धर्मशाला. भारत ने इंग्लैंड को 4-1 से हराकर एक शानदार क्रिकेट सीरीज जीती है. यह सीरीज विभिन्न पहलुओं के लिए महत्वपूर्ण थी. भारतीय टीम ने वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा दिया है.
आलोक कुमार हूं। ग्रामीण प्रबंधन एवं कल्याण प्रशासन में डिप्लोमाधारी हूं। कई दशकों से पत्रकारिता में जुड़ा हूं। मैं समाज के किनारे रह गये लोगों के बारे में लिखता और पढ़ता हूं। इसमें आप लोग मेरी मदद कर सकते हैं। https://adsense.google.com/adsense/u/0/pub-4394035046473735/myads/sites/preview?url=chingariprimenews.blogspot.com chingariprimenews.com
शनिवार, 9 मार्च 2024
टीम इंडिया ने टेस्ट क्रिकेट में पिछले 92 साल से चला आ रहा एक घाटा खत्म कर दिया
धर्मशाला. भारत ने इंग्लैंड को 4-1 से हराकर एक शानदार क्रिकेट सीरीज जीती है. यह सीरीज विभिन्न पहलुओं के लिए महत्वपूर्ण थी. भारतीय टीम ने वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा दिया है.
शुक्रवार, 8 मार्च 2024
युवा कांग्रेस ने युवा न्याय का किया विमोचन
इंडिया गठबंधन की सरकार आते ही 30 लाख युवाओं को सबसे पहले नौकरी दी जाएगी
पटना.कांग्रेस पार्टी आम चुनाव को मद्देनजर रखते हुए युवाओं के लिए युवा न्याय किया शुरुआत की संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान की सरकार के पास कोई विजन नहीं है यह सरकार टेलीविजन की है इंडिया गठबंधन की सरकार आते ही 30 लाख युवाओं को सबसे पहले नौकरी दी जाएगी.
पीएम मोदी की गारंटी थी कि, हर साल दो करोड़ नौकरी देंगे लेकिन मोदी जी की गारंटी कहां गई. हमारा सवाल है कि कहां है वो नौकरियां? नई गारंटी लाने से दस साल पहले दी गई गारंटी का रिपोर्ट कार्ड क्या है. 2024 की नई गारंटी से पहले 2014 की गारंटी का क्या हुआ?देश में रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी दस सालों में हुई है, ये सब मोदी जी और भाजपा की गलत नीतियों के कारण है. अडानी को दिनरात मजबूत करके युवाओं का रोजगार खराब कर मोदी जी वोट मांगने जा रहे हैं. उस अन्याय के खिलाफ रोजगार दो न्याय दो मुहिम की शुरुआत यूथ कांग्रेस कर रही है. युवा कांग्रेस सड़क पर उतर कर जनता के साथ खड़ी रहेगी.
इस बार देश में आस्था भारी पड़ रही है वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि, आस्था अपनी जगह पर है, हम सब अपने धर्म के प्रति आस्था रखते हैं. धर्म में कोई भी आस्था रखने वाला व्यक्ति भी रोजी रोटी कमाने निकलता है. जनता बेरोजगारी से परेशान है, महंगाई बढ़ रही है, लोग बर्बाद होते जा रहे हैं, अच्छा और सस्ता इलाज देने में मोदी जी फेल हैं.
प्रदेश उपाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी, खुर्रम , मुख्य प्रवक्ता विशाल यादव, लीगल सेल के चैयरमैन विकास झा , महासचिव तनु , अरशद कमल, अमितेश पांडे, राहुल सिंह, विकास सिंह अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहें.
आलोक कुमार
गुरुवार, 7 मार्च 2024
भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर कुलदीप यादव के 50 लेने में सफल
कुलदीप यादव ने 15 ओवर में 72 रन देकर इंग्लैंड के पांच विकेट झटके
कानपुर. उत्तर प्रदेश के कानपुर में रहने वाले हैं कुलदीप यादव.उनका जन्म 14 दिसम्बर 1994 को हुआ है. एक भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी है जो घरेलू क्रिकेट उत्तरप्रदेश के लिए खेलते हैं.उन्होंने अपने टेस्ट क्रिकेट के कैरियर की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के खिलाफ धर्मशाला के हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में 25 मार्च 2017 को की थी.
आज तकरीबन 7 साल के बाद कुलदीप यादव ने 15 ओवर में 72 रन देकर इंग्लैंड के पांच विकेट झटके. उन्होंने जैक क्राउली (79), बेन डकेट (27), ओली पोप (11), जॉनी बेयरस्टो (29) और बेन स्टोक्स (0) को आउट किया. चार विकेट लेते ही कुलदीप ने टेस्ट क्रिकेट में 50 विकेट भी पूरे कर लिए.फिलहाल उनके नाम 12 टेस्ट में 51 विकेट हैं। 40 रन देकर पांच विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.इतना ही नहीं कुलदीप टेस्ट क्रिकेट में 50 विकेट पूरे करने वाले भारत के पहले बाएं हाथ के रिस्ट स्पिनर हैं.वहीं, ओवरऑल वह ऐसा करने वाले दुनिया के तीसरे स्पिनर हैं. उनसे पहले दक्षिण अफ्रीका के पॉल एडम्स (कुल 134 विकेट) और इंग्लैंड के जॉनी वार्डल (कुल 102 विकेट) ने यह मुकाम हासिल किया था.
