शुक्रवार, 8 दिसंबर 2023

2024 में प्रभावशाली समुदाय आधारित लाइटनिंग रेजिलिएंस कार्यक्रम चलाना

 पटना। कैरिटास इंडिया सामाजिक सरोकार और मानव विकास के लिए कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) का आधिकारिक राष्ट्रीय संगठन है। इसका अध्यक्ष पटना के आर्चबिशप सेबेस्टियन कल्लुपुरा है।कैरिटास इंडिया के द्वारा बिहार वाटर डेवलपमेंट सोसाइटी को सहयोग किया जाता है। इस सहयोग से नवादा जिले के कौवाकोल प्रखंड में फादर दिनेश कुमार और जौन डी‘क्रूज के नेतृत्व में शानदार कार्य किया जा रहा है।

    बताया गया कि कौवाकोल ब्लॉक के खैरा पंचायत में लाइटिंग जागरूकता रथ द्वारा लोगों को दिनांक 7.12.23 एवं 8.12. 23 को जागरूक किया गया.इसका मुख्य विषय लाइटनिंग रेजिलिएंस फ्रेमवर्क बनाने का था। इसमें कैरिटास इंडिया और क्लाइमेट रेजिलिएंट ऑब्जर्विंग सिस्टम एसप्रमोशन काउंसिल सीआरओपीसी, एनडीएमए, आईएमडी के द्वारा अध्ययन की जा रही है। इसका खास उद्देश्य पुरानी प्रथाओं से सीखना और उसमें हुई कमियों को पहचान कर चर्चा कर 2024 में प्रभावशाली समुदाय आधारित (वज्रपात) लाइटनिंग रेजिलिएंस कार्यक्रम चलाना है।
         दो दिनों के दरम्यान प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों में हाल के दशकों में तेजी से वृद्धि देखी गई है. दुनिया भर के शहरों और देशों को यह एहसास होने लगा है कि ये घटनाएँ अब ‘सौ साल‘ के तूफान नहीं हैं, बल्कि कुछ वर्षों के भीतर दोहराई जाती हैं। जैसे-जैसे इस सदी में शहरीकरण जारी रहेगा, अधिक से अधिक लोग और अधिक आर्थिक गतिविधियाँ जोखिम वाले क्षेत्रों में केंद्रित होंगी; विशेष रूप से पूरे एशिया और अफ्रीका के शहरों में नए आगमन के सबसे अधिक जोखिम वाले जिलों में केंद्रित होने की संभावना है, जैसा कि वे आज अक्सर उत्तरी अमेरिका और यूरोप में होते हैं। यह लेख प्राकृतिक आपदाओं की हालिया वृद्धि की समीक्षा करता है और विचार करता है कि कैसे एक सिस्टम दृष्टिकोण इन जोखिमों के शमन और अनुकूलन और ऐसी घटनाओं से उबरने के तरीकों में सुधार कर सकता है।
    शहरों और क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के जोखिमों के शमन और अनुकूलन को इंटरनेट ऑफ थिंग्स, डेटा साइंस से विश्लेषणात्मक और मॉडलिंग तकनीकों पर आधारित सिस्टम साइंस परिप्रेक्ष्य और सिस्टम इंजीनियरिंग विधियों के अनुप्रयोग के माध्यम से कैसे मजबूत किया जा सकता है, और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) में सामान्य विकास। इस तरह का काम हाल ही में शुरू हुआ है और न केवल अकादमिक हित के लिए, बल्कि इन जोखिमों के लिए जीवन और संपत्ति के जोखिम को कम करने के लिए सिमुलेशन मॉडलिंग की तकनीकों को लागू करने के महान अवसर हैं। स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र, विशेष रूप से बीमा कंपनियों की ऐसे उपकरण विकसित करने में गहरी रुचि है।
   कोई भी मानव जीवन जोखिम से मुक्त नहीं है और अंत में हम सभी मर जाते हैं। हम कितने समय तक और कितना अच्छा जीवन जीते हैं यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि हम जोखिमों को कैसे पहचानते हैं और उन्हें कैसे कम करते हैं और उनके साथ कैसे तालमेल बिठाते हैं। हम इसे व्यक्तियों और समुदायों के सदस्यों के रूप में करते हैं। हम कुछ जोखिम स्वीकार करते हैं, क्योंकि यदि हम आपदा से बचने में सफल होते हैं, तो हम कुछ वांछनीय परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। हम आपदा से बचने के लिए अन्य जोखिमों को कम करते हैं या उनके अनुकूल ढलते हैं, लेकिन इसमें अवसर लागत शामिल होती है। व्यक्ति और समुदाय दोनों के रूप में हम जोखिमों और संबंधित लागतों को समझने का खराब काम करते हैं। यह आलेख शहरी और क्षेत्रीय समुदायों को ऐसी घटनाओं के प्रति अपने लचीलेपन में सुधार करने में सक्षम बनाने के लिए नए तरीकों का वर्णन करता है।
   भूभौतिकीय संवेदन का व्यापक विस्तार, जो लगभग 50 साल पहले पृथ्वी की उपग्रह इमेजिंग के साथ शुरू हुआ था, और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के माध्यम से ऐसी जानकारी प्राप्त करने और डेटा विज्ञान के एल्गोरिदम और कम्प्यूटेशनल शक्ति के साथ इसका विश्लेषण करने की हमारी क्षमता में क्षमता है। प्राकृतिक आपदा जोखिमों के प्रति हमारे दृष्टिकोण को बदलें। संवेदन का इसी तरह का विस्तार शहरों में भी चल रहा है और ये शहरी प्रणालियों को समझने में सक्षम बनाता है। इस लेख में हम उन क्षेत्रों की ओर इशारा करते हैं जहां ये प्रौद्योगिकियां, सिस्टम साइंस पर आधारित नए सिद्धांतों के साथ, मानव जीवन की सुरक्षा और सार्वजनिक और निजी बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश में सहायता कर सकती हैं।
