सोमवार, 3 जुलाई 2023

पोलित ब्यूरो के सदस्य अमर और फुलवारी विधायक गोपाल रविदास वार्ता में शामिल

पटना.यूनिफॉर्म सिविल कोड पर देश में जारी विरोध के मद्देनजर इमारत-ए-शरिया के पदाधिकारियों ने भाकपा-माले नेताओं से मुलाकात की और बिहार में भी इसका विरोध करने की अपील की.

इमारत-ए-शरिया के पदाधिकारियों में संगठन के अध्यक्ष मो. शमशाद रहमानी, कार्यकारी सचिव जनाब शिबली कासिमी और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुहैल अहमद नदवी शामिल थे. वहीं, भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो के सदस्य अमर और फुलवारी विधायक गोपाल रविदास वार्ता में शामिल हुए.

माले नेताओं ने वार्ता के दौरान कहा कि भारत विविध संस्कृतियों और रीति-रिवाजों का देश है, इसलिए समान नागरिक संहिता के नाम पर एकरूपता थोपने का प्रयास उलटा ही नतीजा दे सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा इसके जरिए समाज को विभाजित करना चाहती है और चुनावी गुणा-गणित का हिसाब कर रही है. भाकपा-माले का स्पष्ट मानना है कि सामाजिक और कानूनी सुधारों को चुनावी हथकंडे से अलग रखना चाहिए. उन्होंने इमार त-ए-शरिया के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया कि भाकपा-माले यूसीसी के खिलाफ पूरी तरह से खड़ी है और इसे महागठबंधन के दलों के बीच भी ले जाएगी.

इमारत-ए-शरिया के पदाधिकारियों ने माले नेताओं को बताया कि वे लोग यूसीसी के खिलाफ ऑनलाइन कंपेन चला रही हैं. उन्होंने माले नेताओं से इस अभियान को नई गति देने की अपील की.

आलोक कुमार


 

रविवार, 2 जुलाई 2023

प्रदेश के 34 जिले के प्रभारियों सहित 60 प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया

 एकता परिषद की दो दिवसीय प्रांतीय बैठक ग्वालियर में संपन्न

आदिवासियों पर हो रहे अन्याय के खिलाफ एकता परिषद ने जताई चिंता और बनाई रणनीति

प्रदेश के 34 जिले के प्रभारियों सहित 60 प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया

मणिपुर में हुई हिंसा पर भी इस बैठक में गहरी चिंता प्रकट की गई

ग्वालियर। एकता परिषद संगठन की दो दिवसीय प्रांतीय प्रतिनिधियों की बैठक एक व दो जुलाई ग्वालियर रिसोर्स सेंटर पर संपन्न हुई। इसमें एकता परिषद के 60 से अधिक प्रदेशस्तरीय प्रतिनिधिगणों के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.रन सिंह परमार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रद्धा कश्यप, राष्ट्रीय महासचिव अनीस भाई राष्ट्रीय प्रतिनिधियों में से संतोष सिंह सरस्वती बहन एवं प्रदेश अध्यक्ष डोंगर शर्मा तथा 34 जिले के जिम्मेदार सक्रिय प्रदेश प्रतिनिधि, कार्यकर्ताओं ने बैठक में भाग लिया।

एकता परिषद संगठन विगत 32 वर्षों से आदिवासी जनजाति समुदाय एवं दलितों के विकास हेतु लगातार संघर्ष कर रहा है, एकता परिषद संगठन ने आदिवासी जनजाति समुदाय एवं दलितों के उत्पीड़न के खिलाफ भी लंबी लड़ाई लड़ता आ रहा है।

ग्वालियर रिसोर्स सेंटर पर एक व दो जुलाई को हुई बैठक में शामिल कार्यकर्ताओं ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश को एकता परिषद ने 6 रीज़न में निम्नानुसार विभाजित किया गया है। 1.ग्वालियर एवं चंबल संभाग 2.महाकौशल 3.बुंदेलखंड 4.बघेलखंड 5. मध्यक्षेत्र 6.झाबुआ में एकता परिषद सक्रिय रूप से 34 जिले तथा 76 विधानसभा में कई हजार गांवों में कार्य कर रहा है।

