मंगलवार, 28 जून 2022

विरोध सभा में माले के कई विधायक व नागरिक समाज के लोग शामिल रहे

 

* मोदी के ‘नए भारत’ में न्याय मांगना सबसे बड़ा अपराध

* मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और आरबी श्रीकुमार की गिरफ्तारी के खिलाफ पटना में प्रतिवाद

* अल्ट न्यूज के सह संस्थापक मो. जुबैर की गिरफ्तारी का भी किया विरोध

पटना. 2002 गुजरात जनसंहार के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कई अभियान चला चुके तीस्ता सीतलवाड़ व आरबी श्रीकुमार, तथा 2018 में किए गए एक ट्वीट के लिए अल्ट न्यूज के सह संस्थापक मो. जुबैर की दिल्ली पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी के खिलाफ आज पटना में एआइपीएफ, माले व इंसाफ मंच के बैनर से विरोध कार्यक्रम का आयोजन किया गया तथा उनकी अविलंब रिहाई की मांग की गई. बुद्ध स्मृति पार्क के पास आयोजित विरोध सभा में माले के कई विधायक व नागरिक समाज के लोग शामिल रहे.

कार्यक्रम में मुख्य रूप से एआइपीएफ से जुड़े व शहर के चर्चित शिक्षाविद गालिब, अभय पांडेय, अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह, माले विधायक दल के नेता महबूब आलम, इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व विधायक मनोज मंजिल, अरवल से पार्टी विधायक महानंद सिंह, ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, राज्य सचिव शशि यादव, पटना नगर के सचिव अभ्युदय, पार्टी के वरिष्ठ नेता राजाराम, इंसाफ मंच के नसीम अंसारी, आफशा जबीं, आसमां खां, कोरस की समता राय आदि शामिल थे. जबकि कार्यक्रम का संचालन एआइपीएफ के संयोजक कमलेश शर्मा ने किया.

नेताओं ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के तथाकथित नए भारत में न्याय मांगना सबसे बड़ा अपराध है. मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलबाड़ और आर.बी. श्रीकुमार के बाद अब अल्ट न्यूज से जुड़े मो. जुबैर को गिरफ्तार कर लिया गया है. नफरत, झूठ व अन्याय के इस दौर में अब प्यार, सच और न्याय की मांग करना सबसे बड़े अपराध बन गए हैं. जहां पूरे देश में नफरत व झूठ  को पूरा छूट हासिल है, वहीं सच और न्याय को जेल की सलाखों में डाल दिया जा रहा है. 

आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जिन जजों ने गुजरात जनसंहार में नरेन्द्र मोदी को निचली अदालत द्वारा मिली क्लीन चिट के खिलाफ तीस्ता सीतलवाड़ की अपील को खारिज करते हुए कहा कि ‘‘न्याय के हिमायती’’ लोगों ने जकिया जाफरी के दर्द का फायदा उठाया और उसके महज 24 घंटे के अंदर ही मुकदमा दायर करके तीस्ता सीतलबाड व आर बी श्रीकुमार की गिरफ्तारी हुई, उन जजों की बहाली प्रक्रिया देखने लायक है. इस बहाली प्रक्रिया से यह स्पष्ट हो जाता है कि सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था आज प्रधानमंत्री मोदी के पूरे दबाव में काम कर रही है. तीन जजों में दिनेश महेश्वरी के लिए उनसे 32 वरिष्ठ जजों को साइडलाइन किया गया. अन्य दोनों जजों की नियुक्ति प्रक्रिया भी नियम-कानूनों का घोर उल्लंघन है. जाहिर सी बात है कि ऐसी स्थिति में न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती. सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्याय की तलाश का अपराधीकरण कर देना व न्याय मांगने वालों को कठघरे में खड़ा कर देना लोकतंत्र के हित में बिलकुल ठीक नहीं है.

ये सारी गिरफ्तारियां प्रधानमंत्री मोदी व गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर हुई हैं, जिसमें बदले की भावना काम कर रही है. आज पूरा देश तीस्ता सीतलबाड़, आर.बी. श्रीकुमार व मो. जुबैर की रिहाई की मांग पर सड़क पर है. 

कार्यक्रम में उपर्युक्त नेताओं के अलावा प्रकाश कुमार, अनय मेहता, जितेन्द्र कुमार, डॉ. प्रकाश, अनिल अंशुमन, संजय यादव, विनय कुमार आदि भी उपस्थित थे.


आलोक कुमार

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