सोमवार, 21 अप्रैल 2025

बक्सर धर्मप्रांत के तीसरे बिशप डॉ.जेम्स शेखर हैं

 


बक्सर धर्मप्रांत के तीसरे बिशप डॉ.जेम्स शेखर हैं.उनका बिशप अभिषेक 25 मार्च 2023 को बक्सर में हुआ था.बिशप अभिषेक के 549 दिनों के बाद विश्व गुरू संत पिता पोप फ्रांसिस से 24 सितंबर 2024 को मिले थे.

      बिशप डॉ.जेम्स शेखर  कहते हैं, कि ‘मैंने स्वयं उन्हें करीब से अनुभव किया. वे बड़े ही ध्यान से बात सुनते थे. सादगी और प्यार से बोलते थे. औपचारिकता की दीवार तोड़कर वे सीधे दिल से संवाद करते थे.उनके निधन से दुख हुआ.


रविवार, 20 अप्रैल 2025

ईसाई समुदाय ने ईस्टर धूमधाम से मनाया

ईसाई समुदाय ने ईस्टर धूमधाम से मनाया


पटना.ईसाई समुदाय का महत्वपूर्ण पर्व ईस्टर है.प्रभु येसु ख्रीस्त चालीस दिन-रात दुःख सहते हैं और उनको पवित्र क्रूस पर चढ़ाया कर मार दिया जाता है.पूरे पराक्रम के साथ .प्रभु येसु ख्रीस्त मृतकों में से जी उठते हैं.उसी को ईसाई समुदाय के लोगों के द्वारा ईस्टर संडे, .प्रभु येसु ख्रीस्त के पुनरूत्थान दिवस के रूप में बड़े ही धूम-धाम से मनाया.इस अवसर पर पटना महाधर्मप्रांत के धर्मप्रांत बक्सर,मुजफ्फरपुर,बेतिया,भागलपुर,पूर्णिया और पटना के विभिन्न चर्चों में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा बड़ी संख्या में मसीही समुदाय के लोगों ने भाग लिया.

       ईसाई मान्यताओं के अनुसार गुड फ्राइडे को प्रभु येसु ख्रीस्त को सूली पर लटकाए जाने के तीसरे दिन यानी ईस्टर को मृतकों में से पुर्नजीवित  हो उठते हैं.प्रभु येसु ख्रीस्त को पुनर्जीवित हो उठने को उत्सवी माहौल में मनाया गया.ईसाई समुदाय के लोग शनिवार को अर्धरात्रि चर्च में जाकर ईस्टर मास में शामिल हुए.जो रात में नहीं जा से उनके रविवार के दिन सुबह में विशेष मास आयोजित की गयी. प्रार्थना, भक्ति और उत्सव का समावेश था.इस अवसर पर चर्च को विशेष रूप से फूलों व विद्युत झालरों से सजाया गया था.

             बक्सर धर्मप्रांत में बिशप डाॅ,जेम्स शेखर के नेतृत्व में आयोजित प्रार्थना सभा में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया.वहीं पुराना भोजपुर में भी विशेष मास किया गया.इस अवसर पर पादरी ने कहा प्रभु यीशु ईश्वर के पुत्र हैं। वे लोगों को एक दूसरे की मदद करने की,नफरत को त्यागकर प्रेम को अपनाने और ईश्वर में आस्था रखने की सीख देते हैं.

