सोमवार, 13 नवंबर 2023

प्रेरितिक राजदूत लेओपोल्दो जिरेल्ली के हाथों सिनॉडल गिरजाघर एवं 150वीं जयंती स्मारक का उद्घाटन


प्रेरितिक राजदूत लेओपोल्दो जिरेल्ली के हाथों सिनॉडल गिरजाघर एवं 150वीं जयंती स्मारक का उद्घाटन

छोटानागपुर जिसमें आज पश्चिम बंगाल, बिहार (जिसमें वर्तमान झारखंड शामिल था) और उड़ीसा के क्षेत्र आते हैं, उसके पूर्वजों ने पहली बार चाईबासा के खूंटपानी में बपतिस्मा संस्कार ग्रहण कर, काथलिक धर्म स्वीकार किया था.....

चाईबासा . छोटानागपुर कैथोलिक मिशन की स्थापना का श्रेय जेसुइट मिशनरी फादर अगुस्तुस स्टॉकमैन को जाता है, जिन्होंने सन् 1869 ई. में चाईबासा की भूमि में अपना पाँव रखा था. उसके बाद 8 नवम्बर 1873 को कलकत्ता के धर्माध्यक्ष वालतेरूस स्टेन्स एस. जे. ने खूंटपानी में 28 लोगों को पहला बपतिस्मा संस्कार दिया, जो छोटानागपुर के पहले कैथोलिक बने. जिस स्थान पर प्रथम ख्रीस्तीयों ने बपतिस्मा ग्रहण किया, वहाँ आज एक तीर्थस्थल स्थापित है, जिसमें एक ग्रोटो, स्कूल, हॉस्टेल, कानूनी सहायता केंद्र, अर्ध पैरिश भी बन चुके हैं.

           छोटानागपुर की कैथोलिक कलीसिया 8 नवम्बर 2023 को अपने इतिहास की उस महान घटना की याद की, जब उसके विश्वासियों ने 150 साल पहले, पहली बार बपतिस्मा ग्रहण किया था.छोटानागपुर में प्रथम बपतिस्मा की 150वीं जयंती समारोह का अनुष्ठान वाटिकन के प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष लेओपोल्दो जिरेली अर्पित किये. इसी अवसर पर वे सिनॉडल कलीसिया एवं 150वीं जयंती स्मारक का उद्घाटन भी किया गया.पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा भी मौजूद थे

   छोटानागपुर में आज 7 धर्मप्रांत हैं। कोल्हान क्षेत्र की कलीसिया में कुल 16 पल्लियाँ, 5 जूनियर कॉलेज, 12 उच्च विद्यालय, 13 माध्यमिक विद्यालय, 5 समाज सेवा केंद्र, 9 अस्पताल एवं स्वास्थ्य देखभाल केंद्र और 18 धर्मसंघ हैं।काथलिकों की कुल संख्या 8,61,761 है जो झारखंड की कुल आबादी का 3.86 प्रतिशत है।

आलोक कुमार



संविधान के अनुच्छेद 341 (1) के तहत जारी आदेशों के अनुसार आरक्षण उपलब्ध

संविधान के अनुच्छेद 341 (1) के तहत जारी आदेशों के अनुसार आरक्षण उपलब्ध 

पटना.भारत में ईसाई धर्म मानने वालों को अनुसूचित जाति का आरक्षण प्राप्त नहीं है क्यों ?इस संदर्भ में यह कहा गया कि हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और सिख धर्म का पालन करने वाले दलितों के लिए आरक्षण उपलब्ध है, लेकिन भारतीय आरक्षण नीति के तहत दलित ईसाइयों और मुसलमानों को जाति के रूप में संरक्षित नहीं किया गया है.इस्लाम और ईसाइयों में जाति भेद नहीं है इसलिए इन धर्मों के दलितों के साथ भेदभाव नहीं होगा और वे सामाजिक और आर्थिक दर्जे में दूसरे मुस्लिमों और ईसाइयों के बराबर होंगे.

