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जनवरी 21, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
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बक्सर धर्मप्रांत के शाहपुर पैरिश के संस्थापक फादर निकोलस पोलार्ड आज पोलार्ड दिवस के रूप में मनाया गया बक्सर. बक्सर धर्मप्रांत के शाहपुर पैरिश के संस्थापक फादर निकोलस पोलार्ड,एस.जे.को बड़ी शिद्दत से पुण्यतिथि के अवसर पर याद किया गया.आज पोलार्ड दिवस के रूप में मनाया गया.     आज शाहपुर पैरिश के पल्ली पुरोहित फादर विजय भास्कर बोज्जा ने पवित्र मिस्सा अर्पित किया.इस अवसर पर फादर ने धर्मोपदेश दिया. धर्मोपदेश का थीम था फादर पोलार्ड का जीवन और मिशन.इस पर बोलते हुए फादर विजय भास्कर बोज्जा ने कहा कि फादर पोलार्ड का जन्म कनाडा में हुआ मगर दिल हिंदुस्तानी बनकर रह गया.    उनका जन्म माह मार्च 1905 में कनाडा में हुआ था.जब 21 साल के तब विश्व विख्यात येसु समाज के बिहार के पटना प्रोविंस में 1926 में प्रवेश किये.बाद में 1947 में पुरोहित बने. पुरोहित बनने के बाद में एक मिशनरी पुरोहित के रूप में  1945 में शाहपुर मिशन में आये और लोगों के जीवन को बदलने के लिए कड़ी मेहनत करने लगे. वे शाहपुर मिशन के पहले पल्ली पुरोहित थे. फादर पोलार्ड शाहपुर मिशन में लगभग 35 साल तक थे. फादर भास्कर बोज्जा...
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कुछ निवाले ही खाता और बाकी को फेंक देता अपने बाकी परिवार और दोस्तों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया पटना.एक गांव में गणेश नाम का एक जवान लड़का रहता था.मगर गणेश लापरवाह था और अक्सर अपना खाना बर्बाद करता था.इस महंगी में भी वह अक्सर अपने खाने में से कुछ निवाले ही खाता और बाकी को फेंक देता था.    एक दिन गणेश का परिवार एक गरीब गांव की यात्रा पर गया था.जब वे पहुंचे, तो उन्होंने बहुत से बच्चों को देखा जो भूखे थे और उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था. गणेश भूखे बच्चों को देखकर दुखी हो गया और महसूस करने लगा कि वह कितना भाग्यशाली है कि उसे कम से कम खाने के लिए भोजन तो मिल जा रहा है.     अगले दिन गांव में , गणेश का परिवार एक संस्था में जाता है जहाँ स्वयंसेवक गाँव में भूखे लोगों को भोजन परोसते दिखे गणेश यह देखकर चैंक गया कि कितने सारे लोग एक समय के भोजन के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते हैं. उसने महसूस किया कि भोजन को बर्बाद करना न केवल अपमानजनक है बल्कि दूसरों के लिए भी हानिकारक है. जब गणेश घर वापस गया, तो उसने खुद से वादा किया कि वह फिर कभी खाना बर्बाद नहीं करेगा.अब वह उस भोज...