कुलदीप यादव, भारतीय क्रिकेट के प्रमुख नामों में से एक हैं.उन्होंने अपने उदार और आक्रमक बॉलिंग स्टाइल के लिए विख्यात हैं. कुलदीप को लेफ्ट-आर्म वार्म-अप बॉलर के रूप में जाना जाता है और उनका स्पिन बॉलिंग विशेषज्ञता में उच्च मान्यता प्राप्त है.वह चाइनामैन बॉलर है.उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रचते हुए स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर धाकड़ प्रदर्शन किया है.कुलदीप ने आईपीएल में मुंबई इंडियंस के साथ भी बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की हैं. उनकी सटीक गेंदबाजी और बल्लेबाजी में चुनौतीपूर्ण भूमिका ने उन्हें क्रिकेट की दुनिया में महत्वपूर्ण नाम बनाया है.
कुलदीप की तकनीकी शानदारी और मैच को बदलने में उनकी क्षमता ने उन्हें टीम इंडिया के एक कुंजी पथ प्लेयर बना दिया है. उन्होंने विभिन्न संघों के खिलाफ अपने माहिरातम उपयोग की ओर से टीम को जीत की दिशा में मदद की है.कुलदीप यादव का संघर्ष, उनका समर्पण और क्रिकेट के प्रति उनका प्यार उन्हें एक उदाहरण स्थान देते हैं जो आगे बढ़ने के लिए कठिनाइयों का सामना करता है और उच्चतम स्तर का क्रिकेट खेलता है.
आलोक कुमार
आईपीएस अधिकारी विकास वैभव के हाथों मोमेंटो एवं सर्टिफिकेट
पटना। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर लेट्स इंस्पायर बिहार के संरक्षक सह आईपीएस अधिकारी विकास वैभव के हाथों मोमेंटो एवं सर्टिफिकेट मेरी आयरिन ओस्ता को प्रदान किया गया.वह संत पीटर स्कूल की निदेशिका हैं.जो गार्गी अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित की गयी.
इस नारी शक्ति सम्मान समारोह में तीन साल बेमिसाल....इसे सत्यापित करते हुए इस साल भी बिहार की महिलाओं को सम्मानित कर उनकी नारी शक्ति से बिहार को चरम उत्कर्ष पर ले जाने का सफल प्रमाण भी दिया गया. यह उल्लेखनीय है कि एक मंच पर ऑटो चालक से लेकर संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त बिहार की महिलाओं को सम्मानित करते हुए समाज में महिलाओं की भागीदारी को विशेष स्थान दिया गया. यह भी कहा गया कि ये केवल सम्मान समारोह नहीं अपितु बिहार तथा बिहार से बाहर रह रही महिलाओं की कार्यकुशलता और समाज के प्रति उनके निःस्वार्थ योगदान को देखते हुए उन्हें एक बड़ी पहचान दिलाने की कोशिश है. विदेशों में भी रह रही बिहारी महिलाओं को उनके उत्कृष्ट योगदान को समाज में आदर्श रूप में स्थापित करने की पहल है.
वैदिक युग से बिहार विदुषियों की धरती रही है.आज भी बिहार की महिलाएँ समाज में बढ़-चढ़कर योगदान दे रही हैं.गार्गी पाठशालाओं में वंचित वर्ग के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने तथा गार्गी महिला कौशल प्रशिक्षण केन्द्र में वंचित महिलाओं को कला-कौशल का निःशुल्क प्रशिक्षण देने का पुनीत कार्य कर रही हैं.
ये सभी प्रयास शुद्ध मन से किए जा रहे हैं. जिनके दिल में बिहार बसता है, वे सभी बिहार को समृद्ध बनाने में तत्पर हैं.नारीत्व का सम्मान करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित है.एक नई आशा और अंतर्दृष्टि के साथ हर रोज मुझ पर यानी मेरी आयरिन ओस्ता अपने अनंत आशीर्वाद की वर्षा करने के लिए सर्वशक्तिमान ईश्वर को धन्यवाद देती है. मेरी माता उषा जोसेफ ओस्ता और पिता जोसेफ पीटर ओस्ता.जिनके कारण मैं पहले से ही इस ग्रह पर उतरते ही सशक्त थी. मेरे सबसे प्यारे पति और मेरे सबसे अच्छे दोस्त हमेशा मेरे साथ हाथ में हाथ मिलाकर चलने के लिए और जिन्होंने मुझे माँ बनने का सर्वोच्च दर्जा दिया है. महिलाएं पहले से ही ब्रह्मांड द्वारा सशक्त हैं और पृथ्वी पर कुछ विशेष लोग हैं. आईपीएस अधिकारी विकास वैभव सर को मेरे दिल की गहराई से धन्यवाद एक प्यारी आत्मा होने के लिए हमें सशक्त बनाने के लिए और हम में से सर्वश्रेष्ठ लाने के हमारे छोटे प्रयासों को स्वीकार करने के लिए आइए बिहार को प्रेरित करें.
आलोक कुमार
2016 में इंटरनेशनल डेब्यू करते हुए वनडे मैच में पचासा
पटना.एक महीने के अंदर पांच इंटरनेशनल क्रिकेटरों ने संन्यास ले लिया.सबसे पहले फरवरी में सौरभ तिवारी ने रिटायरमेंट का फैसला लिया था. उसके बाद स्टार पेसर वरुण एरोन ने भी संन्यास ले लिया था. फिर उसी कड़ी में 2016 में इंटरनेशनल डेब्यू करते हुए वनडे मैच में पचासा लगाने वाले फैज फजल ने भी संन्यास ले लिया.फरवरी में ही घरेलू क्रिकेट के स्टार और भारत के बल्लेबाज मनोज तिवारी ने संन्यास का ऐलान कर दिया. अब इस कड़ी में पांचवां शाहबाज नदीम का नाम जुड़ गया है.