          संविधान के अनुच्छेद 341 (1) के तहत जारी आदेशों के अनुसार, केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानने वाले व्यक्ति ही अनुसूचित जाति के सदस्य माने जाते हैं। मद्रास हाई कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि बौद्ध जाति रहित है और इस धर्म को अपनाने वालों को अनुसूचित जाति का लाभ नहीं दिया जा सकता।18 अक्तू॰ 2018

        आंध्र प्रदेश के मंत्री मेरुगु नागार्जुन ने कहा कि केवल धर्म परिवर्तन से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले अनुसूचित जाति (एससी) की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बदलाव नहीं होता है , उन्होंने केंद्र से उन्हें एससी श्रेणी के तहत सुरक्षा और आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन करने का आग्रह किया.

        इस संबंध में विधान सभा में हाल ही में अपनाए गए प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए, राज्य के समाज कल्याण मंत्री ने कहा कि धर्मांतरित लोगों में अस्पृश्यता, भेदभाव और अपमान सहित उनकी विकलांगता बरकरार रहती है-

      “हिंदू धर्म की अनुसूचित जातियों और ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले अनुसूचित जाति के लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियाँ एक समान हैं क्योंकि वे गाँवों के बाहरी इलाके में एक ही क्षितिज में रहते हैं, समान परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन करते हैं३ इनमें से कोई भी चीज़ नहीं बदलती है व्यक्ति दूसरे धर्म में परिवर्तित हो रहा है, ”नागार्जुन ने  केंद्र सरकार को लिखे एक पत्र में कहा, जिसकी एक प्रति मीडिया के साथ साझा की गई थी.

       उन्होंने केंद्र को राज्य सरकार द्वारा प्राप्त कई अभ्यावेदनों से अवगत कराया कि कैसे एससी धर्मांतरितों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है, साथ ही उन्होंने कहा कि वे सिख धर्म और बौद्ध धर्म अपनाने वालों के समान बेहतर व्यवहार के पात्र हैं.

     मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि दक्षिणी राज्य ने हिंदू एससी के लिए उपलब्ध कुछ गैर-वैधानिक रियायतें उन एससी के लिए भी बढ़ा दी थीं, जिन्होंने 1977 में ईसाई धर्म अपना लिया था, जिसमें एपी अनुसूचित जाति सहकारी वित्त निगम लिमिटेड द्वारा स्वीकृत आर्थिक सहायता योजनाएं भी शामिल थीं.

   उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल करने का एक मजबूत वैध आधार है ताकि वे संविधान (अनुसूचित जाति) क्रम में सूचीबद्ध अन्य अनुसूचित जातियों के लिए उपलब्ध लाभों का आनंद ले सकें.

     भारत सरकार से अनुरोध है कि वह भारत में अनुसूचित जाति समुदाय के उन सदस्यों को एससी का दर्जा देने के लिए भारत के संविधान में संशोधन करने पर विचार करें, जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया है, ताकि वे अन्य सभी अनुसूचित जातियों के समान अधिकारों, सुरक्षा और लाभों का आनंद ले सकें.


आलोक कुमार



 

लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर साफ-सफाई की करें समुचित व्यवस्था : जिलाधिकारी

 
लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर साफ-सफाई की करें समुचित व्यवस्था : जिलाधिकारी


