जिस तरह, आरसीपी सिंह को पहले राज्यसभा का टिकट काटा गया और उसके बाद फिर पटना स्थित उनके सरकारी आवास से बेदखल किया गया, उससे उनके समर्थकों में नाखुशी है. कहा जा रहा है कि सिंह के कार्यकर्ता भले ही अभी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन समय आने पर यह पार्टी के खिलाफ आवाज भी बुलंद कर सकते हैं. पार्टी नेतृत्व भी सिंह के ऐसे समर्थकों से बचने का उपाय ढूंढ लिया है. पार्टी नेतृत्व हाल में ही सिंह के नजदीकी माने जाने वाले पार्टी प्रवक्ता अजय आलोक तथा दो महासचिवों सहित पार्टी के चार नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया.
पार्टी से हटाए जाने के बाद डॉ अजय आलोक ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा, प्रकृति का नियम हैं मौसम बदलता है और आदमी भी बदलता है लेकिन मूल चरित्र नहीं बदलता , मैं आज से अपने मूल स्वरूप में रहूंगा, पाटलिपुत्र क्रांति की जननी रही हैं और मैं इस धरती का पुत्र हूं और इस साल की बारिश पूरे वेग में रहेगी. जय हिंद. इसके बाद उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बनाए जाने पर भी इशारों ही इशारों में बिहार सरकार पर निशाना साधा है.
राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के बाद उनके केंद्रीय मंत्री बने रहने की संभावना नहीं के बराबर है. जिस तरह आरसीपी सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुरीद बने हैं, उससे इस संभावना को भी बल मिलता है कि कहीं वे बीजेपी में नहीं चले जाएं. बहरहाल, अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी है. हालांकि कहा भी जाता है कि राजनीति में कुछ भी संभव है. ऐसे में आरसीपी को लेकर जेडीयू में शीत युद्ध जारी है और इससे पार्टी में बिखराव की संभावना को भी नहीं नकारा जा सकता है.
आलोक कुमार
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