🔴 ताजा खबर
खबरें लोड हो रही हैं...

मोबाइल की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है?

 

मोबाइल की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है? ये 7 सेटिंग बदलते ही बढ़ जाएगी बैटरी लाइफ

परिचय

आज के समय में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। हम मोबाइल से कॉल करने के अलावा इंटरनेट, सोशल मीडिया, वीडियो देखने और कई जरूरी काम करते हैं।

लेकिन अक्सर लोगों की सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि मोबाइल की बैटरी बहुत जल्दी खत्म हो जाती है। कई बार नया फोन होने के बावजूद भी बैटरी जल्दी खत्म होने लगती है।

असल में इसकी वजह फोन की कुछ गलत सेटिंग्स होती हैं जिन्हें बदलकर बैटरी लाइफ को काफी बढ़ाया जा सकता है।

1. स्क्रीन ब्राइटनेस कम रखें

मोबाइल की बैटरी जल्दी खत्म होने की सबसे बड़ी वजह स्क्रीन ब्राइटनेस होती है। अगर ब्राइटनेस बहुत ज्यादा रहती है तो बैटरी तेजी से खत्म होती है।

इसलिए बेहतर है कि ब्राइटनेस को ऑटो मोड पर रखें।

2. बैकग्राउंड ऐप बंद करें

कई ऐप्स बैकग्राउंड में लगातार चलते रहते हैं। इससे बैटरी और डेटा दोनों खर्च होते हैं।

इसलिए उन ऐप्स को बंद कर दें जिनका उपयोग आप नहीं कर रहे हैं।

3. लोकेशन सर्विस बंद रखें

लोकेशन या GPS लगातार चालू रहने से भी बैटरी तेजी से खत्म होती है।

जरूरत होने पर ही लोकेशन ऑन करें।

4. डार्क मोड का उपयोग करें

आजकल कई स्मार्टफोन में डार्क मोड की सुविधा होती है। इससे बैटरी की खपत कम हो जाती है।

5. नोटिफिकेशन कम करें

हर ऐप का नोटिफिकेशन चालू रहने से भी बैटरी खर्च होती है। इसलिए केवल जरूरी ऐप्स का नोटिफिकेशन चालू रखें।

6. ऐप्स अपडेट रखें

पुराने ऐप्स कई बार ज्यादा बैटरी खर्च करते हैं। इसलिए समय-समय पर ऐप्स को अपडेट करना जरूरी है।

7. बैटरी सेवर मोड का उपयोग करें

अगर बैटरी कम हो रही हो तो बैटरी सेवर मोड ऑन कर दें। इससे फोन की बैटरी ज्यादा समय तक चलती है।

निष्कर्ष

मोबाइल की बैटरी जल्दी खत्म होने की समस्या बहुत आम है लेकिन सही सेटिंग्स का उपयोग करके इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।

अगर आप ऊपर बताए गए तरीकों को अपनाते हैं तो आपके फोन की बैटरी पहले से ज्यादा समय तक चल सकती है।

आलोक कुमार

“जिस पत्थर को निकम्मा समझा गया, वही बना कोने का मुख्य पत्थर”


“जिस पत्थर को निकम्मा समझा गया, वही बना कोने का मुख्य पत्थर” — Sanju Samson की प्रेरणादायक कहानी

परिचय

जीवन में कई बार ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति की प्रतिभा को समय पर पहचान नहीं मिलती। लोग उसे कम आंकते हैं, उसकी क्षमता पर सवाल उठाते हैं और उसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब वही व्यक्ति अपने धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर सफलता हासिल करता है, तो वही लोग उसकी प्रशंसा करने लगते हैं।

भारतीय क्रिकेट में भी ऐसी कई कहानियां हैं, लेकिन हाल के वर्षों में सबसे चर्चित कहानी विकेटकीपर-बल्लेबाज Sanju Samson की रही है। लंबे समय तक उन्हें भारतीय टीम में लगातार मौका नहीं मिला, लेकिन जब भी अवसर मिला उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया कि वे एक असाधारण प्रतिभा के धनी खिलाड़ी हैं।