आलोक कुमार

शनिवार, 19 अप्रैल 2025

अब उन परिवारों के लिए नीतू दीदी बन गई

 मैं अकेला ही चला था ज़ानिब- ए- मंजिल मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया...कोई हमलोगों को पूछने वाला नहीं था, घृणा की दृष्टि से लोग हमलोगों को देखते थे। कोई हमलोगों को काम नहीं देता था, लेकिन जब से आप यहां आना शुरू की तब से कई लोग, कई संस्था के सदस्य हमलोगों के बीच आते है, हमारी समस्या पूछते है और हमारी सहायता करते है.यह सब आपके कारण हुआ है, यह सब आपकी देन है....  चनपटिया .पश्चिम चंपारण जिले में चनपटिया प्रखंड है.यह चनपटिया प्रखंड के कुमारबाग में अवस्थित है.यहां पर कुष्ठ कॉलोनी है.यहां पर करीब 14-15 कुष्ठ परिवार अपने बाल- बच्चे के साथ रहते है.कुल मिलाकर उनका 43- 44 सदस्यों की  बस्ती है. जिसमें कुछ परिवार के सदस्य कुष्ठ रोग से ग्रसित है और कुछ बिल्कुल सामान्य स्थिति में है.

    समाजसेवी शिक्षिका मेरी आडलिन (नीतू सिंह) कहती हैं कि मैं विगत 14-15 वर्षों से इस बस्ती में जाकर लोगों से मिलती रहती हूं. मेरा प्रयास रहता है उन्हें समाज के मुख्य धारा से जोड़ें, उनके परिवार के बच्चे शिक्षित हों.ये सभी बच्चे व लोग शिक्षा और स्वच्छता को अपनाकर आगे बढ़ें.उनके परिवारों के बच्चे पढ़े और साफ- सुथरा रहें. 

       आज भी जब याद करती हूं कि वर्षों पहले जब पहली बार इस बस्ती में गई थी, तो यहां की स्थिति देखकर मानसिक रूप से काफी परेशान हुई थी.इस बस्ती में सफाई नाम की चीज नहीं थी, चारों तरफ गंदगी का अंबार,  घर के पास जल - जमाव, बदबू, गंदगी भरा नाली, कुष्ठ रोग से ग्रसित रोगी वृद्ध- वृद्धा और बदन पर बिना कपड़ें के छोटे- छोटे बच्चे.तीन पहिये के लकड़ी पर बैठकर भीख मांगने जाते कुष्ठ परिवार के कुछ सदस्य.

    मेरे लिए यह दृश्य मन को बेचैन, परेशान करने वाली थी. मैं इनके दुःख को देखकर जितनी दुखी थी, उससे ज्यादा यहां की कुष्ठ रोगियों की दशा, अशिक्षा और गंदगी को देखकर आहत थी.बस यही तो वह समय था, जब दिल ने, मन से कहा -इक छोटी सी शुरुआत करते है, उन लोगों के लिए कुछ करते है.

         उस दिन से जब भी समय मिलता, मैं इस बस्ती में जाने लगी. मेरे बार- बार यहां जाने से अब उनलोगों के लिए अपरिचित नहीं थी, धीरे- धीरे ये लोग मेरी बात सुनने लगें और मेरा कहना मानने लगे. पहले उनलोगों के लिए मिस, मैडम थी, लेकिन अब उन परिवारों के लिए नीतू दीदी बन गई हूं. ये मुझे नीतू दीदी कहकर बुलाने लगे. मुझसे जो भी सहायता बन पड़ती है, उसमें मेरे परिवार के सदस्य, उनके लिए किया करते हैं. अक्सर अपने घर के बच्चों का जन्मदिन, पर्व त्यौहार के अवसर पर उनके बीच परिवार के साथ पहुँच जाती और खुशियां इनके साथ सांझा करती.मेरे घर के बच्चे भी इनके साथ केक काटकर जन्मदिन मनाते, मिठाईयां, खिलौने बांटते और एक पौधा जरूर लगाते, अपनी खुशियां बस्ती के बच्चों के साथ सांझा करते, कविता कहानी सुनाते और समय बिताते.

        एक तरफ वहां के बच्चों को पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराती, समय देकर उन्हें पढ़ाती, कविता आदि सिखाती, साफ- सफाई के बारे में बताती, वही दूसरी तरफ सभी परिवारों को समय- समय पर खाद्य सामग्री,  कपड़ें, कम्बल के साथ आर्थिक मदद देती रहती.स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए जल- जमाव, नाली आदि की सफाई करवाती.

