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उनकी स्थिति आज भी संवैधानिक हकों से कोसों दूर

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  बिहार में फिर गूंजा भूमि अधिकार का सवाल: तीन डिसमिल को लेकर जन सुराज का प्रदर्शन तेज 17 साल बाद भी लागू नहीं हुई बंदोपाध्याय आयोग की सिफारिशें, चुनावी मौसम में गरमाया मुद्दा पटना. बिहार में आवासीय भूमिहीनों को जमीन देने का वादा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है. वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भूमि सुधार के लिए डी. बंदोपाध्याय आयोग का गठन किया था, जिसने 2008 में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी. रिपोर्ट में स्पष्ट सिफारिश की गई थी कि भूमिहीनों को आवास के लिए जमीन दी जानी चाहिए. प्रारंभ में सरकार ने दस डिसमिल जमीन देने की बात कही, जिसे बाद में पांच डिसमिल और अंततः तीन डिसमिल तक सीमित कर दिया गया.मगर 17 साल बाद भी इन सिफारिशों को जमीन पर उतारने की कोई ठोस पहल नहीं की गई है. अब ‘जन सुराज’ ने उठाया मोर्चा राज्य में चुनावी माहौल के बीच ‘जन सुराज’ संगठन ने इस मुद्दे को फिर से जोरदार ढंग से उठाया है.संगठन के कार्यकर्ता प्रदेश भर में प्रदर्शन कर रहे हैं और तीन डिसमिल भूमि आवंटन को चुनावी एजेंडे में शामिल करने की मांग कर रहे हैं. जन सुराज के संस्थापक सदस्य गोडेन अ...