      प्राकृतिक आपदाएँ अलग-अलग घटनाएँ नहीं हैं। वे सहस्राब्दियों से मौजूद प्राकृतिक प्रणालियों के बार-बार, लेकिन प्रासंगिक, परिणाम हैं, हालांकि आधुनिक मानव गतिविधियों के माध्यम से उन्हें बढ़ाया जा सकता है, उदाहरण के लिए, बड़े पैमाने पर वैश्विक यात्रा के माध्यम से संक्रामक रोगों का प्रसार। इस दृष्टिकोण से, अधिकांश प्राकृतिक आपदाएं आश्चर्य के रूप में नहीं आनी चाहिए।
      पृथ्वी की प्राकृतिक प्रणालियों के हाथों में, हम प्राकृतिक आपदाओं को रोकने में शक्तिहीन हैं। कुछ मामलों में, उदाहरण के लिए भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट, उनकी घटना का सटीक समय उपयोगी रूप से अनुमानित नहीं हो सकता है। लेकिन उन्हें पूरी तरह आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए. किसी दिए गए शहर या क्षेत्र के लिए, मध्यम प्रयास से, यह पहचानना संभव है कि कौन से प्रमुख जोखिम मौजूद हैं, उनके प्रभाव कहाँ होंगे, और कौन से सांकेतिक संकेत किसी आसन्न घटना की चेतावनी देंगे। इस विश्लेषण में से कुछ ऐतिहासिक अभिलेखों से आ सकते हैं, कुछ वैज्ञानिक अनुसंधान से, जैसे कि स्थानीय भूविज्ञान, और कुछ समकालीन उपकरण से। यह विश्लेषण उन लोगों और बुनियादी ढांचे को भी इंगित करेगा जो सबसे अधिक जोखिम में हैं और संभावित घटनाओं की मानवीय और आर्थिक लागत का आकलन करने की अनुमति देगा। यह बदले में इनमें से कुछ या सभी जोखिमों के शमन के लिए नीति के विकास और ऐसे उदाहरणों की पहचान करने की अनुमति देगा जहां शमन और दिन-प्रतिदिन की गतिविधियां एक-दूसरे का समर्थन कर सकती हैं - उदाहरण के लिए, जहां स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकियां आपदा लचीलापन भी प्रदान करती हैं या जहां बाढ़ क्षेत्र को पार्क के रूप में नामित किया जाता है जब वह पानी के नीचे नहीं होता है। ऐसी नीति का लक्ष्य एक ऐसे निर्मित वातावरण का निर्माण करना नहीं है जो प्राकृतिक शक्तियों द्वारा अभेद्य हो, जो सामान्य तौर पर अव्यावहारिक है, बल्कि शहर या क्षेत्र में जीवन की मूल प्रणालियों को समझना और यह सुनिश्चित करना है कि इन्हें संरक्षित और पुनः बनाया जा सके। किसी घटना के बाद यथाशीघ्र स्थापित किया गया। यह प्राकृतिक आपदाओं के प्रति लचीलापन है।
       इस प्रकार प्राकृतिक आपदाओं को अप्रत्याशित, क्षणभंगुर घटनाओं के रूप में नहीं माना जाना चाहिए जो आपातकालीन प्रतिक्रिया की मांग करती हैं, बल्कि वर्षों या सदियों तक चलने वाले जीवन चक्र के साथ चल रहे जोखिमों के रूप में मानी जानी चाहिए जिनका शमन और अनुकूलन शहरी नियोजन और नीति में स्थायी रूप से अंतर्निहित होना चाहिए। यह रूपरेखा नीति निर्माताओं के लिए आवश्यक संतुलन की ओर इशारा करती हैरू भविष्य की घटनाओं के प्रभावों को कम करने के लिए या जहां संभव हो, दोनों नीतियों को एक साथ लाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश करने या आज संभावित आर्थिक विकास को बाहर करने की आवश्यकता है।
      सिस्टम साइंस  के परिप्रेक्ष्य से प्राकृतिक आपदाओं और मानव बस्तियों पर उनके प्रभावों पर विचार करता है । यह ऐसी बस्तियों को न तो पूरी तरह से सामाजिक प्रणालियों के रूप में और न ही पूरी तरह से बुनियादी ढांचे की प्रणालियों के रूप में देखता है, बल्कि निवासियों और प्राकृतिक और निर्मित वातावरणों के बीच और प्राकृतिक और निर्मित वातावरणों के बीच निवासियों के बीच असंख्य बातचीत के रूप में देखता है। ये अंतःक्रिया शहरी प्रणालियों का निर्माण करती हैं  
 विचार यह है कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और बिग डेटा जैसी वर्तमान प्रगति ऐसी प्रणालियों का अध्ययन करने के लिए काफी उन्नत क्षमताएं प्रदान करती है और इन्हें ऐसी बस्तियों के लचीलेपन में सुधार के लिए प्राकृतिक आपदा जोखिमों के पूरे जीवन चक्र में लागू किया जा सकता है।
        हम यह तर्क नहीं देते कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्राकृतिक आपदा लचीलेपन के लिए चमत्कारी समाधान हैं। वास्तव में इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि, उदाहरण के लिए, सामाजिक एकजुटता  अपने आप में एक शक्तिशाली कारक है जो कम से कम किसी घटना के प्रभाव को कम कर सकता है। लेकिन हम ऐसे समय में रह रहे हैं जब दुनिया भर के शहर और क्षेत्र पहले से ही सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरताओं, शहरीकरण और अभूतपूर्व पैमाने पर प्रवास के कारण अत्यधिक तनाव में हैं, और जिसमें प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। इन सभी प्रवृत्तियों से प्राकृतिक आपदाओं के अधिक प्रभाव का ख़तरा है। इस संदर्भ में, हमें न केवल लचीलेपन के लिए सामाजिक दृष्टिकोण पर विचार करना चाहिए, बल्कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से बनाए गए अवसरों पर भी विचार करना चाहिए ।