भारतीय इंटरनेशनल क्रिकेटर संन्यास लेने को मजबूर
भारतीय इंटरनेशनल क्रिकेटरों की तर्ज पर संन्यास लेने का रुझान हमारे क्रिकेट समुदाय में एक महत्वपूर्ण बदलाव का कारण बन रहा है. इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं, जिनमें ज्यादातर दबाव, तनाव, और खेलकूद के लिए आत्मसमर्पण में कमी शामिल है.पहले तो, खेलकूद की बढ़ती हुई मानव भीड़ और तनावपूर्ण तौर पर मुकाबला करने की जिम्मेदारी ने इन क्रिकेटरों को आत्मसमर्पण की अधिकता का सामना करना पड़ा है.वे निरंतर बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा और सामाजिक मीडिया के दबाव में रहते हैं, जिससे उन्हें अधिक दबाव महसूस हो रहा है. साथ ही, खेलकूद की चुनौतीयों का सामना करने के लिए खिलाड़ियों को दिन-प्रतिदिन अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना पड़ता है, जिससे उन्हें खेलने की उच्च स्तर पर बनाए रखने के लिए जोरूरी सावधानियों का पालन करना होता है-इसके अलावा, कई बार क्रिकेटर अपनी करियर के बाद विभिन्न क्षेत्रों में रूचि लेते हैं, जिसके लिए वे खुद को समर्पित करना चाहते हैं. उन्हें खुद को नए चुनौतियों का सामना करने का एक मौका मिलता है, जिससे उनका व्यक्तिगत और पेशेवर विकास होता है.इस समीक्षा से साबित होता है कि क्रिकेट से संन्यास लेने का मुख्य कारण खिलाड़ियों को तनावपूर्ण स्थितियों से निपटना और अपने आत्म-समर्पण को नई दिशा में देना है, जिससे वे खुद को बेहतर बना सकते हैं.टीम में प्रतिस्पर्धा अधिक होने के कारण टीम जगह नहीं मिलने से खिलाड़ी रिटायर हो रहे है
आजकल क्रिकेट खेलना एक बड़ी चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया है, जिसमें खिलाड़ियों को टीम में अपनी जगह बनाए रखना मुश्किल हो रहा है. यह नई पीढ़ियों के आगमन, प्रतिस्पर्धा की बढ़ती हुई मात्रा, और समय-समय पर बदलते रूपयों के कारण हो रहा है.टीम में अधिक प्रतिस्पर्धा के कारण खिलाड़ियों को अपनी जगह बनाए रखना आरंभिक करियर से लेकर अंतिम समय तक कठिन हो रहा है. यह नए प्रतिभाग्रस्त खिलाड़ियों को मौका देने की अपेक्षा से हो रहा है, जिसके कारण स्थानीय
खिलाड़ियों का प्रोत्साहन हो रहा है और वे अपना नाम रोचकता और स्थायिता के साथ बना सकते हैं.इस समय के बदलते माहौल में, कुछ खिलाड़ी चुनौतीपूर्ण दौरों और महत्वपूर्ण स्थितियों में अच्छी प्रदर्शन करने के बावजूद भी अपने स्थान की निश्चितता को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. इसका सीधा प्रभाव है कि कई खिलाड़ी अब संन्यास लेने का निर्णय कर रहे हैं, ताकि उन्हें अपने शौक और विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर मिल सकें.क्रिकेट में टीम में जगह पाना और बनाए रखना एक लम्बा और कठिन कार्य है, और इसमें खिलाड़ियों को अपने आत्मसमर्पण, प्रदर्शन, और फिटनेस को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
आलोक कुमार
इलेक्टोरल बॉन्ड मोदी सरकार का आर्थिक राजद्रोह: डा0 अखिलेश
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता आक्रोशित
पटना.बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता आक्रोशित है.आज आक्रोश का इजहार भारतीय स्टेट बैंक के सामने प्रदर्शन कर किया.माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा निर्धारित 6 मार्च तक इलेक्टोरल बाॅन्ड के तहत चंदा देनेवालों का नाम उजागर करना था.नाम उजागर न करके समय सीमा बढ़ाने की मांग कर दी है.
आज बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रदेश भर में गुरुवार को धरना-प्रदर्शन किया गया. बिहार के करीब 40 संगठनात्मक जिलों और 534 प्रखंडों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया. इसके अलावा राजधानी पटना के गाँधी मैदान स्थित स्टेट बैंक आफ इंडिया के मुख्य शाखा के सामने सैकड़ों कांग्रेसजनों ने बैंक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया एवं जमकर नारेबाजी की.
मालूम हो कि मोदी सरकार द्वारा राजनीतिक फंडिंग के लिए लाये गये इलेक्टोरल बॉन्ड को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया और एसबीआई को चंदा देने वालों का नाम सार्वजनिक करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार एसबीआई को 6 मार्च तक नाम की सूची सार्वजनिक करनी थी, लेकिन भाजपा सरकार के दबाव में बैंक तीन महीने का अधिक समय की मांग कर रही है.