उनकी कहानी हमें पवित्र ग्रंथ में बताए गए एक महत्वपूर्ण संदेश की याद दिलाती है।

बाइबल का एक गहरा संदेश

पवित्र Bible में एक प्रसिद्ध वचन मिलता है—

“जिस पत्थर को राजमिस्त्रियों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने का मुख्य पत्थर बन गया।”

यह संदेश Jesus Christ के संदर्भ में दिया गया था। इसका अर्थ है कि जिसे दुनिया तुच्छ या बेकार समझती है, वही व्यक्ति कभी-कभी सबसे महत्वपूर्ण साबित होता है।

यह शिक्षा केवल धार्मिक संदर्भ तक सीमित नहीं है बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में लागू होती है—चाहे वह शिक्षा हो, व्यवसाय हो या खेल की दुनिया।

भारतीय क्रिकेट में संजू सैमसन की कहानी इस संदेश को जीवंत रूप से साबित करती है।

शुरुआती करियर और संघर्ष

संजू सैमसन का जन्म भारत के दक्षिणी राज्य Kerala में हुआ। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट खेलने का शौक था और उन्होंने बहुत कम उम्र में अपनी प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी थी।

घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली, लेकिन उनका अंतरराष्ट्रीय करियर उतना आसान नहीं रहा।

कई बार शानदार प्रदर्शन के बावजूद उन्हें टीम में नियमित स्थान नहीं मिल पाया। चयनकर्ताओं ने कई बार उन्हें टीम से बाहर रखा और वे लंबे समय तक मौके का इंतजार करते रहे।

यह दौर किसी भी खिलाड़ी के लिए कठिन होता है, लेकिन संजू सैमसन ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी और खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया।

आईपीएल से मिली पहचान

संजू सैमसन को असली पहचान इंडियन प्रीमियर लीग यानी Indian Premier League से मिली।

इस लीग में उन्होंने कई शानदार पारियां खेलीं और क्रिकेट विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। विशेष रूप से Rajasthan Royals के लिए खेलते हुए उन्होंने कई यादगार प्रदर्शन किए।

उनकी आक्रामक बल्लेबाजी, शानदार टाइमिंग और विकेटकीपिंग कौशल ने उन्हें आईपीएल के सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में शामिल कर दिया।

आलोचनाओं का दौर

हालांकि आईपीएल में सफलता के बावजूद संजू सैमसन को भारतीय टीम में नियमित स्थान नहीं मिल पाया। कई बार उन्हें टीम में शामिल किया गया लेकिन फिर अचानक बाहर कर दिया गया।

इस कारण क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों के बीच अक्सर चर्चा होती रही कि इतनी प्रतिभा होने के बावजूद उन्हें लगातार मौका क्यों नहीं दिया जा रहा।

कई बार ऐसा लगा कि उनकी प्रतिभा को नजरअंदाज किया जा रहा है।

लेकिन संजू सैमसन ने कभी शिकायत नहीं की। उन्होंने केवल अपने खेल पर ध्यान दिया और हर मौके पर खुद को साबित करने की कोशिश की।

शानदार प्रदर्शन से दिया जवाब

समय के साथ संजू सैमसन ने अपने प्रदर्शन से सभी आलोचनाओं का जवाब दिया। जब भी उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौका मिला, उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की।

उनकी आक्रामक शैली और आत्मविश्वास ने उन्हें एक खतरनाक बल्लेबाज बना दिया।

उन्होंने कई मैचों में महत्वपूर्ण पारियां खेलकर यह साबित किया कि वे भारतीय टीम के लिए एक भरोसेमंद खिलाड़ी बन सकते हैं।

बड़े टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बड़े टूर्नामेंटों में भी संजू सैमसन ने शानदार प्रदर्शन किया।

एक महत्वपूर्ण मुकाबले में उन्होंने New Zealand national cricket team के खिलाफ शानदार पारी खेली, जिसने क्रिकेट प्रशंसकों को प्रभावित किया।

इसके अलावा West Indies cricket team के खिलाफ उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

इन पारियों के बाद यह स्पष्ट हो गया कि संजू सैमसन केवल एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी ही नहीं बल्कि बड़े मैचों के खिलाड़ी भी हैं।