आलोक कुमार

गुरुवार, 7 दिसंबर 2023

सद्कर्म करने वाले बुराई करने वालो की परवाह नहीं करते

सद्कर्म करने वाले बुराई करने वालो की परवाह नहीं करते

पटना.पटना जिले के जिलाधिकारी डॉ०चन्द्रशेखर सिंह है.उन्होंने सीएम नीतीश कुमार के निर्देश को पालन कर सब्जीबाग कब्रिस्तान एवं पटना सिटी स्थित ईसाई कब्रिस्तान गोरहट्टा का सर्वे कराया. दोनों ईसाई कब्रिस्तानों का अध्ययन कर इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि वर्तमान में मृतकों के शवों के लिए किये जा रहे उपयोग पर जिला प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं है.

       बता दें कि ईसाई कब्रिस्तान (स्थानीय नाम सब्जीबाग कब्रिस्तान) की वर्तमान स्थिति एवं उसके उपयोग के संबंध में अनुमण्डल पदाधिकारी, पटना सदर द्वारा पत्रांक 1182/गो०, दिनांक 10.06.2022 से स्थलीय जाँच प्रतिवेदन एवं पटना सिटी स्थित ईसाई कब्रिस्तान गोरहट्टा की वर्तमान स्थिति एवं उसके उपयोग के संबंध में अनुमण्डल पदाधिकारी, पटना सिटी द्वारा पत्रांक 2132/10, दिनांक 31.12.2022 से स्थलीय जाँच प्रतिवेदन भेजा गया था.

      इसके आलोक में पटना जिले के जिलाधिकारी डॉ०चन्द्रशेखर सिंह ने वर्तमान में ईसाई मृतकों के शवों के लिए किये जा रहे उपयोग पर जिला प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं होने का पत्रांक 13407/ गो० पटना, दिनांक-3/10/23 के माध्यम से कार्यालय आदेश जारी किया है.

   यह अतिशयोक्ति नहीं है कि पटना महाधर्मप्रांत  में कुर्जी पल्ली में सेसिल साह,राजन क्लेमेंट साह और एस. के. लॉरेन्स रहते है,जो असंभव कार्य को संभव करने में सफल हो पाएंगे है.

          सर्वप्रथम सेसिल साह ने पटना सिटी स्थित पादरी की हवेली को पर्यटन स्थल घोषित करवाने में सफल रहे.उसमें पूर्व कैपुचिन पल्ली पुरोहित फादर जेरोम का सहयोग मिला है.सेसिल साह के अनुज राजन क्लेमेंट साह भी पीछे नहीं रहे.उन्होंने कुर्जी कब्रिस्तान की घेराबंदी करवा दी.इसमें दीघा विधायक डॉ संजीव चौरसिया का सहयोग मिला. वहीं अल्पसंख्यक ईसाई कल्याण संघ के महासचिव व इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल, मायिनारिटी डिपार्टमेंट के महासचिव एस. के. लॉरेन्स ने क्रिसमस की बधाई देते हुए वर्णित कब्रिस्तानों का जिक्रकर क्रिसमस गिफ्ट के तौर पर  कब्रिस्तान पर से जिला प्रशासन की पाबंदी हटाकर ईसाई समुदाय के हवाले कब्रिस्तान कर देने आग्रह किया.जिसका परिणाम सामने है.

 इस तरह का कार्य अंजाम देने से कुछ लोगों को पेट में दर्द होने लगा है.ऐसे लोग अपच के शिकार होने से यहां-वहां उल्टी करने लगते है.हाथी चले बाजार कुत्ते भोके हजार, इसका मतलब होता है? सद्कर्म करने वाले बुराई करने वालो की परवाह नहीं करते.ये निरन्तर अपने पथ पर अग्रसर होते रहते है.

    

आलोक कुमार


       

अमित के रक्तदान से बची पीड़िता की जान

 * रक्तदान कर जरूरतमंद की मदद करें:सुमन सौरभ 

* अमित के रक्तदान से बची पीड़िता की जान

 जमुई।खुदगर्ज इस दुनिया में इंसान की यह पहचान है… जो पराई आग में जल जाये वही तो इंसान है। अपने लिये जिये तो क्या जिये… तू जी, ऐ दिल, ज़माने के लिये। इस लाइन को आत्मसात करते हुए राज्य स्तर पर रक्तदान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका का निर्वाह कर रही प्रबोध जन सेवा संस्थान की इकाई मानव रक्षक रक्तदाता परिवार, जमुई से जुड़े सैकड़ों युवा लगतार जिले में रक्त जरुरतमंद की जिंदगी बचाने को आगे आ रहे है। जानकारी के लिए बता दूँ विगत बुधवार को रात्रि में संस्थान से जुड़े रक्तवीरों को जानकारी मिली की एक पीड़िता को एबी पोजेटिव रक्त की बहुत ज्यादा जरुरत है। वहीं जिले के रक्तअधिकोष में सम्बंधित रक्त समूह उपलब्ध नहीं रहने के कारण परिजन काफी परेशान है। केस की गंभीरता को देखते हुए संस्थान से जुड़े मसौढ़ी निवासी कामदेव साव के द्वितीय सुपुत्र अमित कुमार ने संबंधित रक्त समूह का रक्तदान कर इंसानियत के हित में कार्य किया है।