इस बैठक में शरीक हुए एकता परिषद के प्रांतीय नेताओं ने अपने -अपने क्षेत्रों में आदिवासी जनजाति समुदाय की गंभीर समस्याओं और इनके उत्पीड़न पलायन, विद्युत आपूर्ति , पेयजल आपूर्ति समस्या वनवासियों रोजगार,शिक्षा, स्वास्थ्य , राजस्व विभाग व वन विभाग की भूमि विवाद के चलते आदिवासी वनवासी लोगों के ऊपर हुए अत्याचार व अन्यायों पर गहन चिंता प्रकट करते हुए, विचार विमर्श किया तथा आदिवासी जनजाति समुदाय की गंभीर समस्याओं के समाधान हेतु आगे की रणनीति तैयार कर एक कार्ययोजना तैयार कर सभी जिम्मेदार प्रतिनिधि व कार्यकर्ता गण ने अपने दायित्वों के निर्वहन में बैठक में शामिल हुए राष्ट्रीय व प्रांतीय प्रतिनिधियों के समक्ष संगठन के कार्यों को अग्रसर और क्रियान्वयन करने के लिए रणनीति व कार्ययोजना पर आगामी प्रजेंटेशन किए। इस बैठक में एकता परिषद ने मणिपुर में हुई हिंसा पर भी गहरी चिंता जताई और सरकार से शीघ्र ही शांति स्थापित करने के लिए विशेष प्रयास करने और मणिपुर समस्या का समाधान निकालने का अनुरोध किया है।

इस प्रदेश स्तरीय बैठक में अपने विचार व्यक्त करते हुए एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.रन सिंह परमार ने एकता परिषद कहा कि हम सब के प्रेरणास्रोत परम श्रद्धेय पद्मश्री डा.एस.एन.सुब्बाराव भाई जी एवं एकता परिषद के संस्थापक व संरक्षक राजगोपाल पी.वी राजू भाई ने महात्मा गांधी के आदर्शों पर चलकर त्याग, तपस्या, समर्पण, के भावों के साथ नैतिक मूल्यों को स्थापित करते हुए निरंतर गांधीवादी के रूप में देश दुनिया में सत्य अहिंसा का मार्ग अपनाया और जिसके परिणामस्वरूप आज एकता परिषद संगठन के 32 वर्षों की अथक संघर्षों की अनगिनत कहानियां बताईं।कि कैसे एकता परिषद ने कर्तव्यपरायण परिश्रमी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बलबूते पर आदिवासी जनजाति समुदाय की बदहाली इनके ऊपर हुए अत्याचारों के खिलाफ संघर्षरत रहकर आवाज उठाई, परिणामस्वरूप आदिवासी वनवासी लोगों के कल्याण हेतु इनके जीवन में बदलाव लाने का कार्य किया,जल,जंगल और जमीन जैसे मुद्दों पर गांव गांव जाकर संगठन के कार्यकर्ताओं ने वनवासी भाईयों व बहनों को जागरूक कर आदिवासी समुदाय के विकास हित के लिए जोड़ने का कार्य किया।

 संगठन की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रद्धा कश्यप ने एकता परिषद संगठन की संघर्षों पर चर्चा करते हुए बताया कि " आदिवासी जनजाति समुदाय के बीच पहुंच कर उन पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ जागरूक किया तथा गांव गांव जाकर जल, जंगल और जमीन के हक अधिकारों के लिए उन्हें एकजुट कर संगठित करने का काम किया, उन्होंने बताया कि आदिवासी जनजाति समुदाय के विकास के दावे जो सरकार कर रही हैं वो झूठे और थोथे हैं।

आदिवासी जनजाति समुदाय के परिवार के विकास व सशक्तिकरण पर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। उनकी स्थिति आज भी दयनीय है बड़े ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है इन्हें जंगलों से भगाया जा रहा है, इस वनवासी समुदाय को आज भी भूमि के अधिकारों से वंचित रखा गया है । उन्होंने उदाहरण दिया कि वन मित्र पोर्टल धोखा देने वाला और गुमराह करने वाली योजना साबित हुआ है इस पोर्टल से आदिवासी के हित में कोई कार्यवाही नहीं हुई है।"

