बदलते भारत में डिजिटल जागरूकता की ताकत: जानकारी ही नई शक्ति क्यों बन रही है
भारत तेज़ी से डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है.सरकारी सेवाओं से लेकर बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक — लगभग हर क्षेत्र अब इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर होता जा रहा है. ऐसे समय में एक बात पहले से अधिक स्पष्ट होकर सामने आई है कि डिजिटल जागरूकता ही नई सामाजिक और आर्थिक शक्ति बन चुकी है.आज जिसके पास सही जानकारी है, वही अवसरों का बेहतर उपयोग कर पा रहा है.और जिसके पास जानकारी नहीं है, वह पीछे छूटने का जोखिम उठा रहा है.
डिजिटल भारत और आम नागरिक की भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल सेवाओं का विस्तार अभूतपूर्व रहा है.ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, सरकारी पोर्टल, डिजिटल दस्तावेज़ और ई-गवर्नेंस सेवाओं ने आम नागरिक के जीवन को आसान बनाया है.लेकिन सुविधा के साथ-साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी है.अब नागरिकों को केवल सेवाओं का उपयोग करना ही नहीं, बल्कि सुरक्षित और सही तरीके से उपयोग करना भी सीखना पड़ रहा है.
जानकारी की कमी बन सकती है जोखिम
डिजिटल दुनिया में सबसे बड़ा खतरा है — अधूरी या गलत जानकारी.फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी, गलत लिंक, नकली ऐप और भ्रामक संदेश हर दिन नए रूप में सामने आ रहे हैं.कई लोग केवल इसलिए नुकसान झेलते हैं क्योंकि:वे किसी लिंक की सत्यता जांचे बिना क्लिक कर देते हैं.बैंक या ओटीपी से जुड़ी जानकारी साझा कर देते हैं.आधिकारिक वेबसाइट और नकली वेबसाइट में अंतर नहीं समझ पाते.इसलिए आज डिजिटल साक्षरता केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा का प्रश्न बन चुकी है.
युवाओं के लिए अवसरों का नया दौर
डिजिटल जागरूकता ने युवाओं के लिए अभूतपूर्व अवसर भी खोले हैं.ऑनलाइन शिक्षा, फ्री कोर्स, डिजिटल स्किल, फ्रीलांसिंग, कंटेंट क्रिएशन और स्टार्टअप जैसे विकल्प अब छोटे शहरों और गांवों तक पहुँच चुके हैं.अब करियर केवल पारंपरिक नौकरियों तक सीमित नहीं रहा.सही जानकारी और कौशल के साथ कोई भी व्यक्ति डिजिटल माध्यम से अपनी पहचान बना सकता है.
डिजिटल अंतर को कम करना जरूरी
हालाँकि प्रगति के बावजूद एक बड़ी चुनौती अभी भी मौजूद है —डिजिटल डिवाइड, यानी जानकारी और संसाधनों की असमानता.ग्रामीण क्षेत्रों, बुजुर्गों और सीमित शिक्षा वाले लोगों तक डिजिटल जागरूकता पूरी तरह नहीं पहुँच पाई है.यदि इस अंतर को कम नहीं किया गया,तो विकास का लाभ सभी तक समान रूप से नहीं पहुँच पाएगा.
जिम्मेदार मीडिया और सूचना की विश्वसनीयता
डिजिटल युग में सूचना की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.ऐसे समय में जिम्मेदार मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वे:सही और सत्यापित जानकारी दें.भ्रामक खबरों से दूर रहें.जनहित से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दें.विश्वसनीय जानकारी ही डिजिटल समाज की नींव मजबूत करती है.जागरूक नागरिक ही मजबूत समाज की पहचान.जब नागरिक जागरूक होते हैं,तो वे केवल अपने अधिकारों की रक्षा नहीं करते,बल्कि समाज को भी सुरक्षित और जिम्मेदार बनाते हैं.
डिजिटल जागरूकता:
आर्थिक अवसर बढ़ाती है.ठगी से बचाती है.सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाती है.लोकतांत्रिक भागीदारी मजबूत करती है.इसलिए इसे केवल तकनीकी विषय नहीं,बल्कि सामाजिक आवश्यकता के रूप में देखना चाहिए.
निष्कर्ष
भारत का भविष्य डिजिटल है, लेकिन यह भविष्य तभी सुरक्षित और समावेशी होगा.जब हर नागरिक डिजिटल रूप से जागरूक होगा.सही जानकारी, सुरक्षित व्यवहार और जिम्मेदार उपयोग —यही वह तीन आधार हैं जो डिजिटल भारत को वास्तव में मजबूत बना सकते हैं.जानकारी ही नई शक्ति है, और जागरूकता ही उसका सबसे बड़ा संरक्षण.
आलोक कुमार
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