संस्थान के जिला सचिव विनोद कुमार ने बताया की रक्तदाता अमित कुमार का यह नौवां रक्तदान है वहीं जमुई के ही एक और केस में पटना के एक निजी अस्पताल में मदद की गई है।


संस्थान सचिव व सामाजिक कार्यकर्त्ता सुमन सौरभ ने कहा की समाज के हर व्यक्ति को रक्तदान करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। बदलते समय के अनुसार मानव रक्त को समाज की बड़ी जरूरत है हर स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान कर जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।


आलोक कुमार

बुधवार, 6 दिसंबर 2023

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की गुरुवार 7 दिसंबर, 2023 में दिल्ली में रैली

 नई दिल्ली. राष्ट्रीय संघर्ष समिति के अध्यक्ष रिटायर्ड कमांडर अशोक राउत है.ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) ने बुधवार को एक बयान जारी कर कहा कि समिति अपनी मांगों के समर्थन में रामलीला मैदान में रैली करने जा रही है. 

    बता दें कि एम्पलॉय प्राविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (Employee Provident Fund Organization) के दायरे में आने वाले कर्मचारी और पेंशनधारक ईपीएफओ की पेंशन स्कीम ईपीएस - 95 (EPS-95) के तहत मिलने वाले न्यूनतम पेंशन को हर महीने 7500 रुपये करने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन करने जा रहे हैं. इन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की गुरुवार 7 दिसंबर, 2023 में दिल्ली में रैली होने जा रही है. 
         राष्ट्रीय संघर्ष समिति के अध्यक्ष रिटायर्ड कमांडर अशोक राउत का कहना है कि इस समय साढ़े 7 करोड़ श्रमिक काम कर रहे हैं.अभी तक करीब 75 लाख श्रमिक रिटायर हो गए हैं.रिटायर हो जाने वाले लोग प्रत्येक माह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में अंशदान देते थे.तनख्वाह के अनुसार कोई साढ़े 400, 500, 600 रुपए जमा करते थे. उसमें प्रबंधक के द्वारा भी अंशदान दिया जाता था.रिटायर होते होते श्रमिकों की राशि 
करीब 30 से 35 लाख रुपए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन 
जमा हो जाता है. उन रूपए को संगठन के द्वारा बैंक में जमा किया जाता है.
      उन्होंने कहा कि संगठन के द्वारा बैंक में जमा करने से ब्याज मिलता है.अगर श्रमिक 30 से 35 लाख जमा करते थे,तो सीधे श्रमिकों को 15 से 20 हजार हाथ में मिलता.हाल यह कि श्रमिकों की संग्रहित राशि को वापस नहीं दिया जा रहा है.वहीं पेंशन के रुप में श्रमिकों को 1171 अधिकतम पेंशन दी जा रही है.यूपीए सरकार ने न्यूनतम 1000 रूपए पेंशन देने की योजना बना रही थी.उसी समय भगत सिंह कोश्यारी समिति बनी.भगत सिंह कोश्यारी कमेटी ने 2013 में ईपीएफ से जुड़े कर्मचारियों की न्यूनतम पेंशन ₹1000 से बढ़ाकर ₹3000 किए जाने की सिफारिश की थी. 
       यूपीए सरकार के बाद एनडीए सरकार सत्ता में आई.तब एनडीए सरकार ने भगत सिंह कोश्यारी समिति के न्यूनतम पेंशन ₹1000 को ही 1995 में लागू कर दी.जिसे ईपीएस 95 कहते हैं.उसके बाद से ही केंद्र सरकार ने इस पर अब तक अमल नहीं किया. ईपीएफ से जुड़े कर्मचारियों की न्यूनतम पेंशन ₹1000 से बढ़ाकर ₹3000 किए जाने का मामला एक बार फिर जोर पकड़ चुका है. 
      उसके बाद ईपीएस 95 का मुद्धा को राष्ट्रीय संघर्ष समिति के अध्यक्ष रिटायर्ड कमांडर अशोक राउत ने लपक लिया है. न्यूनतम पेंशन ₹1000 से बढ़ाकर ₹7500 की मांग होने लगी.उसके साथ महंगाई भत्ते के साथ मूल पेंशन को 7,500 रुपये मासिक करने, पेंशनभोगियों के पति या पत्नी को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं देने की मांग होने लगी है.इस मांग को लेकर दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला गया.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्काल मांग को पूरी करने का आश्वासन दिए.जो दो बार के प्रधानमंत्री के कार्यकाल में पूरा नहीं कर पा रहे है.
      मौजूदा समय में कर्मचारी पेंशन योजना  ईपीएस -95 के तहत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये महीना है.गुरुवार 7 दिसंबर, 2023 में दिल्ली में रैली होने जा रही है.रामलीला मैदान में रैली के बाद पेंशनभोगी 8 दिसंबर से जंतर-मंतर पर अनशन भी करेंगे. समिति के अध्यक्ष रिटायर्ड कमांडर अशोक राउत ने कहा, हम अपनी मांगों के समर्थन में सात दिसंबर को रामलीला मैदान में रैली करेंगे. उन्होंने कहा कि ये सरकार को ये आखिरी चेतावनी है और मांगे नहीं मानी गई तो आमरण अनशन करेंगे.
        कर्मचारी पेंशन योजना ईपीएस - 95 के तहत आने वाले कर्मचारियों के मूल वेतन का 12 फीसदी हिस्सा भविष्य निधि में जाता है. जबकि एम्पलॉयर के 12 फीसदी हिस्से में से 8.33 फीसदी कर्मचारी पेंशन योजना में जमा किया जाता है.  इसके अलावा पेंशन कोष में सरकार भी 1.16 फीसदी का योगदान करती है. अशोक राउत ने कहा,  तीस - तीस साल काम करने और ईपीएस आधारित पेंशन मद में निरंतर योगदान करने के बाद भी कर्मचारियों को मासिक पेंशन के रूप में इतनी कम रकम मिल रही है, जिससे कर्मचारियों पेंशनधारक और उनके परिवारजनों का जीना दुभर हो चुका है.  
        ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) ने बुधवार को एक बयान जारी कर कहा कि समिति अपनी मांगों के समर्थन में रामलीला मैदान में रैली करने जा रही है. समिति का दावा है कि न्यूनतम पेंशन हर महीने बढ़ाकर 7,500 रुपये करने समेत अन्य मांगों के समर्थन में इस रैली में देशभर से आए 50,000 कर्मचारी और पेंशनधारक शामिल होंगे. पेंशनभोगी महंगाई भत्ते के साथ मूल पेंशन को 7,500 रुपये मासिक करने, पेंशनभोगियों के पति या पत्नी को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं देने की मांग कर रहे हैं. 

