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ईसा मसीह के खिलाफ षड्यंत्र रच कर उन्हें सूली पर लटकाया गया

पटना.इस साल 15 अप्रैल को गुड फ्राइडे है.इन दिनों ईसाई समाज 40 दिनों का उपवास रखते हैं.ईसाई धर्म में आस्था रखने वालों के लिए भी गुड फ्राइडे का दिन बहुत अहम है.बाइबल के अनुसार, इसी दिन ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह के खिलाफ षड्यंत्र रच कर उन्हें सूली पर लटकाया गया था. इस वर्ष गुड फ्राइडे 15 अप्रैल को मनाया जाएगा.दरअसल, गुड फ्राइडे के साथ ईसाई धर्म के लोगों के लिए पाम संडे और ईस्टर डे भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

इस साल पाम संडे 10 अप्रैल को है.वहीं गुड फ्राइडे 15 अप्रैल को है और ईस्टर संडे 17 अप्रैल को है.बाइबल, यूहन्ना 18 और 19 में इन तीन दिनों में जो घटना घटी थी उसका उल्लेख किया गया है. बाइबल के अनुसार, पाम संडे पर ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह यरूशलेम पहुंचे थे जहां लोगों ने उनका स्वागत खजूर की डालियों को बिछाकर किया था, इस घटना के वजह से इस दिन को पाम संडे का नाम दिया गया है. जब वह  यरूशलेम यानी इजरायल की राजधानी  यरूशलेम  पहुंचे थे तब उन्हें सूली पर लटकाया गया था. जिस दिन उनकी मृत्यु हुई थी उस दिन को गुड फ्राइडे के नाम से जाना जाता है. आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे की, ठीक 3 दिन बाद यानी रविवार के दिन मेरी मेग्दलीन नाम की एक महिला ने ईसा मसीह को उनके कब्र के पास देखा था. यह चमत्कारी घटना जिस दिन हुई थी उसे ईस्टर संडे कहा गया.

आज भी इजराइल की राजधानी जेरूसलम में वह जगह मौजूद है जहां ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था. यह जगह गोलगोथा के नाम से पूरे विश्व में मशहूर है. जिस जगह गोलगोथा मौजूद है वह हिल ऑफ द केलवेरी के नाम से जाना जाता है. इसी जगह पर चर्च ऑफ फ्लेजिलेशन स्थित है जहां सार्वजनिक रूप से ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह की निंदा की गई थी. मान्यताओं के अनुसार, चर्च ऑफ फ्लेजिलेशन के मार्ग को दर्द या पीड़ा का मार्ग कहा जाता है. इस स्थान पर नौ और ऐतिहासिक स्थल स्थित है.

पटना महाधर्मप्रांत के प्रेरितों की रानी कैथेडल में मिस्सा पूजा में शामिल होने वाले भक्तगण प्रभु येसु ख्रीस्त की दुःखभरी यात्रा को एक झांकी के रूप में दर्शाकर प्रार्थना करते हैं.हरेक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी गुड फ्राइडे को प्रभु येसु ख्रीस्त की दुःखमयी घटना को एक झांकी के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया था.दिनांक 15 अप्रैल ( गुड़ फ्राइडे) के पुण्य बेला में सुबह सात बजे से लोयला हाई स्कूल, कुर्जी से प्रारम्भ होकर कुर्जी के मुख्य सड़क से होते हुए प्रभु ईसा की दुःखमयी यात्रा को एक झांकी के रूप में दर्शाते हुए, प्रार्थना और भक्ति गीतों के साथ कुर्जी चर्च में जाकर एक विशेष प्रार्थना के साथ संपन्न होगी.

यह बताया गया कि यह कलीसिया का काम है जो लोकधर्मियो द्वारा आयोजित किया जा रहा है. निवेदक विक्टर फ्रांसिस का नम्र निवेदन है कि इस धार्मिक कार्य में आप अपने स्तर से सहयोग करें ताकि इसे हम एक साथ मिलकर और भी भक्तिमय और दूसरों के लिए प्रेरणादायक बना सकें.आज दिनांक 2 अप्रैल को और कल दिनांक 3 अप्रैल को संध्या 4 बजे से इसके रिहर्सल में उपस्थित होकर अपना योगदान देने की कृपा करें.आशा करता हूं कि आप अपनी भागदौड़ की जिंदगी में से कुछ समय इस पुण्य कार्य के लिए अवश्य निकलने की कोशिश करेंगे.

आलोक कुमार

बक्सर धर्मप्रांत में 29 जून 2018 से बिशप नहीं

पटना.कैथोलिक धर्मप्रांत में इलाहाबाद धर्मप्रांत विश्व का सबसे बड़ा धर्मप्रांत था.इसमें कोलकाता, पटना, जबलपुर, इंदौर, लखनऊ, झांसी और गोरखपुर आते थे. 1887 में कोलकाता धर्मप्रांत, पटना धर्मप्रांत 1919 में, 1932 में जबलपुर धर्मप्रांत, 1935 में इंदौर धर्मप्रांत, 1940 में लखनऊ धर्मप्रांत व 1946 में गोरखपुर इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग हुए.

