गुरुवार, 31 जुलाई 2025

बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस लीगल सेल

 "न्याय संकल्प शिविर" का भव्य आयोजन


पटना. बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस लीगल सेल द्वारा आज "न्याय संकल्प शिविर" का भव्य आयोजन पटना स्थित राजीव गांधी सभागार, सदाकत आश्रम में अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.कार्यक्रम की अध्यक्षता लीगल सेल के प्रदेश अध्यक्ष श्री विकास कुमार झा ने की.मंच पर विशिष्ट उपस्थिति रही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बिहार प्रभारी श्री कृष्णा अल्लावरू जी एवं भारतीय युवा कांग्रेस लीगल सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रूपेश सिंह भदौरिया जी की.

     कार्यक्रम का संचालन सह-अध्यक्ष अधिवक्ता नंद कुमार सागर ने किया जिन्होंने अधिवक्ताओं को चुनाव में आदर्श आचार संहिता, कागजी प्रक्रिया और उम्मीदवारों को विधिक सहायता देने के लिए प्रशिक्षित किए जाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया.उन्होंने कहा कि यह अधिवक्ता अब केवल कानूनी मदद तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि चुनावी अनियमितताओं और प्रशासनिक हस्तक्षेप की निगरानी भी जिम्मेदारीपूर्वक करेंगे.

    श्री अंबुज दीक्षित (बिहार प्रभारी, IYC लीगल सेल) एवं चितवन गोदारा ने अधिवक्ताओं को चुनावी कानून, शिकायत निवारण प्रक्रिया और राज्य मशीनरी के दुरुपयोग से संबंधित कानूनी उपायों पर गहन प्रशिक्षण दिया. कार्यक्रम में गया से अधिवक्ता सतींदर कुमार यादव अपने साथ कई अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ विशेष रूप से मंच पर उपस्थित रहे, उन्होंने गया जिले से युवा अधिवक्ताओं की सक्रिय भागीदारी का परिचय दिया.कार्यक्रम में सह-अध्यक्ष अधिवक्ता नदीम इमाम, गौहर इमाम, राजदेव यादव, सुरभि भारती, शिखा रॉय, तौक़ीर रज़ा, इब्रार आलम, कमलेश पासवान सहित बिहार के सैकड़ों युवा अधिवक्ताओं ने भाग लिया और कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया.

     श्री कृष्णा अल्लावरू जी ने स्पष्ट किया कि आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस एक सशक्त, प्रशिक्षित और संगठित वकीलों की टीम तैयार कर मैदान में उतरेगी और उन्हें पूर्ण समर्थन प्रदान किया जाएगा.श्री रूपेश सिंह भदौरिया जी ने अधिवक्ताओं से अपील की कि वे सत्ता दल द्वारा की जाने वाली हर प्रकार की चुनावी अनियमितताओं पर पैनी निगाह रखें  और संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा हेतु सजग रहें.


आलोक कुमार

बुधवार, 30 जुलाई 2025

पीयूसीएल प्रशासन से मांग करता है कि ननो को अविलम्ब रिहा करे एवं दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करें

 


दुर्ग . छतीसगढ़ में दुर्ग है.पिछले दिनों 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन में यात्रा की तैयारी कर रहे 2 नन एवं उनके साथ के बालिग युवतियों को एवं स्टेशन छोड़ने आए एक व्यक्ति को कानून-पुलिसेत्तर (कानून व पुलिस से ऊपर सर्वोच्च निकाय के रूप में कार्य कर रहे संविधान विरोधी) तत्वों/गिरोह द्वारा जबरन हंगामा कर-धार्मिक अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय के खिलाफ नफरत-हिंसा फैलाने में माहिर संगठनों द्वारा प्रताड़ित कर झूठा आरोप गढ़ा गया और एफआईआर कर 2 ननों को जेल में डाल दिया गया. मानव तस्करी तब माना जाता है, जब किसी अपराधी गिरोह द्वारा किसी को शारीरिक शोषण (श्रम व अन्य प्रकार से ) खरीदी -बिक्री किया जाता है.

           लेकिन शिक्षा स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए जाने वाले ईसाई संस्थाओं के नन द्वारा बालिग लड़कियों को ईसाई संस्थानिक जगह पर खाना बनाने के लिए उचित परिश्रमिक पर जा रहे थे.  इन लड़कियों को सही जगह ले जाने एवं स्टेशन छोड़ने आए व्यक्ति व नन पर जबरन मानव तस्करी का आरोप लगाना एवं धर्मांतरण का आरोप लगाना, इन गिरोहों का आम काम है. इससे ये राजनैतिक लाभ लेने ध्रुवीकरण करने का काम करने के लिए कुख्यात हैं.

                   बस-ट्रेन में रोजाना लाखों लोग अपनी स्वेच्छा से अपने काम- धाम के लिए विभिन्न जगहों पर आना- जाना करते हैं.इनमे से किसी धार्मिक अल्पसंख्यक को सूंघकर ये अपराधी तत्व अशांति फैलाने का काम करते हैं.यदि किसी को कहीं पर कोई कानूनन असंगत बात लगता है, तो वह अपनी शिकायत पुलिस- कानून को कर सकता है, लेकिन हल्ला- बवाल पैदाकर पुलिस को धौंस-धपट दिखाकर कोई भी कानून को प्रभावित नहीं कर सकता. लेकिन यह सब कुछ पुलिस न सिर्फ मूकदर्शक बनकर देखता है वरन सहजरूप से वह इन तत्वों को सक्रिय सहयोग देता है.

              पीयूसीएल की जानकारी में इस मामले में जो तथ्य सामने आया है वह यह है कि,सिस्टर प्रीती मेरी और सिस्टर वंदना फ्रांसिस 25/07/2025 सुबह आगरा से दुर्ग रेलवे स्टेशन इसलिए आएं ताकि वे तीन लड़िकियों को अपने कान्वेंट में खाना पकाने का काम के लिए ले जा सके.ये तीन आदिवासी लड़िकियां जिनका उम्र 19 वर्ष से अधिक था,  नारायणपुर और ओरछा आसपास के थे. उन्हें, उनके ही परिचित सुकमन मंडावी, पूर्व योजना अनुसार, उनके और उनके माता पिता के सहमति से बस द्वारा 25/07/2025 के सुबह करीब 8 बजे दुर्ग पहुंचाए ताकि वे सिस्टरगण के साथ आगरा जा सके.आगरा जाने, सुकमन को छोड़, सभी के लिए सिस्टरगण द्वारा टिकट बुक हो चुका था जो सिस्टरगण के पास था. सुकमन को दुर्ग से वापस अपना घर जाना था. जब सुकमन और ये तीनों लड़कियां प्लेटफार्म में प्रवेश किये तो टीटीई ने उनसे प्लेटफार्म टिकट के लिए पूछताछ किये.जिसपर उन्होंने बताया की टिकट सिस्टर लोगों के पास हैं और वे उनके साथ आगरा जा रहें हैं.

     पूछताछ के दौरान एक बजरंगदली भी था जिसने तुरंत अपने साथियों को दुर्ग रेलवे स्टेशन में बुलाया और सभी को रेलवे पुलिस थाने में सुबह करीब 8.30 - 9.00 बजे ले गये.

रेलवे पुलिस थाने में बजरंगदली सिस्टरगण एवं सुकमन पर तरह-तरह के आरोप, धर्म परिवर्तन और मानव तस्करी का आरोप लगाते, नारें बाजी करतें हुए पुलिस पर मानव तस्करी और धर्मपरिवर्तन के आरोप के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के लिए दबाव बनाते रहें. इसमें ज्योति शर्मा और रवि निगम प्रमुख भूमिका निभाए.ज्योति शर्मा एवं उनके साथी-बजरंगी,  तीनों आदिवासी लड़कियों और सुकमन के फोन एवं उनका झोला का जबरदस्ती पूर्वक परिक्षण करतें हुए तरह तरह के आरोप और धमकी के साथ-साथ मारपीट भी किये. वे लोग सिस्टरगनो को भी गाली एवं मारने की धमकी दिए.सुकमन, जो उन तीनों लड़िकियों की मदद करने आया था, उस पर दलाल होने का आरोप भी लगाया गया. इस दौरान एक लड़की  इतना परेशान हो गयी की वह वापस जाने की बात कहने लगी.ये सिलसिला शाम 5 बजे तक चलता रहा.बजरंगियों के अलावा और किसी को भी सिस्टरगण, सुकमन और लड़िकियों से मिलने या बात करने नहीं दिया गया. रेलवे पुलिस बस मूक दर्शक बने रहें मानो थाना में अब बजरंगियों का कब्जा हो गया हो. रेलवे पुलिस सिस्टरगण के पक्ष में आएं लोगोँ से कहतें रहें की बजरंगियों के चले जाने पर वे इन सबको छोड़ देंगे और आगरा जाने की टिकट भी कर देंगे. 

     मगर बजरंगियों के दबाव के चलते वे 5.30 बजे शाम को दो सिस्टर और सुकमन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दिया गया . रेलवे थाना से उन्हें मोहन नगर पुलिस थाना ले जाया गया और वहां से शाम 6 बजे के बाद मजिस्ट्रेट के पास ले गए जो उन्हें रिमांड में दुर्ग जेल भेज दिए. उन लड़कियों को शेल्टर होम भेज दिया गया.

पीयूसीएल प्रशासन से मांग करता है कि, ननो को अविलम्ब रिहा करे एवं दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करें.


मंगलवार, 29 जुलाई 2025

एक बार फिर दक्षिणपंथियों के निशाने पर ईसाई समुदाय के नन

 


दुर्ग.एक बार फिर दक्षिणपंथियों के निशाने पर ईसाई समुदाय के नन और लोग आ गए हैं. बता दें कि कुछ दक्षिणपंथी समूहों द्वारा ईसाई समुदाय, विशेष रूप से नन और अन्य सदस्यों को निशाना बनाते  हैं. इस बार दुर्ग में कथित अंजाम देने में सफल हो गए.ये घटनाएं धार्मिक और राजनीतिक तनावों को दर्शाती हैं, जहां दक्षिणपंथी विचारधाराएं अक्सर ईसाई धर्म के साथ जुड़ जाती हैं और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देती हैं.

 दुर्ग रेलवे स्टेशन से आगरा जाने की तैयारी में दो नन सहित एक युवक को बजरंग दल के लोगों ने शुक्रवार की सुबह घेर लिया. दोनों नन के साथ तीन लड़कियां भी थीं, जो नारायणपुर एवं ओरछा क्षेत्र की है.बजरंग दल के नेताओं ने आरोप लगाया कि तीनों लड़कियों का मानव तस्करी कर मतांतरण के लिए ले जाने की तैयारी थी.दुर्ग रेलवे स्टेशन पर घंटों गहमागहमी के बाद जीआरपी ने दोनों नन प्रीति मेरी, वंदना फ्रांसिस एवं युवक सुकमन मंडावी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 के तहत मामला दर्ज कर लिया है.लड़कियों को फिलहाल सखी सेंटर ले जाया जा रहा है.

       इस संदर्भ में  भारतीय कैथोलिक बिशप्स सम्मेलन (सीबीसीआई) ने दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हाल ही में दो कैथोलिक धार्मिक महिलाओं की गिरफ्तारी और कथित शारीरिक हमले की कड़ी निंदा की है.सीबीसीआई ने ननों के उत्पीड़न की निंदा की, सरकार से तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया है.

