रविवार, 13 जुलाई 2025

पटना में व्यवसायी महासंघ, बिहार का स्थापना सम्मेलन संपन्न, व्यवसायी सुरक्षा आयोग के गठन की मांग तेज

 


उन्माद, उत्पात और अराजकता के माहौल में किसी का व्यवसाय सुरक्षित नहीं रह सकता : दीपंकर भट्टाचार्य

पटना में व्यवसायी महासंघ, बिहार का स्थापना सम्मेलन संपन्न, व्यवसायी सुरक्षा आयोग के गठन की मांग तेज

पटना .पटना के रविन्द्र भवन में आज व्यवसायी महासंघ, बिहार का स्थापना सम्मेलन आयोजित किया गया. सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाकपा-माले के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि देश एक गहरे आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है.मौजूदा आर्थिक नीतियों के कारण गरीबों की स्थिति लगातार बदतर हो रही है, जबकि बड़े पूंजीपतियों की संपत्ति में जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है.

                  उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट लूट और श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के खिलाफ किसान-मजदूरों के साथ मिलकर छोटे व्यवसायियों को एकजुट होना होगा। किसान, मजदूर और छोटे व्यापारियों की त्रिकोणीय एकता ही इस संघर्ष को मजबूती दे सकती है.

           दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज छोटी दुकानें बंद हो रही हैं, सरकारी नौकरियां खत्म हो रही हैं और किसान-मजदूरों की हालत बदतर होती जा रही है. बिहार में भी छोटे दुकानदारों, किसानों और मजदूरों के लिए कोई ठोस काम नहीं किया जा रहा। केवल ओवरब्रिज, मेट्रो और एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं की बातें हो रही हैं, जबकि छोटे बाजार, छोटे उद्योग और स्थानीय व्यापार को कोई समर्थन नहीं मिल रहा.उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यवसाय के लिए शांति, सौहार्द और भाईचारे का माहौल जरूरी है। लेकिन आज समाज में अपराध, उन्माद और अराजकता का बोलबाला है, जो व्यापार के लिए अत्यंत घातक है.

       उन्होंने यह भी कहा कि आज देश के संविधान पर सीधा हमला हो रहा है। संविधान और कानून का राज ही अन्याय को रोक सकता है। देश को आज़ादी सम्मान के लिए मिली थी, लेकिन अब सरकार अमेरिका की दबंगई के आगे झुक रही है.

          नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों ने देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है। बिहार में कर्ज वसूली के नाम पर महिलाओं का शोषण हो रहा है और आत्महत्याओं की घटनाएं बढ़ रही हैं.दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार में बदलाव की जरूरत है और इसके लिए मौजूदा सरकार को बदलना होगा। उन्होंने डबल इंजन सरकार को डबल बुलडोजर करार देते हुए कहा कि यह सरकार विकास की राह में रुकावट बन रही है.

              सम्मेलन को संबोधित करते हुए काराकाट से भाकपा-माले सांसद का. राजाराम सिंह ने कहा कि अपराध की घटनाओं का प्रतिकार करते हुए शांति और भाईचारे का माहौल कायम करना होगा, तभी व्यापार सुरक्षित रहेगा और आगे बढ़ेगा.उन्होंने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यह सरकार चंद बड़े व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर रही है और राजशाही की वापसी का प्रयास कर रही है। बिहार की जनता इसे कतई स्वीकार नहीं करेगी.

         विदित हो कि छोटे और मझोले व्यवसायियों की सुरक्षा, सम्मान और अस्तित्व के सवालों पर संगठित हस्तक्षेप की दिशा में में यह स्थापना सम्मेलन आज संपन्न हुआ. आरा से माले के सांसद सुदामा प्रसाद ने इसकी पहलकदमी ली। उन्होंने कहा कि व्यवसायियों के लिए सुरक्षा आयोग बने, यह हमारी पहली मांग है.पटना में जिस प्रकार से व्यवसायी गोपाल खेमका की हत्या हुई, उससे पूरा व्यापार जगत स्तब्ध है.