1845 मे हुगली दो विकारिएट में विभाजित हुआ. एक भाग चटगांव विकारिएट और दूसरा कोलकाता विकारिएट जो पूर्वी बंगाल और पश्चिम बंगाल के नाम से जाने जाते थे. पश्चिम बंगाल को 1864 में बेल्जियम जेसुइट पुरोहितों के हाथों सौंपा गया.वह महाधर्मप्रांत के अस्तित्व में आया. मिशनरियों ने 1865 में मिदनापुर, बालासेार, 1868 में 24 परगना, 1869 में चाईबासा और 1870 में छोटानागपुर क्षेत्र में विकास का काम किया.

रोम 1812 में एक विकारिएट में तिब्बत-हिंदुस्तान के प्रान्त बनवाया. 1827 एक स्वतंत्र पटना विकारिएट बनाया गया था.जिसमें बेतिया , चुहड़ी , पटना सिटी , दानापुर , भागलपुर , दार्जिलिंग , सिक्किम , नेपाल तथा निकटवर्ती प्रदेशों. संत अनास्तासियस हार्टमैन को इसका पहला विकार अपोस्टोलिक नियुक्त किया गया था. पोप लियो एक्सटीटीआई के एक डिक्री के साथ पटना विकारिएट 1886 में इलाहाबाद धर्मप्रांत का हिस्सा बन गया.बेतिया, चुहड़ी , चखनी और लातौना के अपने चार स्टेशनों के साथ उत्तर बिहार मिशन को 1886 में टायरोलिस कैपुचिन्स को सौंपा गया था. मई 1892 में उत्तर बिहार मिशन बेतिया - नेपाल प्रीफेक्चर बनाया गया था, जिसका पहला प्रीफेक्ट अबतेई के फादर हिलारियन, ऑफम कैप था. 1919 में इस प्रान्त को भंग कर दिया गया और पटना के वर्तमान धर्मप्रांत के रूप में दक्षिण बिहार में शामिल हो गया.

पोप बेनेडिक्ट 15 वें ने 10 सितंबर 1919 को एक डिक्री द्वारा इलाहाबाद के धर्मप्रांत को दो में विभाजित किया. इस प्रकार पटना का धर्मप्रांत बनाया गया था. बेतिया-नेपाल के प्रीफेक्चर को नए धर्मप्रांत के साथ जोड़ा गया था. परमधर्मपीठ ने पटना धर्मप्रांत को सोसाइटी ऑफ जीसस के अमेरिकी मिसौरी प्रांत को सौंपा. बाद में, 13 नवंबर 1930 को, मिसौरी प्रांत के विभाजन के बाद, पटना धर्मप्रांत को सोसाइटी ऑफ जीसस के शिकागो प्रांत को सौंपा गया था. बेल्जियम के जेसुइट लुइस वैन होएक को 20 जुलाई 1920-15 फरवरी 1928 पटना का पहला बिशप नियुक्त किया गया था. 6 मार्च 1921 में विधिवत फादर लुइस वानहुक को पटना धर्मप्रांत के प्रथम  धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषिक्त किया गया.

आपको मालूम है कि इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग होकर बना है पटना धर्मप्रांत. जी हां, संत पिता बेनेडिक्ट 15 वें के कार्यकाल में 10 सितम्बर 1919 को इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग करके पटना धर्मप्रांत की स्थापना की गयी थी.इसके 2 साल के बाद पटना धर्मप्रांत को प्रथम धर्माध्यक्ष मिला.प्रथम धर्माध्यक्ष बनने का श्रेय फादर लुइस वानहुक को प्राप्त हुआ. 6 मार्च 1921 में विधिवत फादर लुइस वानहुक को पटना धर्मप्रांत के प्रथम  धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषिक्त किया गया.

बिशप लुई वैन होएक , एसजे (6 मार्च 1921 - 15 फरवरी 1928),बिशप बर्नार्ड जेम्स सुलिवन , एसजे (15 जनवरी 1929 - 6 जून 1946),बिशप ऑगस्टीन फ्रांसिस वाइल्डरमुथ , एसजे (12 जून 1947 - 6 मार्च 1980),बिशप बेनेडिक्ट जॉन ओस्टा, एसजे (76) (बाद में आर्चबिशप ) (6 मार्च 1980 - 16 मार्च 1999),बिशप विलियम डिसूजा( बाद में आर्चबिशप ) (12 दिसंबर 2005 -ं9 दिसंबर 2020) और अब सेबस्टियन कल्लूपुरा ( बाद में आर्चबिशप) April 3, 2009....)                                

पटना धर्मप्रांत को विभक्त कर मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत बनाया. मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत को विभक्त कर बेतिया धर्मप्रांत बनाया. पटना महाधर्मप्रांत को विभक्त कर बक्सर धर्मप्रांत बनाया.  जून 29, 2018 से बिशप नहीं हैं. अभी सेवानिवृत आर्चबिशप विलियम डिसूजा को प्रेरितिक प्रशासक बनाकर काम निकाला जा रहा है.

                                                                                                                                                                      आलोक कुमार

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