एक्टिविस्ट शिव प्रकाश राय ने कहा कि मुख्यालय स्तरीय वरीय पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद शुक्रवार को ही देर रात में प्राथमिकी दर्ज हो पाई है. जिला स्तरीय सभी अधिकारी केवल इसके लिए प्रयासरत रहे थे कि किसी तरह भी प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पाए. इस मामले में यह पूछा जाना चाहिए कि अंचल अधिकारी दाउदनगर के द्वारा 15 जून को समर्पित प्राथमिकी आवेदन पर आखिर 17 जून की रात में प्राथमिकी दर्ज क्यों हुई.
इस बीच कौन-कौन अधिकारी हैं जो उसे बचाने के लिए अनवरत प्रयासरत रहे? थानाध्यक्ष का हवाला देकर लोग मुख्यालय स्तरीय अधिकारियों को गलत सूचना देते रहे कि आवेदक द्वारा प्राथमिकी आवेदन वापस ले लिया गया है, जबकि अंचल अधिकारी दाउदनगर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए लगातार प्रयासरत थे. वरीय अधिकारियों को गलत सूचना देने पर थानाध्यक्ष पर क्या कार्रवाई की गई ? प्रकाश चंद्रा से जिले और दाऊदनगर अनुमंडल के सभी वरीय अधिकारियों के संबंधों की जांच की जानी चाहिए कि आखिर वे किस अहसान के तले दबे होने के कारण अपने सबॉर्डिनेट के साथ आपराधिक कृत्य कारित करने के बावजूद प्राथमिकी आवेदन में आरोपी बने प्रकाश चंद्रा के पक्ष में बचाव के लिए ढाल बन कर दीवार की तरह खड़े थे ?
आलोक कुमार
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
welcome your comment on https://chingariprimenews.blogspot.com/