शनिवार, 2 जुलाई 2022

सभी स्टेकहोल्डर्स एवं सेक्स वर्कर पर कार्य करने वाली संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने शिरकत किया

 

मुजफ्फरपुर. जिला विधिक सेवा प्राधिकार एवं जिला बाल संरक्षण इकाई के संयुक्त तत्वावधान  में सेक्स वर्कर के अधिकारों को प्रोटेक्शन देने एवं उनकी समस्याओं के समाधान पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में समाहरणालय सभा कक्ष में कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में जिला प्रशासन ,पुलिस प्रशासन के वरीय पदाधिकारी के साथ सभी स्टेकहोल्डर्स एवं सेक्स वर्कर पर  कार्य करने वाली संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने शिरकत किया.

 जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बताया कि सर्वाेच्च न्यायालय एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश एवं मार्गदर्शन में जिले के सेक्स वर्कर्स को उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता एवं संवेदीकरण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है.उन्होंने कहा कि आज के कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं मीडिया कर्मियों को  जागरूक करना है. सेक्स वर्कर्स के अधिकारों की रक्षा कैसे हो, उनके संवैधानिक अधिकार क्या है इसकी विस्तृत जानकारी इस कार्यशाला के माध्यम से दी गई.

 उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 21 को  स्पष्ट रूप से डिस्क्राइब किया है जिसके अनुसार सभी नागरिकों को जो संवैधानिक  अधिकार प्राप्त हैं वैसे ही सेक्स वर्कर्स को यह अधिकार मिला हुआ है. बताया गया कि सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशानुसार सेक्स वर्कर्स के कार्य को एक व्यवसाय के रूप में माना गया है.कहा कि इन्हें भी आम नागरिक की तरह पूरी मर्यादा के साथ जीने का अधिकार है।कहा कि सेक्स वर्कर्स के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में सभी स्टेकहोल्डर पूरी गंभीरता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें. उनके प्रति समाज, पुलिस प्रशासन एवं जिला प्रशासन को अति संवेदनशील होना होगा. 

इसके पूर्व कार्यशाला में उपस्थित जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर प्रणव कुमार ने कहा  कि सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा बुद्धदेव करमासकर बनाम पश्चिम बंगाल राज्य में दिये गये निर्णय के आलोक में सेक्स वर्कर्स के अधिकारों की रक्षा के मद्देनजर स्टेकहोल्डर्स तथा अन्य विभागों के पदाधिकारियों एवं मीडिया कर्मियों को जागरूक करने की दिशा में उक्त कार्यशाला का आयोजन किया गया है. उन्होंने आर्टिकल -21 जीवन जीने के अधिकार पर विस्तृत चर्चा करते हुए  कहा कि सेक्स वर्कर को भी सामान्य जीवन जीने का अधिकार है.उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव न करते हुए उनके अधिकारों की रक्षा की दिशा में हमें सजग रहना होगा और सभी को मिलजुल कर कार्य करने होंगे ताकि वे भी सामान्य जीवन जी सके और यह  उनका अधिकार भी है.

कार्यशाला में सेक्स वर्कर को राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, सूखा राशन प्रदान कराना, मानव गरीमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार दिलाना एवं पुर्नवास जैसे विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई. बताया गया कि इन्हे मूल अधिकार उपलब्ध कराने के संबंध में संबंधित स्टेक होल्डर्स को जागरूक करने की आवश्यकता है. सेक्स वर्कर्स भी मनुष्य है और वह पूरी तरह से मानव जीवन जीने की अधिकारी हैं.हमारे समाज का उनके प्रति भी कुछ कर्तव्य है

इसके पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर, सचिव विधिक सेवा प्राधिकार एवं अन्य अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का उद्घाटन किया गया. कार्यशाला के आरंभ में सहायक निदेशक बाल संरक्षण इकाई उदय कुमार झा के द्वारा उपस्थित सभी वरीय पदाधिकारियों को एवं विभिन्न विभागो तथा स्टेक होल्डर्स के प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया. साथ ही उन्होंने यह बात भी कही कि इस कार्यशाला के माध्यम से सेक्स वर्कर के अधिकारों को समझने और उनके अधिकारों  की सुरक्षा कैसे हो इस दिशा में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए यह एक बड़ा प्लेटफार्म है.उन्होंने कहा कि सेक्स वर्कर हमारे समाज के ही अंग है और उनके अधिकारों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है.