      नीतू सिंह कहती कि  मुझे खुशी हो रही है कि इस बस्ती के लोगों में खूब जागरूकता आई है और वे अपनी बस्ती को साफ रखने लगे है.अपने बच्चों को पढ़ाने लगे है और स्वयं काम-काज करने लगे है. यहां की महिलाएं बच्चों को, घरों आस पास के जगह को स्वच्छ रखने लगी है.

       कुमारबाग निवासी एक युवा है- विक्रम कुमार.उस विक्रम की जितनी भी तारीफ करूँ कम है.विक्रम इस बस्ती के बच्चों को प्रतिदिन पढ़ाने का काम करते है. गर्व है ऐसे युवा पर, जो निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करते है. नीतू कहती है कि मैं अक्सर विक्रम से उनलोगों के बारे में पूछती रहती हूँ और जब भी यहां जाती हूँ विक्रम के साथ बस्ती के लोगों की समस्याओं, परेशानियों को पता करती हूं और उसका हल निकालने का प्रयास करती हूं.

          इस कुष्ठ बस्ती के प्रधान है- भोला गिरी हैं. बस्ती के लोग उनकी इज्जत करते है, उनकी बातों को मानते है,  साथ ही कोई भी निर्णय हो ये लोग एक साथ मिलकर करते है. भोला जी इस बस्ती की लोगों की अगुवाई करते है.यहाँ के लोगों के लिए जब भी कोई जरूरत होती है, भोला जी मुझसे संपर्क करते है, मुझे बताते है और हमलोग मिलकर इसे हरसंभव पूरा करने का प्रयास करते है. हमलोगों ने मिलकर अपनी प्रयास से यहां पर बस्ती में बिजली की व्यवस्था, चापाकल की व्यवस्था किया.

           जो कुष्ठ बस्ती समाज से बिल्कुल अलग-थलक, अभिवंचित था,  दूसरे लोग इस कुष्ठ बस्ती में कभी जाते नहीं थे, यहां के रोगियों के दुःख दर्द से अनभिज्ञ थे, इनसे मिलते, बोलते नहीं थे. उनकी बीमारी की वजह से इनसे दूर रहते थे.अब यहां बहुत सारे लोग, बहुत संस्था आकर इनकी सहायता करते है.

      नीतू कहती है कि मैं आभार व्यक्त करती हूं उन सभी मीडिया का जिन्होंने कुष्ठ बस्ती में मेरे द्वारा किये जा रहे कार्यों को काफी प्रमुखता से कई बार प्रकाशित किया है.साथ ही सोशल मीडिया पर डाले गए मेरे पोस्ट को देखकर कई संस्था, कई लोग मुझे फोन करके पूछते है नीतू जी यह कुष्ठ बस्ती कहाँ है, हमलोग वहाँ के लिए कुछ करना चाहते है.कुछ लोग, कुछ संस्था मेरे माध्यम से और कुछ लोग स्वयं आकर बस्ती के लोगों की सहायता करने लगे.

          इनर व्हील क्लब, मारवाड़ी महिला समिति, यूथ क्लब जैसी कई संस्था के सदस्य एवं अन्य कई संस्था के सदस्य यहां आकर लोगों की मदद करते है. बच्चों की पढ़ाई, शादी ब्याह, बस्ती के लिए आवश्यक सामग्री आदि देते है.

         विगत कुछ महीनों से मैं व्यक्तिगत कारण, अस्वस्थता की वजह से बस्ती में नहीं जा सकी थी. लेकिन आज जब मैं वहां गई तो लोगों का वही प्यार और सम्मान मेरे प्रति था.थोड़ा दुःख हुआ यह देखकर कि 15 परिवारों में से आज मात्र 6 ही परिवार और उनके बच्चे है.कुछ लोग ईश्वर की शरण में चले गए है.कुछ कमाने बाहर चले गए है.