 विस्तार से भारतीय कैथोलिक बिशप्स सम्मेलन (सीबीसीआई) के प्रवक्ता ने बताया कि दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हाल ही में दो कैथोलिक धार्मिक महिलाओं की गिरफ्तारी और कथित शारीरिक हमले की कड़ी निंदा की है और इसे देश भर में ननों को निशाना बनाकर उत्पीड़न, झूठे आरोपों और मनगढ़ंत मामलों की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति का हिस्सा बताया है.

सीबीसीआई के अनुसार, ननों के साथ आई लड़कियों के माता-पिता के लिखित सहमति पत्र मौजूद होने के बावजूद यह घटना घटी.सभी लड़कियाँ कानूनी रूप से वयस्क हैं, जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है.सम्मेलन ने उन रिपोर्टों पर विशेष रूप से चिंता व्यक्त की जिनमें कहा गया था कि घटना के दौरान ननों के साथ शारीरिक हमला किया गया था.

सीबीसीआई ने चिंता जताई है कि ईसाई धार्मिक महिलाओं पर असामाजिक तत्वों द्वारा नज़र रखी जा रही है, जो उन्हें रेलवे स्टेशनों पर घेर लेते हैं, भीड़ को उकसाते हैं और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं.सम्मेलन ने कहा कि ये कार्रवाइयाँ न केवल इन महिलाओं की गरिमा और शील के लिए, बल्कि उनके जीवन के लिए भी गंभीर खतरा हैं.

उत्पीड़न की इन लगातार घटनाओं को "संविधान का गंभीर उल्लंघन" बताते हुए, सीबीसीआई ने राज्य सरकारों से सभी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया है.इसके अतिरिक्त, सम्मेलन ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है.

कैथोलिक चर्च ने इस मुद्दे को सभी उपयुक्त मंचों पर उठाने और धार्मिक ननों और पादरियों की गरिमा का हनन करने, धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करने या अल्पसंख्यक समुदायों के विरुद्ध शत्रुता फैलाने के किसी भी प्रयास के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े होने का संकल्प लिया है.

न्याय और अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए, सीबीसीआई ने अधिकारियों से धार्मिक महिलाओं के अधिकारों और गरिमा को बनाए रखने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया.संगठन ने स्थिति पर कड़ी नज़र रखने और भारत में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का संकल्प लिया है.


सोमवार, 28 जुलाई 2025

14वीं पुण्यतिथि पर विशेष:

 14वीं पुण्यतिथि पर विशेष:

कुष्ठ रोगियों के मसीहा ‘बाबा’ ब्रदर क्रिस्टुदास को श्रद्धांजलि

बाबा क्रिस्टुदास की विरासत आज भी जीवित है

रक्सौल.सुंदरपुर, बिहार. कुष्ठ रोगियों के लिए अपने जीवन को समर्पित कर देने वाले समाजसेवी और "कुष्ठ रोगियों के मसीहा" के रूप में विख्यात ब्रदर क्रिस्टुदास की 14वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई. 27 जुलाई 2011 को 74 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ था.

केरल के कोट्टायम जिले के एडमावुकु गांव में 1937 में जन्मे ब्रदर क्रिस्टुदास ने जीवन के शुरुआती दिनों में ही मानव सेवा का मार्ग चुना.1970 के दशक में वे कोलकाता के पास टीटागढ़ स्थित सेंट मदर टेरेसा के कुष्ठ रोग केंद्र में निदेशक रहे. वहीं से प्रेरित होकर वे बिहार आए, जो उस समय कुष्ठ रोग से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में था.

लिटिल फ्लावर अस्पताल की स्थापना

1982 में ब्रदर क्रिस्टुदास ने पूर्वी चंपारण के रक्सौल प्रखंड के सुंदरपुर गांव में लिटिल फ्लावर लेप्रोसी वेलफेयर एसोसिएशन की स्थापना की. इस संस्था के तहत 200 बेड वाले लिटिल फ्लावर लेप्रोसी हॉस्पिटल ने हजारों कुष्ठ रोगियों को मुफ्त इलाज और पुनर्वास की सुविधा प्रदान की. उनकी करुणा और समर्पण के कारण मरीज उन्हें प्यार से ‘बाबा’ कहकर पुकारते थे.

नेपाल और यूपी तक फैली सेवा की पहुंच

उनकी सेवाओं की चर्चा बिहार तक सीमित नहीं रही।.नेपाल और उत्तर प्रदेश से भी कुष्ठ रोगी सुंदरपुर पहुंचने लगे। समाजसेविका कविता भट्टराई 'माताजी', जिन्हें क्रिस्टुदास ने अपने निधन से पहले संस्था की जिम्मेदारी सौंपी थी, आज भी उसी सेवा भाव से अस्पताल का संचालन कर रही हैं.

कुष्ठ रोग नियंत्रण की दिशा में योगदान

डॉ. गिरीश चंद्र के अनुसार, "आज 10 हजार की आबादी में मुश्किल से एक-दो मरीज ही मिलते हैं.यह बाबा क्रिस्टुदास जैसे लोगों की अथक मेहनत का परिणाम है कि कुष्ठ रोग अब नियंत्रित श्रेणी में आ चुका है." ब्रदर क्रिस्टुदास की पुण्यतिथि पर सुंदरपुर में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई और उनके मानव सेवा कार्यों को याद किया गया। स्थानीय लोगों ने कहा, "बाबा का सपना था कि समाज कुष्ठ रोग से मुक्त हो और मरीज सम्मानजनक जीवन जी सकें."बाबा क्रिस्टुदास की विरासत आज भी जीवित है.

आलोक कुमार

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शनिवार, 26 जुलाई 2025

फादर जेरोम डिसूजा का निधन

कैपुचिन फादर जेरोम डिसूजा का अंतिम संस्कार संपन्न

फादर जेरोम डिसूजा का निधन 23 जुलाई को बरेली में हो गया था 

लखनऊ. फादर जेरोम डिसूजा का निधन 23 जुलाई को बरेली में हो गया था.आज 25 जुलाई को लखनऊ में फादर जेरोम डिसूजा, कैपुचिन का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ.जिसका संचालन बरेली, उत्तर प्रदेश, भारत के बिशप इग्नाटियस डिसूजा और कई कैपुचिन, डायोकेसन पुरोहित और कई शिक्षकों और विश्वासियों द्वारा किया गया था.

दुःखद निधन

फादर जेरोम डिसूजा कैपुचिन (87) का  23 जुलाई को बरेली में निधन हो गया.वे एक संत पुरोहित थे और उन्होंने कैपुचिन संप्रदाय, चर्च और समाज की अनेक पदों पर सेवा की. वे गोवा के मोंटे दे गिरिम में एक कुशल शिक्षक, आगरा के सेंट पीटर्स कॉलेज में प्रधानाचार्य और उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित हार्टमैन कॉलेज में भी प्रधानाचार्य थे; वे न्यूज़ीलैंड में एक मिशनरी और बांग्लादेश के मैमनसिंह में क्लोइस्टर्ड सिस्टर्स के पादरी थे, और बरेली, उत्तर प्रदेश में सेवानिवृत्त हुए.

   

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शुक्रवार, 25 जुलाई 2025

ईसाई मिशनरी संस्थाओं में स्वैच्छिक इस्तीफे की आड़ में जबरन निष्कासन

 

ईसाई मिशनरी संस्थाओं में स्वैच्छिक इस्तीफे की आड़ में जबरन निष्कासन कर दिया जाता है. मिशनरी प्रबंधन की सॉफ्ट टर्मिनेशन रणनीति उजागर,दर्जनों कर्मचारियों को इस रणनीति के तहत नौकरी से बाहर कर देने की खबर......

पटना.राजधानी पटना में है मेडिकल मिशन सिस्टर्स द्वारा संचालित कुर्जी होली फैमिली अस्पताल.यहां कार्यरत कर्मी हलकान और परेशान हैं.यहां के कर्मी जानते हैं कि कभी भी यहां की प्रबंधन की मनमर्जी के शिकार होकर स्वैच्छिक इस्तीफे की आड़ में जबरन नौकरी से निष्कासन कर दिया जाएगा.यहां के अगस्टीन,वर्गीस,अशोक,सत्यनारायण आदि कर्मियों पर निष्कासन की कैची चल गई है.ये सबके सब ईसाई मिशनरी संस्था की प्रबंधक की ‘सॉफ्ट टर्मिनेशन रणनीति‘ के शिकार हो चुके हैं.

        जानकार लोगों का कहना है कि कुर्जी होली फैमिली अस्पताल की प्रबंधक ने तारा टोप्पों को जबरन नौकरी से निकालने के बाद काफी बवाल हुआ था,तब से कर्मचारियों को  प्रत्यक्ष रूप से नहीं निकाला जाता हैं.उनको मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर उनसे इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया जाता है.यहां तक घरेलू जांच कमिटी गठित कर जबरन मानसिक प्रताड़ना देना शुरू कर दिया जाता है.उनसे कहा जाता है कि अगर इस्तीफा नहीं देते हैं तो आपको वेतन व अन्य सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा. इस्तीफा देने से इनकार करने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जाती है. उनके लिए विदाई सम्मान या फेयरवेल कार्यक्रम नहीं होता है, भले ही उनकी सेवा अवधि लंबी क्यों न हो.


1. मलहम लगाना -शुरुआत में कर्मचारी को समझाया जाता है कि “आपके लिए यह बेहतर होगा”

2. दबाव में कहा जाता है – “इस्तीफा नहीं देंगे तो कानूनी कार्रवाई होगी”

3.धमकी - "3 माह का वेतन और अन्य लाभ नहीं मिलेंगे”

4. मजबूरी में इस्तीफा- "कर्मचारी को दिखाया जाता है कि बाहर का रास्ता ही विकल्प है"

5. कोई फेयरवेल नहीं -"वर्षों की सेवा के बावजूद कोई सार्वजनिक विदाई नहीं होती"

यह प्रबंधन की चालाकी है. स्वेच्छा से इस्तीफा दिया.यह दिखाने से संस्था कानूनी झंझट से बचती है.कर्मचारी न्याय की लड़ाई नहीं लड़ पाते क्योंकि दस्तावेजों में ‘इस्तीफा’ होता है यह नैतिक सवाल है कि क्या यह स्वैच्छिक इस्तीफा है या ढका-छिपा निष्कासन?सेवा करने वाले कर्मचारियों को इस तरह बाहर करना क्या क्रूरता नहीं? प्रासंगिक उदाहरण है कि यही नीति उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के साथ हाल में उपयोग में लाई गई..जैसे दूध में गिरी मक्खी को निकाल फेंकना..यह नीति केवल अस्पताल या मिशनरी संस्था नहीं, कई अन्य एनजीओ और संस्थानों में भी प्रचलित है.

मांगें

1. ऐसे संस्थानों में लेबर लॉ और मानवाधिकार आयोग की जांच हो

2. निकाले गए कर्मचारियों को न्याय व हर्जाना मिले

3. पारदर्शी टर्मिनेशन पॉलिसी अनिवार्य हो

4. धर्म आधारित संस्थाओं की जवाबदेही तय हो


आलोक कुमार


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गुरुवार, 24 जुलाई 2025

उनकी स्थिति आज भी संवैधानिक हकों से कोसों दूर

 

बिहार में फिर गूंजा भूमि अधिकार का सवाल: तीन डिसमिल को लेकर जन सुराज का प्रदर्शन तेज

17 साल बाद भी लागू नहीं हुई बंदोपाध्याय आयोग की सिफारिशें, चुनावी मौसम में गरमाया मुद्दा

पटना. बिहार में आवासीय भूमिहीनों को जमीन देने का वादा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है. वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भूमि सुधार के लिए डी. बंदोपाध्याय आयोग का गठन किया था, जिसने 2008 में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी. रिपोर्ट में स्पष्ट सिफारिश की गई थी कि भूमिहीनों को आवास के लिए जमीन दी जानी चाहिए.