इसी बीच लोक सभा का चुनाव होना है, इसलिए कांग्रेस इस साजिश के खिलाफ उठ खड़ी हुई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने अपने संदेश में कहा कि इलेक्टोरल बाॅन्ड वास्तव में मोदी सरकार का एक बड़ा घोटाला है. जिसके तहत मोदी सरकार ने विरोधी दलों एवं उनको दान देने वालों को दंडित करने की नापाक साजिश रची थी. हैरानी इस बात की है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद भी एसबीआई नाम सार्वजनिक करने से भाग रही है. साफ है कि बैंक मोदी के डर से ऐसा कर रहा है ताकि मोदी के पूंजीपति मित्रों का नाम उजागर न हो पाए. हकीकत यह है कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम मोदी सरकार द्वारा किया गया आर्थिक राजद्रोह है. इसकी जाँच होनी चाहिए.उन्होंने कहा कि कांग्रेस मांग करती है कि एसबीआई अविलम्ब भाजपा को इलेक्टोरल बाॅन्ड के द्वारा करीब बीस हजार करोड़ देनेवाले सरकारी मित्रों का नाम सार्वजनिक करे.
इस विरोध प्रदर्शन में जो लोग शामिल हुए इनमें प्रमुख है- बृजेश प्रसाद मुनन, लाल बाबू लाल, कुमार आशीष, शशि रंजन, आनन्द माधव, डा0 विनोद शर्मा, अरविन्द लाल रजक, मधुरेन्द्र कुमार सिंह, सुमन कुमार मल्लिक, शशि कांत तिवारी, संजय यादव, धनंजय शर्मा, संजय पाण्डेय, उदय शंकर पटेल, सिद्धार्थ क्षत्रिय, सुधा मिश्रा, निधि पाण्डेय, रवि गोल्डेन, विमलेश तिवारी, सत्येन्द्र कुमार सिंह, सुनील कुमार सिंह, गुरदयाल सिंह, सुदय शर्मा, वशी अख्तर, विशाल झा, सरदार जगजीत सिंह, निशांत करपतने, अभय जायसवाल, धर्मेन्द्र कुमार, पवन केसरी, अब्दुल वाकी सज्जन, यशवंत कुमार चमन, विशाल यादव, समीम अख्तर, धीरज कुमार, शिवनारायण सिंह, दीपक शर्मा, आदित्य पासवान, गोपाल कृष्ण, डा0 परवेज, ललन यादव, पंकज पासवान, उमेन्द्र सिंह, शंकर झा, अशोक यादव, मो0 कामरान इत्यादि.
आलोक कुमार
एक समर्थ उपाय अपनाना चाहिए ताकि समृद्धि और समाज में सामंजस्य बना रह सके
गरीब छात्रों को सुविधा मिले और वे अपनी पढ़ाई में सफल हो सकें
पटना। गरीबी एक बड़ी समस्या है, जिससे अनेक लोग प्रभावित हो रहे हैं। गरीबी हटाने का सामाजिक उद्देश्य रखने वाले लोगों को एक समर्थ उपाय अपनाना चाहिए ताकि समृद्धि और समाज में सामंजस्य बना रह सके।सबसे पहले, शिक्षा को पहुंचाना आवश्यक है। शिक्षा गरीबी को हटाने का एक महत्वपूर्ण साधन है जो लोगों को अधिक और सुरक्षित रोजगार की दिशा में मार्गदर्शन कर सकता है। सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करना चाहिए ताकि गरीब छात्रों को सुविधा मिले और वे अपनी पढ़ाई में सफल हो सकें।
दूसरा, गरीबों को रोजगार के अवसरों की पहुंच देना महत्वपूर्ण है। सरकार और निजी संगठनों को उद्यमिता बढ़ाने के लिए योजनाएं बनानी चाहिए, जिससे गरीबों को सही मार्ग पर चलने में मदद मिले।
तीसरा, स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाना भी गरीबी को हटाने में मदद कर सकता है। आदेशपरक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने से लोग सकारात्मक और सुरक्षित जीवन जी सकते हैं, जिससे उनका उत्साह बढ़ेगा और वे सक्षम बनेंगे।
आखिरकर, सामाजिक सांठ-गांठ को तोड़ना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोगों को समझाना चाहिए कि सभी को समान अवसर मिलने चाहिए और वे एक दूसरे की मदद करके समृद्धि की दिशा में बढ़ सकते हैं। इन सभी पहलुओं को मजबूती से लागू करने से गरीबी हटाने में सफलता मिल सकती है और एक समृद्ध और समाजवादी समाज की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। गरीबी का असमानता के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध है । तीसरी दुनिया के देशों में जहाँ प्रति व्यक्ति आय का स्तर अत्यन्त निम्न है, आय और सम्पत्ति के वितरण की असमानताओं ने अनेक समस्याओं को जन्म दिया है, जिनमें सबसे गंभीर समस्या गरीबी है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि स्वतंत्रता के बाद भारत में आर्थिक प्रगति हुई है।गरीबी भारत में एक गंभीर समस्या है जिसका दुखद परिणाम हमारे समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। गरीबी के कई कारण हैं....
