मंगलवार, 15 अप्रैल 2014

राष्ट्रीय महिला बैठक में बिहार से चार नेत्री शिरकत करेंगी


पटना। राष्ट्रीय महिला बैठक में एक साथ एकता परिषद के संस्थापक पी.व्ही.राजगोपाल, एकता परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष रनसिंह परमार, एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप प्रियदर्शी और राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य रमेश शर्मा नजर आएंगे। राष्ट्रीय महिला बैठक में शामिल होने बिहार से मंजू डूंगडूंग, सिंधु सिन्हा, देवन्ती देवी और मीना देवी जा रही हैं। बिहार की सभी नेत्री 26 अप्रैल की शाम अथवा 27 अप्रैल की सुबह रिसोर्स सेंटर, ग्वालियर, मध्यप्रदेश में प्रवेश कर जाएंगी। 27 से 29 अप्रैल तक राष्ट्रीय बैठक की जाएगी।
विख्यात गांधीवादी और एकता परिषद के संस्थापक पी.व्ही.राजगोपाल के द्वारा मूल रूप से अहिंसात्मक आंदोलन पर ध्यान केन्द्रित कर प्रशिक्षण देंगे। अंहिसात्मक आंदोलन क्या है। यह क्यों जरूरी है। कहां से शुरू और कहां पर अंत किया जा सकता है। यह अंहिसात्मक आंदोलन किसके लिए किया जाएगा। इसके बाद स्वयं के जीवन एवं सामाजिक जीवन में अहिंसा का महत्व क्या है? इसके पहले 27 अप्रैल को आगत अतिथियों का स्वागत पुष्पा सिंह करेंगी और बैठक का उद्देश्य श्रद्धा कश्यप पेश करेंगी।
राष्ट्रीय महिला बैठक के दूसरे दिन 28 अप्रैल को राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य रमेश शर्मा के द्वारा एकता परिषद रजत जयंती वर्ष में महिलाओं की भूमिका एवं कार्यक्रमों पर फोकस डालेंगे। उसके बाद वनाधिकार अधिनियम 2006 एवं भूमि मुद्दे पर चर्चा करेंगे। एकता परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष रनसिंह परमार सक्रिय एवं द्वितीय स्तर के लीडरषीप को तैयार करने की प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे। राष्ट्रीय महिला बैठक के तीसरे दिन 29 अप्रैल को एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप प्रियदर्शी एकता परिषद के संगठनात्मक कार्यों में आने वाली समस्याएं,उनके समाधान और विकल्पों पर चर्चा करेंगे।
बिहार से राष्ट्रीय महिला बैठक में शामिल होने जा रही मंजू डूंगडूंग ने कहा कि  एकता महिला मंच का पुर्नगठन एवं भावी स्वरूप, जन संगठन का भावी स्वरूप, ग्राम वापसी अभियान एवं महिला आर्थिक समूह को सशक्त बनाने पर चर्चा होगी। इसके अलावे 5 वर्षों की क्रमबद्ध योजना बनायी जाएगी। इसके आलोक में अन्तरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन की तैयारियों पर भी चर्चा की जाएगी।

आलोक कुमार

बुधवार, 5 मार्च 2014

आम चुनाव की शंखनाद , बिहार में 6 चरणों में होगा चुनाव



बुधवार को चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा कर दी गयी। इसके साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गयी है। बिहार में 10 अप्रैल से चुनाव होगा। अंतिम 12 मई को चुनाव होगा।

बिहार में कुल चालीस सीट के लिए चुनाव होगा। इसमें 6 सीट आरक्षित है। आरक्षित है। सासाराम , गया , जमुई , समस्तीपुर , सारण और गोपालगंज है। आरक्षित सीट पर 10 अप्रैल को सासाराम , गया और जमुई , 30 April at the Samastipur , 5 मई को हाजीपुर और 12 मई को गोपालगंज में चुनाव होगा।

लोकसभा की निवर्तमान अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार सासाराम सीट से विजयी हुई है। उनको कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है। वहीं सेक्युलरिज्म के चादर उतारने वाले रामविलास पासवान को भाजपा की गोद में बैठकर कमल को खिलाना होगा। पैरवी करने के लिए रकम की मांग करने वाले हरि मांझी को सीट बचाने में खासा मुश्किल होने की संभावना है। सिने कलाकार शत्रुध्न सिन्हा को जीत हासिल करने के लिए जोर लगाना पड़ेगा। पटना साहिब की जनता नाराज चल रहे हैं।