सड़क, सार्वजनिक स्थल सहित छठ घाटों की अच्छे तरीके से कराएं सफाई

छठ घाटों तक जाने वाला मार्ग अगर क्षतिग्रस्त है तो, कराएं मोटरेबल

बेतिया । जिलाधिकारी द्वारा जिलेवासियों को छठ महापर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गयी है। उन्होंने जिलेवासियों से कहा है कि शांतिपूर्ण, आपसी सौहार्द एवं भाईचारे के साथ हर्षोल्लास पर्व को मनाएं।
     जिलाधिकारी, श्री दिनेश कुमार राय ने कहा कि छठ महापर्व को लेकर जिले के सभी एसडीएम, नगर आयुक्त, नगर निगम, बेतिया सहित सभी नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारी तथा सभी प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रान्तर्गत साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।
     उन्होंने कहा कि लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े, इसका विशेष ध्यान रखना है। छट घाटों की प्रॉपर सफाई अतिआवश्यक है। साथ ही घाटों तक जाने वाले मार्ग अगर क्षतिग्रस्त हैं, तो उसे मोटरेबल भी कराना सुनिश्चित करेंगे। इस कार्य में लापरवाही नहीं बरतनी है। उन्होंने कहा कि महिला श्रद्धालुओं की सुविधा के मद्देनजर छठ घाटों पर पर्याप्त संख्या में चेंजिंग रूम का अधिष्ठापन कराना सुनिश्चित किया जाय। इसके साथ ही अस्थायी शौचालय का निर्माण भी कराया जाय।
       उन्होंने कहा कि सभी संबंधित प्रत्येक छठ घाटों का फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगे। बांस आदि के माध्यम से घाटों की गहराई का आकलन कर लेंगे। खतरनाक घाटों पर फ्लैक्स, बैनर का अधिष्ठापन कराना सुनिश्चित करेंगे ताकि दुर्घटना की संभावना नहीं रहे। खतरनाक घाटों की समुचित घेराबंदी कि जाए तथा वहाँ पर स्पष्ट सूचक बोर्ड एवं झन्डे पर्याप्त संख्या में लगाया जाय।
        जिलाधिकारी ने कहा कि छठ पूजा के अवसर पर विभिन्न घाटों पर व्रतियों के साथ बच्चों, महिलाओं, युवकों एवं वृद्धों की भाड़ी भीड़ एकत्र होती है, एवं भगदड़ होने की संभावना रहती है। इस के लिए एहतियातन सभी आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाय। खतरनाक घाटों के निकटस्थ पर्याप्त संख्या में पूजा के तालाबों का निर्माण हो ताकि छठव्रती महिलाओं-पुरुषों को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।
          उन्होंने कहा कि पूजा घाटों पर उद्घोषणा प्रणाली कि समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। बिजली के तारों एवं अन्य उपकरणों के उपयोग सुरक्षा के मानकों को अनुसार कराना सुनिश्चित किया जाय। समुचित रोशनी एवं पार्किंग की समुचित एवं सुचारु व्यवस्था होनी चाहिए। पर्याप्त संख्या में एनडीआरएफ/एसडीआरएफ से प्रशिक्षित सामुदायिक स्वयंसेवकों/गोताखोरों की घाटों पर तैनाती सुनिश्चित की जाय।
         जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी एसडीएम उपरोक्त कार्यों का लगातार अनुश्रवण, समीक्षा एवं निरीक्षण करेंगे। जिलाधिकारी द्वारा जिलेवासियों को दीपावली एवं छठ महापर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गयी है। उन्होंने जिलेवासियों से कहा है कि शांतिपूर्ण, आपसी सौहार्द एवं भाईचारे के साथ हर्षोल्लास पर्व को मनाएं।
       इस अवसर पर अपर समाहर्ता, श्री राजीव कुमार सिंह, अपर समाहर्ता-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, श्री अनिल राय सहित सभी जिलास्तरीय पदाधिकारी, सभी एसडीएम आदि उपस्थित रहे।

आलोक कुमार

शनिवार, 11 नवंबर 2023

दलितों की मुक्ति के लिए समर्पित 12 नवंबर रविवार

दलितों की मुक्ति के लिए समर्पित 12 नवंबर रविवार



पटना. भारत में ख्रीस्तीयों ने 12 नवंबर को दलित मुक्ति रविवार के रुप में अंकित कर समाज में ‘आवाजहीनों की आवाज‘ बनने की आवश्यकता को उजागर करने का प्रयास किया है.

  दलित पहले से ही अछूत के रूप में जाने जाते हैं और अनुसूचित जाति के सदस्य के रूप में भी जाने जाते हैं. हिंदू धर्म की कठोर वर्ण व्यवस्था के तहत वे सबसे नीचे वर्ण अर्थात पायदान में आते हैं.

