गुमनामी से गौरव तक: साकिबुल गनी के नेतृत्व में बिहार क्रिकेट का ऐतिहासिक उदय
बिहार क्रिकेट टीम के कप्तान साकिबुल गनी—आज यह नाम सिर्फ एक खिलाड़ी या कप्तान भर नहीं, बल्कि बिहार क्रिकेट के पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है.उनके नेतृत्व में बिहार ने विजय हजारे ट्रॉफी प्लेट ग्रुप और रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप में मणिपुर को पराजित कर खिताब अपने नाम किए और अब प्लेट से निकलकर एलीट ग्रुप में ऐतिहासिक प्रवेश कर लिया है.
विजय हजारे ट्रॉफी में इतिहास रचने वाला शतक
विजय हजारे ट्रॉफी प्लेट ग्रुप में नंबर-5 पर बल्लेबाज़ी करते हुए साकिबुल गनी ने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना तक मुश्किल थी.महज़ 32 गेंदों में शतक जड़कर उन्होंने इतिहास रच दिया.सिर्फ 40 गेंदों पर 128 रन की नाबाद पारी खेलते हुए साकिबुल गनी लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज़ शतक लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज़ बन गए.यह पारी सिर्फ रिकॉर्ड नहीं थी—यह बिहार क्रिकेट के बदले हुए मिज़ाज का ऐलान थी.
मोइनुल हक़ स्टेडियम: इतिहास का सजीव गवाह
रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप का फाइनल मुकाबला पटना के ऐतिहासिक मोइनुल हक़ स्टेडियम में खेला गया.जीर्णोद्धार की उम्मीद में खड़ी इसकी पुरानी दीवारें गवाह हैं कि बिहार क्रिकेट ने कितनी बेरुख़ी झेली, कितनी बार खुद को साबित करने का इंतज़ार किया.लेकिन इस बार फिज़ा बदली हुई थी.जब ख़िताबी मुक़ाबले में विरोधी टीम का आख़िरी विकेट गिरा, तो लगा मानो बिहार के सीने से वर्षों का बोझ उतर गया हो.यह सिर्फ एक जीत नहीं थी—यह उन तमाम सवालों का जवाब थी, जो वर्षों से बिहार क्रिकेट की क़ाबिलियत पर उठते रहे.
568 रनों की ऐतिहासिक जीत
बिहार ने मणिपुर को 568 रनों के विशाल अंतर से पराजित कर रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप का ताज अपने सिर सजाया।
पहली पारी: 522 रन, दूसरी पारी: 505 रन. ये आंकड़े नहीं, बल्कि उस ज़िद और आत्मविश्वास का प्रतीक थे, जो बिहार क्रिकेट ने वर्षों की उपेक्षा के बाद हासिल किया.
कप्तान की आंखों में संघर्ष की कहानी
जब ‘मैन ऑफ द मैच’ का खिताब साकिबुल गनी के हाथों में आया, तो उनकी चमकती आंखों में साफ़ झलक रहा था—गुमनामी से एलीट ग्रुप तक का लंबा, संघर्षपूर्ण सफर.इस रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप के प्रमुख प्रदर्शन.सर्वाधिक विकेट (18): हिमांशु सिंह (बिहार)
सर्वाधिक रन (540): आयुष लोहरूका
गौरतलब है कि हिमांशु सिंह अब 42 विकेट के साथ बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी में सर्वाधिक विकेट लेने वालों की सूची में पांचवें स्थान पर पहुंच चुके हैं.
पर्दे के पीछे के नायक
इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे कई ऐसे चेहरे हैं, जो कैमरों से दूर रहकर बिहार क्रिकेट की नींव मजबूत करते रहे.बीसीए के सचिव ज़ियाउल अरफ़ीन ने इस उपलब्धि का श्रेय.नंदन सिंह की मुस्तैदी,विनायक सामंत की रणनीतिऔर पूरे सपोर्ट स्टाफ के समर्पण को दिया. कोच संजय, मृदुल, डॉक्टर हेमेंदु और गोपाल—ये वो सिपहसालार हैं, जिन्होंने इस जीत की इबारत को मुकम्मल किया.
अब एलीट ग्रुप में बिहार
अब बिहार क्रिकेट का परचम एलीट ग्रुप में लहराएगा. यह जीत हर उस बिहारी क्रिकेट प्रेमी की रूह को सुकून देती है, जिसने मुश्किल दौर में भी अपनी टीम का साथ नहीं छोड़ा.
मुबारक हो बिहार!
आज तुम्हारी तक़दीर ने खुद अपने हाथों से नया इतिहास लिखा है.
आलोक कुमार