शनिवार, 2 जुलाई 2022

बिल्ली के गले में घंटी बाँधे कौन ?


पटना.बिल्ली के गले में घंटी  बाँधे  कौन ? बिल्ली के गले में घंटी बाँधना एक प्रचलित लोकोक्ति अथवा हिन्दी मुहावरा है.कोई भी असम्भव काम करने का प्रयत्न करना.यह आज भी क्रिश्चियन समुदाय के लिए चुनौती बनकर रह गया है.सर्वविदित है कि अंग्रेजों के शासनकाल में अंग्रेजों ने भारतीय को जाति,धर्म,क्षेत्र,भाषा आदि में विभक्त कर रख दिया था.उसी तरह आज क्रिश्चियन समुदाय स्वयं को बाँट कर रख दिये हैं.

 
वृहद क्रिश्चियन समुदाय में साउथ इंडियन क्रिश्चियन, नॉर्थ इंडियन क्रिश्चियन, एंग्लो इंडियन क्रिश्चियन, आदिवासी क्रिश्चियन, दलित क्रिश्चियन, संथाली क्रिश्चियन, उत्तर बिहार क्रिश्चियन व अन्य हैं. इसके आलावे रोमन कैथोलिक, जीएल चर्च, बापतिस्त चर्च, सीएनआई चर्च, नॉर्थ ईस्ट चर्च और न जाने कितने घरेलू चर्च हैं जो अपने अपने ढ़ंग से संचालित है.

यहां बता दें कि कई बार यूनाइटेड चर्च फोरम बनी परंतु आगे कायम नही रही. इसका दो कारण हो सकता है.पहला आपसी मनमुटाव उनमें ईसाई जनता के पक्ष व हित में सही नेतृत्व न देने की कमी क्योंकि जमीनी स्तर के  नेता न होना.दूसरी कारण अपनी डफली अपना राग अलापना.दूसरी ओर 40 सालों से क्रिश्चियन वेलफेयर एसोसिएशन बिहार ही एक मात्र रजिस्टर्ड एसोसिएशन है.इस एसोसिएशन के माध्यम से कई प्रकार से सामाजिक,धार्मिक,राजनीतिक आदि कार्य किये गए. ऐतिहासिक गांधी मैदान में गुड फ्राइडे के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रम किये गए.इसमें सभी क्रिश्चियन चर्च के लोगों की भागीदारी हुआ करती थी.जो पिछले 20 सालों से नहीं हो पा रहा है.

इसके अलावा कई कार्य हुआ. जिसके कारण ईसाइयत की पूछ आज हो रही है.लेकिन एसोसिएशन में जानकार लोग जो नेतृत्व कर रहे थे वे सेक्रेड लाइन के नेता तैयार भी नहीं किये. जिसके कारण एसोसिएशन आज संचालित है. क्रिश्चियन समुदाय  की समुचित विकास की सोच हमारे  नेताओं में कमी है. नकारात्मक सोच आपसी मनमुटाव, क्षेत्रीयता सोच,धार्मिक बन्धन जैसे बहुत कारण है.अल्पसंख्यक समुदाय में मुस्लिम समुदाय सरकार से फायदेमंद मे रहती है पर हम आपसी नाराज़गी मे रहते है. विशेष रूप से  क्रिश्चियन की राजनीति और मदद चर्च कैम्पस मे सीमित होती है.जो जहां पद ले ली वो सब कुछ  अपने आप को नेता समझ बैठते है,आज भी बिहार सरकार से रजिस्टर्ड ईसाई अल्पसंख्यक कल्याण संघ है उन्हे क्रिश्चियन समुदाय के हित के लिए सरकार से हक अधिकार के लिये तत्पर है पर लोगो मे ईगो भरी हुई है, आप को यह बताते हुए शर्म आ रही है की आज तक क्रिश्चियन समुदायो की आमसभा जिसमे हर क्रिश्चियन की भागीदारी हो कभी भी कहीं बिहार के धरती पर नहीं हुई है.जहां सब समुदाय उपस्थित हुआ हो.इसका कारण है  हम क्रिश्चियन को कुछ लोग सिर्फ तुष्टिकरण करते है.आज जो रजिस्टर्ड संघ संगठन है वो इस विषय को गम्भीरतापूर्वक लें.  जो क्रिश्चियन लोग जिस भी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं वो भी अपनी पार्टी में इस मामले को उठाया और  क्रिश्चियन समुदाय के बीच प्रस्तुत करें. वरणः ऐसे लोगों को नकारात्मक जवाब दे और बहिष्कार करे आने वाले समय चुनौतीपूर्ण है. अब नहीं जगे तो फिर मुश्किल में आना ही है जागो क्रिश्चियन जागो.

आलोक कुमार

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