     आज मेरे साथ चुहड़ी कैथोलिक युवा संघ (Youth club chuhari) के सदस्य इस बस्ती में गए और और गुड फ्राइडे के अवसर पर बच्चों के बीच कॉपी, पेंसिल, रबर, कटर, बिस्किट, केक, मिठाई आदि बांटे और बस्ती के सभी परिवारों को सुखा खाद्य सामग्री चावल, आटा, दाल, दूध आदि दिये  साथ ही सभी परिवारों को कपड़ें आदि प्रदान किये.अच्छा लगा कि आज के युवा पढ़ाई- लिखाई के साथ समाजसेवा में भी रुचि ले रहे है.

        दिल को छू गई बस्ती के प्रधान भोला गिरी और युवा विक्रम की बातें - दीदी हमलोगों के कुष्ठ बस्ती में पहले कोई नहीं आता था, कोई हमलोगों को पूछने वाला नहीं था, घृणा की दृष्टि से लोग हमलोगों को देखते थे.कोई हमलोगों को काम नहीं देता था, लेकिन जब से आप यहां आना शुरू की तब से कई लोग, कई संस्था के सदस्य हमलोगों के बीच आते है, हमारी समस्या पूछते है और हमारी सहायता करते है.यह सब आपके कारण हुआ है, यह सब आपकी देन है.

        वह कहती है की मैं नहीं जानती कि मेरी वजह से समाज के तमाम लोगों को इस बस्ती की जानकारी हुई, आज इनकी सहायता के लिए दूर-दूर से कई लोग आते है। मैं इन लोगों की सहायता के लिए कारण बनी कि नहीं, यह मुझे पता नहीं.मैं तो सिर्फ इतना जानती हूं आज 14-15 साल पहले अगर मैं इनलोगों से नहीं मिलती, इनकी स्थिति देखकर अपनी दिल की आवाज को नहीं सुनती, तो शायद कुष्ठ बस्ती के इन लोगों की सेवा से वंचित रह जाती.

आलोक कुमार

शुक्रवार, 18 अप्रैल 2025

मैंने प्रभु और गुरु होकर भी धोए पैर तुम्हारे , तू ने भी धोना सब की जो है भाई तुम्हारे

पटना. ईसाई समुदाय पवित्र गुरुवार को विशेष दिन मानते हैं. आज गिरजाघरों में बारंबार यह गीत प्रस्तुत की जाती है. मैंने प्रभु और गुरु होकर भी धोए पैर तुम्हारे , तू ने भी धोना सब की जो है भाई तुम्हारे.प्रभु येसु ख्रीस्त बर्तन में पानी लेकर अपने शिष्य के पैर धोने लगे. पैर को धोने के बाद कपड़े से पोछकर पैर में चुम्बन लिए. इसी तरह तू ने भी करना है जो भाई तुम्हारे हैं.हम अपने प्रभु येसु ख्रीस्त के क्रूस पर गौरव करते हैं.

    हां , बेशक संसार के सभी ईसाई धर्मावलम्बी प्रभु येसु ख्रीस्त के क्रूस पर गौरव करते हैं. आज के ही दिन येसु ख्रीस्त ने पुरोहिताई और परमप्रसाद की स्थापना की थी. येसु ने अपने 12  शिष्यों के साथ अंतिम बार भोजन किए. 12 शिष्य पुरोहित बने और जो अंतिम बार भोजन किए. वह परमप्रसाद के रूप में विकसित हुआ.इसके पहले येसु ने अपने शिष्य के पैर धोएं.प्रेम धोने के साथ शिष्यों के साथ प्रगाढ़ प्रेम प्रदर्शित किए. यूदस नामक शिष्य के द्वारा विरोध करने पर येसु ने कहा कि यदि पैर न धो दूं तो तेरे साथ कोई संबंध नहीं रह जाएगा.यह न भूले कि जो स्नान कर चुका है. उसे स्नान करने की जरूरत नहीं है.केवल पैर ही धोने से कर्तव्य पूरा हो सकता है. इस बीच येसु ने स्पष्ट कर दिए कि तुम सबके सब शुद्ध नहीं हो.अगर आप लोग प्रभु और गुरु कहते हो , तुम्हारे पैर धोएं हैं.तो तुम्हें भी दूसरे का पैर धोना चाहिए। जैसा मैंने तुम्हारे साथ किया हूं। तुम भी किया करो.