उन्होंने बताया कि आज का कार्यक्रम मुख्यतः जिला प्रशासन के द्वारा शुरू किए गए अभियान का आगाज था जिसमें सभी स्टेकहोल्डर्स पुलिस प्रशासन और न्यायपालिका से जुड़े पदाधिकारी एक मंच पर इकट्ठा हुए.आगे चलकर सेक्स वर्कर्स के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लाने तथा उन्हें सामान्य जीवन जीने के लिए एक सकारात्मक माहौल का निर्माण करने की दिशा में संबंधित इलाकों में सघन जन जागरूकता अभियान चलाकर इस अभियान को गति दी जाएगी. 

बैठक में रिसोर्स पर्सन वंदना शर्मा ,नसीमा खातून, सांत्वना भारती भी उपस्थित थे.जुडिशल मजिस्ट्रेट मृत्युंजय कुमार ने संबंधित विषय पर कानूनी पक्ष रखा.

अंत में विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ने धन्यवाद ज्ञापन किया और कहा कि सेक्स वर्कर को उनकी मूल जरूरतों के लिए सभी संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर समस्याओं का निराकरण कराया जाएगा. उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकार से  प्राप्त होने वाली सुविधाओं ,विधिक सहायता कैसे प्राप्त होगी के बारे में विस्तृत जानकारी दी. कहा कि यदि कोई समस्या आती है तो उसके निपटारे के लिए वे जिला विधिक सेवा प्राधिकार पुलिस पदाधिकारी या जिला प्रशासन से बेहिचक संपर्क करें.


आलोक कुमार

टीम वर्क के साथ बेहतर तरीके से कार्य करते हुए विधि-व्यवस्था सहित अन्य कार्यों को करायें निष्पादित : चैतन्य प्रसाद

 

बेतिया. श्री  चैतन्य प्रसाद  , अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, बिहार द्वारा विधि-व्यवस्था एवं गृह विभाग से संबंधित अन्य बिंदुओं की समीक्षात्मक बैठक समाहरणालय सभाकक्ष में की गयी. इस अवसर पर जिलाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, बेतिया, श्री कुंदन कुमार, पुलिस अधीक्षक, बेतिया, श्री उपेन्द्रनाथ वर्मा, पुलिस अधीक्षक, बगहा, श्री किरण कुमार गोरख जाधव, उप विकास आयुक्त, श्री अनिल कुमार सहित वरीय जिला स्तरीय प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, लोक अभियोजक आदि उपस्थित रहे.

अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, बिहार द्वारा कब्रिस्तान घेराबंदी एवं मंदिर चहारदीवारी निर्माण, विधि-व्यवस्था, पैरेन्ट्स एण्ड चाइल्ड एकाउंट, अभियोजन स्वीकृति, स्पीडी ट्रायल एवं डीएलएमसी, आरटीपीएस के तहत चरित्र प्रमाण पत्र, संयुक्त भवन का निर्माण, साम्प्रदायिक मामलों में अभियोजन की स्वीकृति, साम्प्रदायिक घटनाओं की रोकथाम, सीसीए के ममालों का अनुश्रवण, गंभीर एवं जघन्य कांडों का त्वरित विचारण, पुलिस थाना/ओपी/पुलिस केन्द्र के लिए भूमि की उपलब्धता, यातायात की समस्या व यातायात थानों से जुड़े मामले एवं चेकपोस्ट, क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला एवं संयुक्त भवन निर्माण, पुलिस थानों में महिला एसएचओ तथा महिला कांस्टेबल की पदस्थापना, थाना/ओपी में लैंड लाइन  फोन की व्यवस्था, पुलिस पेट्रोलिंग/पैदल गश्ती/जीपीएस अधिष्ठापन, महिला हेल्प डेस्क, एससी/एसटी अपराध से जुड़े मामले, थाना भवनों में आगंतुक कक्ष का निर्माण एवं पुलिस थाना एवं चौकी में महिला प्रसाधन के निर्माण, सीसीटीएनएस प्रणाली, वारंट, गिरफ्तारी एवं कुर्की जब्ती, गंभीर कांडों का त्वरित अनुसंधान, गंभीर कांडों का विचारण, अपराध नियंत्रण हेतु निरोधात्मक कार्रवाई, प्रभावी गश्ती की व्यवस्था, कारा में बंद अपराधियों की निगरानी, द0प्र0स0 के अंतर्गत निरोधात्मक कार्रवाई, शनिवारीय जनता दरबार, भूमि विवाद हेतु मासिक बैठक, राष्ट्रीय मानक के अनुरूप पुलिस कर्मियों की आवश्यकता एवं पद सृजन आदि की बिन्दुवार गहन समीक्षा की गयी.