   भारत ने दलितों के उत्थान के लिए कई सार्वजनिक कार्यक्रमों की स्थापना की है लेकिन उनके प्रति व्यापक भेदभाव और हाशिए पर बनाये रखना जारी है. भारत में 300 मिलियन से अधिक दलित हैं.(1.3 बिलियन नागरिकों में से लगभग 25 प्रतिशत) और, ख्रीस्तीय एवं मुस्लिम अल्पसंख्यकों के बीच, छूआछूत का कलंक व्यापक है.भारत के 28 मिलियन ईसाइयों में से दलितों की संख्या लगभग 60 प्रतिशत हैं, जिसका अर्थ है कि वे अधिकांश समुदायों में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक हाशिए और बहिष्कार का अनुभव करते हैं.

दलितों की मुक्ति के लिए समर्पित रविवार, जिसमें हम बात करते, चर्चा करते, उत्पीड़न और भेदभाव से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं, ताकि नागरिक सह-अस्तित्व को एक ऐसे संविधान द्वारा विनियमित किया जा सके जो न्याय, समानता, समान अधिकार और सभी के लिए अवसरों की गारंटी देता है। दलितों की स्थिति, जो अभी भी सामाजिक कलंक से चिह्नित है, अक्सर सभी के द्वारा बहिष्कृत हैं, एक असहनीय उल्लंघन है और एक लोकतांत्रिक दुर्बलता को दर्शाता है.

भारतीय कैथोलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्ग के लिए  विभाग बने है.जब ईसाई मिशनरियों ने स्कूल खोले, तो इन दलितों को उन स्कूलों में दाखिला मिला और वो ईसाई बन गए. हर मौके का फायदा उठाते हुए, वो औपनिवेशिक नीति की मदद से आगे बढ़े और इस तरह से दलित आंदोलन संगठित हुआ.

बावजूद इसके आधुनिक युग में भी दलितों के खिलाफ अत्याचारों में कमी नहीं हुई बल्कि यह बढ़ रही है. इसी कारण से, कैथोलिक धर्माध्यक्षों ने भारत की कलीसियाओं के राष्ट्रीय परिषद के साथ मिलकर प्रतिवर्ष नवंबर के दूसरे रविवार को दलित लिबरेशन रविवार के रुप में घोषित किया है.इस वर्ष दलित कैथोलिक दलित लिबरेशन 12 नवम्बर 2023 रविवार को  “दलितों की मुक्ति के लिए समर्पित रविवार” के रूप में मना रहे हैं.

       हिन्दू होने पर भी दलितों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है लेकिन वे दलित, जो ख्रीस्तीय हैं, उन्हें विश्वास के आधार पर अतिरिक्त भेदभाव सहना पड़ता है, साथ ही वे अन्य दलितों के लिए उपलब्ध सरकारी सहायता कार्यक्रमों से भी वंचित किये जा रहे हैं.भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने 1950 में एक राष्ट्रपति के आदेश पर हस्ताक्षर किया, जिसमें कहा गया कि हिंदू धर्म से अलग कोई भी धर्म अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा. बाद में सिख धर्म को(1956) से और बौद्ध धर्म को (1990) से दलितों के लिए लागू कानूनों से लाभ प्राप्त करने की अनुमति दी गई है.

      1936 में ब्रिटिश शासन की तरफ से जारी आदेश में कहा गया था कि धर्म परिवर्तन कर ईसाई बने दलितों को शोषित वर्ग नहीं माना जाएगा. 1950 में राष्ट्रपति की तरफ से जारी ‘ दी कॉन्स्टिट्यूशन (शेड्यूल्ड कास्ट्स) ऑर्डर‘ में इस बात का प्रावधान है कि सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध समुदाय से जुड़े दलितों को ही अनुसूचित जाति का दर्जा मिलेगा. चूंकि ईसाई और मुस्लिम समाज मे जाति व्यवस्था के न होने की बात कही जाती है, इसलिए हिंदू से ईसाई या मुस्लिम बने धर्म परिवर्तित लोग सामाजिक भेदभाव के आधार पर खुद को अलग दर्जा देने की मांग नहीं कर सकते. 