एकता परिषद के राष्ट्रीय महासचिव अनीस भाई ने कार्यकर्ताओं में जोश, उत्साह और ऊर्जा का संचार करने के लिए कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि " आज महिलाओं की भागीदारी पर ज्यादा से ज्यादा फोकस किया जाना चाहिए कार्यकर्ता गण प्रशिक्षणों के माध्यम से अपने अंदर नेतृत्व क्षमता का विकास कर अपनी अनूठी पहचान बनाएं सांस्कृतिक कार्यक्रम व गीतों के जरिए लोगों जागरूक बनाने का कार्य करें। तथा आदिवासी समुदाय में संगठन का बेहतर प्रचार प्रसार कर पीड़ित जनजाति समुदाय के हक़ अधिकारों इनके जल, जंगल और जमीन की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने का काम करें।"

आयोजित दो दिवसीय बैठक में कई सत्रों में हुई चर्चाओं में राष्ट्रीय सचिव संतोष सिंह , सरस्वती बहन राष्ट्रीय सचिव तथा रुक्मिणी बाई बारेला कार्यकारिणी सदस्य तथा अन्य राष्ट्रीय प्रांतीय प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया संगठन के प्रदेशाध्यक्ष डोंगर शर्मा ने बैठकों का संचालन किया तथा अपने उद्बोधन में कहा कि 

उन्होंने बताया कि एकता परिषद संगठन ने आदिवासी जनजाति समुदाय के हक अधिकारों के लिए संघर्ष के लिए इन बैठकों में विशेष रणनीति तैयार कर एक बृहद कार्ययोजना तैयार की गई है। वंचित समुदाय एकता परिषद संगठन नेतृत्व में अपने संसाधनों एक एक रुपया एक एक मुठ्ठी अनाज एकत्रित कर अपनी जल जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ेगा तथा आदिवासी समुदाय पर हो रहे अत्याचारों अन्यायों के खिलाफ आवाज बुलंद करेगा।


बैठक में दीपक अग्रवाल, सरस्वती उइके रायसेन, राकेश रतन बुधनी, अनिल उत्साही शिवपुरी, दुर्गा बहन झाबुआ, टीकाराम सिलवानी,सुरक्षा लाल भोंडे बालाघाट,सुकेश भाई डिंडोरी,सोंन सिंह, मार्को मंडला, सुखराम धुर्वे सिवनी, धर्मदास शहडोल, रामप्रकाश उमरिया, गोवर्धन अशोकनगर,सूरज सहरिया गुना, मनीष मुरैना भंवरलाल विदिशा, रामदत्त तोमर श्योपुर दौलतराम गौड़ कराहल श्योपुर घनश्याम दमोह,अवनीश ग्वालियर।आदि कार्यकर्ताओं ने इस बैठक में भाग लिया। 


आलोक कुमार

विपक्षी एकता से घबराई बीजेपी और आरएसएस के लोगों को 2024 में हार का डर सताने लगा

 पटना.बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवादल यंग ब्रिगेड के अध्यक्ष आदित्य कुमार पासवान आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि बिहार में हुई विपक्षी एकता से घबराई बीजेपी और आरएसएस के लोगों को 2024 में हार का डर सताने लगा है, ऐसे में वो कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं.

        पटना में एक पोस्टर लगाया गया है जिसमें विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ अनर्गल और वाहियात बातें लिखी गई है, जो किसी भी पार्टी की गरिमा को ठेस पहुंचती है और नेताओं के खिलाफ ऐसा दुष्प्रचार किसी भी पार्टी को बर्दाश्त नहीं होगा.कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ ऐसे दिग्भ्रमित करने वाले पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ बिहार कांग्रेस सेवादल यंग ब्रिगेड द्वारा मानहानि का केस करने जा रहे हैं साथ ही उनके खिलाफ लीगल नोटिस भेजा जा रहा है.