प्रारंभ में सरकार ने दस डिसमिल जमीन देने की बात कही, जिसे बाद में पांच डिसमिल और अंततः तीन डिसमिल तक सीमित कर दिया गया.मगर 17 साल बाद भी इन सिफारिशों को जमीन पर उतारने की कोई ठोस पहल नहीं की गई है.

अब ‘जन सुराज’ ने उठाया मोर्चा

राज्य में चुनावी माहौल के बीच ‘जन सुराज’ संगठन ने इस मुद्दे को फिर से जोरदार ढंग से उठाया है.संगठन के कार्यकर्ता प्रदेश भर में प्रदर्शन कर रहे हैं और तीन डिसमिल भूमि आवंटन को चुनावी एजेंडे में शामिल करने की मांग कर रहे हैं.

जन सुराज के संस्थापक सदस्य गोडेन अंतुनी ठाकुर ने साफ शब्दों में कहा है, “हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक बिहार के हर भूमिहीन परिवार को तीन डिसमिल जमीन नहीं दिलवा देते.”

राजनीतिक खामोशी पर सवाल

विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि नीतीश कुमार सरकार ने भूमि सुधार आयोग की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. यह रिपोर्ट राज्य के भूमिहीन, दलित, वंचित और आदिवासी समुदायों के लिए एक उम्मीद की किरण मानी जा रही थी, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में यह निष्क्रिय पड़ी है.

भूमिहीनों की दशा जस की तस

बिहार में लाखों परिवार आज भी बिना वैध आवासीय भूमि के झुग्गियों, सरकारी जमीनों या जल-जंगल की जमीन पर रह रहे हैं. न बिजली, न पानी, न स्थायी अधिकार—उनकी स्थिति आज भी संवैधानिक हकों से कोसों दूर है.


भूमि अधिकार फिर बना चुनावी मुद्दा

चुनाव नजदीक आते देख तीन डिसमिल जमीन का सवाल फिर गूंज रहा है.जन संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब तक गरीबों को जीने लायक जमीन नहीं दी जाएगी, तब तक विकास की बात अधूरी रहेगी.

आलोक कुमार 

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बुधवार, 23 जुलाई 2025

विधान सभा घेराव के लिए प्रस्थान करेगा

 

पटना. भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (बिहार) द्वारा बेरोजगार, पेपर लीक, पलायन और छात्रावासों सहित शिक्षण संस्थानों की जर्जर स्थिति के खिलाफ व निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की मांग को लेकर कल दिनांक 24 जुलाई, 2025 को मध्याह्न 12-00 बजे प्रदेश काग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम से राजापुर पुल, बोरिंग रोड होते हुए विधान सभा घेराव के लिए प्रस्थान करेगा. उक्त कार्यक्रम में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (बिहार) के प्रभारी श्री सत्यम कुशवाहा जी अलावे कई गणमान्य नेतागण के साथ-साथ हजारों की संख्या में एन.एस.यू.आई के छात्रगण भी उपस्थित रहेंगे।  

आलोक कुमार 

सोमवार, 21 जुलाई 2025

आवासीय भूमिहीनों को जमीन दिलाने एकता परिषद का गांधीवादी आंदोलन ग्वालियर से दिल्ली तक

 आवासीय भूमिहीनों को जमीन दिलाने एकता परिषद का गांधीवादी आंदोलन ग्वालियर से दिल्ली तक

जन सत्याग्रह, पी. वी. राजगोपाल के नेतृत्व में देशभर से हजारों लोगों की पदयात्रा होती थी

पटना. आवासीय भूमिहीनों को न्यूनतम तीन डिसमिल भूमि दिलाने की मांग को लेकर जन संगठन एकता परिषद ने बीते दो दशकों में कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया है.इस आंदोलन की अगुवाई देश के वरिष्ठ गांधीवादी नेता पी. वी. राजगोपाल ने की, जिसका उद्देश्य था – शांतिपूर्ण सत्याग्रह के माध्यम से गरीबों और हाशिए पर खड़े समुदायों के भूमि अधिकार सुनिश्चित करना.

2007 से लगातार उठती रही आवाज

2007 में जनादेश यात्रा के नाम से पहला बड़ा अभियान शुरू हुआ, जिसमें देशभर के हजारों भूमिहीनों ने भाग लिया.इस अभियान के तहत सरकार से आवास और आजीविका के लिए भूमि देने की नीति तैयार करने की मांग की गई.

2012 में ‘जन सत्याग्रह’ बनी निर्णायक घड़ी

इस आंदोलन की सबसे अहम कड़ी 2012 में देखने को मिली, जब ग्वालियर से दिल्ली तक लगभग 50,000 लोगों ने पैदल मार्च किया। इसे जन सत्याग्रह का नाम दिया गया. शांतिपूर्ण पदयात्रा के इस आयोजन ने देश का ध्यान आकर्षित किया.अंततः केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से बातचीत की और कुछ बिंदुओं पर सहमति जताई, जिसमें भूमि सुधार नीति, भूमिहीनों की पहचान और भूमि आवंटन की प्रक्रिया तेज करने के वादे शामिल थे.

2018 में ‘जनांदोलन’ के रूप में फिर उठी मांग

2018 में जनांदोलन के नाम से एक और चरण शुरू किया गया.इसमें फिर से भूमि अधिकार, वन अधिकार और आजीविका सुरक्षा को लेकर मांगें उठाई गई.यह आंदोलन भी पूरी तरह अहिंसात्मक रहा और गांधीवादी मूल्यों पर आधारित था.

गांधी के रास्ते पर राजगोपाल

पी. वी. राजगोपाल, जो कभी चंबल के डकैतों के पुनर्वास में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं, ने जीवन भर अहिंसा और जन संगठन की ताकत को मजबूत किया.उनका मानना है कि भारत में भूमि के बिना न तो आत्मसम्मान संभव है और न ही स्थायी विकास.

मांग आज भी प्रासंगिक

एकता परिषद की प्रमुख मांग रही है कि हर भूमिहीन परिवार को कम-से-कम तीन डिसमिल भूमि आवास के लिए दी जाए.आज भी देश के कई हिस्सों में लाखों परिवार ऐसे हैं, जो बिना किसी वैध जमीन के बसे हैं.यह आंदोलन न केवल जमीन की मांग है, बल्कि गरिमा और अधिकार की भी मांग है.

आलोक कुमार

रविवार, 20 जुलाई 2025

भारतीय जनता पार्टी के नेता राजन क्लेमेंट साह नेआरोप को एक सिरे से नकारा

 

पटना. यह आरोप ईसाई समुदाय के द्वारा लगाया जाता है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ईसाइयों पर हमले बढ़े है. बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के उपाध्यक्ष राजन क्लेमेंट साह ने खुद ईसाई होकर आरोप को खारिज कर रहे हैं हम अल्पसंख्यक को निशाना बनाया जा रहा है.

     भाजपा के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं, तथा विगत कई वर्षों से अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाई समुदाय के हितों की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं.इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से देश में ईसाई समुदाय पर हमलों की संख्या में वृद्धि हुई है.यह गंभीर आरोप देश के  तथाकथित ईसाई संगठनों और धार्मिक नेताओं के द्वारा लगाया जाता हैं. 

      मीडिया में बने रहने और मिशनरी कर्ताधर्ताओं के सामने चमकने के लिए समय समय पर अखिल भारतीय ईसाई परिषद, यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम और अन्य संगठनों के द्वारा कहा जाता रहा है कि पिछले दस वर्षों में चर्चों पर हमलों, प्रार्थना सभाओं में तोड़फोड़, और पादरियों की गिरफ्तारी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. संगठनों का कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन है.जबकि ईसाई नेता राजन का कहना है कि प्रधानमंत्री जी दिल्ली के गिरजाघर में जाते हैं और आर्चबिशप से मिलकर वार्तालाप करते हैं.

वहीं भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए कहा है कि उनकी सरकार सबका साथ, सबका विकास की नीति पर चल रही है और किसी भी धर्म के खिलाफ भेदभाव नहीं किया जाता है.भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “देश में कानून का राज है. यदि कोई घटना घटती है, तो उस पर स्थानीय प्रशासन कार्रवाई करता है.यह कहना गलत है कि सरकार किसी एक धर्म के विरुद्ध है.”

आलोक कुमार

शुक्रवार, 18 जुलाई 2025

स्मार्ट मीटरों ने आम जनता की कमर तोड़ दी

 पटना. भाकपा(माले) के राज्य सचिव कॉ. कुणाल ने कहा है कि चुनाव आते ही भाजपा-जदयू गठबंधन ने एक बार फिर जुमलों की झड़ी लगा दी है, लेकिन इस बार बिहार की जागरूक जनता इन झूठे वादों के जाल में फंसने वाली नहीं है.उन्होंने कहा कि बिजली दरों के मामले में बिहार देश का सबसे महंगा राज्य बना हुआ है. ऊपर से


स्मार्ट मीटरों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है.पूरे राज्य में लोग फर्जी बिजली बिल, अनाप-शनाप चार्ज और जबरन वसूली से त्रस्त रहे हैं. स्मार्ट मीटरों के अनुभव से इतने लोग दुखी हैं कि उन्होंने इसे सही ही नाम दिया है — "खून चुसवा मीटर".आज भी हजारों लोग बिजली विभाग के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन न सुनवाई है, न राहत.

         कॉ. कुणाल ने तंज कसते हुए कहा कि अब जब भाजपा-जदयू गठबंधन को अपनी हार सामने नजर आ रही है, तो इन्होंने फिर से एक नया जुमला फेंका है — हर परिवार को 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का.साथ ही दावा किया जा रहा है कि 2025 से 2030 के बीच एक करोड़ रोजगार दिए जाएंगे। सवाल है कि जब हर साल दो करोड़ रोजगार का वादा करके सत्ता में आए थे, तो पिछले 10 साल में 20 करोड़ रोजगार कहां गए?

      उन्होंने कहा कि 5 साल में 4.8 साल जनता को लूटो और चुनाव के दो महीने पहले बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर दो — यही भाजपा-जदयू का फार्मूला बन गया है.लेकिन बिहार की जनता अब इतनी भोली नहीं है। वह समझ चुकी है कि यह केवल सत्ता में बने रहने की साजिश है, न कि जनता की भलाई के लिए कोई गंभीर योजना।

कुणाल ने यह भी याद दिलाया कि भाकपा(माले) के विधायकों ने बार-बार विधानसभा से लेकर सड़कों तक आवाज उठाई है —स्मार्ट मीटरों को हटाने,सभी जरूरतमंद परिवारों को कम से कम 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने, और बिजली को निजी कंपनियों के चंगुल से मुक्त करने की.

            उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन अपने हर वादे और संकल्प पर गंभीरता से कायम है. केवल घोषणा नहीं, बल्कि ज़मीन पर बदलाव लाना ही हमारा लक्ष्य है. प्रेस वक्तव्य के अंत में उन्होंने पटना के पारस अस्पताल में दिनदहाड़े की गई हत्या की कड़ी निंदा की और कहा कि बिहार की राजधानी अब अपराध की राजधानी में तब्दील हो चुकी है.अपराधी बेलगाम हैं और शासन-प्रशासन मूक दर्शक बना बैठा है.

     उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि बिहार की जनता इस निकम्मी और लुटेरी सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाए। जनता ने बदलाव का मन बना लिया है और माले समेत INDIA गठबंधन इस बदलाव की लड़ाई में मजबूती से साथ है.