     कुर्जी गिरजाघर के प्रधान पुरोहित ने कहा कि प्रभु येसु ख्रीस्त विनम्र के स्त्रोत हैं.संसार के राजाओं के राजा होने के बाद भी पवित्र खजुर इतवार के दिन महाराजा की तरह हाथी और घोड़ा पर बैठकर शहर में प्रवेश नहीं किए. वरण विनम्र की मूर्ति येसु ने गदहा पर बैठकर शहर में आए.इसी अवस्था में लोगों ने शानदार स्वागत किए. हरियाली टहनियों को हिला हिला कर स्वागत किए.जो कुछ था लोगों ने राह में बिछा दिए। इससे एक कदम बढ़ाकर अपने शिष्य के पैर धो दिए। उस समय महिलाएं ही अतिथियों के पैर धोते थे। अगर महिला नहीं तो दास लोग पैर धोते थे.इसके बावजूद प्रभु और गुरु होकर शिष्यों के पैर धोएं. फिर पवित्र शुक्रवार के दिन येसु ने सलीब पर चढ़ाने वालों को क्षमादान कर देते हैं. हे ! प्रभु माफ कर देना कि यह नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं ?

आगे फादर ने कहा कि उस समय मेमना की बलि देकर ही बलिदान चढ़ाया जाता था. अब नूतन विधान के तहत व्यक्ति के चतुर्दिक विकास के लिए प्रभु येसु ख्रीस्त ने प्राण त्याग दिए.रक्त और शरीर ही दे दिया है। जो प्रत्येक दिन चर्च के अंदर जाने पर मिल सकता है. जब स्नान ग्रहण करने के बाद ईशायत धर्म स्वीकार कर लेते हैं.यह खुला ऑफर है.संसार के मुक्तिदाता के द्वारा दिए गए आहार को ग्रहण किया जाए.

  बेतिया में पुरोहितों द्वारा जिन बारह लोगों के पांव धोये गये, उनमें सरोज डेनिस, राजेश डिक्रूज, राजेश फ्रांसिस, चार्ली पौल, जौर्ज पीटर, समीर कुमार, रोबेन अन्तुनी, संजय लियो, संजय ई बेनेडिक्ट, रंजीत इग्नासिउस, अनिल केविन सोलोमन, हर्षित ओस्ता के नाम शामिल है.


आलोक कुमार

बुधवार, 16 अप्रैल 2025

वागी समर्पण दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी

 


जौरा. महात्मा गांधी सेवाश्रम जौरा चंबल घाटी में वागी समर्पण दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी  का आयोजित शान्ति एवं अहिंसा पर हुआ. जिसमें गांधीवादी पी व्ही राजगोपाल, जलपुरुष राजेन्द्र सिंह,तरुण भारत संघ राजस्थान, पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा,गौतम सागर राड़ा,पूर्व मंत्री झारखंड,दशरथ कुमार,मंत्री सर्व सेवा संघ राजस्थान, जिल बहन पंकज,उपाध्याय विधायक जौरा, अखिल महेश्वरी जी अध्यक्ष नगर पालिका वरिस्ठ पत्रकार जयंत तोमर व 12 राज्यों से आये राष्ट्रीय युवा योजना के प्रतिनिधियों सहित चम्बल घाटी के प्रबुद्धजनों सहित आत्मसमर्पण कारी वागी भाइयों ने भाग लिया तथा सभी अतिथियों ने इस अवसर पर प्रेरक उद्बोधन दिया और आज के दौर में कैसे आगे बढ़ा जाए उस पर मार्गदर्शन दिया.