        श्री पासवान ने का कहना है कि समाज में ऐसे गलत संदेश देने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए. कांग्रेस का मानना है कि बीजेपी और आरएसएस के लोग देश के मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. अल्पसंख्यकों में डर का माहौल पैदा करना इनका काम है साथ ही बीजेपी अपने स्वार्थ के लिए राजनीति में धर्म का इस्तेमाल करती है. हमें अपने संविधान में निहित देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बनाए रखने के लिए बीजेपी के ऐसे कदमों का बहुत दृढ़ता से विरोध करना होगा.

        उन्होंने  कहा कि भारत में विचारधाराओं की लड़ाई चल रही है. एक तरफ कांग्रेस भारत को जोड़ने की बात करती है तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी-आरएसएस ‘भारत तोड़ो’ विचारधारा पर चल रही है. कांग्रेस मानती है कि मोदी के शासनकाल में देश की जनता की हालत बदहाल हो चुकी है. आज देश में सभी वर्ग के लोग, छात्र,मजदूर,किसान, व्यापारी, नौकरी पेशा वाले परेशान हैं. महंगाई चरम पर है. पेट्रोल,डीजल, गैस एवं खाद्य पदार्थों की सामग्रियों की कीमतें आसमान छू रही है. 

       उन्होंने  कहा कि 2 करोड़ लोगों को नौकरी देने की बात कहकर बीजेपी सत्ता में आई थी, लेकिन सरकार का इसपर कोई ध्यान नहीं है. बीते 75 सालों में बेरोजगारी की ऐसी भयावह स्थिति कभी सामने नहीं आई. साथ ही लुढ़कते रूपये के बीच विदेशी कर्ज बढ़कर 620 अरब डालर पहुंच गया है.मोदी सरकार ने अपने 9 साल के कार्यकाल में अकेले 85 लाख करोड़ का कर्ज लिया है. 


आलोक कुमार 



विभिन्न वर्गों के कुछ श्रद्धालुगण आस्था के साथ करेंगे लंगोट अर्पण

 "लंगोट मेला के आयोजन को लेकर जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने बाबा मनीराम अखाड़ा प्रबंधन समिति के साथ की बैठक.लंगोट अर्पण करने के लिए नहीं निकाला जाएगा कोई जुलूस, विभिन्न वर्गों के कुछ श्रद्धालुगण आस्था के साथ करेंगे लंगोट अर्पण...


राजगीर .बाबा मनीराम अखाड़ा पर लगने वाले वार्षिक लंगोट मेला का आयोजन इस वर्ष 3 जुलाई से  9 जुलाई की अवधि में किया जा रहा है.मेला के आयोजन पर विधि व्यवस्था एवं अन्य प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शनिवार देर संध्या जिलाधिकारी श्री शशांक शुभंकर एवं पुलिस अधीक्षक श्री अशोक मिश्रा ने बाबा मनीराम अखाड़ा प्रबंधन समिति के सदस्यों के साथ बैठक किया.

     आयोजकों द्वारा बताया गया कि लिए गए निर्णय के अनुरूप लंगोट अर्पण करने के लिए किसी जुलूस का आयोजन नहीं किया जाएगा। विभिन्न वर्गों के कुछ श्रद्धालुगण यहाँ आकर लंगोट अर्पण करेंगे.अखाड़ा आने जाने वाले सभी मार्गों पर पैदल गश्तीदल के साथ साथ अलग से भी पेट्रोलिंग की जाएगी। इसके साथ ही सभी महत्वपूर्ण स्थलों पर स्टैटिक दंडाधिकारी एवं पुलिस बल पर्याप्त संख्या में प्रतिनियुक्त रहेंगे।

     मेला क्षेत्र में ड्रोन कैमरा से निगरानी रखी जायेगी। सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है. मेला क्षेत्र के सभी बिजली के तारों को दुरुस्त रखने का निर्देश कार्यपालक अभियंता विद्युत आपूर्ति शहरी को दिया गया.नगर निगम को पूरे मेला अवधि में विशेष साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित रखने को कहा गया. मेला क्षेत्र में नियंत्रण कक्ष भी रहेगा, जहाँ दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी लगातार प्रतिनियुक्त रहेंगे। नियंत्रण कक्ष में पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाने का निर्देश दिया गया.