बेरोजगारी: बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है जो गरीबी को और भी बढ़ा देती है। अपातकालीन रूप से बेरोजगारी की स्थितियों में बढ़ोतरी हो रही है।
शिक्षा की कमी:गरीब परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने में अक्सर कठिनाइयाँ आती हैं, जिसके कारण उनके जीवन की संभावनाएं कम हो जाती हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं की कमीः गरीब लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका स्वास्थ्य प्रशासनिक संकट का शिकार हो सकता है।
जातिवाद और सामाजिक असमानतारू भारत में जातिवाद और सामाजिक असमानता भी गरीबी को बढ़ावा देते हैं।
गरीबी के समाधान
गरीबी को कम करने के लिए हमें समृद्धि की दिशा में कदम उठाना होगा। सरकार को और अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में कदम उठाना होगा, जिससे बेरोजगारी कम हो सके।शिक्षा क्षेत्र में निवेश करके हम गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के पहुंच को बढ़ावा देने से हम गरीबों को अधिक उपचार और स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान कर सकते हैं।समाज में सामाजिक असमानता के खिलाफ कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि हर किसी को बराबरी का हक मिल सके। सरकार को गरीबों के लिए विभिन्न योजनाओं का आयोजन करना चाहिए, जैसे कि गरीबों को आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजनाएँ।
गरीबी को कम करना एक लम्बा और कठिन प्रक्रिया हो सकता है, लेकिन इसे समझना और उसके समाधान के दिशा में कदम उठाना हमारी समाज की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। हम सभी को एकमात्र इस समस्या का समाधान करने के लिए साथ मिलकर काम करना होगा ताकि हमारा देश गरीबी से मुक्त हो सके।
आलोक कुमार
सार्वजनिक चर्चा के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकलता
बीजेपी ने 2014 में चायवाला, 2019 में चौकीदार और 2024 परिवार को मुद्दा बनाया
पटना। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है। हरेक दिन दिग्गज नेताओं के द्वारा एक दूसरे पर वार की धार और तेज होती जा रही है। रोज नए नारे गढ़े जा रहे हैं और नारों का जवाब नए नारे के साथ दिया जा रहा है। हर जनसभा में इन्हीं नारों का शोर है। मालूम हो कि बीजेपी ने 2014 में चायवाला, 2019 में चौकीदार और 2024 परिवार को मुद्धा बनाया था।बता दें कि साल 2014 में दिल्ली में कांग्रेस का सम्मेलन था, जिसमें उसके एक वरिष्ठ नेता ने ऐसी ही एक चूक की थी, जिसे भाजपा ने अपने सबसे बड़े हथियार में बदल दिया था. मणिशंकर अय्यर ने कहा था, ‘ मैं आपसे वादा करता हूं कि 21वीं सदी में नरेंद्र मोदी इस देश का प्रधानमंत्री कभी नहीं बन पाएंगे. लेकिन अगर वो यहां आकर चाय बेचना चाहते हैं, तो हम उन्हें इसके लिए जगह दिला सकते हैं.‘ दरअसल, इससे पहले कई बार नरेंद्र मोदी और भाजपा ये कहती आई थी कि वो बचपन में चाय बेचा करते थे. अय्यर का ताना इसी पर था लेकिन उल्टा पड़ा.
इसी तरह 2019 में मध्य प्रदेश के सीधी में हुई रैली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनावी सभाओं में लगाए जा रहे नारे ‘चौकीदार चोर है’ का जवाब मोदी ने अपने ही अंदाज में दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी सभाओं में नए तरीके से चौकीदार वाला नारा लगवाया।सीधी की चुनावी सभा के अंत में मोदी ने कहा, ‘गांव-गांव है’, जनता ने आवाज दी ‘चौकीदार है‘ फिर मोदी ने कहा, ‘शहर-शहर है‘ तो जनता ने आवाज लगाई ‘ चौकीदार है।‘ इसी प्रकार प्रधानमंत्री मोदी कहते गए, ‘बच्चा-बच्चा है, डॉक्टर- इंजीनियर है, शिक्षक है, माताएं-बहनें हैं। सीमा पर भी हैं। खेत-खलिहान में है। लेखक-पत्रकार हैं। वकील-व्यापारी हैं। छात्र-छात्राएं हैं। पूरा हिंदुस्तान है। मोदी के पहली लाइन कहने के बाद इन सभी के अंत में जनता ने आवाज लगाई ‘ चौकीदार है।‘
ऐतिहासिक गांधी मैदान में 2024 में महागठबंधन द्वारा आयोजित जन विश्वास महारैली में राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि अगर प्रधानमंत्री मोदी का कोई परिवार नहीं तो इसमें वो क्या कर सकते हैं? इस पर मोदी ने कहा कि बचपन में जब मैंने घर छोड़ा था, तो एक सपना लेकर निकला था कि देशवासियों के लिए जीऊंगा। उन्होंने कहा, ‘इस देश के 140 करोड़ लोग मेरा परिवार हैं... मेरा भारत मेरा परिवार।‘इस ओर बीजेपी के राज्याध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के 14 करोड़ लोग मोदी के परिवार है। अब राजद के कार्यकर्ताओं ने बैनर टांग कर कहा है कि हमलोग मोदी के परिवार के लोग नहीं है।
विपक्ष का वक्तव्य और सत्ताधारी का मुद्धा बनना सार्वजनिक विवेचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब विपक्ष सत्ताधारी के प्रति अपने विचार व्यक्त करता है, तो यह समाज को विभिन्न दृष्टिकोणों से सोचने का अवसर प्रदान करता है। विपक्ष का वक्तव्य विभिन्न रूपों में प्रस्तुत किया जा सकता है, जैसे कि संसदीय भाषण, मीडिया कॉन्फ्रेंस, या सामाजिक मीडिया के माध्यम से। इसमें विपक्ष अपने पक्ष की राय और समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करके सत्ताधारी से अलग दृष्टिकोण प्रदान करता है।
सत्ताधारी का मुद्दा बनाना इस विवेचना का दूसरा पहलू है। सत्ताधारी को विपक्ष के विचारों को सुनना और उनका उचित रूप से जवाब देना आवश्यक है। सत्ताधारी को चाहिए कि वह विपक्ष की बातचीत को सुने और उस पर विचार करें, ताकि सामाजिक समृद्धि और संवाद की भावना बनी रहे।इस प्रकार की विवेचना से समाज में विचार विनिमय होता है और नीतियों में सुधार होता है। सार्वजनिक चर्चा के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकलता है, जिससे राष्ट्र का विकास हो सकता है।
आलोक कुमार
बुधवार, 6 मार्च 2024
दूसरी राय के रूप में इस पर भरोसा किया जाता
विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता
विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता
पटना.विश्व भर में बहुत लोगों को आकर्षित करता है क्रिकेट. यह खेल ऐसा ही है.यह खेल एक बल्ले और गेंद के साथ खेला जाता है, जिसमें दो टीमें प्रतिस्पर्धा करती हैं.एक वक्त में एक टीम गेंदबाजी और दूसरी टीम बल्लेबाजी करती है.यह सब सिक्का उछालने के बाद टॉस जीतने वाली टीम के कप्तान पर निर्भर होता है.