जिलाधिकारी, श्री कुंदन कुमार एवं पुलिस अधीक्षक, बेतिया, श्री उपेन्द्रनाथ वर्मा, पुलिस अधीक्षक, बगहा, श्री किरण कुमार गोरख जाधव द्वारा पावर प्रेजेंटेशन के माध्यम से उक्त बिन्दुओं की अद्यतन स्थिति से अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, बिहार को अवगत कराया गया.अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, बिहार ने कहा कि जिले में विधि-व्यवस्था संधारण सहित अन्य मामलों में अच्छा कार्य किया गया है, इसी तरह आगे भी टीम वर्क के साथ बेहतर तरीके से कार्य करते हुए विधि-व्यवस्था सहित अन्य कार्यों को निष्पादित करायें.

अपर मुख्य सचिव द्वारा स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन संख्या 1, बेतिया एवं 2 बगहा से लंबित मामलों की स्टेज वाइज समीक्षा की गई और इसे हर हालत में 15 अगस्त तक प्रारम्भ कराने का निर्देश दिया गया. अपर मुख्य सचिव ने जिला पदाधिकारी को योजनावार निर्माण कार्य का अनुश्रवण करने का निर्देश दिया गया. उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान घेराबंदी, सरकार की अति महत्वपूर्ण योजना है, जिसका समयबद्ध तरीके से निर्माण कराना आवश्यक है.
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में अमन-चैन बना रहे इसके लिए उच्च स्तर की विधि-व्यवस्था का संधारण आवश्यक है.पुलिस अधीक्षक, बेतिया ने जानकारी देते हुए बताया कि विगत दिनों हुई विधि-व्यवस्था की घटना में कुल 6 प्राथमिकी दर्ज हुई है और अब तक 49 लोगों की गिरफ्तारी कर ली गयी है. अन्य की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कराई जा रही है.अपर मुख्य सचिव के द्वारा इस मामले में त्वरित अनुसंधान कराते हुए चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया गया और इसके साथ ही बेल पिटीशन का सख्ती से विरोध करने का निर्देश दिया गया.

अपर मुख्य सचिव के द्वारा सड़क दुर्घटना से बचाव के लिए हॉटस्पॉट चिन्हित करने का निर्देश दिया गया और माह में कम से कम एक बार सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया गया. इसके साथ-साथ तेज़ वाहन चलाने वालों  के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया.अनुसूचित जाति/जनजाति मामलों की समीक्षा के दौरान अपर मुख्य सचिव ने कहा कि कांडों का विधिसम्मत तरीके से त्वरित गति से अनुसंधान कराया जाए.

अपर मुख्य सचिव ने पुलिस अधीक्षक को विभिन्न कांडों के विगत तीन वर्षों के तुलनात्मक आंकड़ों पर विचार करते हुए स्ट्रेटेजी तैयार कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया.एन०डी०पी०एस० की समीक्षा के दौरान अपर मुख्य सचिव के द्वारा नारकोटिक्स सामग्रियों के निस्तारण को सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया.अपर मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न घटनाओं के कारित होने का कारण भूमि विवाद रह रहा है.सरकार भूमि विवादों  के प्रभावी निपटारे के लिए प्रयासरत है.थाना स्तर पर प्रत्येक सप्ताह संयुक्त शानिवारिय बैठक का आयोजन चक्रीय प्रणाली से कराया जाय। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाए कि अंचल अधिकारी हरेक थाना में भाग लें. हत्या के मामले में भी गहनता से जांच किया जाए कि क्या भूमि विवाद के कारण हत्या घटित हुई है.यदि भूमि विवाद कारण था तो क्या शानिवारिय जनता दरबार में यह मामला लिया गया था? इस परिदृश्य में भी जांच किया जाए.

