दुर्ग.एक बार फिर दक्षिणपंथियों के निशाने पर ईसाई समुदाय के नन और लोग आ गए हैं. बता दें कि कुछ दक्षिणपंथी समूहों द्वारा ईसाई समुदाय, विशेष रूप से नन और अन्य सदस्यों को निशाना बनाते हैं. इस बार दुर्ग में कथित अंजाम देने में सफल हो गए.ये घटनाएं धार्मिक और राजनीतिक तनावों को दर्शाती हैं, जहां दक्षिणपंथी विचारधाराएं अक्सर ईसाई धर्म के साथ जुड़ जाती हैं और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देती हैं.
दुर्ग रेलवे स्टेशन से आगरा जाने की तैयारी में दो नन सहित एक युवक को बजरंग दल के लोगों ने शुक्रवार की सुबह घेर लिया. दोनों नन के साथ तीन लड़कियां भी थीं, जो नारायणपुर एवं ओरछा क्षेत्र की है.बजरंग दल के नेताओं ने आरोप लगाया कि तीनों लड़कियों का मानव तस्करी कर मतांतरण के लिए ले जाने की तैयारी थी.दुर्ग रेलवे स्टेशन पर घंटों गहमागहमी के बाद जीआरपी ने दोनों नन प्रीति मेरी, वंदना फ्रांसिस एवं युवक सुकमन मंडावी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 के तहत मामला दर्ज कर लिया है.लड़कियों को फिलहाल सखी सेंटर ले जाया जा रहा है.
इस संदर्भ में भारतीय कैथोलिक बिशप्स सम्मेलन (सीबीसीआई) ने दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हाल ही में दो कैथोलिक धार्मिक महिलाओं की गिरफ्तारी और कथित शारीरिक हमले की कड़ी निंदा की है.सीबीसीआई ने ननों के उत्पीड़न की निंदा की, सरकार से तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया है.
विस्तार से भारतीय कैथोलिक बिशप्स सम्मेलन (सीबीसीआई) के प्रवक्ता ने बताया कि दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हाल ही में दो कैथोलिक धार्मिक महिलाओं की गिरफ्तारी और कथित शारीरिक हमले की कड़ी निंदा की है और इसे देश भर में ननों को निशाना बनाकर उत्पीड़न, झूठे आरोपों और मनगढ़ंत मामलों की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति का हिस्सा बताया है.
सीबीसीआई के अनुसार, ननों के साथ आई लड़कियों के माता-पिता के लिखित सहमति पत्र मौजूद होने के बावजूद यह घटना घटी.सभी लड़कियाँ कानूनी रूप से वयस्क हैं, जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है.सम्मेलन ने उन रिपोर्टों पर विशेष रूप से चिंता व्यक्त की जिनमें कहा गया था कि घटना के दौरान ननों के साथ शारीरिक हमला किया गया था.
सीबीसीआई ने चिंता जताई है कि ईसाई धार्मिक महिलाओं पर असामाजिक तत्वों द्वारा नज़र रखी जा रही है, जो उन्हें रेलवे स्टेशनों पर घेर लेते हैं, भीड़ को उकसाते हैं और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं.सम्मेलन ने कहा कि ये कार्रवाइयाँ न केवल इन महिलाओं की गरिमा और शील के लिए, बल्कि उनके जीवन के लिए भी गंभीर खतरा हैं.
उत्पीड़न की इन लगातार घटनाओं को "संविधान का गंभीर उल्लंघन" बताते हुए, सीबीसीआई ने राज्य सरकारों से सभी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया है.इसके अतिरिक्त, सम्मेलन ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है.
कैथोलिक चर्च ने इस मुद्दे को सभी उपयुक्त मंचों पर उठाने और धार्मिक ननों और पादरियों की गरिमा का हनन करने, धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करने या अल्पसंख्यक समुदायों के विरुद्ध शत्रुता फैलाने के किसी भी प्रयास के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े होने का संकल्प लिया है.
न्याय और अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए, सीबीसीआई ने अधिकारियों से धार्मिक महिलाओं के अधिकारों और गरिमा को बनाए रखने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया.संगठन ने स्थिति पर कड़ी नज़र रखने और भारत में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का संकल्प लिया है.

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