     इस अवसर पर नगर आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी बिहार शरीफ, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बिहार शरीफ, कार्यपालक अभियंता विद्युत आपूर्ति शहरी, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी बिहारशरीफ, अंचलाधिकारी बिहारशरीफ एवं अन्य पदाधिकारी तथा अखाड़ा प्रबंधन समिति के अमरकांत भारती एवं अन्य सदस्यगण उपस्थित थे.

आलोक कुमार



साधु-संत एवं पंडा समाज के प्रतिनिधियों के साथ आरआईसीसी सभागार में बैठक

  


राजगीर . राजकीय राजगीर मलमास मेला के आयोजन को लेकर आज जिलाधिकारी श्री शशांक शुभंकर ने आरआईसीसी सभागार में साधु-संत एवं पंडा समाज के प्रतिनिधियों के साथ आरआईसीसी सभागार में  बैठक किया.एक-एक कर सभी प्रतिनिधियों द्वारा आवश्यक जानकारी एवं सुझाव दिया गया.

      संतों के विभिन्न अखाड़ों के लिए परंपरागत रूप से निर्धारित आवासन स्थलों पर पर्याप्त शौचालय एवं पेयजल की व्यवस्था का अनुरोध किया गया. उन्हें बताया गया कि धुनिवर, ब्रह्मकुण्ड से सामने(पीएचईडी मैदान) एवं ब्रह्मकुंड के पास प्रशासन द्वारा तमाम व्यवस्थाओं से युक्त यात्री शेड तैयार किया जा रहा है. संतो द्वारा दी गई जानकारी के अनुरूप उनके अन्य आवासन स्थलों में भी पर्याप्त संख्या में शौचालय, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. 4 जुलाई को विभिन्न  पदाधिकारियों द्वारा संत जनों के साथ उनके सभी निर्धारित आवासन स्थलों का स्थल निरीक्षण किया जाएगा तथा आवश्यकता को सूचीबद्ध करते हुए तमाम व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी.

   

इस अवसर पर नगर आयुक्त, अपर समाहर्त्ता, अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी, साधु-संत समाज के प्रतिनिधि, पंडा समिति के सदस्यगण आदि उपस्थित थे.


आलोक कुमार

पिछले 9 वर्षों में देश ने बदहाली का गर्त देखा

  पूरे प्रदेश में मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने की प्रेस वार्ता  


पटना. आज प्रदेश के सभी जिलों में कांग्रेस के जिलाध्यक्षों ने प्रेस वार्ता कर मोदी सरकार के नौ साल में हुए बदहाली की कहानी साझा की. यही काम पूरे प्रदेश के सभी प्रखंडों में भी बड़े जोर-शोर के साथ किया गया.कांग्रेस ने सभी स्तर पर लोगों के दुख दर्द और बदहाली का नौ साल से चला आ रहा सिलसिला दुनिया के सामने रखी.

      इस अवसर पर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि भाजपा के लिए उत्सव मनाने का यह आखिरी साल है. बदहाली, बदनीयती और फरेब से भरा मोदी सरकार का नौ साल पूरा हो गया है. देश की जनता हर मोर्चे पर अनगिनत दुखों का सामना कर रही है। महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार नया रिकॉर्ड बना रहा है. गरीबों की थाली से पहले दाल छिनी गयी, अब सब्जी गायब. टमाटर गुस्से में लाल होता जा रहा है.  रसोई गैस की कीमत 12 सौ पहुँच गई. इसलिए चावल या रोटी बनाना भी मुसीबत. महंगाई की मार से महिला मरी जा रही हैं. नौजवान बेरोजगारी से त्रस्त है। समाज नफरत और उन्माद से कराह रहा है. पूरा माहौल निराशा, हताशा और कुंठा से ग्रस्त है. इस सबके लिए मोदी सरकार पूरी तरह जिम्मेवार है. पिछले 9 वर्षों में देश ने बदहाली का गर्त देखा है.