          इस अवसर पर श्योपुर के वरिष्ठ समाजसेवी जयसिंह जादौन ने कहा चंबल घाटी में हुआ बागियों का आत्मसमर्पण हिंसा से अहिंसा की और मुड़ने तथा गांधी जी के आदर्शों को स्वीकार कर संत बिनोवा भावे, लोकनायक जयप्रकाश नारायण व मानवता के अग्रदूत डॉ एस एन सुब्बाराव जी की प्रेरणा से अपराधी जीवन का त्याग एक ऐसा उदाहरण है जो विश्व में दूसरा नहीं मिलता है.एक समय था जब चंबल घाटी में शाम के बाद सड़कें सूनी हो जाती थी. बागियों के भय से लोगों का सामान्य जीवन जीना कठिन हो गया था.

           संविधान द्वारा प्रदत्त शांति से जीवन यापन करने,का अधिकार,छिन गया था.गरिमा के साथ जीना स्वप्न हो गया था.भय के इस माहौल का खात्मा बागियों के इस आत्मसमर्पण से संभव हुआ.यह भी एक संयोग है कि यह समर्पण उस दिन हुआ जो संविधान के निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर का जन्म दिवस था जिन्होंने संविधान के माध्यम से सांवेधानिक मूल्यों व मौलिक अधिकारों का  तोहफा दिया परन्तु बागी समस्या के दौर में ये अधिकार सपना हो गये.

         आज जब हम उस आत्मसमर्पण को याद करने हम एकत्रित हुए हैं तब हमें यह विचार करना है कि किस तरह खतरों से खेलते हुए अपनी जान की परवाह न कर बागियों को अहिंसा का मार्ग दिखाया गया तथा संविधान द्वारा प्रदत्त मूल्यों की रक्षा की गई.

            इस अवसर पर हमें भी यह संकल्प लेना है कि जहां भी सांवेधानिक मूल्यों कि हनन हो, मौलिक अधिकारों पर चोट की जाये तब हम चुप नहीं रहें स्वयं तो इसमें अग्रणी रहे ही दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें ताकि समाज में न्याय,समानता,बंधुता का भाव बढ़े।सबको गरिमा पूर्ण जीवन का अधिकार मिले.

         यह आत्म समर्पण को स्मरण करने का दिवस तो है ही साथ ही उन मूल्यों की पुनर्स्थापना का अवसर भी है जो हमें हमारे मार्गदर्शक डॉ एस एन सुब्बाराव जी व अन्य गांधीवादी विचारकों ने हमें दिए हैं.

इस कार्यक्रम में श्योपुर से जयसिंह जादौन रामदत तोमर श्रीमती अनामिका पाराशर दौलत राम गोड़ राधावल्लभ जागिड़ वीरमदेव बैरवा हर्षवर्धन सिंह ओम नायक ने भाग लिया.


आलोक कुमार


मंगलवार, 15 अप्रैल 2025

सीबीसीआई लोकल पुरोहितों पर ध्यान दें

सीबीसीआई लोकल पुरोहितों पर ध्यान दें

पटना.संत पिता के द्वारा धर्मप्रांत के विकर जेनरल अथवा सामाजिक विकास केंद्र के निदेशक को ही भावी बिशप नियुक्त किया जाता है.धर्मप्रांत के बिशप का कार्य अधिकार है कि धर्मप्रांत के फादर को विकर जेनरल का पद दें.उसी तरह किसी फादर को सामाजिक विकास केंद्र के निदेशक का पद दें.

     पटना महाधर्मप्रांत में देखा गया कि पटना धर्मप्रांत के विकर जेनरल बीजे ओस्ता थे.उनको बिशप पद पर पदोन्नत किया गया.मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के विकर जेनरल विलियम डिसूजा थे.उनको पदोन्नत कर बक्सर धर्मप्रांत का बिशप बनाया गया.