अपर मुख्य सचिव के द्वारा गंभीर मामलों का त्वरित विचरण कराने का निर्देश दिया गया। गवाह की उपस्थिति सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया.यातायात की समस्या के निदान पर ध्यान देने का निर्देश दिया गया. आवश्यकतानुसार यातायात पोस्ट के लिए जगह चिन्हित करते हुए प्रॉपर पोस्ट बनवाने का निर्देश दिया गया. अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सभी थानों में लैंडलाइन की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए तथा रैंडम तरीके से थाने में कर्मी/पदाधिकारी की उपस्थिति की जांच भी कराई जाए. थानों में महिला आगंतुकों के उपयोग के लिए शौचालय की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया गया.

आलोक कुमार

भारत में विभिन्न संप्रदायों के ईसाई रहते

 


पटना. भारत में विभिन्न संप्रदायों के ईसाई रहते हैं. रविवार को 3 जुलाई को संत थोमस प्रेरित का पर्व है.इस दिन ‘भारतीय ईसाई दिवस‘​​के रूप में मनाते हैं.परम्परागत तौर से माना जाता है कि प्राचीन काल से ही भारत अपने भारतीय मसालों के लिए विश्वप्रसिद्ध रहा है. समुद्री मार्ग से भारतीय व्यापारी पश्चिम देश जाते थे और वहाँ के व्यापारी भारत आते थे. 

हाबान नामक ऐसे ही एक व्यापारी के साथ संत थोमस 0052 ईस्वी में केरल के  मालाबार तट पर आये.उस समय के राजा ने उनका स्वागत किया और इसी समय भारत भूमि पर ईसाइयत अंकुरित हुई. इसके पश्चात संत थोमस वर्तमान तमिलनाडु की ओर चले गए. वहाँ भी उन्होंने ईसाई धर्म का प्रचार किया, और इसी के चलते संत थोमस 0072 ईस्वी में चेन्नई के पास शहीद हो गए. तभी से भारतीय ईसाई धर्मसमाज संत थोमस को अपना संरक्षक संत मानते हैं. इस प्रकार यह बिलकुल स्पष्ट है कि भारत में ईसाइयत  2000 वर्ष पूर्व अंकुरित हुई. वह विचारधारा सरासर गलत है कि ईसाइयत अंग्रेजों द्वारा भारत में लाई गई, जिनका मूल उद्देश्य व्यापार करना था. 

बताया जाता है कि 21वी सदी ईसाइयत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. आज से 2000 वर्ष पहले प्रभु ईसा मसीह मानव के रूप में धरती पर अवतरित हुए थे. इसलिए 2021से लेकर 2030 तक हम ‘उत्सव का दशक‘ मना रहे है. भारत में ईसाई धर्म 2000 वर्ष पूर्व संत थोमस द्वारा लाया गया था. 


ईसाई धर्म पिछले 2,000 वर्षों से भारतीय इतिहास का अभिन्न अंग है और इसने ईसाई जीवन के कई स्वदेशी रूपों को जन्म दिया है.इस महान सभ्यतागत योगदान की उपेक्षा करने का कोई भी प्रयास भारत की नींव को ही नकारने के समान है.

रविवार 03 जुलाई 2022 को बाजितपुर मोहल्ला गेट नम्बर-92 के सामने अगापे चर्च में इंडियन क्रिश्चियन डे मनाने का निश्चय किया गया है.इस अवसर पर शाम पांच बजे कार्यक्रम होगा.शनिवार को इंडियन क्रिश्चियन डे की पूर्व संध्या पर लोगों को शर्बत पिलाकर आमत्रंण पत्र देते जा रहे थे.


आलोक कुमार

बिल्ली के गले में घंटी बाँधे कौन ?