संघर्ष से मिली सफलता

संजू सैमसन की कहानी यह साबित करती है कि सफलता तुरंत नहीं मिलती। कई बार इसके लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।

उन्होंने वर्षों तक मेहनत की, आलोचनाओं का सामना किया और फिर भी अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटे।

उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि अगर व्यक्ति अपने काम पर विश्वास रखे और लगातार मेहनत करता रहे तो एक दिन उसे उसका फल जरूर मिलता है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

आज संजू सैमसन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि अगर आपको अपने ऊपर विश्वास है तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती।

कभी-कभी परिस्थितियां कठिन होती हैं, अवसर कम मिलते हैं और लोग आपको कमतर समझते हैं। लेकिन अगर आप मेहनत और धैर्य बनाए रखते हैं तो सफलता निश्चित है।

जीवन का बड़ा संदेश

संजू सैमसन की कहानी हमें वही संदेश देती है जो पवित्र Bible में बताया गया है—

जिस पत्थर को निकम्मा समझा गया, वही कोने का मुख्य पत्थर बन सकता है।

जीवन में कभी भी किसी व्यक्ति की क्षमता को कम नहीं आंकना चाहिए। क्योंकि समय आने पर वही व्यक्ति सबसे बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।

निष्कर्ष

Sanju Samson की कहानी संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की कहानी है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा को लंबे समय तक दबाकर नहीं रखा जा सकता।

आज वे भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में से एक हैं और उनकी सफलता लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है।

उनकी यात्रा हमें यह सिखाती है कि अगर हम अपने सपनों के लिए मेहनत करते रहें और कठिन परिस्थितियों में भी हार न मानें, तो एक दिन सफलता जरूर मिलती है।

आलोक कुमार


UPI ने कैसे बदल दी भारत की पेमेंट व्यवस्था?

 

UPI ने कैसे बदल दी भारत की पेमेंट व्यवस्था?

कभी छोटी-सी खरीदारी के लिए जेब में नकद रखना जरूरी था, फिर एटीएम और कार्ड का दौर आया। आज एक मोबाइल फोन और QR कोड से चाय की दुकान से लेकर बड़े कारोबार तक भुगतान हो रहा है। आखिर UPI ने भारत की भुगतान व्यवस्था को इतना तेजी से कैसे बदल दिया?

भारत में भुगतान व्यवस्था में पिछले एक दशक में जितना बदलाव आया है, उसमें Unified Payments Interface यानी UPI की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। UPI को 2016 में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम यानी NPCI ने शुरू किया। इसका उद्देश्य अलग-अलग बैंक खातों और भुगतान प्रणालियों के बीच ऐसा साझा डिजिटल ढांचा तैयार करना था, जिससे पैसे भेजना और प्राप्त करना आसान हो सके। UPI का पायलट लॉन्च 11 अप्रैल 2016 को हुआ था।

आज UPI केवल पैसे भेजने का माध्यम नहीं है। यह भारत की रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुका है।

नकद से मोबाइल तक का सफर

UPI से पहले भी भारत में डिजिटल भुगतान मौजूद था। NEFT, RTGS और IMPS जैसे माध्यमों से बैंक खातों के बीच पैसे भेजे जाते थे। कार्ड और मोबाइल वॉलेट भी इस्तेमाल होते थे। लेकिन इन प्रणालियों में अलग-अलग प्रक्रियाएं, ऐप और विवरण की जरूरत पड़ सकती थी।

UPI ने इस अनुभव को काफी सरल बना दिया। एक UPI ऐप में कई बैंक खातों को जोड़ा जा सकता है और बैंक खाते से सीधे भुगतान किया जा सकता है। NPCI के अनुसार UPI तत्काल बैंक-टू-बैंक भुगतान की सुविधा देता है और P2P तथा व्यापारी भुगतान दोनों को समर्थन करता है।

यही सरलता इसकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

अब किसी दुकानदार को भुगतान करने के लिए बैंक खाते की लंबी जानकारी लिखने की जरूरत नहीं होती। QR कोड स्कैन किया, राशि दर्ज की और UPI PIN से भुगतान पूरा किया।