मंगलवार, 5 दिसंबर 2023

योग्य अल्पसंख्यकों में ऋण ससमय वितरित


बेतिया.योग्य अल्पसंख्यकों में ऋण ससमय वितरित कराने के निमित्त आवेदकों का स्थल जांच 15 जून तक करने का निर्देश.18-21 जून को निर्धारित है साक्षात्कार की तिथि. मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक रोजगार ऋण योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 एवं 2021-22 के लिए योग्य अल्पसंख्यकों में ऋण की राशि ससमय वितरित करने के निमित्त मुख्य सचिव, बिहार द्वारा उक्त योजना अंतर्गत 15 जून तक आवेदकों का स्थल जांच कराने तथा दिनांक-30.06.2022 तक साक्षात्कार का कार्य पूर्ण करते हुए चयन सूची बिहार राज्य अल्पसंख्यक वित्त निगम, पटना को उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया है.


इसी परिप्रेक्ष्य में जिलाधिकारी, श्री कुंदन कुमार की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक सम्पन्न हुयी. उन्होंने निर्देश दिया कि मुख्य सचिव, बिहार द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुरूप सभी कार्यों को ससमय निष्पादन हो जाना चाहिए. उन्होंने निर्देश दिया कि जांच दल द्वारा 15 जून तक सभी आवेदकों के स्थल जांच का कार्य पूर्ण किया जाए. जांच दल अपने-अपने आवंटित क्षेत्रान्तर्गत सभी आवेदकों का स्थल जांच करते हुए स्थल जांच की पावती रसीद की प्रति आवेदक को प्राप्त करते हुए तथा प्रखंडवार समेकित जांच प्रतिवेदन तथा जांच स्थल की पावती रसीद की कार्यालय प्रति दिनांक-12.06.2022 तक अपने प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-नोडल पदाधिकारी को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे. इसके साथ ही स्थल निरीक्षण के दौरान साक्षात्कार की निर्धारित तिथि की सूचना संबंधित आवेदकों को देना सुनिश्चित करेंगे.


उन्होंने निर्देश दिया कि सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रत्येक दिन संध्या में गठित जांच दल एवं पर्यवेक्षीय पदाधिकारी के साथ कार्य की प्रगति की समीक्षा करेंगे तथा दैनिक प्रतिवेदन कार्यकारी विभाग को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे. समीक्षा के क्रम में सहायक निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण, श्री बैद्यनाथ प्रसाद द्वारा बताया गया कि निर्देशानुसार साक्षात्कार के लिए अध्यक्ष, जिला स्तरीय चयन समिति, मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक रोजगार ऋण योजना-सह-उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में तिथि का निर्धारण कर दिया गया है. जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय, समाहरणालय, पश्चिम चंपारण, बेतिया में दिनांक-18.06.2022 को बैरिया, चनपटिया, लौरिया, नौतन, नरकटियागंज के कुल-219 आवेदक भाग लेंगे. इसी तरह दिनांक-19.06.2022 को गौनाहा, रामनगर, सिकटा, मैनाटांड़, बगहा-01, बगहा-02, योगापट्टी प्रखंड के कुल-205 आवेदक भाग लेंगे.दिनांक-20.06.2022 को बेतिया, मझौलिया, भितहां, पिपरासी प्रखंड के कुल-218 आवेदक भाग लेंगे तथा दिनांक-21.06.2022 को सभी प्रखंडों के छूटे हुए आवेदक भाग लेंगे. उन्होंने बताया कि उपर्युक्त तिथि को 10.30 बजे पूर्वाह्न से आयोजित साक्षात्कार कार्यक्रम में आवेदक को आवेदन में संलग्न किए गए सभी प्रमाण पत्रों की मूल प्रति, बैंक पासबुक के साथ स्वयं भाग लिया जाना अनिवार्य है.