     उन्होंने कहा कि जुमलों से पेट नहीं भरता देश अब महसूस करने लगा है इसलिए कांग्रेस ने पूरे प्रदेश के हर जिला में, हर प्रखंड में मोदी सरकार के कुशासन के नौ साल का खुला चिट्ठा देश के सामने रख रही है. यह केवल शुरुआत है आने वाले दिनों में यह प्रदर्शन और धरना का रूप लेगी.


आलोक कुमार

शनिवार, 1 जुलाई 2023

मैतेई और कुकी जातीय के लोग अशांत होकर हिंसात्मक आंदोलन करने पर उतारू

 पटना. पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा हैं. महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा कारितास  इंडिया के अध्यक्ष भी हैं.हाल के दिनों में 3 मई 2023 से मणिपुर राज्य में हिंसा भड़क गया है. मैतेई  और कुकी जातीय के लोग अशांत होकर हिंसात्मक आंदोलन करने पर उतारू हैं. सैकड़ों लोगों की हत्या हो गयी है.

                                                                                   बताया गया कि मैतेई एक जाति, जो पूर्वोत्तर भारत में मणिपुर राज्य में निवास करती है. राज्य में उनकी बहुसंख्यक आबादी है.इन्हें ‘मणिपुरी‘ भी कहा जाता है।.इनकी अर्थव्यवस्था का आधार सिंचित खेतों में धान की कृषि है. मैतेई रीति-रिवाजों के मिश्रण से बड़ी कट्टरता से दूर रहते हैं और गाय को पूजनीय मानते हैं.

   मणिपुर का अधिकांश क्षेत्र कभी पूरी तरह उन लोगों से बसा हुआ था, जो नागा और मिज़ो पर्वतीय जाति से मिलते-जुलते थे. परस्पर विवाह संबंधों और अपने राजनीतिक वर्चस्व के कारण धीरे-धीरे अन्य प्रभावशाली जातियों के इनके साथ विलीन होते जाने से मैतेई जाति बनी, जिसकी आबादी अब लगभग 7,80,000 है.

    मैतेई  लोग ऐसे कुलों में बंटे हुए हैं, उनमें परस्पर विवाह संबंध नहीं होते हैं. वंशागत रूप से मंगोल नस्ल के होने और तिब्बती-बर्मी भाषा बोलने के बावजूद हिन्दू परंपराओं का पालन करने के कारण मैतेई आसपास की पहाड़ी जातियों से भिन्न हैं.

   हिन्दू धर्म में परिवर्तित होने के पूर्व वे मांसाहार करते थे, पशुबलि और नरबलि भी देते थे, लेकिन अब वे मांसाहार, और मदिरा पान से परहेज़ करते हैं.मैतेई रीति-रिवाजों के मिश्रण से बड़ी कट्टरता से दूर रहते हैं और गाय को पूजनीय मानते हैं.

   ये लोग उच्च वर्ण का होने का दावा करते हैं. हिन्दू देवी-देवताओं, खासतौर से कृष्ण के उपासक होने के अलावा, वे हिन्दू बनने से पूर्व के अपने पंथ विशेष के देवी-देवताओं और भूत-प्रेतों की पूजा भी करते हैं.

इनकी अर्थव्यवस्था का आधार सिंचित खेतों में धान की कृषि है. वे अश्वपालन में निपुण हैं.पोलो इन लोगों का राजकीय खेल है. हॉकी, नौका दौड़, नाटक और भारत भर में मशहूर मणिपुरी नृत्य इनके मनोरंजन के अन्य साधन हैं.

 बताते चले कि कुकी भारत और म्यांमार के बीच की सीमा की मिज़ो पहाड़ियों पर रहने वाले दक्षिण-पूर्वी एशियाई लोग है. इस जनजाति की जनसंख्या 1970 के दशक में लगभग 12,000 थी. ये मुख्यतः अधिक संख्या वाले मिज़ो लोगों में उनकी प्रथाएँ व भाषा अपनाकर घुलमिल गए हैं. इसके बोंजुंग कुकी, बायटे कुकी, खेलमा कुकी आदि कई कुलवाची भेद हैं.ये बलिष्ठ एवं ठिंगने होते हैं और नागा लोगों की अपेक्षा अधिक खूंखार समझे जाते हैं. आज से लगभग सौ वर्ष पूर्व लुशाई और कुकी लोगों में युद्ध हुआ जिसमें कुकी लोगों की हार हुई और वे अपना निवास छोड़कर काचार में आ बसे. उन्हें तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने प्रश्रय दिया और 200 कुकियों को सीमांत रक्षार्थ सैनिक शिक्षा दी.