क्रिकेट एक खेल है जिसमें दो टीमें होती हैं, प्रत्येक टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं जो बल्ले और गेंद के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं. एक खेल में दो टीम होती हैं, जिसमें एक टीम बल्लेबाजी करती है जबकि दूसरी टीम गेंदबाजी करती है. विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता होता है और विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता है.आउट करने का फैसला अंपायर करते हैं.
अब सोनी के स्वामित्व वाली हॉक-आई प्रणाली को यूनाइटेड किंगडम में पॉल हॉकिन्स द्वारा विकसित किया गया. यह प्रणाली मूल रूप से क्रिकेट में टेलीविजन उद्देश्यों के लिए 2000 में लागू की गई थी.सिस्टम छह (कभी-कभी सात) उच्च-प्रदर्शन वाले कैमरों के माध्यम से काम करता है, जो आम तौर पर स्टेडियम की छत के नीचे स्थित होते हैं, जो विभिन्न कोणों से गेंद को ट्रैक करते हैं.फिर छह कैमरों के वीडियो को त्रिकोणीय बनाया जाता है और गेंद के प्रक्षेपवक्र का त्रि-आयामी प्रतिनिधित्व बनाने के लिए संयोजित किया जाता है.हॉक-आई अचूक नहीं है, लेकिन इसे 3.6 मिलीमीटर के भीतर सटीक होने के लिए विज्ञापित किया जाता है और आम तौर पर खेल में निष्पक्ष दूसरी राय के रूप में इस पर भरोसा किया जाता है.
उसके बाद अंपायर डिसीजन रिव्यू सिस्टम (यूडीआरएस) आया.हालांकि टेस्ट क्रिकेट में डीआरएस का उपयोग 2008 में किया गया.इस प्रणाली को 2011 में वनडे में शामिल किया गया था.डीआरएस को 2017 में T20 इंटरनेशनल में पेश किया गया था. क्रिकेट का इतिहास हजारों वर्षों से बदला है और यह खेल विभिन्न प्रकारों में खेला जाता है, जैसे कि टेस्ट मैच, वनडे इंटरनेशनल, और टी20. वनडे और टी20 खेल आमतौर पर अधिक रोमांचक होते हैं और उनमें बहुत तेजी से बदलती घटनाएं होती हैं.
क्रिकेट की प्रतिस्पर्धा आमतौर पर एक उत्सव की भावना के साथ खेली जाती है और इसमें उत्साह, जज्बा, और अद्वितीयता होती है. खेल के शौर्य और कुशलता के साथ, यह खेल खिलाड़ियों के बीच अज्ञात से मित्रता भी पैदा करता है.क्रिकेट जनप्रियता के कारण विभिन्न टूर्नामेंट और लीग आयोजित होते हैं, जैसे कि विश्व कप, आईपीएल, बीबीसी चैम्पियंस ट्रॉफी, और बहुत से अन्य।.इन टूर्नामेंट्स में विभिन्न देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और अपने देश का गौरव बढ़ाते हैं.
क्रिकेट का इतिहास, उनके क्रिकेट स्टेडियमों की भरपूर महक, और विभिन्न रूपों के खेलों की रोचकता ने इसे एक महत्वपूर्ण खेल बना दिया है.यह न केवल खेल है, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है.क्रिकेट की प्रतिस्पर्धा न केवल खेल दर्शकों को एकजुट करती है, बल्कि यह एक खेल के रूप में आदर्श से उत्साहित करता है.
