मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

डिजिटल बैंकिंग Fraud में कमी, लेकिन सतर्कता जारी

 डिजिटल बैंकिंग Fraud में कमी, लेकिन सतर्कता जारी


के डिजिटल युग में बैंकिंग सेवाएँ तेजी से डिजिटल हो गई हैं. मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग और ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं ने आम लोगों के लिए वित्तीय लेन-देन को सरल, तेज़ और सुविधाजनक बनाया है.हालांकि कभी-कभी डिजिटल दुनिया में इसके साथ जुड़े जोखिम भी सामने आते हैं, लेकिन ताज़ा आँकड़े बताते हैं कि बैंकिंग Fraud पर कड़ी निगरानी और जागरूकता से कुछ हद तक कमी देखी जा रही है.

फ़्रॉड में कमी, लेकिन खतरे अभी भी हैं

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अनुसार, डिजिटल बैंकिंग से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में गिरावट आई है.पिछले वित्तीय वर्ष में कुल शिकायतों में से डिजिटल फ्रॉड की हिस्सेदारी 20% से घटकर लगभग 17% हो गई है, जो कि निगरानी बढ़ने और जागरूकता अभियानों के कारण संभव हुआ है.

हालाँकि, यह गिरावट यह संकेत देती है कि नियंत्रण और सुरक्षा सिस्टम मजबूत हो रहे हैं, पर यह स्थिति यह भी दर्शाती है कि सतर्कता और सुरक्षा सजगता अभी भी जारी रखनी चाहिए.

बेहतर निगरानी, बैंक की Fraud टीमों की सक्रिय प्रतिक्रिया, और उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रमों के प्रभाव से यह सकारात्मक बदलाव आया है।

साथ ही RBI के कदमों में ऐसे उपाय शामिल हैं जो धोखाधड़ी के पीड़ितों को सहायता प्रदान करना चाहते हैं—यह भी डिजिटल सिस्टम पर भरोसा बनाए रखने का एक प्रयास है।

डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते फायदे

डिजिटल सेवाओं ने आम जनता के लिए वित्तीय लेन-देन को इतना सरल बना दिया है कि अब लोग:

*मोबाइल से ही तुरंत पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं

*यूपीआई से बिल और खाता भुगतान कर सकते हैं

*इंटरनेट बैंकिंग से फंड ट्रांसफर कर सकते हैं

डिजिटल सेवाओं के ज़रिए बचत और निवेश योजनाएँ भी संचालित कर सकते हैं

इन सेवाओं का उपयोग आसान और आर्थिक रूप से फायदेमंद रहा है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में लोगों का विश्वास भी बढा है.

सतर्कता है ज़रूरी

हालाँकि फ्रॉड में कमी आई है, यह बहती हवा की तरह नहीं है—यह लगातार जागरूकता और सुरक्षा उपायों से आता है.

इसलिए कुछ बातों पर हमेशा ध्यान देना चाहिए:

*OTP और बैंक विवरण किसी के साथ साझा न करें

*संदिग्ध लिंक या ऐप पर क्लिक न करें

*आधिकारिक बैंक ऐप का ही इस्तेमाल करें

*बैंक से आने वाली चेतावनी सूचनाओं को गंभीरता से लें

ये छोटे-छोटे सावधानियाँ डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित बनाती हैं.

क्यों बैंकिंग सेक्टर अब बेहतर है

डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दायरे के कारण बैंक और वित्तीय संस्थाएँ लगातार:

*दो-स्तरीय प्रमाणीकरण लागू कर रही हैं

*मशीन लर्निंग आधारित फ्रॉड सिस्टम ला रही हैं

*ग्राहक के व्यवहार को ट्रैक कर उचित सुरक्षा अलर्ट दे रही हैं

इन उपायों से न केवल धोखाधड़ी कम हो रही है, बल्कि उपयोगकर्ताओं के लिए भरोसा और सुरक्षा बढ़ रही है.

निष्कर्ष

आज के डिजिटल वित्तीय ज़माने में बैंकिंग की सुरक्षा में सुधार के संकेत मिल रहे हैं.RBI के आंकड़ों के अनुसार फ्रॉड मामलों में गिरावट एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसे स्थिरता और वृद्धि-हित बनाए रखने के लिए हम सबको सतर्क और जागरूक रहना आवश्यक है.डिजिटल सुविधा और सुरक्षा साथ-साथ चलने चाहिए—तभी यह तकनीक आम नागरिक के लिए सशक्त और सुरक्षित बन पाएगी.

आलोक कुमार

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