उन्होंने बताया कि पश्चिम चम्पारण जिलान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 एवं 2021-22 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31.03.2022 तक कुल-642 आवेदन प्राप्त हुआ है. उन्होंने बताया कि आवेदकों का स्थल जांच के लिए प्रखंडवार, पंचायतवार जांच दल का गठन कर दिया गया है.स्थल जांच कार्य में अपेक्षित सहयोग करने के लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय, बेतिया के प्रमंडलीय प्रभारी, अल्पसंख्यक वित्त निगम, श्री रफी अहमद (मो0 9431002659) की प्रतिनियुक्ति कर दी गयी है.उन्होंने बताया कि साक्षात्कार के लिए अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय में 02 काउंटर की व्यवस्था की गयी है तथा पर्यवेक्षीय पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कर दी गयी है.



आलोक कुमार 

दिवंगत मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण

* बिहार के आनंद कुमार,कपिल देव प्रसाद और सुभद्रा देवी को पद्मश्री


नई दिल्ली.गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार (25 जनवरी) को पद्म पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की गई है. इसमें राकेश झुनझुनवाला (मरणोपरांत), गणितज्ञ आनंद कुमार, रवीना टंडन, मणिपुर बीजेपी अध्यक्ष थौनाओजम चाओबा सिंह समेत 91 लोगों को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा. 

   बता दें कि 2023 में 106 पद्म पुरस्कारों को प्रदान करने की मंजूरी दी गई है. सूची में 6 पद्म विभूषण, 9 पद्म भूषण और 91 पद्मश्री शामिल हैं.19 पुरस्कार विजेता महिलाएं हैं. समाजवादी पार्टी संरक्षक और यूपी के पूर्व सीएम दिवंगत मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से नवाजा गया है. सुधा मूर्ति, कुमार मंगलम बिड़ला पद्म भूषण के नौ पुरस्कार पाने वालों में शामिल हैं. रतन चंद्राकर को अंडमान के जारवा ट्राइब्स में मिजल्स के लिए बेहतर काम के लिए सम्मान दिया गया है. हीरा बाई लोबी को गुजरात में सिद्धि ट्राइब्स के बीच बच्चों के शिक्षा पर काम करने के लिए पद्मश्री से नवाजा गया है.

बालकृष्ण दोसी और पश्चिम बंगाल के पूर्व डॉ. दिलीप महलानाबीस को भी पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से नवाजा गया है. डॉ. दिलीप महलानाबीस को ओआरएस की खोज के लिए ये सम्मान दिया गया है. इनके अलावा संगीतकार जाकिर हुसैन, एसएम कृष्णा, श्रीनिवास वरधान को भी पद्म विभूषण से नवाजा गया.

   

बिहार के आनंद कुमार,कपिल देव प्रसाद और  सुभद्रा देवी को पद्मश्री.गणितज्ञ आनंद कुमार कोचिंग संस्थान सुपर 30 के सूत्रधार रहे हैं. आनंद कुमार के ऊपर सिनेमा भी बनायी गयी है. गरीब बच्चों को पढ़ा कर आइआइटी तक पहुंचाने वाले आनंद कुमार देश दुनिया के जाने माने नाम हैं. पद्मश्री की घोषणा के बाद आनंद कुमार ने ट्वीट कर कहा कि भारत-सरकार ने मुझे पद्मश्री सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की. इसके लिए विशेष आभार. मुझे इस सम्मान के लायक समझा गया. साथ ही साथ उन तमाम लोगों का सहृदय धन्यवाद दिया, जिन्होंने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साथ नहीं छोड़ा.राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं के संपादक रह चुके हैं.पटना के यारपुर में रहने के बाद दशकों से जक्कनपुर में रह रहे हैं.50 वर्षीय आनंद कुमार से साक्षात्कार लेने एक अंग्रेज पत्रकार के साथ आलोक कुमार भी गये थे.

     बता दें कि आनंद कुमार गणित के मेधावी छात्र थे, लेकिन परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के कारण वह अवसर होने के बाद भी विदेश में पढ़ने नहीं जा सके. इसके बाद उन्होने एक कोचिंग सेंटर 'सुपर 30' खोला और गरीब बच्चों को IIT-JEE की तैयारी करवाने लगे. इस कोचिंग सेंटर में हर साल ऐसे 30 बच्चे जो गरीब घर के हो और पढ़ने में मेधावी हो उनका चयन किया जाता है, देश के कोने-कोने से बच्चे यहां पढ़ने आते हैं. 

      नालंदा जिला के बिहारशरीफ प्रखंड के बसवन बिगहा के बुनकरों की पहचान देश-दुनिया में है. यहां के बने बाबन बुटी साड़ी, चादर और पर्दे की मांग देश-दुनिया में है. बुनकर कपिलदेव प्रसाद ने इसमें चार चांद लगाया है. उन्हें इस कला के इस वर्ष के पद्मश्री देने की घोषणा केंद्र सरकार ने की है.बता दें कि कपिलदेव को बुनकरी की विशेष बावन बूटी कला में प्रवीणता प्राप्त है. कपिलदेव 15 वर्ष की उम्र से बुनकरी का कार्य कर रहे हैं. उन्होंने बावन बूटी कला में 50 वर्षों का अनुभव है. कपिल देव को भारत सरकार, कपड़ा मंत्रालय की ओर से पहले भी राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना जा चुका है. वह बुनकरी का कार्य करते भी हैं और अन्य कामगारों का इसकी बारीकियों और तकनीकियों का प्रशिक्षण भी देते हैं. 