आलोक कुमार
पटना महानगर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष शशि रंजन के नेतृत्व में प्रदर्शन 7 मार्च को
चुनावी बॉण्ड के डीटेल्स का खुलासा करने के लिए 30 जून तक समय बढ़ाने का सोमवार को उच्चतम न्यायालय से अनुरोध
पटना.सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को बुधवार 6 मार्च तक निर्वाचन आयोग को डीटेल्स पेश करने का निर्देश दिया था. इस बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी डीटेल्स को जमा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 30 जून तक का समय मांगा है. एसबीआई ने कहा है कि कोर्ट ने जो 3 हफ्ते का समय दिया था वह पर्याप्त नहीं है. एसबीआई ने राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए प्रत्येक चुनावी बॉण्ड के डीटेल्स का खुलासा करने के लिए 30 जून तक समय बढ़ाने का सोमवार को उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया. पिछले महीने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को आदेश दिया था.यू.पी.ए.दो को हराने के बाद एन.डी.ए.की सरकार 2014 में सत्तासीन हो गई.कांग्रेस मुक्त राज्य सरकार बनाने में जुटी भारत सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना की घोषणा 2017 में की थी. इस योजना को सरकार ने 29 जनवरी 2018 को कानून लागू कर दिया था.प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा शुरू की गई चुनावी बांड प्रणाली के तहत, इन बांडों को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से खरीदा जाना चाहिए, लेकिन गुमनाम रूप से पार्टियों को दान किया जा सकता है.इसका भरपूर लाभ एन.डी.ए.सरकार को मिली. हालांकि इलेक्टोरल बॉन्ड का काफी विरोध हुआ.
बता दें कि इस योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक राजनीतिक दलों को धन देने के लिए बांड जारी कर सकता है.इन्हें ऐसा कोई भी दाता खरीद सकता है, जिसके पास एक ऐसा बैंक खाता है, जिसकी केवाईसी की जानकारियां उपलब्ध हैं. इलेक्टोरल बॉन्ड में भुगतानकर्ता का नाम नहीं होता है.योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक की निर्दिष्ट शाखाओं से 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, एक लाख रुपये, दस लाख रुपये और एक करोड़ रुपये में से किसी भी मूल्य के इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदे जा सकते हैं.चुनावी बॉन्ड्स की अवधि केवल 15 दिनों की होती है, जिसके दौरान इसका इस्तेमाल सिर्फ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत पंजीकृत राजनीतिक दलों को दान देने के लिए किया जा सकता है.
केवल उन्हीं राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये चंदा दिया जा सकता है, जिन्होंने लोकसभा या विधान सभा के लिए पिछले आम चुनाव में डाले गए वोटों का कम से कम एक प्रतिशत वोट हासिल किया हो.योजना के तहत चुनावी बॉन्ड जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीनों में 10 दिनों की अवधि के लिए खरीद के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं.इन्हें लोकसभा चुनाव के वर्ष में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की अतिरिक्त अवधि के दौरान भी जारी किया जा सकता है.हालांकि, इस प्रणाली के साथ कुछ विवाद भी जुड़े हैं.कुछ लोग यह मानते हैं कि इससे लोगों को निश्चित राजनीतिक दलों के साथ बंधन में डालने का खतरा हो सकता है और यह लोकतंत्र के सिद्धांत के खिलाफ है.
इस प्रणाली की तुलना में, यह भी महत्वपूर्ण है कि कैसे उसे सुधारा जा सकता है ताकि यह सबके समर्थन और प्रतिनिधित्व की दिशा में और बेहतर काम कर सके.इसमें नागरिकों को अधिक सकारात्मक और सशक्त बनाने के लिए उपाय शामिल करना भी महत्वपूर्ण है.सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मतदाताओं के सूचना के अधिकार का उल्लंघन है.आयकर अधिनियम के तहत, किसी के चुनावी बांड दान को धारा 80 जीजी और धारा 80 जीजीबी के तहत कर-मुक्त माना जाता है. हालाँकि, दान प्राप्त करने वाला राजनीतिक दल भी आयकर अधिनियम की धारा 13 ए के अनुसार दान प्राप्त कर सकता है.
इस बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भाजपा को चंदा देने वालों का नाम एस.बी.आई. द्वारा सार्वजनिक नहीं किये जाने के विरोध में पटना महानगर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष शशि रंजन के नेतृत्व में गुरुवार 0 7 मार्च,2024 को गांधी मैदान स्थित एस.बी.आई. शाखा के पास प्रदर्शन किया जाएगा.प्रदर्शन अपराह्न 12ः30 बजे गांधी मैदान स्थित एस.बी.आई. शाखा के पास होगा.