       साल 1950 के राष्ट्रपति आदेश को 1980 के दशक में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. ‘सूसाई बनाम भारत सरकार‘ नाम से चर्चित इस मामले पर 1985 में फैसला आया था. फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ईसाई और मुस्लिम दलितों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने से मना कर दिया था. कोर्ट ने माना था कि राष्ट्रपति आदेश काफी सोच-विचार कर जारी किया गया था. ऐसा कोई भी तथ्य या आंकड़ा उपलब्ध नहीं है जिसके आधार पर धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को वंचित या शोषित माना जा सके.

           गाज़ी सादुद्दीन नाम के याचिकाकर्ता ने 2004 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मुस्लिम दलितों को भी आरक्षण का लाभ देने की मांग की. इसके बाद ईसाई संगठनों और लोगों की तरफ से भी कई याचिकाएं दाखिल हुईं जिनमें धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को भी अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग की गई. यह याचिकाएं अभी तक लंबित है. कोर्ट ने 2011 में विस्तृत सुनवाई के लिए संवैधानिक सवाल तय किए थे, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी. 

     2007 में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने पूर्व चीफ जस्टिस रंगनाथ मिश्रा की अध्यक्षता मे आयोग का गठन किया. जस्टिस रंगनाथ मिश्रा ने 2009 में अपनी रिपोर्ट दी. इसमें सभी धर्म के लोगों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की सिफारिश की गई. उन्होंने मुस्लिम और ईसाइयों को आरक्षण का लाभ देने का भी सुझाव दिया.

      7 अक्टूबर 2022 को केंद्र सरकार ने पूर्व चीफ जस्टिस के जी बालाकृष्णन की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय आयोग बनाया. यह आयोग इस बात की समीक्षा करेगा कि क्या धर्म परिवर्तन कर ईसाई या मुस्लिम बन चुके दलितों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की ज़रूरत है. इस आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 2 साल का समय दिया गया है. 

    केंद्र सरकार के लिए पेश एडिशनल सॉलिसीटर जनरल के एम नटराज ने बालाकृष्णन आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करने का सुझाव दिया. याचिकाकर्ताओं के लिए पेश प्रशांत भूषण, कॉलिन गोंजाल्विस, सी यू सिंह जैसे वकीलों ने सुनवाई टालने का विरोध किया. उन्होंने संवैधानिक सवालों पर विचार की मांग की. उनका कहना था कि धर्म के आधार पर कुछ लोगों को अनुसूचित जाति न मानना समानता के अधिकार का उल्लंघन है.

    जस्टिस संजय किशन कौल, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और अरविंद कुमार के सामने कुछ अनुसूचित जाति संगठनों ने भी अपनी बात रखी. उन्होंने ईसाई और मुसलमानों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने पर सुनवाई न करने की मांग की.

     बताया जाता है अगर मुसलमान और ईसाई दलित धर्मपरिवर्तन करते हैं कि उनको अनुसूचित जाति का आरक्षण समाप्त कर दिया जाएगा.ऐसे लोगों को पिछड़ी जाति का आरक्षण मिलेगा.यदि मुसलमान और ईसाई दलित धर्मपरिवर्तन कर हिंदू धर्म स्वीकार करता है तो उनको वहां पर आरक्षण सुविधा मिल जाएगा.


आलोक कुमार


 

इस्लामिक धर्मशास्त्री होने के बावजूद धर्मनिरपेक्ष थे मौलाना कलाम : डा0 अखिलेश

इस्लामिक धर्मशास्त्री होने के बावजूद धर्मनिरपेक्ष थे मौलाना कलाम : डा0 अखिलेश


पूरे देश में शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता


पटना। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की दो कैटोगरी है। एक वर्ग उनका है जो स्वतंत्रता संग्राम में अविस्मरणीय योगदान दिये और दूसरे वो जिन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ने के साथ-साथ आजादी के बाद भी व्यवस्था की नींव रखने में अमिट छाप छोड़ी। आजाद भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आजाद दूसरे वर्ग के रत्नों में से एक हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक योगदान के कारण ही 11 नवम्बर को मनायी जाने वाली उनकी जयंती को पूरे देश में शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