छोटे दुकानदारों के लिए बड़ा बदलाव

UPI की सबसे बड़ी सामाजिक और आर्थिक उपलब्धियों में से एक है छोटे कारोबारियों तक डिजिटल भुगतान की पहुंच।

पहले छोटे दुकानदारों के लिए कार्ड मशीन लगाना हमेशा आसान या सस्ता नहीं था। लेकिन QR कोड आधारित भुगतान ने डिजिटल लेनदेन को छोटे व्यापारियों तक पहुंचाने में मदद की।

चाय की दुकान, सब्जी विक्रेता, किराना दुकान, ऑटो चालक, रेहड़ी-पटरी वाला या छोटा स्थानीय व्यवसाय—कई जगह ग्राहक सीधे मोबाइल से भुगतान कर सकता है।

इस बदलाव ने डिजिटल भुगतान को केवल बड़े मॉल और ऑनलाइन खरीदारी तक सीमित नहीं रहने दिया।

UPI की असली ताकत: इंटरऑपरेबिलिटी

UPI की एक महत्वपूर्ण विशेषता interoperability है। इसका मतलब है कि अलग-अलग बैंक और UPI ऐप एक साझा भुगतान व्यवस्था के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं।

उपयोगकर्ता को केवल इस वजह से भुगतान व्यवस्था बदलने की जरूरत नहीं पड़ती कि सामने वाले व्यक्ति का बैंक अलग है।

यही विशेषता UPI को पारंपरिक बैंक ट्रांसफर से अलग अनुभव देती है।

NPCI के अनुसार UPI में उपयोगकर्ता एक ही ऐप के माध्यम से कई बैंक खातों तक पहुंच बना सकता है। साथ ही virtual payment address और QR आधारित भुगतान जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

आंकड़े बताते हैं बदलाव की कहानी

UPI का विस्तार कितना बड़ा हो चुका है, इसका अंदाजा इसके लेनदेन आंकड़ों से लगाया जा सकता है।

NPCI के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में UPI पर लगभग 23.20 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹29.90 लाख करोड़ था। उस महीने UPI पर 720 बैंक लाइव थे।

यह केवल डिजिटल भुगतान की लोकप्रियता का आंकड़ा नहीं है। यह बताता है कि मोबाइल आधारित भुगतान अब भारत के आर्थिक जीवन में किस स्तर तक प्रवेश कर चुका है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने भी अपनी रिपोर्ट में UPI को भारत के retail payment landscape में प्रमुख परिवर्तनकारी माध्यम बताया है। 2023-24 में कुल retail payment volume में UPI की हिस्सेदारी 79.6 प्रतिशत थी।

छोटे भुगतान भी डिजिटल हो गए

UPI ने भुगतान की एक और पुरानी धारणा बदली—कि डिजिटल भुगतान केवल बड़ी रकम के लिए उपयोगी है।

अब कुछ रुपये की चाय, नाश्ता, पानी की बोतल या स्थानीय यात्रा का भुगतान भी डिजिटल माध्यम से किया जा सकता है।

इससे नकद रखने की जरूरत कम हुई और छोटे व्यापारियों के लिए भुगतान प्राप्त करने के नए विकल्प खुले।

यही कारण है कि UPI केवल बैंकिंग तकनीक नहीं बल्कि दैनिक जीवन की भुगतान आदत में बदलाव बन गया है।

बैंकिंग और फिनटेक का नया रिश्ता

UPI ने बैंकों के साथ-साथ fintech कंपनियों के लिए भी नया अवसर पैदा किया।

विभिन्न ऐप ने भुगतान के अनुभव को आसान बनाने, QR भुगतान, बिल भुगतान, ऑटो-पेमेंट और दूसरी सुविधाओं को एक ही डिजिटल अनुभव में जोड़ने की कोशिश की।

NPCI के आंकड़े बताते हैं कि UPI ecosystem में कई बैंक और ऐप सक्रिय हैं। अगस्त 2025 के उपलब्ध आंकड़ों में PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे ऐप बड़े transaction volumes के साथ दिखाई देते हैं।

इससे स्पष्ट है कि UPI ने केवल बैंकिंग को डिजिटल नहीं किया, बल्कि पूरे fintech ecosystem को विस्तार दिया।

ग्रामीण भारत के लिए क्या बदला?