आलोक कुमार

गुरुवार, 17 जुलाई 2025

वर्तमान चुनाव आयोग तानाशाह मोदी सरकार के सिस्टम का एक तानाशाह हैं


 वर्तमान चुनाव आयोग तानाशाह मोदी सरकार के सिस्टम का एक तानाशाह हैं


सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई को क्या करेगा ?


पटना. "चुनाव आयोग जनता को वोटबंदी कर रहा और हमारे पास दो अदालतें हैं जनता का अदालत व सुप्रीम कोर्ट"यह बात भाकपा-माले महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने इंडिया गठबंधन के चुनाव आयोग से मिलने के बाद कहा. क्योंकि चुनाव आयोग इंडिया गठबंधन के नेताओं को कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया उल्टे एक तानाशाह की तरह पेश आया.

   इंडिया गठबंधन दोनों अदालत में गया और 9 जुलाई को पूरा बिहार बंद रहा था 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक सलाह दी कि मतदाता गहन निरीक्षण में वोटर कार्ड, आधार कार्ड व राशन कार्ड को शामिल किया जाय तथा सुप्रीम कोर्ट जज ने कहा ग्यारह डाकोमेंट से मेरे पास भी नहीं है जिससे मैं भी साबित कर सकता.

  मगर चुनाव आयोग ने न जनता की सुनी और न ही सुप्रीम कोर्ट की बात नहीं मानी बल्कि अपने वही पहले वाला ही जनता का वोट बंदी का निर्णय जारी रखा बल्कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम को और भी विकृत कर दिया जिसका भंडाफोड़ पत्रकार अजीत अंजुम ने किया और इस सच्चाई को सामने लाकर चुनाव आयोग को मोदी सरकार के पक्षधर बता दिया, इसके लिए मैं अजीत अंजुम को सलाम करता हूं.

  अभी फार्म का जांच भी नहीं हुआ कि सत्ता का दलाल गोदी मीडिया ने सूत्रों के हवाले से खबर देने भी लगा है कि बिहार के 35 लाख मतदाताओं का नाम कटेगा क्योंकि वे विदेशी हैं, घुसपैठिए हैं. यानी पिछले 2024 चुनाव के एक वर्ष एक माह दस दिनों में सिर्फ बिहार में पैंतीस लाख विदेशी घुसपैठिए दाखिल हुए और उन्होंने आधार कार्ड, वोटर कार्ड,जॉब कार्ड तथा राशन कार्ड भी बनवा लिया जबकि 20 सालों से भाजपा नीतीश की सरकार है. और इसके जिम्मेदार कौन है?

सवाल है कि क्या भाजपा नीतीश सरकार निकम्मी है, फर्जी है या फिर चुनाव आयोग व गहन परीक्षण फर्जी है?

  अब सवाल है कि इंडिया गठबंधन क्या करेगा?व सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई को क्या करेगा ? संविधान व लोकतंत्र बचेगा या उसके खात्मा की शुरुआत होगी?

  क्या इंडिया गठबंधन लोकतंत्र की रक्षा के लिए चुनाव आयोग को पूरा देश में हर राज्य हर जिले में घेराबंदी कर अनवरत चक्का जाम कर देगा?

  क्या सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग को, केंद्र सरकार को गंभीर चेतावनी देते हुए मतदाता गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को निरस्त करेगा?

आलोक कुमार

सोमवार, 14 जुलाई 2025

बिहार प्राइड परेड 2025 में कई प्रदेशों के ट्रांसजेंडर भाग लेंगे......

 


बिहार की राजधानी पटना में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग प्राइड परेड करेंगे. सामाजिक सुरक्षा के उपाय के रूप में मासिक पेंशन की मांग करेंगे. ‘दोस्तानासफर’ नाम के एक गैर सरकारी संगठन की ओर से ये परेड आयोजित किया जाएगा. जिसमें कई प्रदेशों के ट्रांसजेंडर  भाग लेंगे......

पटना. बिहार प्राइड परेड 2025 पूर्व की भांति दिनांक 14 जुलाई को समय शाम 4:00 बजे से साहित्य सम्मेलन से शुरुआत होकर के प्रेमचंद रंगशाला तक जाएगी और प्रेमचंद रंगशाला में किन्नर महोत्सव में सभी व्यक्ति शामिल होंगे.इस कार्यक्रम में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता हरीश अय्यर एवं कलकी सुब्रमण्यम भी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में सभी महिला पुरुष ट्रांसजेंडर जुलूस की शक्ल में अपनी बातों को समाज के सामने ले जाते हुए नजर आएंगे.

   आज पटना में विभिन्न तरीके की सामाजिक मुश्किलों से  समयौनिक एवं ट्रांसजेंडर समुदाय अंतर सामुदायिक हमले, बाह्य व्यक्तियों के द्वारा ब्लैकमेलिंग, सामाजिक स्वीकार्यता, पारिवारिक स्वीकार्यता जैसी स्थितियों से जूझ रहे होते हैं उसमें किस तरीके से कानून का पालन के द्वारा मुश्किलों से बाहर निकाला जा सकता है. इस बार की थीम सामाजिक प्रताड़ना झेल रहे समयौनिक एवं ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की मुश्किलों को दुनिया के सामने ले जाना आज की परिस्थितियों से आवश्यक है. यह कार्यक्रम लगभग 13 वर्षों से पटना जिले में आयोजित हो रही है .इस कार्यक्रम में लगभग हजारों हजार व्यक्ति शामिल होते हैं. यह ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए बहुत ही अच्छा मौका सामाजिक स्वीकार्यता के लिए प्रदान करती है.इस कार्यक्रम में मणिपुर,नेपाल, तमिलनाडु पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब एवं अन्य राज्यों के साथी शामिल हो रहे हैं। इस कार्यक्रम में ट्रांसजेंडर एवं समयौनिक व्यक्तियों के अलावा आम समाज के व्यक्ति भी शामिल होंगे.

     इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम में कावडिअट्टम, नेपाली लोक संस्कृति, बिहार की लोक संस्कृति, डिवोशनल, मणिपुर लोक संस्कृति के विभिन्न कार्यक्रम की प्रस्तुतियां प्रेमचंद रंगशाला के अंदर में होगी एवं बबीता किन्नर गायिका का संगीत में कार्यक्रम भी प्रस्तुत होगी.


आलोक कुमार

रविवार, 13 जुलाई 2025

पटना में व्यवसायी महासंघ, बिहार का स्थापना सम्मेलन संपन्न, व्यवसायी सुरक्षा आयोग के गठन की मांग तेज

 


उन्माद, उत्पात और अराजकता के माहौल में किसी का व्यवसाय सुरक्षित नहीं रह सकता : दीपंकर भट्टाचार्य

पटना में व्यवसायी महासंघ, बिहार का स्थापना सम्मेलन संपन्न, व्यवसायी सुरक्षा आयोग के गठन की मांग तेज

पटना .पटना के रविन्द्र भवन में आज व्यवसायी महासंघ, बिहार का स्थापना सम्मेलन आयोजित किया गया. सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाकपा-माले के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि देश एक गहरे आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है.मौजूदा आर्थिक नीतियों के कारण गरीबों की स्थिति लगातार बदतर हो रही है, जबकि बड़े पूंजीपतियों की संपत्ति में जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है.

                  उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट लूट और श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के खिलाफ किसान-मजदूरों के साथ मिलकर छोटे व्यवसायियों को एकजुट होना होगा। किसान, मजदूर और छोटे व्यापारियों की त्रिकोणीय एकता ही इस संघर्ष को मजबूती दे सकती है.

           दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज छोटी दुकानें बंद हो रही हैं, सरकारी नौकरियां खत्म हो रही हैं और किसान-मजदूरों की हालत बदतर होती जा रही है. बिहार में भी छोटे दुकानदारों, किसानों और मजदूरों के लिए कोई ठोस काम नहीं किया जा रहा। केवल ओवरब्रिज, मेट्रो और एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं की बातें हो रही हैं, जबकि छोटे बाजार, छोटे उद्योग और स्थानीय व्यापार को कोई समर्थन नहीं मिल रहा.उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यवसाय के लिए शांति, सौहार्द और भाईचारे का माहौल जरूरी है। लेकिन आज समाज में अपराध, उन्माद और अराजकता का बोलबाला है, जो व्यापार के लिए अत्यंत घातक है.

       उन्होंने यह भी कहा कि आज देश के संविधान पर सीधा हमला हो रहा है। संविधान और कानून का राज ही अन्याय को रोक सकता है। देश को आज़ादी सम्मान के लिए मिली थी, लेकिन अब सरकार अमेरिका की दबंगई के आगे झुक रही है.

          नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों ने देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है। बिहार में कर्ज वसूली के नाम पर महिलाओं का शोषण हो रहा है और आत्महत्याओं की घटनाएं बढ़ रही हैं.दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार में बदलाव की जरूरत है और इसके लिए मौजूदा सरकार को बदलना होगा। उन्होंने डबल इंजन सरकार को डबल बुलडोजर करार देते हुए कहा कि यह सरकार विकास की राह में रुकावट बन रही है.

              सम्मेलन को संबोधित करते हुए काराकाट से भाकपा-माले सांसद का. राजाराम सिंह ने कहा कि अपराध की घटनाओं का प्रतिकार करते हुए शांति और भाईचारे का माहौल कायम करना होगा, तभी व्यापार सुरक्षित रहेगा और आगे बढ़ेगा.उन्होंने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यह सरकार चंद बड़े व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर रही है और राजशाही की वापसी का प्रयास कर रही है। बिहार की जनता इसे कतई स्वीकार नहीं करेगी.

         विदित हो कि छोटे और मझोले व्यवसायियों की सुरक्षा, सम्मान और अस्तित्व के सवालों पर संगठित हस्तक्षेप की दिशा में में यह स्थापना सम्मेलन आज संपन्न हुआ. आरा से माले के सांसद सुदामा प्रसाद ने इसकी पहलकदमी ली। उन्होंने कहा कि व्यवसायियों के लिए सुरक्षा आयोग बने, यह हमारी पहली मांग है.पटना में जिस प्रकार से व्यवसायी गोपाल खेमका की हत्या हुई, उससे पूरा व्यापार जगत स्तब्ध है.

            कार्यक्रम के अध्यक्ष मंडल में का. सुदामा प्रसाद के अलावा लेमनचूस फैक्ट्री, पटना के पूर्व संचालक शंभूनाथ मेहता, फर्नीचर व्यवसायी सुरेन्द्र सिंह, भोजपुर के ईंट भट्ठा एसोसिएशन के अध्यक्ष उमाशंकर यादव, सीमेंट कारोबारी पूनम देवी, फुटपाथ दुकानदारों के नेता शहजादे आलम, सिकटा से माले विधायक वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता, शिव गंगा बस ट्रांसपोर्ट के ईश्वर दयाल सिंह, फारबिसगंज के किराना व्यवसायी रंजन भगत, हिंदुस्तान टायर के मालिक गंगा साह, राइस मिल एसोसिएशन के सच्चिदानंद राय आदि शामिल थे.

            मंच पर माले के राज्य सचिव कुणाल, एमएलसी शशि यादव, विधायक रामबलि सिंह यादव, पटना से अजय प्रसाद गुप्ता, गया से अजय कुमार, नालंदा से किशोर साव, जहानाबाद से विशाल गुप्ता, नवादा से सावित्री गुप्ता, रणविजय गुप्ता सहित पूरे बिहार से हजारों की तादाद में व्यवसायी आज पटना पहुंचे थे.


