपनी सहायता की पेशकश की. बैंगलोर बहुउद्देशीय सामाजिक सेवा सोसायटी के निदेशक,  फादर लूर्डू जेवियर संतोष और सिस्टर रोसली, एसएसएएम, शिक्षा और सुरक्षित आवास के मामले में इन युवाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.कुल मिलाकर, बंगलौर महाधर्मप्रांत ने मणिपुर के विस्थापित युवाओं को शिक्षा, आश्रय और रोजगार खोजने में सहायता प्रदान करते हुए उन्हें समर्थन देने और सुरक्षित आश्रय प्रदान करने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं. महाधर्माध्यक्ष और विभिन्न पुरोहितों ने सताए गए ख्रीस्तियों के साथ एकजुटता दिखाई है और इन कठिन परिस्थितियों के दौरान इन व्यक्तियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

आलोक कुमार

बुधवार, 14 जून 2023

जदयू विधायक रत्नेश सादा मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे

 


पटना. इस बार पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने महागठबंधन से अलग होने की घोषणा नहीं की है.इस बार उनके पुत्र व हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.इसके साथ ही अब हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा से और महागठबंधन के बीच बंधन नहीं रहा.इसका क्या असर राजनीति पर पड़ेगा वह तो आने वाले वक्त ही पता चल पाएगा.इतना जरूर है कि संतोष सुमन से अति बेहतर व्यक्ति मुख्यमंत्री के पास रत्नेश सादा हैं.उनको मंत्री बनाने की तैयारी कर ली गयी है.उनको मंत्री के रूप में मनोनीत कर लिया गया है. 16 जून को नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार होगा.उसी में जदयू विधायक रत्नेश सादा मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे.

     सोनवर्षा  विधानसभा के विधायक है रत्नेश सादा . हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन ने मंत्री पद से भी इस्तीफा दे दिया.उनके इस्तीफे के बाद जदयू विधायक रत्नेश सादा का राह साफ हो गया है.उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भेंट की.भेंट करने का मतलब है कि रत्नेश को मंत्री बनाया जाए.रत्नेश सादा भी उसी समाज से आते हैं जिस समाज से संतोष सुमन आते हैं.इसलिए यह चर्चा तेज है कि उन्हें संतोष की जगह मंत्री बनाया जा सकता है.

  JDU विधायक रत्नेश सादा संतोष सुमन की जगह लेंगे.गुरुवार को शपथ ग्रहण हो सकता है. बिहार में नीतीश कैबिनेट से संतोष सुमन के इस्तीफे के बाद तीन मंत्री पद खाली हो गए हैं. ऐसे में गुरुवार को मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है. माना जा रहा है कि जेडीयू विधायक रत्नेश सादा को संतोष सुमन की जगह अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग का मंत्री बनाया जा सकता है. वह जीतन राम मांझी की जाति से ही ताल्लुक रखते हैं.

  रत्नेश सादा जदयू के उन विधायकों में से एक है, जिनकी जनता के बीच गहरी पैठ है. इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि वह बीते 11 साल से सोनबरसा के विधायक हैं.  JDU विधायक रत्नेश सादा का पैतृक गांव महिषी प्रखंड का कुंदह गांव है. वह पिछले 11 साल से सोनबरसा राज (सुरक्षित) विधानसभा से जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ते और जीतते आ रहे है. रत्नेश सादा ने 2010 के विधानसभा चुनावों में सीट जीती थी. वह तब से सोनबरसा से जीतते आ रहे हैं और मौजूदा विधायक हैं. अब वह मंत्री बनने जा रहे हैं.


आलोक कुमार


नीतीश की मुहिम से केसीआर, पटनायक, मायावती पहले ही बना चुके दूरी

● विपक्षी एकता बैठक से पहले मांझी का अलग होना बड़ा अपशकुन

● आर सी पी सिंह, उपेंद्र कुशवाहा के बाद मांझी का किनारा करना बड़ी घटना

●  महागठबंधन सरकार बनने के बाद से एक भी बड़ा दल  नहीं जुड़ा

● नीतीश की मुहिम से केसीआर, पटनायक, मायावती पहले ही बना चुके दूरी

पटना. पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जीतन राम मांझी का महागठबंधन से अलग होना  विपक्षी एकता की पटना बैठक के लिए बड़ा अपशकुन है.उन्होंने कहा कि पहले बैठक की तारीख टली, फिर रोज कोई न कोई बड़ा नेता इससे दूरी बनाने लगा.

   उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने वरिष्ठ दलित नेता मांझी को नौ माह बाद अपमानित कर मुख्यमंत्री पद से हटाया था और अब उनकी पार्टी के जदयू में विलय के लिए दबाव बनाया जा रहा था.श्री मोदी ने कहा कि कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति नीतीश कुमार के साथ नहीं रह सकता. आर सी पी सिंह और उपेंद्र कुशवाहा के बाद मांझी का किनारा करना साधारण घटना नहीं है.

    उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार बनने के बाद पिछले नौ महीनों में एक भी बड़ा दल या नेता इससे नहीं जुड़ा.श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार की विपक्षी एकता मुहिम से केसीआर, नवीन पटनायक, मायावती, एचडी कुमारस्वामी और  जगनमोहन रेड्डी पहले ही दूरी बना चुके हैं.अब उमर अब्दुल्ला ने भी पटना बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है.

   उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के निकाय चुनाव में जब टीएमसी के गुंडे कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमले कर रहे हैं, तब नीतीश कुमार वहाँ इन दो दलों में क्या एकता करा पायेंगे?

   इंजीनियर दिनेश कुमार ने ट्वीट कर कहा है कि बीजेपी के साथ जितने छोटे छोटे दल जुड़ेंगे महागठबंधन को उतना फायदा होगा. ये सब टोटल मिला के 10 से 12 सीट लेंगे और पैसा लेकर किसी को भी टिकट दे देंगे और सारे सीट पर जीरो पर आउट हो जायेंगे. बहुत जल्दी भूल गए 2015. बीजेपी इनको 80 सीट दी थी और ये 41 सीट जीते थे.

     राजीव रंजन सिंह ने भी ट्वीट कर कहा कि बीजेपी ने शिवसेना ,अकाली दल ,जदयू, तेलगुदेशम, त्रिमूल कांग्रेस , बीजू जनता दल सब तो छोड़ ही दिए. ये सब शुभ संकेत है क्या! पहले आपको मुबारक हो.


आलोक कुमार

मंगलवार, 13 जून 2023

 

पटना.बक्सर धर्मप्रांत के महामहिम धर्माध्यक्ष डॉ जेम्स शेखर के पवित्र मिस्सा अर्पित करने के बाद दो दिवसीय आवासीय शिविर संपन्न हो गया.यह शिविर 'दाम्पत्य जीवन सुचारू रूप से संचालित हो' पर जानकारी देने के लिए आयोजित था.
सर्वविदित है कि ईसाई धर्म रीति के अनुसार विवाह करने वालों को विवाह के पूर्व विशेष जानकारी दी जाती है.विवाह कर लेने वाले दम्पतियों को वैवाहिक जीवन के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए नवज्योति निकेतन पटना में दो दिवसीय आवासीय शिविर शनिवार से शुरू हुआ था.
इसमें पटना महाधर्मप्रांत के पटना, मुजफ्फरपुर, बेतिया और पूर्णिया धर्मप्रांत के पचास से अधिक दम्पतियों ने हिस्सा लिए.इस शिविर का संचालन बेतिया धर्मप्रांत के विकर जनरल फादर फिंटन साह और गोवा-दमन महाधर्मप्रांत के फादर अरूण कर रहे थे.
विभिन्नन धर्मप्रांतों से आए कपल (कपल (couple) कपल का मतलब जोड़ा, जोड़ी, युगल, युग्मन या युग्म, दो लोगो का समूह, दम्पति, जोड़ना आदि होता है.उन्होंने अपने मैरिज लाइफ के बारे में विस्तार से बताया.
मौके पर पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा, मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष कैजेटन फ्रांसिस ओस्ता व बेतिया धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष पीटर सेबेस्टियन गोबियस उपस्थित थे.बक्सर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष डॉ.जेम्स शेखर शिविर के समापन दिवस रविवार को पवित्र मिस्सा अर्पित किए.उनके साथ फादर फिंटन साह और फादर ज्ञान प्रकाश, फादर अरुण आदि पुरोहित थे.
इस अवसर पर बक्सर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष डॉ.जेम्स शेखर शिविर ने कहा कि विभिन्न धर्मप्रांतों में द कपल्स फॉर क्राइस्ट संचालित है. मिशनरी फैमिली ऑफ क्राइस्ट के भूतपूर्व कंट्री सर्वेंट एवी जोसेफ थे.जो कपल ऑफ क्राइस्ट के लिए समर्पित थे. वक्त का मांग है कि प्रत्येक घरों में जीवंत क्राइस्ट का दर्शन दूर से ही हो जाए.
शिविर के संचालक फादर फिंटन साह और फादर अरुण ने कहा कि द कपल्स फॉर क्राइस्ट ( CFC ) एक अंतरराष्ट्रीय कैथोलिक लोक कलीसियाई आंदोलन है जिसका लक्ष्य ईसाई मूल्यों को नवीनीकृत और मजबूत करना है.घरेलू समूह 'परिवार' सप्ताह में एक बार या सप्ताह में दो बार मिलते हैं. घर के प्रत्येक सदस्य को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे अपने घर पर बैठकें आयोजित करें, जब वे गिरजे की सभाओं में नहीं होती हैं. एक घरेलू समूह 'परिवारों के परिवार' के रूप में कार्य करता है. घरेलू बैठकों को देहाती या फेलोशिप के रूप में आयोजित किया जा सकता है.
शिविरार्थियों ने निश्चिय किए कि घर पर जाने के बाद द कपल्स फॉर क्राइस्ट के बारे में पल्लिवासियों के कपल को जानकारी देंगे और उनलोगों के साथ योजना बनाकर काम करेंगे. हमलोगों का प्रयास होगा की हर परिवार में जा कर परिवारिक प्रार्थना करना.पारिवारिक मुलाकात के दरम्यान बुजुर्ग और बीमार लोगों से मिलना.उनके साथ प्रार्थना करना उनकी समस्याओं को परिवार के लोगों के साथ मिलकर सुलझाना.
इस शिविर में बेतिया धर्मप्रांत से 3 कपल भाग लिए. बेतिया पल्ली से केविन क्लारेंस और उनकी पत्नी शालिनी विशाल विक्टर और उनकी पत्नी अनु विशाल और चुहड़ी पल्ली से रवि राजेश और उनकी पत्नी ज्योति रवि थे.
आलोक कुमार

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