गुरुवार, 15 अगस्त 2024

सदाकत आश्रम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने तिरंगा फहराया

 बिहार कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह ने फहराया तिरंगा

* सदाकत आश्रम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने तिरंगा फहराया

*आजादी की लड़ाई में जिनका योगदान रहा वें समझेंगे इस देश की नब्ज : प्रदेश अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह

*आजादी की लड़ाई को झुठलाने वाले तिरंगा यात्रा निकाल देशभक्ति का कर रहें हैं प्रदर्शन : डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह

पटना.देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस पके अवसर पर बिहार प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में प्रदेश अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह ने तिरंगे को सलामी दी। राष्ट्रध्वज को सलामी देने के बाद प्रदेश अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह ने उपस्थित कांग्रेसजन को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने देश की आजादी की लड़ाई लड़ी है और हमारे खून में देशभक्ति है। जबकि आज के दौर में ऐसे लोग देशभक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं जो आजादी के लड़ाई के समय अंग्रेजों के लिए मुखबिरी करते थे और आजादी के लड़ाई को ही झुठलाने का प्रयास करते रहें। आज तिरंगा यात्रा निकालने वाले लोगों से पूछना होगा कि देश की नवनिर्माण में जब आहुतियां दी जा रही थी तो वें कहां थे? 

     उन्होंने आगे कहा कि हमारे नेता राहुल गांधी ने देश की सदन से लेकर सड़क तक जनता के हक की लड़ाई लड़ी, जिसके कारण आज 56 इंच का सीना लिए घूमने वाले लोगों का बॉडी लैंग्वेज और व्यवहार सहमा हुआ है। देश को राहुल गांधी के जैसा मजबूत नेतृत्व देना होगा तभी इस देश में अराजकता की सरकार चलाने वाले लोगों से हम निपट सकते हैं। आज इस देश में वित्तीय अराजकता का माहौल बनाया गया है और उसे हिंडनबर्ग के रिपोर्ट ने जाहिर कर दिया कि इस देश की सरकार के द्वारा ऐसे घपलेबाजों को समर्थन मिल रहा है। देश के संविधान पर लगातार हमला करने वाले लोगों को जनता ने आधा सबक सीखा दिया है और अगली बार मजबूती से सबक सीखा देना है। जनता देश में अराजकता फैलाने वाले लोगों को चिन्हित कर चुकी है और संविधान की रक्षा के लिए हमारे नेता राहुल गांधी को अपना आशीर्वाद देने का मन बना चुकी है। आजादी के इस जश्न में हम सब को देश की एकता, अखंडता और अक्षुण्णता को मजबूत करना है।


इससे पूर्व सेवादल ने ध्वज गीत का गायन किया और तत्पश्चात सभी कांग्रेसजन ने राष्ट्र गान का गायन किया। स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में कांग्रेस विधान परिषद दल के नेता डा0 मदन मोहन झा, पूर्व मंत्री डा0 शकील अहमद, विधान पार्षद डा0 समीर कुमार सिंह, विधायक प्रतिमा कुमारी दास, कोषाध्यक्ष निर्मलेन्द्र वर्मा, ब्रजेश पाण्डेय, राजेश राठौड़, वीणा शाही, नरेन्द्र कुमार, कौकब कादरी, श्याम सुन्दर सिंह धीरज, डा0 ज्योति, ब्रजेश प्रसाद मुनन,डा0 हरखू झा, लाल बाबू लाल, अमिता भूषण, अमित कुमार टुन्ना, मुन्ना शाही, बंटी चौधरी , प्रभात द्विवेदी, ज्ञान रंजन, डॉ स्नेहाशीष वर्धन पाण्डेय, आशुतोष शर्मा, मनोज कुमार सिंह, कपिलदेव प्रसाद यादव, आसिफ गफूर, राज कुमार राजन, डा0 संजय यादव, राजकिशोर सिंह, चंद्रप्रकाश सिंह, शरवत जहां फातिमा, प्रभात कुमार सिंह, आलोक हर्ष, नागेन्द्र कुमार विकल, कुमार आशीष, गुंजन पटेल, ललन यादव, असफर अहमद, सुधा मिश्रा,सौरभ सिन्हा, उदय शंकर पटेल, सत्येन्द्र कुमार सिंह, पंकज यादव, अजय  चौधरी  , शशि रंजन, अनुराग चंदन, कैसर अली, वैद्यनाथ शर्मा, अरविन्द लाल रजक,संजय पाण्डेय, विश्वनाथ बैठा, निरंजन कुमार,आदित्य पासवान, विकास कुमार झा, शशिकांत तिवारी, उर्मिला सिंह नीलू, राज छविराज, मो0 शाहनवाज, राहुल पासवान, प्रदुम्न यादव, अश्विनी कुमार, राजेश मिश्रा, विमलेश तिवारी,मृणाल अनामय, सुदय शर्मा, मनीष सिन्हा, मो0 कामरान, संजय तिवारी, खुशबू कुमारी, खुर्रम, विमलेश तिवारी,निधि पाण्डेय, दिलीप कुमार सिंह,राकेश कुमार सिंह सहित सैंकड़ों की संख्या में कांग्रेसजन शामिल रहें।


आलोक कुमार

रविवार, 11 अगस्त 2024

केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया को पत्र लिखा

 

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने चुनाव 2014 में कहा करते थे कि जब बीजेपी की सरकार सत्ता में आएगी,तब सरकार न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर तीन हजार रूपए कर देगे.जो 10 साल के बाद आजतक नहीं हुआ.वहीं लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूनतम पेंशन के बारे में बढ़ाचढ़ाकर अभिभाषण दे दिए.

