Bihar : इन दिनों पेट्रोल की कालाबाजारी का एक नया और खतरनाक तरीका

यह पूरा खेल बेहद खतरनाक होने के बावजूद तेजी से फैलता जा रहा है।

राजधानी पटना के दीघा इलाके में इन दिनों पेट्रोल की कालाबाजारी का एक नया और खतरनाक तरीका सामने आया है। कभी मुख्य सड़क पर खुलेआम कोल्ड ड्रिंक्स की बोतलों में पेट्रोल बिकता दिखाई देता था, लेकिन प्रशासन की सख्ती और पेट्रोल पंपों पर प्लास्टिक के जार में तेल देने पर रोक लगने के बाद अब धंधेबाजों ने नया रास्ता निकाल लिया है। वे मोटरसाइकिल और अन्य वाहनों की टंकी को ओवरफुल कराकर पेट्रोल लाते हैं और फिर दुकानों या गुप्त ठिकानों पर पाइप की सहायता से उसे बोतलों में निकालकर बेचते हैं। यह पूरा खेल बेहद खतरनाक होने के बावजूद तेजी से फैलता जा रहा है।

दीघा और आसपास के क्षेत्रों में कई जगहों पर पान दुकानों, गुमटियों और छोटे ठेलों पर कोल्ड ड्रिंक्स की बोतलों में पेट्रोल छिपाकर रखा जाता है। ग्राहकों की पहचान के लिए दुकानदार बोतल के ढक्कन या टीप को ऊपर की ओर रखते हैं ताकि सामान्य लोगों को पता न चले, लेकिन जरूरतमंद ग्राहक आसानी से पहचान सकें। यह अवैध कारोबार अब गुप्त संकेतों और पहचान के आधार पर चलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पेट्रोल 120 से 130 रुपये प्रति लीटर तक बेचा जा रहा है, यानी सरकारी कीमत से काफी अधिक दर पर।

असल में यह समस्या अचानक पैदा नहीं हुई। पिछले कुछ समय से पटना के कई पेट्रोल पंपों पर तेल की सीमित आपूर्ति की खबरें सामने आ रही हैं। कुछ पंपों पर बाइक चालकों को केवल 300 से 400 रुपये तक का ही पेट्रोल दिया जा रहा है। इसी स्थिति का फायदा उठाकर कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो गए हैं। पहले वे प्लास्टिक के जार लेकर सीधे पेट्रोल पंप पहुंचते थे, लेकिन प्रशासन के निर्देश के बाद पंप मालिकों ने बोतलों और जार में पेट्रोल देना बंद कर दिया। इसके बाद धंधेबाजों ने नया तरीका निकाला—वाहन की टंकी फुल कराओ और फिर सुनसान जगह पर पेट्रोल निकालकर बोतलों में बेचो।

यह धंधा केवल गैरकानूनी ही नहीं बल्कि जानलेवा भी है। पेट्रोल अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ है। प्लास्टिक की बोतलों में पेट्रोल रखने से आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। गर्मी, धूप, स्थैतिक बिजली या मामूली चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। किसी पान दुकान या भीड़भाड़ वाले इलाके में यदि आग लग जाए तो भारी जनहानि हो सकती है। इसके बावजूद कुछ लोग मामूली मुनाफे के लिए लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।

बिहार सरकार और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पहले ही इस मामले में सख्त निर्देश जारी कर चुके हैं। नियम स्पष्ट है कि प्लास्टिक की बोतलों, थैलियों या किसी भी अनधिकृत कंटेनर में पेट्रोल और डीजल बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित है। पेट्रोल पंप मालिकों को साफ निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी ग्राहक को प्लास्टिक बोतल या जार में पेट्रोल न दें। केवल आपातकालीन स्थिति में ISI मार्क वाले धातु के कंटेनर में ही सीमित मात्रा में पेट्रोल दिया जा सकता है।

सरकार की इस सख्ती के पीछे केवल नियम नहीं बल्कि सुरक्षा की गंभीर चिंता है। कई बार पेट्रोल का इस्तेमाल आगजनी और आपराधिक गतिविधियों में भी होता रहा है। खुलेआम बोतलों में पेट्रोल बिकने से असामाजिक तत्वों को आसानी हो सकती है। यही कारण है कि पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और अवैध बिक्री रोकने की कोशिश कर रही है। दीघा क्षेत्र में भी कई जगहों पर पुलिस की रेड हुई है, लेकिन धंधेबाज नए-नए तरीके अपनाकर बच निकलते हैं।

यह भी सच है कि पेट्रोल की कृत्रिम किल्लत और सीमित आपूर्ति जैसी स्थितियां ऐसे अवैध कारोबार को बढ़ावा देती हैं। जब आम लोगों को आसानी से पेट्रोल नहीं मिलता, तब मजबूरी में वे ऊंचे दाम पर भी खरीदने को तैयार हो जाते हैं। इस स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोग काला बाजार खड़ा कर देते हैं। इसलिए प्रशासन को केवल छापेमारी ही नहीं बल्कि नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देना होगा।

समाज के स्तर पर भी जागरूकता जरूरी है। कई लोग सुविधा के लिए बोतल में पेट्रोल खरीद लेते हैं, लेकिन वे शायद यह नहीं समझते कि यह कदम कितना खतरनाक हो सकता है। एक छोटी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है। सड़क किनारे रखी पेट्रोल की बोतलें किसी बम से कम नहीं हैं। यदि किसी बच्चे ने शरारत में आग लगा दी या कोई वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, तो पूरा इलाका खतरे में पड़ सकता है।

प्रशासन, पेट्रोल पंप संचालकों और आम जनता—तीनों की जिम्मेदारी है कि इस अवैध कारोबार को खत्म किया जाए। पुलिस को नियमित निगरानी बढ़ानी होगी, पेट्रोल पंपों को नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा और लोगों को भी ऐसे अवैध धंधे से दूरी बनानी होगी। कुछ रुपये बचाने या सुविधा के लिए बोतल में पेट्रोल खरीदना खुद अपने और दूसरों के जीवन को खतरे में डालना है।

पटना जैसे तेजी से बढ़ते शहर में सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना बेहद जरूरी है। दीघा में पेट्रोल की बोतलबंदी का यह खेल केवल अवैध व्यापार नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। यदि समय रहते इस पर पूरी तरह रोक नहीं लगी, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा पूरे शहर को हिला सकता है।

आलोक कुमार

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