      डा0 सिंह स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की 135वीं जयंती के अवसर पर प्रदेश पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अबुल कलाम आजाद की सबसे बड़ी पहचान ये है कि वे मौलाना मतलब कट्टर समझे जाने वाले इस्लामिक धर्मशास्त्री होने के बावजूद धर्मनिरपेक्ष थे। भारतीय इतिहास में मौलाना आजाद की पहचान हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक और मुसलमानों के लिए एक प्रथक राष्ट्र की अवधारणा के प्रबल विरोधी के रूप में होती है। भारत में शिक्षा व्यवस्था की नींब रखने में मौलाना आजाद ने अपने दूरगामी सोच का परिचय दिया। उन्होंने यु0जी0सी0 और आई0आई0टी0 जैसे संस्थानों की नींव रखी जो भारत में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा का मापदंड तय करती है।

       जयंती   के अवसर पर सदाकत आश्रम में एक विचार-गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता डा0 शकील अहमद खान ने विस्तार से मौलाना आजाद के योगदान को रेखांकित किया। और वर्तमान संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किये।

विचार-गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में पटना कॉलेज, पटना के प्राचार्य डा0 तरूण कुमार मौजूद थे। अपने संबोधन में डा0 तरूण कुमार ने मौलाना आजाद के योगदान और हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रति उनके नजरिये पर प्रकाश डाला। मंच संचालन मधुवाला ने किया।

      इसके अलावा इस अवसर पर उपस्थित कांग्रेस नेताओं में शामिल थे- प्रदेश कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी,पूर्व मंत्री डा0 अशोक कुमार, संजीव प्रसाद टौनी, विधायक राजेश कुमार, बंटी चौधरी, कपिलदेव यादव, लाल बाबू लाल, ब्रजेश प्रसाद मुनन, निर्मल वर्मा, पूनम पासवान,  डा0 विनोद शर्मा, गरीब दास, शरबत जहां फातिमा, डा0 संजय यादव, आलोक हर्ष, राजेश राठौड़, आनन्द माधव, असित नाथ तिवारी, चन्द्र प्रकाश सिंह, गरीब दास, रीता सिंह,  आई0 पी0 गुप्ता, गुंजन पटेल, नागेन्द्र विकल,  सुधा मिश्रा, असफर अहमद, शाशिकान्त तिवारी, अमरेन्द्र सिंह, स्नेहाशीष वर्द्धन पाण्डेय, राजनन्दन कुमार, शशि रंजन, निधि पाण्डेय, अखिलेश्वर सिंह, अश्विनी कुमार, फिरोज हसन, मंटन सिंह,  आदित्य कुमार पासवान, सुमित सन्नी, मृणाल अनामय, ललित सिंह, राज छविराज, अरूणा सिंह, शमा परवीन।  


आलोक कुमार

 

शुक्रवार, 10 नवंबर 2023

सदाकत आश्रम में प्रेस वार्ता

 पटना। बिहार विधानसभा में 9 नवंबर को सर्वसम्मति से पारित 75 प्रतिशत आरक्षण विपत्र को लेकर भारतीय युवा कांग्रेस के बिहार इकाई के अध्यक्ष व ओजस्वी युवा नेता श्रीमान शिव प्रकाश गरीब दास जी ने अपने कार्यालय सदाकत आश्रम में प्रेस वार्ता किया।

अपने संबोधन में बिहार की मांटी में सामाजिक न्याय के पुरोधा
लालू प्रसाद यादव जी जैसे महामानव के सानिध्य से जननायक के रूप में उभरे तेजस्वी प्रसाद यादव जी और विकास पुरुष के नाम से ख्याति प्राप्त श्रीमान नीतीश कुमार जी जैसे मुख्यमंत्री के साथ-साथ अपनी दादी इंदिरा और पिता राजीव जैसे को भारत की माटी को माटी को अपना लहू पिलाते देखकर परवरिश पाये देश की अखण्डता को आतुर जननेता श्रीमान राहुल गांधी जी की दृढ़ इच्छाशक्ति प्राप्त हो वहां की जनता कैसे अपने वाजिब अधिकार से वंचित रह सकती है। 