  बात 10 फरवरी 2021 की है.लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईपीएस 95 पेंशन धारकों के लिए न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये करने का उल्लेख किया.उन्होंने कहा, “2014 से पहले किसी को (ईपीएस) पेंशन 7 रुपये मिल रही थी, किसी को 25 रुपये तो किसी को 50 रुपये, किसी को 250 रुपये मिल रही थी. ये सब देश में चल रहा था. मैंने कहा कि इन पैसों को लेने जाने के लिए भी ऑटो रिक्शा में इससे ज्यादा पैसे खर्च होता होगा. किसी ने मुझसे मांग नहीं की थी.किसी मजदूर संगठन ने मुझे आवेदन नहीं दिया था. फिर भी हमने उन्हें न्यूनतम 1000 रुपये देने का फैसला किया, जबकि हमसे किसी ने मांगा नहीं था.”

    इस संदर्भ में पेंशनधारकों का कहना है कि प्रधानमंत्री जी, आपने कृपा करके पेंशन की न्यूनतम राशि को 1000 रुपए किया, लेकिन यह बताना भूल गए कि इस छोटी सी राशि में वृद्धा पेंशन धारक कैसे गुजारा करेंगे. एक ने कहा कि “मैं अस्सी साल का वृद्ध नागरिक हूं.मुझे सिर्फ 1112 रुपये पेंशन मिलता है. मेडिकल सुविधाओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है. 40 साल काम करने के बाद मेरी स्थिति बुरी हो गई है. सरकार को अवश्य ही पेंशन बढ़ाना चाहिए.”

“कोई भी ये क्यों नहीं समझता कि हम कोई दया या भीख नहीं मांग रहे. हम हमारा हक मांग रहे हैं. हमारा बीस-बाईस साल तक पैसा काटा है सरकार ने और उसे ही देने में आनाकानी कर रही है.इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी हमारे पक्ष में फैसला दिया है फिर भी केंद्र की मोदी सरकार अड़ंगा लगाकर बैठी है.आखिर क्या चाहती है सरकार? क्या कोई भी परिवार 2000, 2500 या 3000 प्रति माह में गुजारा कर सकता है?”

  “इस सरकार ने पिछले 10 साल से पेंशनभोगियों की दुर्दशा के बारे में कुछ भी नहीं सोचा और ना ही कुछ किया. हमारे विचार से यह सरकार आगे भी सही नियत से कुछ नहीं करने वाली.यह कोई भी सोच सकता है कि 2000 रुपये के अंदर महीने भर का गुजारा पेंशन भोगी कैसे कर सकते हैं? इतनी छोटी सी बात को आज तक सरकार समझ नहीं पाई. 30-35 साल की नौकरी के बाद पेंशन भोगियों को और अर्ध सरकारी कर्मचारी केवल 2000 पेंशन मिलती है. कितनी लज्जाजनक और दर्दनीय स्थिति है.”

    “हर बार श्रम मंत्री एक ही जवाब देते हैं कि महंगाई नहीं है और स्व वित्तपोषित योजना है तो ईपीएफओ की स्थिति कब ठीक होगी जबकि पेंशन कोष में पैसा भरपूर है. क्यों इन वृद्ध पेंशनरों को यह योजना सरकार ने थोपी? आज तक जितनी भी हाई मॉनिटरिंग कमेटी और कोश्यारी समिति का गठन हुआ, उसे आज तक धरातल पर नहीं उतारा गया। इससे साफ है कि सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है. अपने कर्मचारियों को बराबर पेंशन डीए दे रहे हैं तो इन्हें क्यों नहीं? सरकार शीघ्र पेंशन वृद्धि करें.”

    प्रधानमंत्री जी, आपने 2014 में न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये करके एक कदम जरूर उठाया, लेकिन यह अपर्याप्त है. पेंशनधारकों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, उनकी पेंशन में उचित वृद्धि की जानी चाहिए ताकि वे अपनी वृद्धावस्था में सम्मान पूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें.यह उनका हक है, भीख नहीं। सरकार को इन पेंशनधारकों की आवाज सुननी चाहिए और तुरंत प्रभाव से उनकी पेंशन में सुधार करना चाहिए. विधायक अख्तरूल इस्लाम शाहीन ने केंद्र सरकार से कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 ईपीएस के तहत आने वाले पेंशनभोगियों की न्यूनतम मासिक पेंशन में बढ़ोतरी की मांग की है. इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया को पत्र लिखा है.


आलोक कुमार

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