आलोक कुमार

https://youtu.be/907dOmSui_c?si=Vb0AICbqUPtc2uVo

 https://youtu.be/907dOmSui_c?si=Vb0AICbqUPtc2uVo

शनिवार, 12 जुलाई 2025

सीधे-सीधे बिहारी अस्मिता पर हमला

 जनता दल यूनाइटेड की सरकार, चुनाव आयोग के साथ मिलकर, बिहार के दलितों, पिछड़ों, शोषितों और गरीबों के वोट के अधिकार को छीनने का षड्यंत्र रच रही थी. यह न सिर्फ लोकतंत्र पर आघात भाजपा,जदयू ,चुनाव आयोग के षड्यंत्र की हार......

पटना .बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश राम ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम यहाँ एक ऐतिहासिक फैसले और एक जनविरोधी साजिश के पर्दाफाश के संदर्भ में आपसे संवाद करने के लिए उपस्थित हुए हैं.

    भारतीय जनता पार्टी और था, बल्कि यह
सीधे-सीधे बिहारी अस्मिता पर हमला था। लेकिन हम आपको यह बताते हुए गर्व और संतोष का अनुभव कर रहे हैं कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस साजिश पर करारा ब्रेक लगा दिया है.यह जीत सिर्फ एक कानूनी जीत नहीं है — यह पूरे बिहार की जनता की जीत है। यह उस भरोसे की जीत है जो उन्होंने देश के जननायक, नेता विपक्ष राहुल गांधी जी पर किया। राहुल जी ने बिहार बंद आंदोलन के दौरान यह वादा किया था कि वे बिहार के सरोकारों की लड़ाई अंतिम दम तक लड़ेंगे — और आज वो वादा साकार होते हुए दिख रहा है.

    सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने कहा — “यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो हमारे लोकतंत्र की जड़ों तक जाता है। यह वोटरों के मताधिकार के अधिकार का मामला है.” 10 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि बिहार में चल रहे विशेष तीव्र पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के दौरान आधार कार्ड, EPIC (मतदाता पहचान पत्र) और राशन कार्ड को पहचान प्रमाण के रूप में मानने पर गंभीरता से विचार करें.

    चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बार-बार आग्रह किया कि इन दस्तावेजों को स्वीकार करना आयोग के विवेकाधिकार पर निर्भर माना जाए। लेकिन न्यायमूर्ति धूलिया ने स्पष्ट कहा — “हमारा आदेश साफ है, चुनाव आयोग को इन तीन दस्तावेजों को स्वीकार करने पर विचार करना चाहिए.”कोर्ट ने यह भी कहा कि – “जब आयोग खुद कह रहा है कि 11 दस्तावेजों की सूची अंतिम नहीं है, तो न्यायहित में आधार, EPIC और राशन कार्ड को शामिल करना ही तार्किक होगा.”

    साथियों, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हमने SIR की प्रक्रिया पर रोक की कोई मांग नहीं की। यह बात कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज की है। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी — तब तक कोई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित नहीं की जाएगी.कोर्ट ने यह भी पूछा कि SIR की प्रक्रिया इतनी चुनाव-केंद्रित क्यों है? यह पुनरीक्षण न तो “संक्षिप्त” है, न “विशेष” — जैसा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 में कहा गया है.जब चुनाव आयोग ने यह तर्क दिया कि आधार सिर्फ पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं — तब न्यायमूर्ति धूलिया ने यह सवाल उठाया कि — “आज के समय में आधार सबसे बुनियादी पहचान पत्र है। जब मैं जाति प्रमाणपत्र बनवाता हूं तो आधार दिखाता हूं। फिर यह इस सूची में क्यों नहीं है? पूरी SIR प्रक्रिया का उद्देश्य तो सिर्फ व्यक्ति की पहचान है.”

      न्यायमूर्ति बागची ने भी दो टूक कहा — “आप जिन 11 दस्तावेजों को मान्य मानते हैं, उनमें से कोई भी सीधे नागरिकता सिद्ध नहीं करता। तो फिर सिर्फ आधार के विरोध में इतना आक्रोश क्यों? कानून के अनुसार चलिए.”यह सारा मामला सिर्फ दस्तावेजों का नहीं है, यह बिहार के करोड़ों लोगों के अधिकारों का सवाल है। कांग्रेस पार्टी साफ तौर पर मानना है कि चुनाव आयोग सत्ता में बैठे दलों के इशारे पर अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहा है, ताकि करोड़ों वोटर — खासकर दलित, पिछड़े और गरीब — मतदाता सूची से बाहर हो जाएं. यह ‘SIR’ एक फर्जी अभ्यास है, और 24 जून का प्रशासनिक आदेश बिहार के लोकतंत्र के साथ एक कुठाराघात है.हम सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक हस्तक्षेप का स्वागत करते हैं। कांग्रेस पार्टी इस लड़ाई को अंतिम सांस तक लड़ेगी। हम बिहार के एक-एक नागरिक की पहचान, सम्मान और मताधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.

      संवाददाता सम्मेलन में विधान परिषद में कांग्रेस दल के नेता डॉ. मदन मोहन झा, नेशनल मीडिया पैनालिस्ट प्रेम चन्द्र मिश्रा, नेशनल मीडिया  कोऑर्डिनेटर अभय दुबे, कोषाध्यक्ष जितेन्द्र गुप्ता, पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, मोतीलाल शर्मा ,  मीडिया चेयरमैन राजेश राठौर, नागेन्द्र कुमार विकल मौजूद थे .

आलोक कुमार

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शुक्रवार, 11 जुलाई 2025

तीन दिवसीय धर्म विधि संगोष्ठी

 तीन दिवसीय धर्म विधि संगोष्ठी


पटना.बिहार रीजनल बिशप कॉन्फ्रेंस (Bihar Regional Bishops Conference) के अधीन बक्सर, पटना, मुजफ्फरपुर,बेतिया,पूर्णिया और भागलपुर धर्मप्रांत है.बिहार के इन सभी धर्मप्रांतों में आस्था को गहरा करने के लिए तीन दिवसीय धर्मविधि संगोष्ठी का आयोजित की गई.इसका समापन आज हो गया.

     बिहार क्षेत्रीय बिशप परिषद (बीआरबीसी) के धर्म विधि आयोग ने 9 से 11 जुलाई, 2025 तक पटना स्थित बिहार चर्च क्षेत्र के क्षेत्रीय पादरी केंद्र, नवज्योति निकेतन में धर्म विधी पर तीन दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया.इस सम्मेलन में बिहार के सभी छह धर्मप्रांतों के 68 पल्ली पुरोहित और धर्म बहनें एकत्रित हुईं ताकि धर्मविधि प्रथाओं के प्रति उनकी समझ और प्रतिबद्धता को गहरा किया जा सके.

भारतीय कैथोलिक बिशप सम्मेलन के धर्म विधि आयोग के राष्ट्रीय सचिव, फादर रुडोल्फ राज पिंटो ओएफएम, इस संगोष्ठी के मुख्य संसाधन व्यक्ति थे.बीआरबीसी धर्म विधि आयोग के क्षेत्रीय सचिव, फादर विजय भास्कर ने इस कार्यक्रम का समन्वयन किया.

        कार्यक्रम के तीन दिनों के दौरान, फादर रुडोल्फ ने चर्च की धार्मिक पद्धति से संबंधित विविध विषयों पर कई सत्र प्रस्तुत किए.इनमें "धर्म विधि और संस्कारों की नींव", "यूकेरिस्ट का धार्मिक अनुष्ठान - मिस्सा की संरचना", "मंत्रालयों का विभाजन", "धर्म विधि अनुष्ठान में कर्तव्य और मंत्रालय", "धर्म विधि की व्यवस्था और अलंकरण", "धर्म विधि संगीत", और "लोकप्रिय धर्मपरायणता" शामिल थे. उनकी अंतर्दृष्टि पूर्ण प्रस्तुतियों ने कई प्रतिभागियों को अनेक प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित किया, जो एक गरिमापूर्ण धर्म विधि के प्रति उनकी गहरी रुचि और प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं.

     सेमिनार के प्रत्येक दिन बिहार क्षेत्र के एक बिशप की अध्यक्षता में आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यूकेरिस्ट अनुष्ठान का आयोजन किया गया.9 जुलाई को बक्सर धर्मप्रांत के बिशप जेम्स शेखर ने मिस्सा अनुष्ठान किया.10 जुलाई को पटना धर्मप्रांत के आर्चबिशप सेबेस्टियन कल्लुपुरा ने समारोह का नेतृत्व किया.कार्यक्रम के अंतिम दिन, मुजफ्फरपुर के बिशप कैजेटन ओस्टा, जो बीआरबीसी के अध्यक्ष भी हैं, ने मिस्सा अनुष्ठान की अध्यक्षता की.उनकी उपस्थिति और सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन के गहन आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया.

समूह चर्चा के दौरान, धर्मप्रांत के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने धर्मप्रांतों में इसी तरह के सेमिनार आयोजित करने की अपनी योजनाएं साझा की, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरे क्षेत्र में धर्म विधि नवीनीकरण की गति बनी रहे.

       संगोष्ठी का समापन उत्साहपूर्ण ढंग से हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने फादर विजय भास्कर, फादर अनिल बेनेट क्रूज़ (क्षेत्रीय सचिव, आस्था निर्माण) और नवज्योति निकेतन के कर्मचारियों के प्रति कार्यक्रम के आयोजन में उनके पूर्ण सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया. 


आलोक कुमार

बुधवार, 9 जुलाई 2025

छह महीने से मजदूरी भुगतान नहीं

छह महीने से मजदूरी भुगतान नहीं


मुजफ्फरपुर. 9 जुलाई की हड़ताल में भाग लेने मुजफ्फरपुर खुदीराम बोस स्मारक से समाहरणालय की ओर  मनरेगा वॉच कार्यकर्ता निकले और चल पड़े हमारी एकता जिंदाबाद का नारा लगाते.कार्यकर्ता बिहार बंद का समर्थन भी किए और आज से मुजफ्फरपुर समाहरणालय में मनरेगा वॉच के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना भी शुरू कर दिये.

     अनिश्चितकालीन धरना देने वाले धरनार्थियों का कहना है कि मुजफ्फरपुर जिले में वर्षा के बहाना बनाकर मनरेगा का काम बंद कर दिया गया है.वहीं मनरेगा कर्मियों को गत छह महीने से मजदूरी भुगतान नहीं किया गया है.मनरेगा वॉच के बैनर तले आज से बकाया मजदूरी सहित सात मांगों को लेकर यह बेमियादी धरना शुरू कर दिया गया है. देखते है इस बार जिला प्रशासन यह धरना कितना दिन चलेगा.

    मालूम हो कि मनरेगा के श्रमिकों की एक दिन की मजदूरी 245 रुपये है. मनरेगा के तहत साल में अधिकतम सौ दिनों का काम एक श्रमिक को दिया जाता है.मनरेगा वॉच कार्यकर्ताओं की मांग है कि मनरेगा श्रमिकों को 600 रुपए दैनिक हो और साल में 200 दिन काम मिले.

     उनका यह भी मांग है कि मनरेगा श्रमिकों से काम लिया जाए.इस जिले में जेसीबी से काम निकलवा रहे हैं.मनरेगा मद की राशि सब फालतू में  जेसीबी वाले हड़प ले जा रहे है.वहीं मनरेगा श्रमिकों को छह माह से मजदूरी भुगतान नहीं किया जा रहा है.