     अब देखे पटना महाधर्मप्रांत के सामाजिक विकास केंद्र के निदेशक पद पर बैठे भाग्यशाली फादर सेबेस्टियन कल्लुपुरा को ही उनको पदोन्नत कर बक्सर धर्मप्रांत का बिशप बनाया गया.उसके बाद सामाजिक विकास केंद्र के निदेशक पद पर बैठे दूसरे भाग्यशाली फादर डॉ.जेम्स शेखर बने.उनको भी पदोन्नत कर बक्सर धर्मप्रांत का बिशप बनाया गया.

   यह भी पटना महाधर्मप्रांत में देखा गया कि बक्सर धर्मप्रांत का बिशप को पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष बना दिया जाता है.यह भी देखा जाता है कि पटना महाधर्मप्रांत में किसी को सहायक धर्माध्यक्ष या मोंसिनियर नहीं बनाया जाता है.समझा जाता है कि यह सब सीबीसीआई का करतब है.सीबीसीआई लोकल पुरोहितों पर ध्यान दें.


आलोक कुमार

 

सोमवार, 14 अप्रैल 2025

आगामी दो माह में बिहार के सभी जिला में लीगल सेल संगठन का विस्तार

 पटना. बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस लीगल सेल के अध्यक्ष विकास कुमार झा की अध्यक्षता में ‘‘ न्याय पथ’’ एक दिवसीय बैठक की गयी. जिसमें बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावारू , भारतीय युवा कांग्रेस , लीगल सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रूपेश भदोड़िया एवं कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता डा0 शकील अहमद खान भी उपस्थिति थे.

     बैठक में बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावारू ने कहा कि हर घर कांग्रेस का झंडा, सोशल मीडिया , संविधान की चर्चा, लीगल विज्ञापन जैसे कार्यक्रम पर विशेष रूप से ध्यान देने की बात कहीं. आगे उन्होंने संगठन विस्तार करने की बात की.

भारतीय युवा कांग्रेस लीगल सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रूपेश भदौरिया ने कहा कि आगामी दो माह में बिहार के सभी जिला में लीगल सेल संगठन का विस्तार करने तथा चुनाव से सम्बन्धित कांग्रेस पार्टी के कार्यकत्र्ताओं को हो रहे परेशानी को दूर करने के लिए लीगल सेल वार रूम की व्यवस्था की जाएगी.

विधान मंडल कांग्रेस दल के नेता डा0 शकील अहमद खान ने कहा कि समाज में फैले कुरीति को दूर करने के लिए वकीलों की अहम भूमिका हमेशा रही है. कांग्रेस पार्टी लीगल सेल संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता है.

बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस लीगल सेल के अध्यक्ष विकास कुमार झा ने कहा कि लीगल सेल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों एवं आम लोगों को होने वाले परेशानी को लेकर लीगल से वार रूम के माध्यम से एक-एक समस्या का समाधान करने का कार्य करेगी एवं बिहार के तमाम जिला में जल्द से जल्द कमिटी बनाने की बात कहीं.

बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं अधिवक्ता मुदस्सीर शम्स ने कहा कि लीगल सेल गांव-गांव तक पहुंचकर गरीब लोगों को मदद करेगी.

     इस अवसर पर लीगल सेल के संजय पाण्डेय, हरिमोहन मिश्रा, विनयकांत त्रिपाठी, जियाउल होदा, नीतीश पटेल, शाहरूख सिद्धिकी, गौहर अली, प्रियांशु कुमार, सुन्दरम पाठक, उज्जवल कुमार, मृगेन्द्र सिंह,राकेश कुमार मिश्रा, अजहर हुसैन, अंशु कुमार, राजदेव, नन्दसागर पासवान, अनिता कुमारी, मुराद अशरफ, अभय कुमार, धीरज कुमार सहगल, रवि परमार, शिखा राय, बालगोविन्द शर्मा के अलावे सैकड़ों अधिवक्ता उपस्थित थे.


आलोक कुमार

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