शनिवार, 2 जुलाई 2022

भारत में विभिन्न संप्रदायों के ईसाई रहते

 


पटना. भारत में विभिन्न संप्रदायों के ईसाई रहते हैं. रविवार को 3 जुलाई को संत थोमस प्रेरित का पर्व है.इस दिन ‘भारतीय ईसाई दिवस‘​​के रूप में मनाते हैं.परम्परागत तौर से माना जाता है कि प्राचीन काल से ही भारत अपने भारतीय मसालों के लिए विश्वप्रसिद्ध रहा है. समुद्री मार्ग से भारतीय व्यापारी पश्चिम देश जाते थे और वहाँ के व्यापारी भारत आते थे. 

हाबान नामक ऐसे ही एक व्यापारी के साथ संत थोमस 0052 ईस्वी में केरल के  मालाबार तट पर आये.उस समय के राजा ने उनका स्वागत किया और इसी समय भारत भूमि पर ईसाइयत अंकुरित हुई. इसके पश्चात संत थोमस वर्तमान तमिलनाडु की ओर चले गए. वहाँ भी उन्होंने ईसाई धर्म का प्रचार किया, और इसी के चलते संत थोमस 0072 ईस्वी में चेन्नई के पास शहीद हो गए. तभी से भारतीय ईसाई धर्मसमाज संत थोमस को अपना संरक्षक संत मानते हैं. इस प्रकार यह बिलकुल स्पष्ट है कि भारत में ईसाइयत  2000 वर्ष पूर्व अंकुरित हुई. वह विचारधारा सरासर गलत है कि ईसाइयत अंग्रेजों द्वारा भारत में लाई गई, जिनका मूल उद्देश्य व्यापार करना था. 

बताया जाता है कि 21वी सदी ईसाइयत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. आज से 2000 वर्ष पहले प्रभु ईसा मसीह मानव के रूप में धरती पर अवतरित हुए थे. इसलिए 2021से लेकर 2030 तक हम ‘उत्सव का दशक‘ मना रहे है. भारत में ईसाई धर्म 2000 वर्ष पूर्व संत थोमस द्वारा लाया गया था. 


ईसाई धर्म पिछले 2,000 वर्षों से भारतीय इतिहास का अभिन्न अंग है और इसने ईसाई जीवन के कई स्वदेशी रूपों को जन्म दिया है.इस महान सभ्यतागत योगदान की उपेक्षा करने का कोई भी प्रयास भारत की नींव को ही नकारने के समान है.

रविवार 03 जुलाई 2022 को बाजितपुर मोहल्ला गेट नम्बर-92 के सामने अगापे चर्च में इंडियन क्रिश्चियन डे मनाने का निश्चय किया गया है.इस अवसर पर शाम पांच बजे कार्यक्रम होगा.शनिवार को इंडियन क्रिश्चियन डे की पूर्व संध्या पर लोगों को शर्बत पिलाकर आमत्रंण पत्र देते जा रहे थे.


आलोक कुमार

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