आलोक कुमार


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मंगलवार, 8 जुलाई 2025

शिल्पी नेहा तिर्की का जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने के संबंध में


राँची,जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की को धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनने को लेकर घेरने का प्रयास किया जा रहा है.संगठन के सामाजिक कार्यकर्ता मेधा उरांव, संदीप उरांव, सोमा उरांव, जगन्नाथ भगत, विशु उरांव, राजू उरांव, सनी उरांव टोप्पो एवं अन्य रांची डीसी से शिल्पी का जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं. संगठन के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने श्रीमान् उपायुक्त महोदय, राँची, झारखण्ड को पत्र लिखा है.पत्र का विषय है कि अनुसूचित जनजाति से धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनी श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की का जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने के संबंध में.

1. उपरोक्त विषय के संबंध में कहना है कि भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय का वाद संख्या 13086/2024 सी० सेल्या रानी बनाम विशेष सचिव सह जिला कलेक्टर एवं अन्य के बाद संख्या में स्पष्ट निर्णय दिया है कि ईसाई धर्म किसी भी जाति वर्गीकरण को मान्यता नहीं देता है.सभी ईसाईयों को समान माना जाता है और एक ईसाई और दूसरे प्रकार के ईसाई के बीच कोई अंतर नहीं है. ईसाई धर्म न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में प्रचलित है और ईसाई धर्म कही भी जाति विभाजन को मान्य है ईसाई धर्म के सिद्धांत ईसाई धर्म के मानने वाले व्यक्तियों को जाति किसी भी वर्गीकरण के आधार पर विभाजित या भेदभाव किये जाने के खिलाफ है.सामान्य नियम यह है कि धर्मान्तरण जाति से निष्कासन के रूप में कार्य करता है दूसरे शब्दों में धर्म परिवर्तन करने वालों की कोई जाति नहीं रह जाति है जाति व्यवस्था केवल हिन्दुओं में या सम्भवतः सिख धर्म जैसे हिन्दू धर्म से जुड़े कुछ धर्मों में प्रचलित है साथ ही माननीय न्यायालय ने यहाँ तक कहा है कि जब कोई व्यक्ति राष्ट्रपति आदेश के तहत प्रदान किये गए आरक्षण और अन्य लाभों को प्राप्त कर संविधान के उक्त लाभकारी प्रावधानों का अनुचित लाभ उठाना है हालांकि वह इसका हकदार नहीं है तो वह न केवल समाज के साथ धोखाधड़ी करता है बल्कि संविधान के साथ धोखाधड़ी करता है.श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की एक धर्मान्तरित ईसाई है.

2. संविधान (अनुसूचित जातियों) आदेश 1950 अनुच्छेद 341, खण्ड (1) क्रमांक 2 में इस आदेश के उपबंधों के अध्यधीन यह है कि वे जातियों, मूलवंश या जनजातियां या जातियों को जनजातियों के भाग या उनमें के यूथ जो कि इस आदेश की अनुसूची भाग संबद्ध जहाँ है वहाँ तक की उनके उन सदस्यों का संबंध है जो उन परिक्षेत्रों है जो उस अनुसूची के उन भागों में उनके संबंध में विनिर्दिष्ट है अनुसूचित समझे जाएंगे एवं क्रमांक 3 अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी कोई व्यक्ति जो हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म से भिन्न धर्म मानता है अनुसूचित जाति का सदस्य न समझा जाएगा अर्थात अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का सदस्य न समझा जाएगा.

3. माननीय केंद्रीय कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया है कि जनजाति लोगों को विभिन्न केन्द्रीय अधिनियमों में हिन्दू के रूप में परिभाषित किया है अर्थात आदिवासी हिन्दू ही है.

अतः श्रीमान् से अनुरोध है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय तथा महामहिम राष्ट्रपति के आदेश एवं भारत सरकार के विधि एवं न्याय विभाग के आदेश के आलोक में ईसाई धर्म में धर्मान्तरित श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की (पति श्री सन्नी विल्फ्रेड जेम्स लकड़ा) पिता बंधु तिर्की ग्राम-दही सोत (वनहोरा) ऊपर टोली थाना पंडरा अंचल कार्यालय रातू राँची के द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र सं०-JHCST/2022/187696 दिनांक-02.05.2022 को अविलंब निरस्त करने की कृपा की जाए.

संलग्न

1. माननीय सुप्रीम कोर्ट वाद सं०-13086/2024 की छायाप्रति

2. संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश 1950 की छायाप्रति

3. माननीय केंद्रीय कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल लोकसभा में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर की छायाप्रति

4. अंचल कार्यालय रातू राँची द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र

सं०- JHCST/2022/187696 दिनांक-02.05.2022 की छायाप्रति मिनी विशीच की

(मेघा उराँव) सामाजिक कार्यकर्ता ग्राम सरना आदर्श कॉलोनी पतराटोली, पो०-बालालौंग

आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं संगठन के लोगों के द्वारा जो अनुसूचित जनजाति से धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनी शिल्पी नेहा तिर्की कृषि मंत्री झारखंड) का जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की मांग पत्र उपायुक्त रांची को सौंपा. उपायुक्त रांची से मिलने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एवं संगठन के मेघा उरांव, संदीप उरांव, सोमा उरांव, जगन्नाथ भगत, विशु उरांव, राजू उरांव, सनी उरांव टोप्पो एवं अन्य.

आलोक कुमार


सोमवार, 7 जुलाई 2025

चुनाव आयोग के ताजा विज्ञापन से मतदाता पुनरीक्षण को लेकर साफ दिखी षड्यंत्र

 


*प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने किया सवाल, क्या चुनाव आयोग का विज्ञापन बड़े षड्यंत्र की है आहट?

*वोटर पुनरीक्षण में मांगे जा रहे कागजात, मतदाताओं के साथ धोखा है, अन्याय है और षड्यंत्र है: राजेश राम

*चुनाव आयोग के ताजा विज्ञापन से मतदाता पुनरीक्षण को लेकर साफ दिखी षड्यंत्र: राजेश राम

पटना . बिहार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने चुनाव आयोग के आज के विज्ञापन को लेकर जिसमें कागजातों और तस्वीरों को लेकर सूचना छपी है कि उनकी आवश्यकता मतदाता पुनरीक्षण में नहीं है, को लेकर चुनाव आयोग के द्वारा बड़े षड्यंत्र का आरोप लगाया है.

     संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि मतदाता सूची से संबंधित फॉर्मों पर जारी एक पोस्टर में चुनाव आयोग ने अब कहा है कि निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO) दस्तावेजों के बिना भी सत्यापन पर निर्णय ले सकता है.पोस्टर में कहा गया है कि “यदि आवश्यक दस्तावेज़ और फोटो उपलब्ध नहीं हैं, तो बस नामांकन फॉर्म भरें और उसे बूथ स्तर अधिकारी (BLO) को दें.” इसमें आगे अहम बात यह जोड़ी गई है कि “यदि आप आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, तो चुनाव रजिस्ट्रेशन अधिकारी स्थानीय जांच या अन्य दस्तावेज़ों के आधार पर निर्णय ले सकता है.” इसका अर्थ यह है कि ERO उन लोगों से मिलने मौके पर जाएंगे जिन्होंने दस्तावेज़ जमा नहीं किए हैं. वे यह सुनिश्चित करेंगे कि फॉर्म भरने वाला व्यक्ति 18 वर्ष का है या नहीं, उस क्षेत्र में निवास की अवधि की जानकारी लेंगे, आसपास के लोगों से बात करेंगे और उपलब्ध साक्ष्य व दस्तावेज़ों के आधार पर निर्णय लेंगे.यह विज्ञापन न सिर्फ़ चुनाव आयोग की अकर्मण्यता की पोल खोलता है अपितु बिहार विधान सभा में सत्ता धारी दल की अनैतिक मदद की आशंका भी पैदा करता है.

     हमारे इस संदर्भ में कुछ प्रासंगिक सवाल :-

1. सवाल यह उठता है कि फिर इस पूरी प्रक्रिया की प्रासंगिकता क्या रह गई है ?

2. क्या यह एक नियोजित  षड्यंत्र है कुछ राजनीतिक दलों को लाभ पहुंचाकर लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने का ?

3. अगर अंतिम निर्णय ईआरओ के विवेक पर छोड़ा गया है तो क्या बहुत बड़ी संख्या में भाजपा और जेडीयू की सरकार दबाव बनाकर वोटर लिस्ट में मनमानी नहीं करेगी?

4. क्या हाल ही में बिहार में स्पेशल समरी रिवीजन वोटर लिस्ट का नहीं किया गया है । जिसमें 6 जनवरी 2025 में अंतिम प्रकाशन मतदाता सूची का किया गया है जिसके तहत:-

    1.घर-घर जाकर सर्वेक्षण

    2.भौतिक स्थल पर जाकर सत्यापन

    3 . दावों और आपत्तियों की सूची का प्रदर्शन और साझा करना

    4 . प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची को राजनीतिक दलों के साथ साझा करना.

जब यह पूरी प्रक्रिया जनवरी में ही की जा चुकी है तो फिर वही प्रक्रिया चुनावों के ठीक पहले फिर करना संदेह पैदा करने वाली है .चुनाव आयोग को तुरंत इस निर्णय को वापस लेना चाहिए, क्योंकि जो खबर इस प्रक्रिया को लेकर बिहार के विधानसभा क्षेत्रों से आ रही है कि लोग ख़ुद किसी भी प्रकार का फॉर्म भरने में समर्थ नहीं है वो चिंता बढ़ाने वाली है .

    संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के अलावे विधान परिषद में दल के नेता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा, नेशनल मीडिया पैनलिस्ट पूर्व विधान पार्षद प्रेम चंद मिश्र, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, सोशल मीडिया विभाग के चेयरमैन सौरभ सिंहा, असित नाथ तिवारी, मंजीत आनंद साहू, प्रो विजय कुमार सहित अन्य नेतागण मौजूद रहें.


आलोक कुमार

रविवार, 6 जुलाई 2025

आधुनिक भारत के निर्माण में जगजीवन राम का भी बड़ा योगदान


पटना. अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की 39 वीं पुण्यतिथि आज सदाकत आश्रम में  मनायी गयी.इस अवसर पर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश राम  ने जगजीवन राम के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में जगजीवन राम का भी बड़ा योगदान था. पंडित जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में जगजीवन बाबू सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्री थे.

       उन्होंने कहा कि बाबू जगजीवन राम देश के रक्षा मंत्री थे उस समय पाकिस्तान के 91 हजार सैनिकों ने भारत के सैनिक कमान्डर के समक्ष आत्म समर्पण किया था यह देश नहीं बल्कि विश्व के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना थी.राजेश राम  ने कहा कि स्व0 जगजीवन राम एक गरीब परिवार में जन्म लेकर बड़े संघर्ष का सामना किया तथा तत्कालीन व्यवस्था में अछूतोद्धार के लिये सामाजिक व्यवस्था में  परिवर्तन लाने की लड़ाई लड़ी. आज कृतज्ञ राष्ट्र बाबू जगजीवन राम के योगदान को स्मरण कर उनके चरणों में शत-शत करता है. इसके पूर्व स्व0 जगजीवन राम के चित्र पर माल्यार्पण किया गया.

