बिहार के राजधानी पटना में भारी बारिश के कारण सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. बारिश की वजह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट को भी नुकसान हुआ है. दरअल पटना में जेपी गंगा पथ की ओर जाने वाले फुटपाथ का एक हिस्सा उद्घाटन के छह दिन बाद ही धंस गया है. इस जेपी गंगा पथ को बिहार का मरीन ड्राइव कहा जा रहा था.पटना में पिछले 24 घंटों से लगातार बारिश हो रही है. जिले के कई इलाकों में पानी भर गया है, जिससे लोगों को घुटने भर पानी से गुजरना पड़ रहा है.मीठापुर, यारपुर, जक्कनपुर, राजेंद्र नगर, बस स्टैंड, सिपारा, दीघा, कुर्जी जैसे कई इलाके जलमग्न हैं.
पिछले शुक्रवार को ही सीएम नीतीश ने जेपी गंगा पथ के फर्स्ट फेज का लोकार्पण किया था. जेपी गंगा पथ से डेढ़ घंटे का सफर महज 20 मिनट में पूरा हो जाएगा.बता दें कि उसी दिन यानि 24 जून को सीएम नीतीश इसके अलावे मीठापुर करबिगहिया आरओबी का भी उद्घाटन किया था. जेपी गंगा पथ के बनने से पटना के साथ-साथ उत्तर बिहार के लोगों को बहुत फायदा मिलेगा. जेपी सेतु के पास से ही जेपी गंगा पथ बनायी गयी है. इसके अलावे अटल पथ को भी इससे जोड़ा गया है
जेपी गंगा पथ के उद्घाटन के बाद इसकी एक झलक पाने के लिए लोग बेताब दिखे.पिछले रविवार को तो मेरिन ड्राइव को देखने के लिए इतनी भीड़ उमड़ी की यहां जाम की स्थिति देखी गयी. पटना के मेरिन ड्राइव को देख लोग भी काफी खुश नजर आए. उद्घाटन के छह दिन बाद ही इसकी पोल खुल गयी. महज दो दिन की बारिश से सड़क किनारे बना पाथवे धंस गया.
इसकी नींव सीएम नीतीश ने मुंबई के मरीन ड्राइव के तर्ज पर वर्ष 11 अक्टूबर 2013 को रखी थी. पिछले 9 साल में यह बनकर तैयार हुआ है, लेकिन अभी भी इसका दूसरा फेज बनना बाकी है. इस पर 3831 करोड़ रुपये खर्च किया गया लेकिन मात्र 6 दिनों में ही दीघा के पास पथवे धंस गया. इस उद्घाटन के दौरान सीएम नीतीश ने इसके निर्माण में लगे कर्मियों का सम्मानित भी किया था. वहीं उद्घटान के दो दिनों बाद ही पहली छुट्टी को इस देखने आये लोगों की इस पथ पर लंबी भीड़ लग गयी थी.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी पटना गंगा ड्राइव वे परियोजना के पहले फेज का सीएम नीतीश कुमार ने उद्धाटन किया था. इसे जेपी गंगा सेतु का नाम दिया गया है, जिसे क्वीन नेकलेस के नाम से भी जाना जाता है. इसके उद्घाटन के साथ ही पटना में लोग मुंबई मरीन ड्राइव का मजा ले रहे हैं. बता दें कि दीघा से पीएमसीएच तक बने इस सड़क की लंबाई 7.4 किलोमीटर है, जिसमें 6.5 किलोमीटर में 13 मीटर ऊंचाई तक बांध बनाकर निर्माण किया गया है. यह परिजना कुल 20 किलोमीटर का है, शेष हिस्सा 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. फिलहाल, मानसून की पहली बारिश से सड़क का हिस्सा धंस जाने से लोग भी हैरान हैं.
आलोक कुमार
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