आलोक कुमार
मंगलवार, 5 मार्च 2024
अगर मोदी देश को वास्तव में परिवार समझते हैं तो परिवार की चिंता करना चाहिए
धृतराष्ट्र ने हस्तिनापुर को अपना परिवार समझता था:डा0 अखिलेश
पटना। बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश को अपना परिवार समझने वाले बयान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मोदी को बपना परिवार बसाना ही नहीं आया उनको तो परिवार को छोड़ने की आदत है। अगर मोदी देश को वास्तव में परिवार समझते हैं तो परिवार की चिंता करना भी उनको देखना चाहिए।
आगे कहा कि परिवार को बेहाल करके खुद वास्कोडिगामा की तरह विश्व भ्रमण नहीं करना चाहिए। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या मणिपुर के जिन महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाया गया वह इस परिवार की इज्जत नहीं थी। महिला पहलवानों को भी मोदी जी बेटी कहा था लेकिन उन्हीं के पार्टी के सांसद जब उन बेटियों की इज्जत पर हाथ डाल रहा था तो मोदी जी की पुलिस ने उन बेटियों पर लाठियां बरसाईं, तब मोदी धृतराष्ट्र क्यों हो गए? धृतराष्ट्र ने हस्तिनापुर को अपना परिवार कहता था लेकिन द्रौपदी का चीरहरण होने दिया, हर तरह का अन्याय, अनैतिकता और सत्ता के दुरुपयोग कर विरोधियों को कुचलने का नापाक खेल चलता रहा, वह आज हो रहा है। लेकिन उनको याद होना चाहिए कि जिस तरह कौरवों का विनाश हुआ ठीक उसी तरह भाजपा का भी विनाश तय है।
अगर देश को मोदी वास्तव में अपना परिवार समझते हैं तो देशवासियों की आह उनको जरूर लगेगी। अगर देश को परिवार समझते तो भूख से बिलखते बच्चों की चीख उनको जरूर सुनाई नहीं देती और भूख मिटाने वाले अन्नदाता किसानों को कुचलने के लिए मोदी रोड पर कील नहीं ठुकवाते और उनके रास्ते में पत्थरों का पहाड़ खड़ा नहीं करवाते। वही हाल नौजवानों का है। देश का भविष्य बेरोजगारी से बेहाल है और मोदी दो करोड़ सालाना नौकरी का झाँसा देते रहे। देश का नौजवान, महिला और किसान इस क्रूर मजाक का बदला जरूर लेंगे।
आलोक कुमार
सोमवार, 4 मार्च 2024
एमेरिटस महाधर्माध्यक्ष विलियम डिसूजा का जन्मदिन
मार्च महीना महत्वपूर्ण बक्सर
आलोक कुमार
रविवार, 3 मार्च 2024
40 से अधिक युवाओं ने रक्त अर्पण शिविर में आकर अंजू कुमारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की
अपनी पत्नी के निधन पर रक्तदान अर्पण शिविर आयोजित कर महादान की शानदार पहल शुरू कर दी
जमुई। अभी तक सर्वज्ञात था कि लोग जन्मदिन और वैवाहिक सालगिरह के अवसर पर रक्तदान करके महादान करते थे। अब समय बदल गया है। इस क्षेत्र में रहने वाले विनोद मंडल ने अपनी पत्नी के निधन पर रक्तदान अर्पण शिविर आयोजित कर महादान की शानदार पहल शुरू कर दी है. इस अवसर पर तकरीबन 40 से अधिक युवाओं ने रक्त अर्पण शिविर में आकर अंजू कुमारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
बता दें कि गुर्दा (किडनी) शरीर का एक जरूरी अंग है। ये मानव शरीर के निचले हिस्से में होता है। ये मानव खून की सफाई करते हैं और आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालते हैं। किडनी आपके मूत्राशय में विषाक्त पदार्थों को भेजती है, जिसे आपका शरीर बाद में पेशाब के दौरान विषाक्त पदार्थों को निकालता है। पर गुर्दे से जुड़ी कोई भी बीमारी इसके काम काज को प्रभावित कर सकती है। अंजू कुमारी किडनी रोग के शिकार हो गयी। अंजू कुमारी की दोनों किडनी फेल्योर हो गई। जब आपके गुर्दे आपके ब्लड से वेस्ट चीजों को पर्याप्त रूप से फिल्टर करने की क्षमता खो देते हैं। उसे लगातार डायलिसिस पर रखा गया। जो सफल नहीं हो सका। अंनतः अंजू कुमारी का निधन हो गया। वह एक बच्ची को छोड़ गयी।
रक्त के अभाव में किसी व्यक्ति की मौत न हो उसके प्रति सचेत रहने वाली गैर सरकारी संस्था प्रबोध जन सेवा संस्थान की इकाई मानव रक्षक रक्तदाता परिवार,जमुई द्वारा रक्तदाता मिलन सह स्वैच्छिक रक्तदाता शिविर आयोजित की गई। शिविर का उदघाटन जिलाधिकारी राकेश कुमार, सिविल सर्जन डॉ. महेन्द्र प्रताप, डीएस डॉ सैयद नौशाद अहमद, सुदर्शन सिंह एवं संस्थान सचिव सुमन सौरभ द्वारा संयुक्त रूप से की गई।
शिविर की शुरुआत रक्तवीर विनोद मंडल के पत्नी के तस्वीर पर पुष्पर्पित कर की गई। इस दौरान स्मृतिशेष अंजू कुमारी के निधन पर तकरीबन 40 से अधिक युवाओं ने रक्त अर्पण श्रद्धांजलि दी। वहीं, अधिकारियों ने रक्तदाताओं के बीच प्रोत्साहन प्रमाण पत्र भी वितरित किए।
डीएम राकेश कुमार ने संस्थान के क्रियाकलापों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान महादान है। इससे लोगों को जीवनदान मिलता है।डीएम ने रक्तवीरों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि, हर सक्षम लोगों को रक्तदान अवश्य करना चाहिए। वहीं, संस्थान सचिव सुमन सौरभ, रक्तवीर अनुराग सिंह,शिवजीत सिंह, रोशन सिंह, सौरभ मिश्र, रॉकी, सचिन कुमार आदि ने बताया कि पत्नी के निधन पर आयोजित हुआ ये शिविर एक सामाजिक चेतना का आगाज है,ताकि समाज के अंतिम वर्ग रक्तदान की महत्ता समझते हुए संस्थान के उद्देश्य को सार्थक कर सके। शिविर के अंतिम कड़ी में सिविल सर्जन व डी एस ने भी संस्थान के सकारात्मक कार्यशैली की प्रसंशा करते हुए रक्तवीरों के बीच प्रमाण पत्र का वितरण किया। वहीं, शिविर के मौके पर सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।आलोक कुमार
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