पटना.बिल्ली के गले में घंटी  बाँधे  कौन ? बिल्ली के गले में घंटी बाँधना एक प्रचलित लोकोक्ति अथवा हिन्दी मुहावरा है.कोई भी असम्भव काम करने का प्रयत्न करना.यह आज भी क्रिश्चियन समुदाय के लिए चुनौती बनकर रह गया है.सर्वविदित है कि अंग्रेजों के शासनकाल में अंग्रेजों ने भारतीय को जाति,धर्म,क्षेत्र,भाषा आदि में विभक्त कर रख दिया था.उसी तरह आज क्रिश्चियन समुदाय स्वयं को बाँट कर रख दिये हैं.

 
वृहद क्रिश्चियन समुदाय में साउथ इंडियन क्रिश्चियन, नॉर्थ इंडियन क्रिश्चियन, एंग्लो इंडियन क्रिश्चियन, आदिवासी क्रिश्चियन, दलित क्रिश्चियन, संथाली क्रिश्चियन, उत्तर बिहार क्रिश्चियन व अन्य हैं. इसके आलावे रोमन कैथोलिक, जीएल चर्च, बापतिस्त चर्च, सीएनआई चर्च, नॉर्थ ईस्ट चर्च और न जाने कितने घरेलू चर्च हैं जो अपने अपने ढ़ंग से संचालित है.

यहां बता दें कि कई बार यूनाइटेड चर्च फोरम बनी परंतु आगे कायम नही रही. इसका दो कारण हो सकता है.पहला आपसी मनमुटाव उनमें ईसाई जनता के पक्ष व हित में सही नेतृत्व न देने की कमी क्योंकि जमीनी स्तर के  नेता न होना.दूसरी कारण अपनी डफली अपना राग अलापना.दूसरी ओर 40 सालों से क्रिश्चियन वेलफेयर एसोसिएशन बिहार ही एक मात्र रजिस्टर्ड एसोसिएशन है.इस एसोसिएशन के माध्यम से कई प्रकार से सामाजिक,धार्मिक,राजनीतिक आदि कार्य किये गए. ऐतिहासिक गांधी मैदान में गुड फ्राइडे के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रम किये गए.इसमें सभी क्रिश्चियन चर्च के लोगों की भागीदारी हुआ करती थी.जो पिछले 20 सालों से नहीं हो पा रहा है.

इसके अलावा कई कार्य हुआ. जिसके कारण ईसाइयत की पूछ आज हो रही है.लेकिन एसोसिएशन में जानकार लोग जो नेतृत्व कर रहे थे वे सेक्रेड लाइन के नेता तैयार भी नहीं किये. जिसके कारण एसोसिएशन आज संचालित है. क्रिश्चियन समुदाय  की समुचित विकास की सोच हमारे  नेताओं में कमी है. नकारात्मक सोच आपसी मनमुटाव, क्षेत्रीयता सोच,धार्मिक बन्धन जैसे बहुत कारण है.अल्पसंख्यक समुदाय में मुस्लिम समुदाय सरकार से फायदेमंद मे रहती है पर हम आपसी नाराज़गी मे रहते है. विशेष रूप से  क्रिश्चियन की राजनीति और मदद चर्च कैम्पस मे सीमित होती है.जो जहां पद ले ली वो सब कुछ  अपने आप को नेता समझ बैठते है,आज भी बिहार सरकार से रजिस्टर्ड ईसाई अल्पसंख्यक कल्याण संघ है उन्हे क्रिश्चियन समुदाय के हित के लिए सरकार से हक अधिकार के लिये तत्पर है पर लोगो मे ईगो भरी हुई है, आप को यह बताते हुए शर्म आ रही है की आज तक क्रिश्चियन समुदायो की आमसभा जिसमे हर क्रिश्चियन की भागीदारी हो कभी भी कहीं बिहार के धरती पर नहीं हुई है.जहां सब समुदाय उपस्थित हुआ हो.इसका कारण है  हम क्रिश्चियन को कुछ लोग सिर्फ तुष्टिकरण करते है.आज जो रजिस्टर्ड संघ संगठन है वो इस विषय को गम्भीरतापूर्वक लें.  जो क्रिश्चियन लोग जिस भी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं वो भी अपनी पार्टी में इस मामले को उठाया और  क्रिश्चियन समुदाय के बीच प्रस्तुत करें. वरणः ऐसे लोगों को नकारात्मक जवाब दे और बहिष्कार करे आने वाले समय चुनौतीपूर्ण है. अब नहीं जगे तो फिर मुश्किल में आना ही है जागो क्रिश्चियन जागो.