   देश के सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री की से एक गुमनाम शख्सियत कपिल देव प्रसाद को भी सम्मानित किया गया है.जो कल तक गुमनामी का शिकार थे। आज उनके बारे में पूरी दुनिया जानाना चाहती है. 70 वर्षीय कपिल देव प्रसाद को टेक्सटाइल के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान मिला है. आपको बता दें कि करीब 6 दशकों से कपिल देव प्रसाद बुनकरी से जुड़े हुए हैं.इस काम की शुरुआत उनके दादा शनिचर तांती ने की थी. इसके बाद उनके पिता हरि तांती ने इस काम को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी उठाई. कपिलदेव प्रसाद का जन्म 1954 में हुआ था, उन्होंने 15 साल की उम्र में ही बुनकरी को अपना रोज़गार बना लिया था. मौजूदा वक्त में कपिल देव प्रसाद के बेटा सूर्यदेव इस काम में उनकी मदद करते हैं.

मधुबनी जिला की सलेमपुर गांव की पेपरमेस कला की कलाकार सुभद्रा देवी को भी पद्मश्री देने की घोषणा भारत सरकार ने की है. सुभद्रा देवी पेपरमेसी के क्षेत्र की सिद्धहस्त कलाकार हैं. इससे पहले उन्हें 1980 में राज्य पुरस्कार और 1991 में राष्ट्रीय पुरस्कार से नमाजा गया है. उनकी इस कला मांग देश-विदेश में हो रही है. वे बचपन में देखा-देखी इस कला को सीखी. अब इस कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दे चुकी हैं.

   बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने बिहार के मधुबनी की श्रीमती सुभद्रा देवी जी को कला के क्षेत्र में, नालंदा के श्री कपिल देव प्रसाद जी को कला के क्षेत्र में तथा पटना के श्री आनंद कुमार जी को शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए पद्म श्री सम्मान मिलने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं.वहीं उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी बिहार के नालंदा से बावन बूटी हस्तकला के प्रसिद्ध बुनकर श्री कपिलदेव प्रसाद जी, मधुबनी से पेपर मेश कला में सिद्धहस्त कलाकार सुभद्रा देवी जी एवं पटना से मशहूर शिक्षक आनंद कुमार जी को पद्म श्री सम्मान मिलने पर बधाई एवं शुभकामनाएं.बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने पद्म पुरस्कारों से देशभर के चयनित महानुभावों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं.बिहार से कला के क्षेत्र में कार्यो में श्रीमती सुभद्रा देवी जी और साहित्य वं शिक्षा के क्षेत्र से श्री आनंद कुमार जी, कला के क्षेत्र से श्री कपिल देव प्रसाद जी को पद्म पुरस्कार से सम्मानित होने पर बधाई.

पद्म विभूषण (6)

मुलायम सिंह यादव (मरणोपरांत), बालकृष्ण दोशी (मरणोपरांत), जाकिर हुसैन, एसएम कृष्णा और दिलीप महालनाबिस (मरणोपरांत).

पद्म भूषण (9)

एसएल भैरप्पा, कुमार मंगलम बिड़ला, दीपक धर, वाणी जयराम, स्वामी चिन्ना जीयर, सुमन कल्याणपुर, कपिल कपूर, सुधा मूर्ति और कमलेश डी पटेल.

पद्म श्री (91)

सुकमा आचार्य, जोधैयाबाई बैगा, प्रेमजीत बारिया, उषा बर्ले, मुनीश्वर चंदावर, हेमंत चौहान, भानुभाई चित्रा, हेमोप्रोवा चुटिया, नरेंद्र चंद्र देबबर्मा (मरणोपरांत), सुभद्रा देवी, खादर वल्ली डुडेकुला, हेम चंद्र गोस्वामी, प्रतिकाना गोस्वामी, राधा चरण गुप्ता, मोदादुगु विजय गुप्ता, अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन (जोड़ी), दिलशाद हुसैन, भीखू रामजी इदाते, सी आई इस्साक, रतन सिंह जग्गी, बिक्रम बहादुर जमातिया, रामकुइवांगबे जेने, राकेश राधेश्याम झुनझुनवाला (मरणोपरांत), रतन चंद्र कर, महीपत कवि, एम एम कीरावनी, आरेज़ खंबाटा (मरणोपरांत), परशुराम कोमाजी खुने, गणेश नागप्पा कृष्णराजनगर, मगुनी चरण कुंअर, आनंद कुमार, अरविंद कुमार, डोमर सिंह कुंवर, राइजिंगबोर कुर्कलंग, हीराबाई लोबी, मूलचंद लोढ़ा, रानी मचैया, अजय कुमार मंडावी, प्रभाकर भानुदास मांडे, गजानन जगन्नाथ माने, अंतर्यामी मिश्रा, नादोजा पिंडीपापनहल्ली मुनिवेंकटप्पा, प्रो. (डॉ.) महेंद्र पाल, उमा शंकर पाण्डेय, रमेश परमार और शांति परमार (जोड़ी), नलिनी पार्थसारथी, हनुमंत राव पसुपुलेटी, रमेश पतंगे,कृष्णा पटेल, के कल्याणसुंदरम पिल्लई,वी पी अप्पुकुट्टन पोडुवल, कपिल देव प्रसाद, एस आर डी प्रसाद, शाह रशीद अहमद कादरी, सी वी राजू, बख्शी राम, चेरुवायल के रमन, सुजाता रामदोराई, अब्बारेड्डी नागेश्वर राव, परेशभाई राठवा, बी रामकृष्णा रेड्डी, मंगला कांति राय, के सी रनरेमसंगी, वडिवेल गोपाल और मासी सदइयां (जोड़ी), मनोरंजन साहू, पयतत साहू, ऋत्विक सान्याल, कोटा सच्चिदानंद शास्त्री, शंकुरत्री चंद्र शेखर, के शनाथोइबा शर्मा, नेकराम शर्मा, गुरचरण सिंह, लक्ष्मण सिंह, मोहन सिंह, थौनाओजम चौबा सिंह, प्रकाश चंद्र सूद, निहुनुओ सोरही, डॉ. जनम सिंह सोय, कुशोक थिकसे नवांग चंबा स्टेनज़िन, एस सुब्बारमन, मोआ सुबोंग, पालम कल्याण सुंदरम, रवीना रवि टंडन, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,धनीराम टोटो, तुला राम उप्रेती, गोपालसामी वेलुचामी, ईश्वर चंद वर्मा, कूमी नरीमन वाडिया, कर्म वांग्चु (मरणोपरांत) और गुलाम मुहम्मद जाज.