   इस अवसर पर कांग्रेस विधान परिषद दल के नेता डा0 मदन मोहन झा, पूर्व मंत्री संजीव प्रसाद टोनी, कृपानाथ पाठक, प्रेमचन्द्र मिश्रा,, नरेन्द्र कुमार, मोती लाल शर्मा, राजेश राठौड़, ब्रजेश प्रसाद मुनन, कपिलदेव प्रसाद यादव, अजय कुमार चौधरी ,असितनाथ तिवारी, सौरभ सिन्हा, मुन्ना शाही, डा0 अजय कुमार सिंह, चन्द्र प्रकाश सिंह, राजेश कुमार सिन्हा, शकीलुर रहमान मंजीत आनन्द साहू, अरविन्द लाल रजक, मनोज मेहता, राजकिशोर सिंह, संजय कुमार पाण्डेय, मिथिलेश शर्मा मधुकर, प्रो0 विजय कुमार, वैद्यनाथ शर्मा, सत्येन्द्र कुमार सिंह, सुनील कुमार सिंह,, ललन यादव, मृणाल अनामय, वसी अख्तर, संतोष कुमार श्रीवास्तव, विश्वनाथ बैठा, सुजीत कसेरा, रोहित कुमार पासवान, मनीष कुमार, अश्विनी कुमार, कशिश यादव, शशि पंडित, साधना रजक, मोनी देवी, सिद्धार्थ क्षत्रिय, नदीम अंसारी, सम्स तवरेज,सहित बड़ी संख्या में उपस्थित  कांग्रेसजनों  ने भी बाबू जगजीवन राम के चित्र पर माल्यार्पण किया.


आलोक कुमार


शनिवार, 5 जुलाई 2025

ईपीएस 95 के तहत न्यूनतम 1000 पेंशन में 7500 बढ़ोतरी करने की मांग


 मजबूरी में 3 अगस्त को EPS-95 एजिटेशन कमिटी की बैठक दिल्ली में होगी.उसके बाद 4 और 5 अगस्त को जंतर मंतर पर धरना और प्रदर्शन किया जाएगा, बापू के अस्त्र सत्याग्रह में भाग लेने लाखों की संख्या में बुजुर्ग दिल्ली आ रह रहे हैं......

नई दिल्ली. EPS-95 एजिटेशन कमिटी के अध्यक्ष अशोक रावत ने कहा है कि केंद्र सरकार के द्वारा लगातार आश्वासन मिल रहा है कि ईपीएस 95 के तहत न्यूनतम 1000 पेंशन में 7500 बढ़ोतरी कर दिया जाएगा.उन्होंने कहा कि एक दशक से केवल आश्वासन ही मिल रहा है.

   आगे कहा कि संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त, 2025 तक बुलाया गया है.इस दौरान माननीय सांसद लोकसभा और राज्यसभा में सरकारी की वादाखिलाफी के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे.वहीं EPS-95 एजिटेशन कमिटी की पैनी नजर मानसून सत्र पर रहेगा.यदि 31 जुलाई तक 7500 न्यूनतम पेंशन,महंगाई भत्ता,पति और पत्नी की स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती है.तो मजबूरी में 3 अगस्त को EPS-95 एजिटेशन कमिटी की बैठक दिल्ली में होगी.उसके बाद 4 और 5 अगस्त को जंतर मंतर पर धरना और प्रदर्शन किया जाएगा, बापू के अस्त्र सत्याग्रह में भाग लेने लाखों की संख्या में बुजुर्ग दिल्ली आ रह रहे हैं.उनकी व्यवस्था एजिटेशन कमिटी की ओर से की जाएगी.समिति के अध्यक्ष अशोक रावत ने कहा कि बुलढाना में साढ़े छह सालों से सत्याग्रह किया जा रहा है.तब भी केंद्र सरकार पर असर नहीं पड़ रहा है.

                पिछले 11 वर्षों से EPS-95 के तहत पेंशनर्स न्यूनतम पेंशन को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. वर्तमान में न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रति माह है, जो आज के समय में जीवन यापन के लिए पर्याप्त नहीं है. इस संदर्भ में, EPS-95 एजिटेशन कमिटी ने वित्त मंत्री से मुलाकात की और न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 प्रति माह करने की मांग की है.इसके अतिरिक्त, उन्होंने महंगाई भत्ते (DA) का समावेश करने और रिटायर्ड कर्मचारियों तथा उनके जीवन साथियों के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधाओं की भी मांग की है.वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत 78 लाख से अधिक पेंशनर्स लाभ प्राप्त कर रहे हैं.

आलोक कुमार


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गुरुवार, 3 जुलाई 2025

स्वतंत्रता सेनानी अब्दुल कय्यूम अंसारी की 121वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई

 


प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने मनाई स्वतंत्रता सेनानी अब्दुल कय्यूम अंसारी की 121वीं जयंती


पटना . बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने आज अपने मुख्यालय सदाकत आश्रम में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व मंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी अब्दुल कय्यूम अंसारी की 121वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई.

     इस अवसर पर, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश राम ने अब्दुल कय्यूम अंसारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे उच्च कोटि के स्वतंत्रता सेनानी थे। राजेश राम ने उन्हें गरीबों का सच्चा मसीहा बताते हुए कहा कि मंत्री के रूप में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में रहते हुए गरीबों के बेहतर इलाज के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की, जिसने असंख्य लोगों को लाभ मिला. इसके साथ ही, उन्होंने राज्य के बुनकरों के उत्थान और विकास के लिए भी कई क्रांतिकारी कार्यक्रम चलाए, जिससे इस वर्ग के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त होने का अवसर मिला. प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल को याद करते हुए राजेश राम ने कहा कि उस दौरान कार्यकर्ताओं का सम्मान सर्वोपरि था और उनके मार्गदर्शन में पार्टी ने नई ऊंचाइयों को छुआ.कार्यक्रम की शुरुआत अंसारी साहब के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपनी पुष्पांजलि अर्पित की.

            स्व. अंसारी साहब को पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, पूर्व विधायक नरेंद्र कुमार, मोती लाल शर्मा, जमाल अहमद भल्लू, स्नेहाशीष वर्धन पांडेय ,सौरभ कुमार सिन्हा, उमैर खान, शिशिर कौंडिल्य,नागेन्द्र कुमार विकल, अश्विनी कुमार, बैजनाथ शर्मा, सकिलुर रहमान , असफर अहमद, अरविन्द लाल रजक शाशि कान्त तिवारी, राजेन्द्र चौधरी,राजकिशोर सिंह मो.शाहनवाज उमर सैफुल्लाह खान, वसी अहमद, , यशवंत कुमार चमन, वसीम अहमद, , कन्हैया कुमार, रंजीत यादव, विश्वनाथ बैठा, , मिहिर झा, नदीम अंसारी, रवि गोल्डन, विमलेश तिवारी,. रवि कुमार, मो. तम्मना, अबुल कलाम जौहरी, रजनीश कुमार सिंह, संजय कुमार पासवान, पवन कुमार यादव, इश्तियाक आजम, नीरज कुमार, भूषण सिंह, उदय चन्द्र झा, अमजद अली आदि प्रमुख हैं.

आलोक  कुमार 


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बुधवार, 2 जुलाई 2025

विश्व की शिक्षा की राजधानी बिहार को भाजपा -जेडीयू ने बदहाल कर दिया: दिग्विजय सिंह

 

विश्व की शिक्षा की राजधानी बिहार को भाजपा -जेडीयू ने बदहाल कर दिया: दिग्विजय सिंह

युवाओं के भविष्य की लगाई बोली, पेपर माफिया की सत्ता से हमजोली!: दिग्विजय सिंह

भर्ती और प्रवेश परीक्षा का मोल लगाया, हर पेपर लीक कराया!: दिग्विजय सिंह

 पटना. बिहार की शिक्षा का परचम पूरे विश्व में लहराया था. नालंदा विश्वविद्यालय हो या विक्रमशिला विश्वविद्यालय तिब्बत, चीन, जापान, कोरिया, सुमित्रा, मंगोलिया आदि देशों से विद्यार्थी यहाँ शिक्षा लेने आते थे. चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuan Zang) और इत्सिंग (Yixing) ने इसके वैभव की बहुत प्रशंसा करते नहीं थकते थे. आज उसी बिहार को भाजपा और जेडीयू की सरकार ने युवाओं के भविष्य बेचने का केंद्र बना दिया है.भर्ती प्रवेश परीक्षा के घोटाले, जर्जर स्कूल भवन और युवाओं का पलायन ये बिहार की शिक्षा का भाग्य बन गया है -

         आज मोदी सरकार ख़ुद कह रही है की बिहार को बर्बाद भाजपा जेडीयू ने किया है ये बातें बिहार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कही .

       राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने क्रमवार आंकड़े पेश करके विस्तार से निम्नांकित बातों को प्रमुखता से संवाददाता सम्मेलन में रखी .उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार की स्कूली शिक्षा की रिपोर्ट UDISE+ 2023–24 का बिहार के लिए चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों की बदहाली और ड्रॉपआउट रेट देश में सबसे ज़्यादा, न स्कूलों में बिजली न शिक्षक , न कंप्यूटर न लाइब्रेरी मौजूद है-

      यह प्रदर्शन पूरे देश में सबसे खराब है- बिजली की सुविधा से वंचित स्कूल पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 78,120 में से 16,529 स्कूलों में अब भी बिजली नहीं है.कंप्यूटर रहित स्कूल और कुल 78,120 शासकीय स्कूलों में से मात्र 5,057 स्कूलों में कंप्यूटर हैं, अर्थात् मात्र 6.5% स्कूलों में यह सुविधा मौजूद है .

       बिहार में 2,637 स्कूल ऐसे हैं जहाँ सिर्फ एक शिक्षक है और इन स्कूलों में 2.91 लाख छात्र नामांकित हैं. वहीँ राज्य में 117 स्कूल ऐसे हैं जहाँ एक भी छात्र नहीं पढ़ता है, फिर भी इन स्कूलों में 544 शिक्षक तैनात हैं. स्कूलों से ⁠ड्रॉप-आउट रेट भी सबसे अधिक बिहार का ही है जिसमें प्राइमरी (1–5): 8.9%, अपर प्राइमरी (6–8): 25.9%, सेकेंडरी (9–10): 25.63% ड्रॉप-आउट रेट है.

      बिहार में कुल स्कूल और सरकारी हिस्सेदारी राज्य में कुल स्कूल पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 94,686, कुल स्कूल में सरकारी स्कूल 78,120 हैं,  यानी लगभग 82% स्कूल सरकारी हैं. 2025-26 के बजट में बिहार सरकार ने 60,954 करोड़ रुपए शिक्षा पर खर्च करने का दावा किया, मगर सच्चाई यह है कि यह पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है.भाजपा जेडीयू सरकार ने उच्च शिक्षा में भी बिहार के भविष्य को बर्बाद कर दिया. AISHE 2021–22 (All India Survey on Higher Education) की हालिया रिपोर्ट ने बिहार में उच्च शिक्षा की दुर्दशा को फिर से उजागर कर दिया है.

     GER (Gross Enrolment Ratio) यानी कुल GER: 17.1% अर्थात, राज्य की 18–23 वर्ष की अनुमानित जनसंख्या 1.36 करोड़ है, लेकिन इनमें से केवल 23.33 लाख छात्र अंडर ग्रेजुएट में पढ़ रहे है .अर्थात 1.13 करोड़ युवा उच्च शिक्षा से वंचित है. देश में सबसे कम प्रति लाख जनसंख्या पर उच्च शैक्षणिक संस्थान बिहार में हैं जिसमें कुल 37 विश्वविद्यालय, 1092 महाविद्यालय, 315 स्टैंड-अलोन संस्थान के साथ कुल उच्च शिक्षण संस्थान 1,387 हैं लेकिन आबादी की तुलना में ये संख्या बेहद कम है.प्रति 1 लाख आबादी पर सिर्फ़ 7 कॉलेज हैं — जबकि राष्ट्रीय औसत 30 कॉलेज प्रति लाख है. यह पूरे भारत में सबसे कम है.

