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राष्ट्रीय महिला बैठक में बिहार से चार नेत्री शिरकत करेंगी

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पटना। राष्ट्रीय महिला बैठक में एक साथ एकता परिषद के संस्थापक पी . व्ही . राजगोपाल , एकता परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष रनसिंह परमार , एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप प्रियदर्शी और राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य रमेश शर्मा नजर आएंगे। राष्ट्रीय महिला बैठक में शामिल होने बिहार से मंजू डूंगडूंग , सिंधु सिन्हा , देवन्ती देवी और मीना देवी जा रही हैं। बिहार की सभी नेत्री 26 अप्रैल की शाम अथवा 27 अप्रैल की सुबह रिसोर्स सेंटर , ग्वालियर , मध्यप्रदेश में प्रवेश कर जाएंगी। 27 से 29 अप्रैल तक राष्ट्रीय बैठक की जाएगी। विख्यात गांधीवादी और एकता परिषद के संस्थापक पी . व्ही . राजगोपाल के द्वारा मूल रूप से अहिंसात्मक आंदोलन पर ध्यान केन्द्रित कर प्रशिक्षण देंगे। अंहिसात्मक आंदोलन क्या है। यह क्यों जरूरी है। कहां से शुरू और कहां पर अंत किया जा सकता है। यह अंहिसात्मक आंदोलन किसके लिए किया जाएगा। इसके बाद स्वयं के जीवन एवं सामाजिक जीवन में अहिंसा का महत्व क्या...

आम चुनाव की शंखनाद , बिहार में 6 चरणों में होगा चुनाव

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बुधवार को चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा कर दी गयी। इसके साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गयी है। बिहार में 10 अप्रैल से चुनाव होगा। अंतिम 12 मई को चुनाव होगा। बिहार में कुल चालीस सीट के लिए चुनाव होगा। इसमें 6 सीट आरक्षित है। आरक्षित है। सासाराम , गया , जमुई , समस्तीपुर , सारण और गोपालगंज है। आरक्षित सीट पर 10 अप्रैल को सासाराम , गया और जमुई , 30 April at the Samastipur , 5 मई को हाजीपुर और 12 मई को गोपालगंज में चुनाव होगा। लोकसभा की निवर्तमान अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार सासाराम सीट से विजयी हुई है। उनको कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है। वहीं सेक्युलरिज्म के चादर उतारने वाले रामविलास पासवान को भाजपा की गोद में बैठकर कमल को खिलाना होगा। पैरवी करने के लिए रकम की मांग करने वाले हरि मांझी को सीट बचाने में खासा मुश्किल होने की संभावना है। सिने कलाकार शत्रुध्न सिन्हा को जीत हासिल करने के लिए जोर लगाना पड़ेगा। पटना साहिब की जनता नाराज चल रह...

राज्य में भूमि आयोग का गठनः राष्ट्रीय समन्वयक

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पटना। देश के जाने माने सामाजिक - राजनीतिक कार्यकर्ता और देशभर में सूचना के अधिकार एवं काम के अधिकार आंदोलन के अग्रणी निखिल डे की मौजूदगी में बिहार जन संसद का दूसरा दिन राजधानी के आर . ब्लॉक में समाप्त हो गया। मौके पर एकता परिषद के राष्ट्रीय समन्वयक प्रदीप प्रियदर्शी ने कहा कि गरीबी उन्मूलन के संदर्भ में जमीन के महत्व का निर्धारण अर्थशास्त्र के शास्त्रीय सिद्धांतों के मुताबिक नहीं जा सकता। एक भूमिहीन व्यक्ति के लिए जमीन का महत्व सिर्फ आजीविका के साधन या वासस्थान के रूप में ही नहीं बल्कि पहचान , सम्मान एवं सुरक्षा के आधार के रूप में कई गुना ज्यादा है। सर्वविदित है कि बिहार जैसे आर्थिक रूप से पिछड़े राज्य में कृषि ही बहुसंख्यक आबादी के जीवन यापन का आधार है। ग्रामीण आबादी खेती के सहारे ही अपना गुजारा चलाती है , चाहे वह खेत मालिक हो , भूमिहीन   खेतिहर हो या बटाईदार। एन एस एस ओ द्वारा 1999-2000 में संचालित सर्वे के मुताबिक बिहार के ...