            कार्यक्रम के अध्यक्ष मंडल में का. सुदामा प्रसाद के अलावा लेमनचूस फैक्ट्री, पटना के पूर्व संचालक शंभूनाथ मेहता, फर्नीचर व्यवसायी सुरेन्द्र सिंह, भोजपुर के ईंट भट्ठा एसोसिएशन के अध्यक्ष उमाशंकर यादव, सीमेंट कारोबारी पूनम देवी, फुटपाथ दुकानदारों के नेता शहजादे आलम, सिकटा से माले विधायक वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता, शिव गंगा बस ट्रांसपोर्ट के ईश्वर दयाल सिंह, फारबिसगंज के किराना व्यवसायी रंजन भगत, हिंदुस्तान टायर के मालिक गंगा साह, राइस मिल एसोसिएशन के सच्चिदानंद राय आदि शामिल थे.

            मंच पर माले के राज्य सचिव कुणाल, एमएलसी शशि यादव, विधायक रामबलि सिंह यादव, पटना से अजय प्रसाद गुप्ता, गया से अजय कुमार, नालंदा से किशोर साव, जहानाबाद से विशाल गुप्ता, नवादा से सावित्री गुप्ता, रणविजय गुप्ता सहित पूरे बिहार से हजारों की तादाद में व्यवसायी आज पटना पहुंचे थे.


आलोक कुमार

https://youtu.be/907dOmSui_c?si=Vb0AICbqUPtc2uVo

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शनिवार, 12 जुलाई 2025

सीधे-सीधे बिहारी अस्मिता पर हमला

 जनता दल यूनाइटेड की सरकार, चुनाव आयोग के साथ मिलकर, बिहार के दलितों, पिछड़ों, शोषितों और गरीबों के वोट के अधिकार को छीनने का षड्यंत्र रच रही थी. यह न सिर्फ लोकतंत्र पर आघात भाजपा,जदयू ,चुनाव आयोग के षड्यंत्र की हार......

पटना .बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश राम ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम यहाँ एक ऐतिहासिक फैसले और एक जनविरोधी साजिश के पर्दाफाश के संदर्भ में आपसे संवाद करने के लिए उपस्थित हुए हैं.

    भारतीय जनता पार्टी और था, बल्कि यह
सीधे-सीधे बिहारी अस्मिता पर हमला था। लेकिन हम आपको यह बताते हुए गर्व और संतोष का अनुभव कर रहे हैं कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस साजिश पर करारा ब्रेक लगा दिया है.यह जीत सिर्फ एक कानूनी जीत नहीं है — यह पूरे बिहार की जनता की जीत है। यह उस भरोसे की जीत है जो उन्होंने देश के जननायक, नेता विपक्ष राहुल गांधी जी पर किया। राहुल जी ने बिहार बंद आंदोलन के दौरान यह वादा किया था कि वे बिहार के सरोकारों की लड़ाई अंतिम दम तक लड़ेंगे — और आज वो वादा साकार होते हुए दिख रहा है.

    सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने कहा — “यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो हमारे लोकतंत्र की जड़ों तक जाता है। यह वोटरों के मताधिकार के अधिकार का मामला है.” 10 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि बिहार में चल रहे विशेष तीव्र पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के दौरान आधार कार्ड, EPIC (मतदाता पहचान पत्र) और राशन कार्ड को पहचान प्रमाण के रूप में मानने पर गंभीरता से विचार करें.

    चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बार-बार आग्रह किया कि इन दस्तावेजों को स्वीकार करना आयोग के विवेकाधिकार पर निर्भर माना जाए। लेकिन न्यायमूर्ति धूलिया ने स्पष्ट कहा — “हमारा आदेश साफ है, चुनाव आयोग को इन तीन दस्तावेजों को स्वीकार करने पर विचार करना चाहिए.”कोर्ट ने यह भी कहा कि – “जब आयोग खुद कह रहा है कि 11 दस्तावेजों की सूची अंतिम नहीं है, तो न्यायहित में आधार, EPIC और राशन कार्ड को शामिल करना ही तार्किक होगा.”

    साथियों, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हमने SIR की प्रक्रिया पर रोक की कोई मांग नहीं की। यह बात कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज की है। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी — तब तक कोई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित नहीं की जाएगी.कोर्ट ने यह भी पूछा कि SIR की प्रक्रिया इतनी चुनाव-केंद्रित क्यों है? यह पुनरीक्षण न तो “संक्षिप्त” है, न “विशेष” — जैसा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 में कहा गया है.जब चुनाव आयोग ने यह तर्क दिया कि आधार सिर्फ पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं — तब न्यायमूर्ति धूलिया ने यह सवाल उठाया कि — “आज के समय में आधार सबसे बुनियादी पहचान पत्र है। जब मैं जाति प्रमाणपत्र बनवाता हूं तो आधार दिखाता हूं। फिर यह इस सूची में क्यों नहीं है? पूरी SIR प्रक्रिया का उद्देश्य तो सिर्फ व्यक्ति की पहचान है.”

      न्यायमूर्ति बागची ने भी दो टूक कहा — “आप जिन 11 दस्तावेजों को मान्य मानते हैं, उनमें से कोई भी सीधे नागरिकता सिद्ध नहीं करता। तो फिर सिर्फ आधार के विरोध में इतना आक्रोश क्यों? कानून के अनुसार चलिए.”यह सारा मामला सिर्फ दस्तावेजों का नहीं है, यह बिहार के करोड़ों लोगों के अधिकारों का सवाल है। कांग्रेस पार्टी साफ तौर पर मानना है कि चुनाव आयोग सत्ता में बैठे दलों के इशारे पर अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहा है, ताकि करोड़ों वोटर — खासकर दलित, पिछड़े और गरीब — मतदाता सूची से बाहर हो जाएं. यह ‘SIR’ एक फर्जी अभ्यास है, और 24 जून का प्रशासनिक आदेश बिहार के लोकतंत्र के साथ एक कुठाराघात है.हम सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक हस्तक्षेप का स्वागत करते हैं। कांग्रेस पार्टी इस लड़ाई को अंतिम सांस तक लड़ेगी। हम बिहार के एक-एक नागरिक की पहचान, सम्मान और मताधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.

      संवाददाता सम्मेलन में विधान परिषद में कांग्रेस दल के नेता डॉ. मदन मोहन झा, नेशनल मीडिया पैनालिस्ट प्रेम चन्द्र मिश्रा, नेशनल मीडिया  कोऑर्डिनेटर अभय दुबे, कोषाध्यक्ष जितेन्द्र गुप्ता, पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, मोतीलाल शर्मा ,  मीडिया चेयरमैन राजेश राठौर, नागेन्द्र कुमार विकल मौजूद थे .

आलोक कुमार

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शुक्रवार, 11 जुलाई 2025

तीन दिवसीय धर्म विधि संगोष्ठी

 तीन दिवसीय धर्म विधि संगोष्ठी


पटना.बिहार रीजनल बिशप कॉन्फ्रेंस (Bihar Regional Bishops Conference) के अधीन बक्सर, पटना, मुजफ्फरपुर,बेतिया,पूर्णिया और भागलपुर धर्मप्रांत है.बिहार के इन सभी धर्मप्रांतों में आस्था को गहरा करने के लिए तीन दिवसीय धर्मविधि संगोष्ठी का आयोजित की गई.इसका समापन आज हो गया.