     पेपर लीक पर बोलते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि युवाओं के भविष्य की लगाई बोली, पेपर माफिया की सत्ता से हमजोली! बिहार में भाजपा-जेडीयू की सत्ता की सरपरस्ती में सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में घोटालों का गोरख धंधा चल रहा है। पिछले सात वर्षों में प्रदेश में 10 से अधिक परीक्षा पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं। नीचे हम पिछले वर्षों में सामने आए प्रमुख घोटालों की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश कर रहे हैं:


 2017: सिपाही भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया था, जिसके कारण परीक्षा को रद्द करना पड़ा.इस मामले में  21 एफआईआर दर्ज की गयी. मगर जांच अभी भी जारी है.

2019 और 2021: इन वर्षों में बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा के पेपर लीक हुए-

2021-22: बिहार उत्पाद विभाग की परीक्षा का पेपर भी लीक हो गया.ईओयू द्वारा जांच जारी है .2022: बहुचर्चित बीपीएससी 67वीं प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया.इस मामले में 21 एफआईआर दर्ज की गयी मगर जाँच अभी जारी है.

2023: फरवरी 2023 में सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हो गया, जिसके चलते परीक्षा रद्द करनी पड़ी. ईओयू द्वारा BPSC के केंद्राधीक्षक को गिरफ्तार किया गया.

2023: अमीन भर्ती परीक्षा का प्रश्न पत्र सोशल मीडिया के जरिए वायरल हो गया था.इस मामले में पटना समेत कई जिलों में एफआईआर दर्ज की गयी.

2023: देशभर में बहुचर्चित NEET परीक्षा का पेपर भी लीक हो गया. पटना से पेपर आउट होने की पुष्टि .यह मामला पूरे देश में सुर्खियों में रहा.

2024: बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई.

2024: राज्य स्वास्थ्य समिति की सीएचओ भर्ती परीक्षा में भी प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले ही व्हाट्सऐप के जरिए लीक हो गया.

    भर्ती और प्रवेश परीक्षा का मोल लगाया, हर पेपर लीक कराया.बिहार में शिक्षा की गौरवशाली और वैभवशाली विरासत को कलंकित करने वाले “पेपर माफिया” का नेटवर्क लगातार सक्रिय होता जा रहा है.एक चौंकाने वाली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं के लिए पेपर लीक करने और उसमें मदद दिलाने के बदले में प्रति छात्र भारी-भरकम रकम वसूली जाती है.इन माफियाओं का कारोबार हजारों करोड़ का है .

        नीचे दी गई सूची में विभिन्न परीक्षाओं के लिए पेपर माफिया द्वारा ली जाने वाली दरों का विवरण प्रस्तुत है:

NEET PG ₹70-80 लाख,NEET UG, ₹30-40 लाख, बैंकिंग परीक्षा (Bank PO) ₹15-20 लाख, एसएससी (SSC) ₹15-20 लाख, साक्षात्कार सहायक ₹25-30 लाख, पुलिस SI ₹25 लाख, पुलिस सिपाही ₹10-15 लाख ,पटवारी ₹10-15 लाख, टेट/रीट ₹10 लाख, अन्य ₹10 लाख.


       चुनाव आयोग के द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सत्यापन पर बोलते हुए राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि बिहार में हो रहे वोटर लिस्ट पुनरीक्षण कार्य भाजपा के निर्देशन पर चुनाव आयोग की मनमानी है जिसमें केवल 28 दिनों में 11 दस्तावेजों के साथ मतदाता सत्यापन का जो दावा चुनाव आयोग कर रही है वो सीधे तौर पर गरीब, आदिवासी, युवा, बाढ़ प्रभावित जनता और पलायन का दंश झेल रहे मतदाताओं को आगामी बिहार विधान सभा चुनावों में मतदान से रोकने की कवायद है.

           संवाददाता सम्मेलन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व विधान परिषद् में कांग्रेस के नेता डॉ मदन मोहन झा, राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दूबे, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष अशोक राम, प्रेमचंद मिश्र, पूर्व मंत्री अवधेश कुमार सिंह, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, पूर्व विधायक प्रमोद सिंह, ब्रजेश प्रसाद मुनन, डॉ स्नेहाशीष वर्धन पाण्डेय, सौरभ सिन्हा, असित नाथ तिवारी, ज्ञान रंजन, रीता सिंह सहित अन्य नेतागण मौजूद रहें.


आलोक कुमार


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मंगलवार, 1 जुलाई 2025

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नवनियुक्त कोएड जुटर एलियास फ्रैंक हैं

 


पोप लियो 14वें ने धर्माध्यक्ष एलियस फ्रैंक को कलकत्ता महाधर्मप्रांत का नया सहायक महाधर्माध्यक्ष नियुक्त किया 

 नवनियुक्त कोएड जुटर एलियास फ्रैंक हैं

परमधर्मपीठीय उर्बानिया विश्वविद्यालय में कैनन लॉ में डॉक्टरेट की पढ़ाई की है

आसनसोल .यह बहुत ही कम लोगों के साथ होता है.कलकत्ता महाधर्मप्रांत विभक्त होने पर आसनसोल धर्मप्रांत में फादर एलियस फ्रैंक शामिल हो गये.फादर एलियस फ्रैंक को आसनसोल धर्मप्रांत के दूसरे धर्मप्रांत बनने का मौका मिला.अब कलकत्ता महाधर्मप्रांत के नये सहायक महाधर्माध्यक्ष कोएड जुटर नियुक्त हो गये.

    कलकत्ता महाधर्मप्रांत में 23 अप्रैल 1993 कांे फादर एलियस फ्रैंक का पुरोहिताभिषेक हुआ. इस बीच कलकत्ता महाधर्मप्रांत को विभक्त कर 1997 में आसनसोल धर्मप्रांत बनाया, तब वे इस नए धर्मप्रांत में शामिल हो गए.यह संयोग रहा कि वे असनसोल धर्मप्रांत का दूसरा धर्माध्यक्ष नियुक्त कर दिये गए. उनको 2023 में संत पापा फ्राँसिस ने धर्माध्यक्ष नियुक्त किये. अब वे कलकत्ता महाधर्मप्रांत में आ गये. वे केवल आए ही नहीं बल्कि कलकत्ता महाधर्मप्रांत का नया सहायक महाधर्माध्यक्ष नियुक्त कर दिए गये.पोप लियो 14वें ने 28 जून 2025 को कलकत्ता महाधर्मप्रांत का नया सहायक महाधर्माध्यक्ष नियुक्त कर दिये हैं.

    नवनियुक्त कलकता महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष के कोएड जुटर एलियास फ्रैंक का जन्म 15 अगस्त 1962 को मैंगलोर के बंटवाल धर्मप्रांत में हुआ था.बारासात में संत जॉन वियानी मेजर सेमिनरी में पढ़ाई के बाद, उन्होंने बैरकपुर के मॉर्निंग स्टार रीजनल सेमिनरी में दर्शनशास्त्र और रोम के परमधर्मपीठीय उर्बानिया विश्वविद्यालय में ईशशास्त्र का अध्ययन किया.23 अप्रैल 1993 को कलकत्ता महाधर्मप्रांत में उनका पुरोहिताभिषेक हुआ था.1997 में जब आसनसोल धर्मप्रांत  बना, तो वे इस नए धर्मप्रांत में शामिल हुए.

    अभिषेक के बाद सबसे पहले उन्होंने बर्दवान के सेक्रेड हार्ट पल्ली में सहायक पल्ली पुरोहित के रूप में कार्य किया (1993-1995 और 1996-1999) और बसिंडा के क्रिस्टो ज्योति पल्ली के पल्ली प्रशासक (1995-1996) की भूमिकाएँ निभाईं.उन्होंने कैनन लॉ में लाइसेंसिएट (1999-2001) और रोम के परमधर्मपीठीय उर्बानिया विश्वविद्यालय में न्यायशास्त्र में डिप्लोमा के लिए अध्ययन किया। दुर्गापुर में येसु की छोटी संत तेरेसा पल्ली के पल्ली प्रशासक (2002-2003) के रूप में सेवा करने के बाद उन्होंने परमधर्मपीठीय उर्बानिया विश्वविद्यालय (2003-2004) में कैनन लॉ में डॉक्टरेट की पढ़ाई की. उसके बाद बर्दवान में सेक्रेड हार्ट पल्ली के पल्ली पुरोहित और कलकत्ता के अंतर-धर्मप्रांतीय ट्रिब्यूनल में न्यायाधीश (2005-2006) और रोम के अलफोंसियानुम अकादमी में अतिथि प्रोफेसर (2020 से) रहे. उन्होंने दिव्य उपासना और संस्कारों के अनुशासन के लिए गठित विभाग के सलाहकार, विश्वास के सिद्धांत के लिए विभाग में विवाह मामलों के आयुक्त और रोम भिखारियेट के न्यायालय में बाहरी न्यायाधीश के रूप में भी काम किया है.


आलोक कुमार


कलकत्ता आर्चडायसिस के आर्चबिशप थॉमस डिसूजा हैं


 वाटिकन के नियमानुसार कलकत्ता आर्चडायसिस के आर्चबिशप थॉमस डिसूजा पद त्याग करेंगे

कलकत्ता. कलकत्ता आर्चडायसिस के आर्चबिशप थॉमस डिसूजा हैं.उनका जन्म तिथि 26 अगस्त, 1950 है.वाटिकन के नियम के अनुसार 75 वर्ष होने पर पद मुक्त हो जाना है.इसके आलोक में आर्चबिशप थॉमस डिसूजा ने पोप लियो 14 वें के पास पद मुक्त होने के लिए पत्र प्रेषित कर दिया है.जिसे बहुत जल्द ही स्वीकार कर लिया जाएगा.आग्रह स्वीकार होते ही आर्चबिशप थॉमस डिसूजा एमेरिटस हो जाएंगे.एमेरिटस एक सम्मानित शब्द है.जो विशिष्ट पद धारकों को दिया जाता है.

कलकत्ता आर्चडायसिस के आर्चबिशप थॉमस डिसूजा का पुरोहिताभिषेक 16 अप्रैल, 1977 को हुआ था. वे बागडोगरा, पश्चिम बंगाल, भारत के बिशप 14 जून, 1997 को नियुक्त हुए थे. उनका बिशप अभिषेक 25 जनवरी, 1998 को हुआ.उसके बाद कलकत्ता आर्चडायसिस के कोएड जुटर 12 मार्च, 2011 को मनोनीत हुए. मात्र 11 माह के बाद थॉमस डिसूजा कलकत्ता के आर्चबिशप 23 फरवरी, 2012 नियुक्त किया गया.इस पद पर 13 साल से हैं.

    एमेरिटस एक शब्द है जिसका उपयोग उन लोगों में किया जाता है जो किसी दिए गए संगठन में अपने कार्यों को समाप्त करने के बाद भी कुछ विशेष विशेषाधिकार प्राप्त करते हैं जो उनकी स्थिति के पूर्ण कार्यों में आनंद ले सकते हैं.सामान्य तौर पर, जिन लोगों को किसी संस्थान में एमेरिटस की उपाधि से सम्मानित किया जाता है, वे एक उत्कृष्ट पेशेवर करियर का प्रतिनिधित्व करते हैं और ज्ञान और सलाह के गढ़ का प्रतिनिधित्व करते हैं, इस बात पर जोर देना महत्वपूर्ण है कि इस प्रकार के शीर्षक आम तौर पर संगठनों में दिए जाते हैं वे एक विशिष्ट सिद्धांत जैसे कि ईसाई चर्च, सरकारी प्रशासनिक प्रणाली, कानून फर्म, आदि को आधार बनाते हैं.

आलोक कुमार


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