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बक्सर धर्मप्रांत के शाहपुर पैरिश के संस्थापक फादर निकोलस पोलार्ड

आज पोलार्ड दिवस के रूप में मनाया गया


बक्सर. बक्सर धर्मप्रांत के शाहपुर पैरिश के संस्थापक फादर निकोलस पोलार्ड,एस.जे.को बड़ी शिद्दत से पुण्यतिथि के अवसर पर याद किया गया.आज पोलार्ड दिवस के रूप में मनाया गया.

    आज शाहपुर पैरिश के पल्ली पुरोहित फादर विजय भास्कर बोज्जा ने पवित्र मिस्सा अर्पित किया.इस अवसर पर फादर ने धर्मोपदेश दिया. धर्मोपदेश का थीम था फादर पोलार्ड का जीवन और मिशन.इस पर बोलते हुए फादर विजय भास्कर बोज्जा ने कहा कि फादर पोलार्ड का जन्म कनाडा में हुआ मगर दिल हिंदुस्तानी बनकर रह गया.

   उनका जन्म माह मार्च 1905 में कनाडा में हुआ था.जब 21 साल के तब विश्व विख्यात येसु समाज के बिहार के पटना प्रोविंस में 1926 में प्रवेश किये.बाद में 1947 में पुरोहित बने.

पुरोहित बनने के बाद में एक मिशनरी पुरोहित के रूप में  1945 में शाहपुर मिशन में आये और लोगों के जीवन को बदलने के लिए कड़ी मेहनत करने लगे. वे शाहपुर मिशन के पहले पल्ली पुरोहित थे. फादर पोलार्ड शाहपुर मिशन में लगभग 35 साल तक थे.

फादर भास्कर बोज्जा ने कहा कि फादर पोलार्ड के कारण ही शाहपुर पल्ली फल-फूल रहा है. शाहपुर पल्ली के लोग फादर पोलार्ड के प्रति कृतज्ञ है.यहां से फादर देवाशीष प्रसाद एस.जे.पुरोहित और 9 सिस्टर बनी है. उनके प्यार और कृतज्ञता के भाव से ग्रसित होकर हमलोग हर साल उनकी पुण्यतिथि मनाते हैं.उनका निधन 09 जनवरी 1984 को हो गया.

    पवित्र मिस्सा के बाद लोग पुरोहितों के निवास की ओर चले गए.यहां पर फादर निकोलस पोलार्ड,एस.जे.के पुरोहित अभिषेक 1947 के 75 साल पूरा होने पर 09 जनवरी 2022 को प्लैटिनम जुबली  के अवसर पर स्मृति स्थापित की गयी.मौके पर स्मृति स्थल पर फादर डोनाल्ड मिरांडा एस.जे. पटना, प्रांतीय सुपीरियर और पटना धर्मप्रांत के आर्चबिशप विलियम डिसूजा एस.जे. (एमेरिटस) अपोस्टोलिक प्रशासक,बक्सर धर्मप्रांत उपस्थित थे.शाहपुर पल्ली पुरोहित फादर विजय भास्कर बोज्जा भी उपस्थित थे.

      स्मृति स्थल के समक्ष उपस्थित होकर लोग मुक्तकंठ से शाहपुर पैरिश के संस्थापक फादर निकोलस पोलार्ड, एस.जे.का यशोगान किये.एकत्रित लोगों ने पुष्प अर्पित किये.लोगों ने एकत्रित होकर पुष्प भी अर्पित किये.अंत में लोगों को जिलेबी (मिठाइयां) दी गई.



आलोक कुमार

कुछ निवाले ही खाता और बाकी को फेंक देता

अपने बाकी परिवार और दोस्तों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया


पटना.एक गांव में गणेश नाम का एक जवान लड़का रहता था.मगर गणेश लापरवाह था और अक्सर अपना खाना बर्बाद करता था.इस महंगी में भी वह अक्सर अपने खाने में से कुछ निवाले ही खाता और बाकी को फेंक देता था.

   एक दिन गणेश का परिवार एक गरीब गांव की यात्रा पर गया था.जब वे पहुंचे, तो उन्होंने बहुत से बच्चों को देखा जो भूखे थे और उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था. गणेश भूखे बच्चों को देखकर दुखी हो गया और महसूस करने लगा कि वह कितना भाग्यशाली है कि उसे कम से कम खाने के लिए भोजन तो मिल जा रहा है.

    अगले दिन गांव में , गणेश का परिवार एक संस्था में जाता है जहाँ स्वयंसेवक गाँव में भूखे लोगों को भोजन परोसते दिखे गणेश यह देखकर चैंक गया कि कितने सारे लोग एक समय के भोजन के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते हैं. उसने महसूस किया कि भोजन को बर्बाद करना न केवल अपमानजनक है बल्कि दूसरों के लिए भी हानिकारक है.

जब गणेश घर वापस गया, तो उसने खुद से वादा किया कि वह फिर कभी खाना बर्बाद नहीं करेगा.अब वह उस भोजन की सराहना करने लगा जो उसे खाने के लिए दिया जाता था और अब वो बिना बर्बादी के अपना सारा खाना खाने लगा.उसने अपने बाकी परिवार और दोस्तों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया.

गणेश ने महसूस किया कि भोजन एक अनमोल संसाधन है जिसे कभी भी बर्बाद नहीं करना चाहिए.उसने जाना कि संसार में करोड़ों लोग भूखे हैं, और भोजन को बर्बाद करके वह उनके दुख को और बढ़ा देता है.


आलोक कुमार 

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