   कुकी लोग अपने सरदार की आज्ञा का पालन अपना धर्म समझते हैं सरदार उनका एक प्रकार से राजा होता है और समझा जाता है कि वह दैवी अंश है.इस कारण वे लोग उसका कभी अनादर करने का साहस नहीं करते वरना वह जो आदेश देता है उसका आँख मूंदकर पालन करते हैं. विशेष अवसर आने पर सरदार संकेत द्वारा आदेश जारी करता है. यदि कोई व्यक्ति सरदार का भाला सुसज्जित रूप में लेकर गाँव में घूमता है तो उसका अर्थ होता है कि सरदार ने सब लोगों को अविलम्ब बुलाया है. इस वर्ग का प्रत्येक व्यक्ति अपने सरदार को प्रति वर्ष कर स्वरूप एक टोकरी चावल, एक बकरी, एक कुक्कुट और अपने शिकार का चौथा भाग प्रदान करता है और चार दिन की कमाई देता है.सरदार की सहायता के लिए एक मंत्रिमंडल होता है जिसकी सहायता से वह न्याय करता है.

   कुकी लोगों में विश्वासघात की सजा मृत्यु है. खून के अपराध में खूनी और उसके परिवार को गुलामी करनी होती है.स्त्रियों को किसी प्रकार की स्वतंत्रता नहीं है उन पर सरदार का आदेश लागू होता है. कुकी लोग उथेन नामक देवता की पूजा करते हैं.

    परंपरागत रूप से कुकी जंगलों में छोटी बस्तियों में रहते थे, जिनमें प्रत्येक उसके अपने प्रमुख द्वारा शासित होती थी.मुखिया का सबसे छोटा पुत्र अपने पिता की संपत्ति का उत्तराधिकारी होता था, जबकि अन्य पुत्रों का गाँव की लड़कियों से विवाह करवाकर उन्हें स्वयं अपने गाँव स्थापित करने के लिए भेज दिया जाता था. कुकी बांस के जंगलों में एकाकी जीवन व्यतीत करते हैं, जो उन्हें निर्माण व हस्तकला सामग्रियां उपलब्ध कराते हैं. ये जंगल को जलाकर भूमि साफ़ करके चावल उगाते है, जंगली जानवरों का शिकार करते हैं और कुत्ते, सूअर, भैंस, बकरी व मुर्गियां पालते हैं.

   इस बीच 3 मई, 2023 से, मणिपुर दो जातीय समूहों के बीच जातीय संघर्ष के कारण जबरदस्त उथल-पुथल में है. यह हिंसा मैतेई लोगों द्वारा अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर भड़की थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई और 47,914 लोगों ने राहत शिविरों में शरण ली.

 कारितास  इंडिया के अध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा, और कार्यकारी निदेशक फादर (डॉ.) पॉल मूनजेली ने 13 जून 2023 को मणिपुर के जातीय संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया.

 कारितास इंडिया प्रबंधन की यात्रा का उद्देश्य मणिपुर में मौजूदा हिंसक स्थिति के आधार पर स्थिति का आकलन करना और पुनर्वास कार्यक्रम की योजना बनाना है. यात्रा की शुरुआत इंफाल पूर्व की उपायुक्त सुश्री डायना देवी के साथ बैठक से हुई. डीएसएसएस के सहायक निदेशक, फादर. सोनी ने कारितास  प्रबंधन टीम का परिचय उपायुक्त से कराया. फादर पॉल ने मणिपुर के इम्फाल पूर्व और कांगपोकपी जिलों में आपातकालीन प्रतिक्रिया के दौरान कारितास इंडिया टीम को उनके बहुमूल्य और सकारात्मक समर्थन के लिए उपायुक्त के प्रति आभार व्यक्त किया.


आलोक कुमार

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