     बिहार क्षेत्रीय बिशप परिषद (बीआरबीसी) के धर्म विधि आयोग ने 9 से 11 जुलाई, 2025 तक पटना स्थित बिहार चर्च क्षेत्र के क्षेत्रीय पादरी केंद्र, नवज्योति निकेतन में धर्म विधी पर तीन दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया.इस सम्मेलन में बिहार के सभी छह धर्मप्रांतों के 68 पल्ली पुरोहित और धर्म बहनें एकत्रित हुईं ताकि धर्मविधि प्रथाओं के प्रति उनकी समझ और प्रतिबद्धता को गहरा किया जा सके.

भारतीय कैथोलिक बिशप सम्मेलन के धर्म विधि आयोग के राष्ट्रीय सचिव, फादर रुडोल्फ राज पिंटो ओएफएम, इस संगोष्ठी के मुख्य संसाधन व्यक्ति थे.बीआरबीसी धर्म विधि आयोग के क्षेत्रीय सचिव, फादर विजय भास्कर ने इस कार्यक्रम का समन्वयन किया.

        कार्यक्रम के तीन दिनों के दौरान, फादर रुडोल्फ ने चर्च की धार्मिक पद्धति से संबंधित विविध विषयों पर कई सत्र प्रस्तुत किए.इनमें "धर्म विधि और संस्कारों की नींव", "यूकेरिस्ट का धार्मिक अनुष्ठान - मिस्सा की संरचना", "मंत्रालयों का विभाजन", "धर्म विधि अनुष्ठान में कर्तव्य और मंत्रालय", "धर्म विधि की व्यवस्था और अलंकरण", "धर्म विधि संगीत", और "लोकप्रिय धर्मपरायणता" शामिल थे. उनकी अंतर्दृष्टि पूर्ण प्रस्तुतियों ने कई प्रतिभागियों को अनेक प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित किया, जो एक गरिमापूर्ण धर्म विधि के प्रति उनकी गहरी रुचि और प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं.

     सेमिनार के प्रत्येक दिन बिहार क्षेत्र के एक बिशप की अध्यक्षता में आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यूकेरिस्ट अनुष्ठान का आयोजन किया गया.9 जुलाई को बक्सर धर्मप्रांत के बिशप जेम्स शेखर ने मिस्सा अनुष्ठान किया.10 जुलाई को पटना धर्मप्रांत के आर्चबिशप सेबेस्टियन कल्लुपुरा ने समारोह का नेतृत्व किया.कार्यक्रम के अंतिम दिन, मुजफ्फरपुर के बिशप कैजेटन ओस्टा, जो बीआरबीसी के अध्यक्ष भी हैं, ने मिस्सा अनुष्ठान की अध्यक्षता की.उनकी उपस्थिति और सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन के गहन आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया.

समूह चर्चा के दौरान, धर्मप्रांत के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने धर्मप्रांतों में इसी तरह के सेमिनार आयोजित करने की अपनी योजनाएं साझा की, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरे क्षेत्र में धर्म विधि नवीनीकरण की गति बनी रहे.

       संगोष्ठी का समापन उत्साहपूर्ण ढंग से हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने फादर विजय भास्कर, फादर अनिल बेनेट क्रूज़ (क्षेत्रीय सचिव, आस्था निर्माण) और नवज्योति निकेतन के कर्मचारियों के प्रति कार्यक्रम के आयोजन में उनके पूर्ण सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया. 


आलोक कुमार

बुधवार, 9 जुलाई 2025

छह महीने से मजदूरी भुगतान नहीं

छह महीने से मजदूरी भुगतान नहीं


मुजफ्फरपुर. 9 जुलाई की हड़ताल में भाग लेने मुजफ्फरपुर खुदीराम बोस स्मारक से समाहरणालय की ओर  मनरेगा वॉच कार्यकर्ता निकले और चल पड़े हमारी एकता जिंदाबाद का नारा लगाते.कार्यकर्ता बिहार बंद का समर्थन भी किए और आज से मुजफ्फरपुर समाहरणालय में मनरेगा वॉच के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना भी शुरू कर दिये.