आलोक कुमार

एकता, एकजुटता और प्रगति का जश्न

इंडिया सोशल फोरम 2023 के मंच से संकल्प’

 एकता, एकजुटता और प्रगति का जश्न

पटना.इंडिया सोशल फोरम 2023 के आयोजन समिति की ओर से प्रदीप प्रियदर्शी ने कहा है कि 2 दिसंबर से 4 दिसंबर तक पटना में आयोजित इंडिया सोशल फोरम (आईएसएफ) 2023 के हम प्रतिभागी व्यक्ति, सामाजिक आंदोलन और नागरिक समाज संगठन, इस महत्वपूर्ण आयोजन की महान सफलता के लिए अपना गहरा आभार व्यक्त करते हैं.जमीनी स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक उभरने वाली यह प्रक्रिया कई राज्यों में राज्य सामाजिक मंचों से शुरू हुई, जिनमें विभिन्न मंचों और मुद्दों पर काम करने वाले विभिन्न तरह के लोग शामिल हुए, अंततः इस आयोजन के माध्यम से पूरे भारत के  हजारों लोगों के इस समागम तक पहुंची. इंडिया सोशल फोरम में तीन दिनों तक  सबकी जोशीली सहभागिता देखी गई . अलग अलग तरह की  आवाजें,  साझा अनुभव, हाशिए पर पड़े समाजों की आकांक्षाएं और सामाजिक संगठनों की प्रतिबद्धताओं का एक अनूठा और सार्थक चित्र उभरा. 

 संवाद और आदान-प्रदान  के तीन गतिशील प्लेनरी सत्रों , विकास संबंधी मुद्दों और मानवाधिकारों पर प्रकाश डालने वाले 70 से अधिक समानांतर सत्रों  और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक समृद्ध सामूहिकता से भरा आई एस एफ इन सबके जीवंत कलरव से गुंजायमान रहा . हमारे समागम  ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया  जैसे किसान, भूमिहीन व्यक्ति, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, दलित, आदिवासी, महिलाएं, एलजीबीटीक्यूआईए समुदाय और छात्र, युवा, शिक्षाविद और सांस्कृतिक कार्यकर्ता . इन सबने  इस मंच का उपयोग कर, अपनी गिर कर उठने,  संघर्ष करने और जीत हासिल करने की  कहानियों को साझा   किया.  इस  समागम  में, हमने मुद्दों और स्थानों  की  सीमाओं को पार करते हुए परस्पर एकता और सहयोग को बढ़ावा देते हुए अपनी एकजुटता मजबूत की.

 निरंतर सहयोग की जरूरत को स्वीकार करते  हुए, हम सभी सामाजिक आंदोलनों, हाशिए पर पड़ी पहचानों और क्षेत्रों से एकजुट होने, प्रयासों में तालमेल बिठाने और पूरे भारत में क्रॉस-सेक्टोरल एकजुटता बढ़ाने का आह्वान करते हैं. संवैधानिक मूल्यों में निहित एकता और सहयोग की भावना को अपनाते हुए, जो सभी के लिए न्याय, शांति, गरिमा और समानता के साथ जीवन के अधिकार को रेखांकित करते हैं, हम सभी भारतीय नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ) और आंदोलनों को,  काठमांडू, नेपाल में 15 से 19 फरवरी, 2024 तक आयोजित होने वाले  आगामी विश्व सामाजिक मंच में सक्रिय भागीदारी के लिए निमंत्रित करते हैं । यह महत्वपूर्ण आयोजन दक्षिण एशियाई और वैश्विक एकजुटता को बढ़ावा देने, भौगोलिक सीमाओं के परे जाने और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा.

 इतिहास की इस घड़ी के  महत्व को स्वीकार करते हुए, आईएसएफ ने विश्व सामाजिक मंच की नैतिकता और  भावनाओं  को मूर्त रूप देते हुए एक असाधारण मंच के रूप में कार्य किया. इसने ऐसे समय में एक दुर्लभ अवसर प्रदान किया जब विविध समूहों और आंदोलनों को इकट्ठा करना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है. आइए हम इस क्षण का जश्न मनाएं, यहां बनी मित्रताओं को  संजोएं और अपने चल रहे प्रयासों में इस एकता, एकजुटता और साझा उद्देश्य को बनाए रखने का संकल्प लें.अटूट संकल्प के साथ, हम सभी के लिए न्याय, समानता और सम्मान की ओर अपनी  सामूहिक यात्रा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं.

 

 आलोक कुमार


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