आलोक कुमार

 


पटनाः शिवहर लोकसभा की सदस्य हैं रमा देवी.इसके साथ ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता संबंधी स्थायी समिति की सभापति भी हैं.सांसद रमा देवी ने माननीय संसद सदस्य,विधानसभा सदस्य एवं विधान परिषद सदस्यगण को सेवामुक्त के बाद दी जाने वाली पेंशन की ओर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ध्यान आकृष्ट कराया है.उन्होंने कहा कि पूर्व में यूपीए सरकार के द्वारा नियम में संशोधन करते हुए यह प्रावधान किया गया था कि यदि कोई एक दिन का भी किसी सदन का सदस्य बन जाए तो उन्हें आजीवन पेंशन एवं अन्य सुविधाएं दी जाएगी.

आगे कहा कि यूपीए सरकार ने प्रावधान कर दिया कि यदि कोई व्यक्ति विधानसभा/विधान परिषद के साथ-साथ लोकसभा एवं राज्यसभा दोनों सदनों के सदस्य रहे तो वे दोहरी पेंशन के हकदार होंगे तथा पूर्व सदस्य की मृत्यु के उपरांत उनके पति/पत्नी आजीवन पेंशन की आधी राशि देने का प्रावधान है.

उन्होंने कहा कि कोविड-19 वैश्विक महामारी ने अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव डाला है जिससे लोग अभी भी जूझ रहे हैं.ऐसी परिस्थिति में माननीय सदस्यगणों को दिये जाने पेंशन मद के लिए सरकार के उपर सैकड़ों करोड़ की अतिरिक्त राशि का बोझ बढ़ जाता है. जिसको बंद करने की समय-समय पर जनता द्वारा मांग की जाती है.उन्होंने कहा कि आपके दूरदर्शी नेतृत्व में आज देश में कई ऐतिहासिक एवं सुधारात्मक कार्य हुए हैं, देशवासियों को आपसे काफी अपेक्षाएं है. एक रिपोर्ट के अनुसार आज देश के अधिकांश सदस्यगण करोड़पति एवं अरबपति है,जिन्हें सही मायने में पेंशन की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए.

सांसद रमा देवी ने सुझाव दी है कि माननीय पूर्व संसद सदस्य, विधानसभा सदस्य एवं विधान परिषद सदस्यगण को दिये जाने वाले पेंशन और भत्ते ( मेडिकल व परिवहन सुविधा को छोड़कर) बंद करने के लिए प्रावधान में संशोधन होनी चाहिए और इनसे होने वाली बचत की राशि से देश में आम वृद्धजनों को दिये जाने वाली वृद्धापेंशन की राशि में मंहगाई के हिसाब से बढ़ोतरी किये हाने से देश के नागरिकों में एक सकारात्मक संदेश जाएगा.

अंत में सांसद ने कहा कि इस विषय पर विचार करते हुए माननीय पूर्व संसद सदस्य,विधानसभा सदस्य एवं विधान परिषद के सदस्यगण को दिये जाने वाले पेंशन एवं भत्तों (मेडिकल एवं परिवहन सुविधा को छोड़कर ) बंद करने के लिए प्रावधान में संशोधन करते हुए आम वृद्धजनों को दिये जाने वाली वृद्धापेंशन की राशि में बढ़ोतरी के लिए कृपा की जाए.