    वर्तमान में सम्पन्न हुए जातीय जनगणना ने न केवल बिहार अपितु ही राष्ट्र की जातीय व्यवस्था और उनकी अवष्यकता राष्ट्र मंच पर उभारने का काम किया है। जिसके मद्देनजर अब राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की गठबंधन सरकार की सम्यक नीति ने संविधान में वर्णित समता के अधिकार को फलीभूत करते हुए जिनकी जितनी आबादी उनकी उतनी भागीदारी को प्रस्तुत करने का कार्य किया है जो कि प्रशंसनीय है बिहार सरकार की यह योजना और नीति तब इस बात को चरितार्थ करेगी जब यह योजना और संपूर्ण राष्ट्र में लागू होकर देश की जनता को उनके वाजिब हक से रूबरू कराने का काम करेगी तो यह कहते हुए हमें गर्व होगा की बिहार जागे देश आगे। इस विधेयक के सरजमी पर उतरने से पिछड़े अति पिछडे और दलितों को 15 प्रतिशत का अतिरिक्त लाभ राहुल गांधी जी की दलित उत्थान मनसा को अग्रदूत करेगी।जबकि 10 प्रतिशत के साथ सामान्य वर्ग के आर्थिक पिछड़ों को आगे बढ़ाने में मददगार सिद्ध होगी जो कि देश के हित में है।



आलोक कुमार

ईसाई समुदाय की तरक्की के बारे में सोचते है ईसाई समुदाय के नेता राजन क्लेमेंट साह

 पटना।बीजेपी के वरिष्ठ कार्यकर्ता और ईसाई समुदाय के नेता राजन क्लेमेंट साह हमेशा ईसाई समुदाय की तरक्की के बारे में सोचते है और उस सोच को क्रियान्वित करते हैं.इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए ईसाई नेता राजन क्लेमेंट साह देश के जाने माने शिक्षाविद तथा लोकप्रिय शिक्षक खान सर के साथ आज लंच के साथ विभिन्न मुद्दों पर लंबी बातचीत की। देश में युवाओं के भविष्य एवं करियर प्लानिंग पर गहन चर्चा हुई।

         उन्होंने कहा कि आज मेरी बातचीत मुख्य रूप से ईसाई छात्र छात्राओं को सही मार्गदर्शन पर केंद्रित रहा। चर्चा के दौरान यह बात साफ साफ उभर कर सामने आई कि ईसाइयों को अपना करियर स्कूल और अस्पताल के बाहर भी ढूंढने की जरूरत है, ताकि ईसाई समाज का प्रभाव समाज के हर क्षेत्र में कायम हो सके। खान सर ने मेरे आग्रह के उपरांत ईसाई समाज के बच्चों को विशेष रूप से सहयोग करने पर अपनी हामी भर दी है, जिसके लिए मैं हृदय से उनके प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूं।

            यह विचारणीय बात है कि ईसाई समाज से जुड़े शिक्षाविद अपने समाज के बच्चों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा ही दे पाते हैं, लेकिन समुचित करियर मार्गदर्शन के अभाव में वे स्कूल और अस्पताल में ही नौकरी कर अपना जीवन व्यतीत करते हैं।

            ईसाई समाज के बच्चों को नई दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से आज की मुलाकात काफी महत्वपूर्ण है। मैं अपने स्तर से इस दिशा में विशेष कर गरीब ईसाई बच्चों के सुंदर भविष्य हेतु निरंतर कार्य करता रहूंगा, ताकि हमारे समाज के प्रभाव एवं प्रतिष्ठा में और इजाफा हो सके। आप सभी का सार्थक सहयोग अपेक्षित है।आप मुझ से निः संकोच संपर्क कर सकते हैं।


आलोक कुमार

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