Alok Kumar

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014

राज्य में भूमि आयोग का गठनः राष्ट्रीय समन्वयक


पटना। देश के जाने माने सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता और देशभर में सूचना के अधिकार एवं काम के अधिकार आंदोलन के अग्रणी निखिल डे की मौजूदगी में बिहार जन संसद का दूसरा दिन राजधानी के आर.ब्लॉक में समाप्त हो गया।
मौके पर एकता परिषद के राष्ट्रीय समन्वयक प्रदीप प्रियदर्शी ने कहा कि गरीबी उन्मूलन के संदर्भ में जमीन के महत्व का निर्धारण अर्थशास्त्र के शास्त्रीय सिद्धांतों के मुताबिक नहीं जा सकता। एक भूमिहीन व्यक्ति के लिए जमीन का महत्व सिर्फ आजीविका के साधन या वासस्थान के रूप में ही नहीं बल्कि पहचान,सम्मान एवं सुरक्षा के आधार के रूप में कई गुना ज्यादा है।
सर्वविदित है कि बिहार जैसे आर्थिक रूप से पिछड़े राज्य में कृषि ही बहुसंख्यक आबादी के जीवन यापन का आधार है। ग्रामीण आबादी खेती के सहारे ही अपना गुजारा चलाती है,चाहे वह खेत मालिक हो, भूमिहीन  खेतिहर हो या बटाईदार। एन एस एस द्वारा 1999-2000 में संचालित सर्वे के मुताबिक बिहार के कुल खेत मजदूरों का 76ण्6 प्रतिशत पूर्णतः भूमिहीन है। भूमिहीनता के मामले में बिहार अन्य समुदाय की तुलना में दलितों की स्थिति बहुत ज्यादा चिंताजनक है। वहीं भूमि वितरण की विषमताओं को दूर करने में बिहार में सरकारी प्रयास अततक अप्रयाप्त रहे हैं। जिस वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में हिंसा प्रतिहिंसा ज्यादा हुई है।
बिहार में मौजूदा भूमि सुधार के उपायों के संदर्भ में एकता परिषद की मांग है कि बिहार के गांव में कृषि/गैर कृषि आधारित जीवन जीने वाले 6 लाख आवासीय भूमिहीन परिवारों को न्यूनतम दस डिसमिल आवासभूमि आवंटित करना। इसके लिए आवासभूमि अधिकार कानून बनाना। भूमि हदबंदी कानूनों में संशोधन करना तथा हदबंदी सीमाओं को कम करना, जिसमें धार्मिक स्थापनाएं एवं चीनी मीलों को शामिल किया जा सके। हदबंदी से फाजिल भूमि के वितरण करना। बिहार काश्तकारी जोत अधिनियम 1973 के अनुरूप नामांतरण मैनुएल तैयार करना तथा एक समयबद्ध सीमा में सभी भू अधिकार अभिलेखों में नामांतरण करना। खासमहल भूमि के उपयोग की शर्तों के अनुसार इसकी मौजूदा स्थिति पर पुनः विचार करना तथा महादलित विकास कार्यक्रम के तहत भूमिहीन परिवारों में वासस्थान आवंटन हेतु उपलब्ध करवाना। गैर मजरूआ खास भूमि पर बड़े भूधारियों का कब्जा हटाना एवं भूमिहीन परिवारों में कृषि योग्य भूमि का वितरण करना। भूदान यज्ञ समिति द्वारा वितरित की गई भूमि पर सभी पर्चाधारी भूदान किसानों का कब्जा सुनिश्चित करना एवं दाखिल खारिज करना। भूदान में प्राप्त अयोग्य करार दी गई भूमि का पता लगाकर भूमिहीनों में वितरित करना। राज्य में भूमि आयोग का गठन कर वैधानिक अधिकार प्रदान करना जिससे भूमि सुधार कार्यक्रम को तेजी के साथ लागू किया जा सके।
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता रणजीव , भोजन के अधिकार और लोक परिषद से जुड़े रूपेश, जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वयक की राष्ट्रीय संयोजक कामायनी स्वामी, प्रो0 जावेद अख्तर, प्रो0 विनय कंठ, फादर फिलिप मंथरा,अधिवक्ता नीतिरंजन झा समेत शहर के कई बुद्धिजीवियों ने शामिल होकर विचार व्यक्त किए।

Alok Kumar

The Configure Featured Post option in Blogger allows you to highlight a selected post prominently on

How to Configure Popular Posts in Blogger The Popular Posts widget highlights your most viewed post