     अनिश्चितकालीन धरना देने वाले धरनार्थियों का कहना है कि मुजफ्फरपुर जिले में वर्षा के बहाना बनाकर मनरेगा का काम बंद कर दिया गया है.वहीं मनरेगा कर्मियों को गत छह महीने से मजदूरी भुगतान नहीं किया गया है.मनरेगा वॉच के बैनर तले आज से बकाया मजदूरी सहित सात मांगों को लेकर यह बेमियादी धरना शुरू कर दिया गया है. देखते है इस बार जिला प्रशासन यह धरना कितना दिन चलेगा.

    मालूम हो कि मनरेगा के श्रमिकों की एक दिन की मजदूरी 245 रुपये है. मनरेगा के तहत साल में अधिकतम सौ दिनों का काम एक श्रमिक को दिया जाता है.मनरेगा वॉच कार्यकर्ताओं की मांग है कि मनरेगा श्रमिकों को 600 रुपए दैनिक हो और साल में 200 दिन काम मिले.

     उनका यह भी मांग है कि मनरेगा श्रमिकों से काम लिया जाए.इस जिले में जेसीबी से काम निकलवा रहे हैं.मनरेगा मद की राशि सब फालतू में  जेसीबी वाले हड़प ले जा रहे है.वहीं मनरेगा श्रमिकों को छह माह से मजदूरी भुगतान नहीं किया जा रहा है.


आलोक कुमार


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मंगलवार, 8 जुलाई 2025

शिल्पी नेहा तिर्की का जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने के संबंध में


राँची,जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की को धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनने को लेकर घेरने का प्रयास किया जा रहा है.संगठन के सामाजिक कार्यकर्ता मेधा उरांव, संदीप उरांव, सोमा उरांव, जगन्नाथ भगत, विशु उरांव, राजू उरांव, सनी उरांव टोप्पो एवं अन्य रांची डीसी से शिल्पी का जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं. संगठन के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने श्रीमान् उपायुक्त महोदय, राँची, झारखण्ड को पत्र लिखा है.पत्र का विषय है कि अनुसूचित जनजाति से धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनी श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की का जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने के संबंध में.

1. उपरोक्त विषय के संबंध में कहना है कि भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय का वाद संख्या 13086/2024 सी० सेल्या रानी बनाम विशेष सचिव सह जिला कलेक्टर एवं अन्य के बाद संख्या में स्पष्ट निर्णय दिया है कि ईसाई धर्म किसी भी जाति वर्गीकरण को मान्यता नहीं देता है.सभी ईसाईयों को समान माना जाता है और एक ईसाई और दूसरे प्रकार के ईसाई के बीच कोई अंतर नहीं है. ईसाई धर्म न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में प्रचलित है और ईसाई धर्म कही भी जाति विभाजन को मान्य है ईसाई धर्म के सिद्धांत ईसाई धर्म के मानने वाले व्यक्तियों को जाति किसी भी वर्गीकरण के आधार पर विभाजित या भेदभाव किये जाने के खिलाफ है.सामान्य नियम यह है कि धर्मान्तरण जाति से निष्कासन के रूप में कार्य करता है दूसरे शब्दों में धर्म परिवर्तन करने वालों की कोई जाति नहीं रह जाति है जाति व्यवस्था केवल हिन्दुओं में या सम्भवतः सिख धर्म जैसे हिन्दू धर्म से जुड़े कुछ धर्मों में प्रचलित है साथ ही माननीय न्यायालय ने यहाँ तक कहा है कि जब कोई व्यक्ति राष्ट्रपति आदेश के तहत प्रदान किये गए आरक्षण और अन्य लाभों को प्राप्त कर संविधान के उक्त लाभकारी प्रावधानों का अनुचित लाभ उठाना है हालांकि वह इसका हकदार नहीं है तो वह न केवल समाज के साथ धोखाधड़ी करता है बल्कि संविधान के साथ धोखाधड़ी करता है.श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की एक धर्मान्तरित ईसाई है.