वित्त मंत्रालय के अधीन संस्था केंद्रीय पेंशन लेखा कार्यालय (सीपीएओ) ने आरटीआई आवेदन के जवाब में बताया है कि एक अप्रैल 2010 से लेकर 31 मार्च 2018 तक पूर्व सांसदों को 489.19 करोड़ रुपये का पेंशन दिया जा चुका है. इस हिसाब से औसतन हर साल 61 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि पूर्व सांसदों के पेंशन पर खर्च की जाती है.खास बात ये है कि पेंशन लेने वालों में बड़े बिजनेसमैन, अखबार के मालिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व चुनाव आयुक्त, पूर्व मुख्यमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के बड़े वकील, फिल्मकार, नामी पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपियों तक के नाम शामिल हैं.


सीपीएओ से मिली जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा 75.37 करोड़ रुपये का पेंशन साल 2011-12 में पूर्व सांसदों को दी गई. इसके बाद 2014-15 में 62.39 करोड़ रुपये, 2015-16 में 65.07 करोड़ रुपये, 2016-17 में 53.56 करोड़ रुपये और 2017-18 में 55.43 करोड़ की राशि पूर्व सांसदों को पेंशन के रूप में दी गई है.‘संसद के सदस्यों का वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954’ के तहत पूर्व सांसदों को पेंशन देने का प्रावधान है और एक अप्रैल 2018 से पूर्व सांसदों को हर महीने 25,000 रुपये की पेंशन राशि दी जाती है. इससे पहले ये राशि 20,000 रुपये प्रति माह थी.


आलोक कुमार 

वर्षाे से भाजपा और आर.एस.एस. राहुल जी के छवि को बिगाड़ने के प्रयास में लगे हैं


पटनाःलोकतंत्र का चौथा स्तम्भ पत्रकारिता जब किसी राजनीतिक दल के मीडिया मैनेजमेंट की भूमिका निभाने लगे तो लोकतांत्रिक समाज के क्षरण का खतरा बढ़ जाता है. हाल ही में आदरणीय राहुल गांधी जी के एक वीडियो को जिस तरह भाजपा के आई.टी.सेल के इशारे पर तोड़-मरोड़ कर राजस्थान की घटना को जोड़ने का घृणित प्रयास एक मीडिया चैनल ने किया है वह निंदनीय ही नहीं बल्कि एक बड़ा अपराध है. वर्षाे से भाजपा और आर.एस.एस. राहुल जी के छवि को बिगाड़ने के प्रयास में लगे हैं,जबकि उन्हें यह पता है कि राहुल वो सूर्य है जिसकी चमक को झूठ और फरेब के चंद बादलों से ढंका नहीं जा सकता है. ये बातें बिहार प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष व पूर्व विधायक श्रीमती अमिता भूषण ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही है. 

श्रीमती भूषण ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता सरकार चलाना नहीं बल्कि धूमिल करना, विपक्ष की सरकार को अस्थिर करना और देश के सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करना रह गया है.

उन्होंने कहा कि जिस मीडिया चैनल ने यह राष्ट्रविरोधी हरकत की है क्या उसके माफीनामे से पूरा मामला समाप्त माना जा सकता है ? हमारी मांग है कि इस तरह के राष्ट्र विरोधी चैनलों और मीडिया हाउस के प्रति सरकार और देश की न्याय प्रणाली को त्वरित संज्ञान लेना चाहिये ताकि भविष्य में इस तरह से देश और समाज में नफरत का वातावरण बनाने में सक्रिय मीडिया गैंग पर लगाम लगायी जा सके.


आलोक कुमार 


बैठक की अध्यक्षता एन0एस0यू0आई, बिहार के प्रदेश अध्यक्ष श्री चुन्नू सिंह ने किया

पटना. भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (बिहार) के प्रदेश कार्यसमिति की बैठक आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम,पटना में सम्पन्न हुई. बैठक की अध्यक्षता एन0एस0यू0आई, बिहार के प्रदेश अध्यक्ष श्री चुन्नू सिंह ने किया.

बैठक को संबोधित करते हुये एन0एस0यू0आई, बिहार के प्रदेश अध्यक्ष श्री चुन्नू सिंह ने कहा कि आर्मी में अग्निपथ भर्ती योजना सरकार द्वारा एक ऐसा प्रक्रिया है जो देश को युवाओं को युवा रहते हुए उनको रिटायरमेंट का ठप्पा लगा देगा. 

