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सोमवार, 27 जुलाई 2026

Bihar : NEET आंदोलन पर बिहार सरकार का बड़ा यू-टर्न

 

NEET आंदोलन पर बिहार सरकार का बड़ा यू-टर्न! एफआईआर वापस लेने का ऐलान, लेकिन क्या तेज प्रताप यादव को भी मिलेगा राहत? यही है सबसे बड़ा सवाल

 NEET/UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बिहार में हुए छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक फैसला लिया है। गृह विभाग ने 27 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में घोषणा की कि आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर, परिवाद और अन्य दंडात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार के इस फैसले ने जहां आंदोलनकारियों को राहत की उम्मीद दी है, वहीं राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि क्या गांधी मैदान थाना में दर्ज मामले में गिरफ्तार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेज प्रताप यादव को भी इस निर्णय का लाभ मिलेगा।

यही प्रश्न अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस का केंद्र बन गया है।

गृह विभाग की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, **26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक** NEET/UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को लेकर सरकार ने चार महत्वपूर्ण आश्वासन दिए हैं।

पहला, सरकार ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा तक आंदोलन में शामिल लोगों के विरुद्ध कोई दंडात्मक, प्रतिशोधात्मक अथवा प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

दूसरा, इस अवधि तक दर्ज सभी एफआईआर, परिवाद और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की विधिक प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाएगी।

तीसरा, इस समयसीमा तक दर्ज मामलों में गिरफ्तार अथवा निरुद्ध सभी व्यक्तियों को शीघ्र रिहा करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

चौथा, सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि उक्त अवधि तक दर्ज मामलों में नामित व्यक्तियों के विरुद्ध भविष्य में भी कोई प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष कार्रवाई नहीं की जाएगी।

सरकार की इस घोषणा के बाद सबसे अधिक चर्चा तेज प्रताप यादव के मामले को लेकर शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गांधी मैदान थाना में दर्ज प्राथमिकी में उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें धारा 109 (हत्या का प्रयास), धारा 191 (दंगा), धारा 190 (गैरकानूनी जमावड़ा), धारा 221 (लोक सेवक के कार्य में बाधा), धारा 324 (सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान), धारा 326 (आगजनी एवं गंभीर क्षति), धारा 132 (लोक सेवक पर हमला) तथा धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) शामिल बताई गई हैं।

इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार कर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया था, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार की नई घोषणा तेज प्रताप यादव पर भी लागू होगी?

इसका स्पष्ट उत्तर फिलहाल उपलब्ध नहीं है। गृह विभाग की प्रेस विज्ञप्ति में किसी भी व्यक्ति या राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया गया है। सरकार ने केवल यह कहा है कि NEET/UG आंदोलन से संबंधित तथा **26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक** दर्ज मामलों में कार्रवाई वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

यदि गांधी मैदान थाना में दर्ज एफआईआर वास्तव में इसी आंदोलन से संबंधित है और निर्धारित समयसीमा के भीतर दर्ज की गई है, तो प्रारंभिक तौर पर यह माना जा सकता है कि उसका मामला भी सरकार के इस निर्णय के दायरे में आ सकता है। हालांकि, यह केवल प्रारंभिक कानूनी संभावना है, अंतिम निष्कर्ष नहीं।

यहीं पर मामला कानूनी रूप से जटिल हो जाता है। तेज प्रताप यादव पर जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज बताया गया है, उनमें हत्या का प्रयास, आगजनी, लोक सेवक पर हमला और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। ऐसे मामलों में केवल प्रेस विज्ञप्ति जारी कर देने से स्वतः एफआईआर समाप्त नहीं हो जाती। सरकार को विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए अभियोजन पक्ष के माध्यम से संबंधित न्यायालय में मामला वापस लेने का आवेदन देना होगा।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आपराधिक मामले को वापस लेने के लिए अदालत की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। न्यायालय यह देखता है कि अभियोजन वापस लेने का निर्णय न्यायहित, सार्वजनिक हित और कानून के अनुरूप है या नहीं। यदि अदालत को लगता है कि मामला गंभीर प्रकृति का है या उसमें व्यापक जनहित जुड़ा है, तो वह सरकार के आवेदन पर स्वतंत्र रूप से विचार करती है। इसलिए केवल सरकारी घोषणा के आधार पर यह मान लेना उचित नहीं होगा कि सभी आरोप स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। विपक्ष इसे छात्र आंदोलन की नैतिक जीत और सरकार के दबाव में झुकने का परिणाम बता रहा है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि उसने लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक सौहार्द और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है, ताकि आंदोलन से जुड़े सामान्य छात्रों और युवाओं पर अनावश्यक कानूनी बोझ न रहे।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गृह विभाग अपनी घोषणा के अनुरूप एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया कब और कैसे शुरू करता है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि गांधी मैदान थाना में दर्ज चर्चित मामलों, विशेषकर तेज प्रताप यादव से जुड़े प्रकरण, को इस निर्णय के तहत शामिल किया जाएगा या नहीं।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सरकार की प्रेस विज्ञप्ति ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। छात्र आंदोलन, कानून और राजनीति—तीनों अब एक-दूसरे से जुड़े दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार की विधिक कार्रवाई और न्यायालय की भूमिका यह तय करेगी कि यह घोषणा केवल राजनीतिक संदेश बनकर रह जाती है या वास्तव में आंदोलन से जुड़े सभी मामलों में राहत का रास्ता खोलती है।

यानी, सरकार का फैसला महत्वपूर्ण अवश्य है, लेकिन तेज प्रताप यादव सहित सभी मामलों में अंतिम स्थिति तभी स्पष्ट होगी जब विधिक प्रक्रिया पूरी होगी और संबंधित न्यायालय आवश्यक आदेश पारित करेगा। तब तक यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसी भी आरोपी के विरुद्ध दर्ज मामले स्वतः समाप्त हो गए हैं।


आलोक कुमार