2. संविधान (अनुसूचित जातियों) आदेश 1950 अनुच्छेद 341, खण्ड (1) क्रमांक 2 में इस आदेश के उपबंधों के अध्यधीन यह है कि वे जातियों, मूलवंश या जनजातियां या जातियों को जनजातियों के भाग या उनमें के यूथ जो कि इस आदेश की अनुसूची भाग संबद्ध जहाँ है वहाँ तक की उनके उन सदस्यों का संबंध है जो उन परिक्षेत्रों है जो उस अनुसूची के उन भागों में उनके संबंध में विनिर्दिष्ट है अनुसूचित समझे जाएंगे एवं क्रमांक 3 अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी कोई व्यक्ति जो हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म से भिन्न धर्म मानता है अनुसूचित जाति का सदस्य न समझा जाएगा अर्थात अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का सदस्य न समझा जाएगा.

3. माननीय केंद्रीय कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया है कि जनजाति लोगों को विभिन्न केन्द्रीय अधिनियमों में हिन्दू के रूप में परिभाषित किया है अर्थात आदिवासी हिन्दू ही है.

अतः श्रीमान् से अनुरोध है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय तथा महामहिम राष्ट्रपति के आदेश एवं भारत सरकार के विधि एवं न्याय विभाग के आदेश के आलोक में ईसाई धर्म में धर्मान्तरित श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की (पति श्री सन्नी विल्फ्रेड जेम्स लकड़ा) पिता बंधु तिर्की ग्राम-दही सोत (वनहोरा) ऊपर टोली थाना पंडरा अंचल कार्यालय रातू राँची के द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र सं०-JHCST/2022/187696 दिनांक-02.05.2022 को अविलंब निरस्त करने की कृपा की जाए.

संलग्न

1. माननीय सुप्रीम कोर्ट वाद सं०-13086/2024 की छायाप्रति

2. संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश 1950 की छायाप्रति

3. माननीय केंद्रीय कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल लोकसभा में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर की छायाप्रति

4. अंचल कार्यालय रातू राँची द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र

सं०- JHCST/2022/187696 दिनांक-02.05.2022 की छायाप्रति मिनी विशीच की

(मेघा उराँव) सामाजिक कार्यकर्ता ग्राम सरना आदर्श कॉलोनी पतराटोली, पो०-बालालौंग

आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं संगठन के लोगों के द्वारा जो अनुसूचित जनजाति से धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनी शिल्पी नेहा तिर्की कृषि मंत्री झारखंड) का जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की मांग पत्र उपायुक्त रांची को सौंपा. उपायुक्त रांची से मिलने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एवं संगठन के मेघा उरांव, संदीप उरांव, सोमा उरांव, जगन्नाथ भगत, विशु उरांव, राजू उरांव, सनी उरांव टोप्पो एवं अन्य.

आलोक कुमार


सोमवार, 7 जुलाई 2025

चुनाव आयोग के ताजा विज्ञापन से मतदाता पुनरीक्षण को लेकर साफ दिखी षड्यंत्र

 


*प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने किया सवाल, क्या चुनाव आयोग का विज्ञापन बड़े षड्यंत्र की है आहट?

*वोटर पुनरीक्षण में मांगे जा रहे कागजात, मतदाताओं के साथ धोखा है, अन्याय है और षड्यंत्र है: राजेश राम

*चुनाव आयोग के ताजा विज्ञापन से मतदाता पुनरीक्षण को लेकर साफ दिखी षड्यंत्र: राजेश राम

पटना . बिहार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने चुनाव आयोग के आज के विज्ञापन को लेकर जिसमें कागजातों और तस्वीरों को लेकर सूचना छपी है कि उनकी आवश्यकता मतदाता पुनरीक्षण में नहीं है, को लेकर चुनाव आयोग के द्वारा बड़े षड्यंत्र का आरोप लगाया है.

     संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि मतदाता सूची से संबंधित फॉर्मों पर जारी एक पोस्टर में चुनाव आयोग ने अब कहा है कि निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO) दस्तावेजों के बिना भी सत्यापन पर निर्णय ले सकता है.पोस्टर में कहा गया है कि “यदि आवश्यक दस्तावेज़ और फोटो उपलब्ध नहीं हैं, तो बस नामांकन फॉर्म भरें और उसे बूथ स्तर अधिकारी (BLO) को दें.” इसमें आगे अहम बात यह जोड़ी गई है कि “यदि आप आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, तो चुनाव रजिस्ट्रेशन अधिकारी स्थानीय जांच या अन्य दस्तावेज़ों के आधार पर निर्णय ले सकता है.” इसका अर्थ यह है कि ERO उन लोगों से मिलने मौके पर जाएंगे जिन्होंने दस्तावेज़ जमा नहीं किए हैं. वे यह सुनिश्चित करेंगे कि फॉर्म भरने वाला व्यक्ति 18 वर्ष का है या नहीं, उस क्षेत्र में निवास की अवधि की जानकारी लेंगे, आसपास के लोगों से बात करेंगे और उपलब्ध साक्ष्य व दस्तावेज़ों के आधार पर निर्णय लेंगे.यह विज्ञापन न सिर्फ़ चुनाव आयोग की अकर्मण्यता की पोल खोलता है अपितु बिहार विधान सभा में सत्ता धारी दल की अनैतिक मदद की आशंका भी पैदा करता है.

     हमारे इस संदर्भ में कुछ प्रासंगिक सवाल :-

1. सवाल यह उठता है कि फिर इस पूरी प्रक्रिया की प्रासंगिकता क्या रह गई है ?

2. क्या यह एक नियोजित  षड्यंत्र है कुछ राजनीतिक दलों को लाभ पहुंचाकर लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने का ?

3. अगर अंतिम निर्णय ईआरओ के विवेक पर छोड़ा गया है तो क्या बहुत बड़ी संख्या में भाजपा और जेडीयू की सरकार दबाव बनाकर वोटर लिस्ट में मनमानी नहीं करेगी?

4. क्या हाल ही में बिहार में स्पेशल समरी रिवीजन वोटर लिस्ट का नहीं किया गया है । जिसमें 6 जनवरी 2025 में अंतिम प्रकाशन मतदाता सूची का किया गया है जिसके तहत:-

    1.घर-घर जाकर सर्वेक्षण

    2.भौतिक स्थल पर जाकर सत्यापन

    3 . दावों और आपत्तियों की सूची का प्रदर्शन और साझा करना

    4 . प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची को राजनीतिक दलों के साथ साझा करना.

जब यह पूरी प्रक्रिया जनवरी में ही की जा चुकी है तो फिर वही प्रक्रिया चुनावों के ठीक पहले फिर करना संदेह पैदा करने वाली है .चुनाव आयोग को तुरंत इस निर्णय को वापस लेना चाहिए, क्योंकि जो खबर इस प्रक्रिया को लेकर बिहार के विधानसभा क्षेत्रों से आ रही है कि लोग ख़ुद किसी भी प्रकार का फॉर्म भरने में समर्थ नहीं है वो चिंता बढ़ाने वाली है .

    संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के अलावे विधान परिषद में दल के नेता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा, नेशनल मीडिया पैनलिस्ट पूर्व विधान पार्षद प्रेम चंद मिश्र, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, सोशल मीडिया विभाग के चेयरमैन सौरभ सिंहा, असित नाथ तिवारी, मंजीत आनंद साहू, प्रो विजय कुमार सहित अन्य नेतागण मौजूद रहें.


आलोक कुमार

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