मोदी सरकार इस अग्निपथ योजना का मार्केटिंग और ब्रांडिंग कराने के लिए सेना के प्रमुख से प्रेस वार्ता भी करवा डाला ,जहां बात वन रैंक वन पेंशन की होनी थी वहां पर नो रैंक नो पेंशन और युवाओं का सपना का ध्वस्त कर दिया, आर्मी में जाने के जज्बा को ही ध्वस्त कर दिया. अग्निपथ योजना से मोदी सरकार की आर्मी में जो स्थाई भर्ती होने की प्रक्रिया है उसे समाप्त करने का कार्य शुरू हो चुका है.अग्निपथ योजना आए हुए 2 दिन भी नहीं हुए थे की इसमें बहुत सारी बिंदुओं को हंगामा होने के बाद जोड़ा गया. 

भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (बिहार) के प्रभारी रोशन लाल बिट्टू ने कहा कि अग्निपथ योजना को लाने से पहले आर्मी के रिटायर्ड बड़े पदाधिकारी और मौजूदा में जो पदाधिकारी हैं उनसे बात विचार विमर्श होना चाहिए था ,एक कमेटी बनाकर हर एक बिंदु पर विचार विमर्श कर के इसे लागू करने का प्रक्रिया आरंभ करना था.खैर ऐसी उम्मीद मोदी सरकार से कभी की नहीं जा सकती क्योंकि मोदी सरकार तो संसद में भी कोई भी बिल बिना  विचार विमर्श के ही पास करा देती है, मोदी सरकार की हिटलर शाही मानसिकता का एक रूप है जो संघ की किताबें उनकी जो नीति है उसको देश पर थोपने का एक जरिया है.लेकिन अब समय आ गया है क्योंकि जो युवा है उनको इनकी जुमलेबाजी समझ आ गई है जहां पर मोदी सरकार ने हर साल दो करोड़ नौकरी देकर युवाओं को लुभाया था वही युवा आज ठगा सा महसूस कर रहे है.

बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा ने कहा कि पूरे 8 साल के मोदी सरकार के कार्यकाल में लगभग 17 लाख ही नौकरी दे पाए हैं आलम यह है बीते 8 सालों में लगभग 9 करोड़ नौकरियां खत्म हो गई है.  इससे पहले जब एनडीए की सरकार थी बाजपेई जी के नेतृत्व में तब सरकारी पेंशन खत्म किया गया था और अब मोदी सरकार है तो सरकारी नौकरियां खत्म  कर रही है.ऐसी संघी सोच देश के तरक्की में घातक है,जिस सरकार का डीएनए आर एस एस की सोच समझ से चलती हो वह क्या राष्ट्रभक्ति की बात करेंगे जिस संस्था ने लगभग 52 वर्षों तक राष्ट्रीय झंडा तिरंगा को नहीं अपनाया उनसे देशभक्ति की बातें दिखवा मात्र है. जिस तरह से देश में चारों तरफ किसी ना किसी चीज को लेकर अराजकता फैली हुई है, अखंड भारत के बात पर भी हंसी आती है,क्योंकि इनकी हरकतें, इनकी योजनाएं ,नीतियां देखकर तो यह लगता है कि यह अखंड भारत की जगह खंड खंड भारत बनाने में लगे हैं, और उसी की कड़ी में अग्निपथ योजना जैसे आर्मी की भर्ती की नियुक्ति की जा रही है. 

लगभग 2लाख नियमित आर्मी की भर्ती की रिक्त पड़ी हुई है. कम से कम हमारे प्रधानमंत्री जी को युवाओं से एक अपील करना था शांति बहाल करने का पर उनसे यह भी ना हो सका आखिर क्यों? मोदी सरकार  देश हित में युवाओं का जो जोश राष्ट्रभक्ति का है आर्मी में भर्ती होकर देश सेवा करने का है,उस जज्बे को ध्यान में रखते हुए अग्निपथ योजना को तुरंत वापस ले और नियमित रिक्तियां जो है आर्मी की उसे तुरंत भर्ती की प्रक्रिया शुरू करें.

इस अवसर पर कुमार आशीष, अरविन्द चौधरी,प्रशांत ओझा,आशुतोष सिंह मौजूद थे.


आलोक कुमार 

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