UPI का प्रभाव शहरों तक सीमित नहीं है। स्मार्टफोन और इंटरनेट की उपलब्धता बढ़ने के साथ छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बढ़ा है।

हालांकि डिजिटल भुगतान की पहुंच अभी समान नहीं है। इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्मार्टफोन की उपलब्धता, डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा की जानकारी जैसे मुद्दे अब भी महत्वपूर्ण हैं।

इसलिए डिजिटल भुगतान का अगला चरण केवल transaction बढ़ाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि कम डिजिटल क्षमता वाले नागरिक भी सुरक्षित तरीके से इसका उपयोग कर सकें।

UPI ने महिलाओं और परिवारों की वित्तीय सुविधा भी बढ़ाई

मोबाइल भुगतान ने परिवारों के भीतर पैसे भेजने की प्रक्रिया भी आसान की है। घर से दूर रहने वाले सदस्य कुछ सेकंड में पैसे भेज सकते हैं।

छोटे व्यवसाय करने वाली महिलाएं भी ग्राहकों से सीधे डिजिटल भुगतान प्राप्त कर सकती हैं। इससे नकद संभालने और खुले पैसे की समस्या कम हो सकती है।

लेकिन यहां भी डिजिटल साक्षरता जरूरी है। किसी व्यक्ति को केवल UPI इस्तेमाल करना आना पर्याप्त नहीं है; उसे PIN, OTP, QR और fraud calls के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए।

सुविधा के साथ साइबर जोखिम

UPI ने भुगतान आसान किया है, लेकिन आसान भुगतान का अर्थ जोखिम समाप्त होना नहीं है।

सबसे बड़ी समस्या है social engineering fraud। ठग अक्सर बैंक अधिकारी, ग्राहक सेवा प्रतिनिधि या किसी परिचित व्यक्ति के रूप में सामने आकर PIN, OTP या payment approval हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।

इसलिए यह समझना जरूरी है कि पैसा प्राप्त करने के लिए आम तौर पर UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती। NPCI भी उपयोगकर्ताओं को UPI PIN साझा न करने की सलाह देता है।

डिजिटल भुगतान की सफलता के साथ डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ी है।

अगला चरण क्या होगा?

UPI लगातार विकसित हो रहा है। UPI Lite, offline payment जैसी सुविधाओं ने कम राशि और सीमित connectivity वाले उपयोग मामलों को संबोधित करने की कोशिश की है। RBI ने भी digital payments को अधिक व्यापक और सुविधाजनक बनाने के लिए offline payment frameworks को आगे बढ़ाया है।

UPI की अंतरराष्ट्रीय पहुंच भी बढ़ रही है। NPCI की UPI One World व्यवस्था विदेशी यात्रियों को भारत में UPI आधारित भुगतान की सुविधा देने के लिए बनाई गई है और NPCI के अनुसार यह भारत में 700 मिलियन से अधिक QR तक भुगतान की सुविधा देती है।

इससे UPI का भविष्य केवल भारत के भीतर डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं दिखाई देता।

निष्कर्ष

UPI ने भारत की payment व्यवस्था को केवल तेज नहीं किया, बल्कि भुगतान की आदत ही बदल दी।

पहले नकद, फिर कार्ड और मोबाइल वॉलेट के बाद भारत ने एक ऐसे interoperable digital payment system को बड़े पैमाने पर अपनाया जिसमें बैंक खाता, मोबाइल और QR कोड आम नागरिक के लिए भुगतान का साधन बन गए।

इस बदलाव की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि डिजिटल भुगतान अब केवल महानगरों की सुविधा नहीं रहा। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

लेकिन आगे की चुनौती भी स्पष्ट है—डिजिटल भुगतान जितना बढ़ेगा, उतनी ही मजबूत साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता जागरूकता और डिजिटल समावेशन की जरूरत होगी।

UPI ने भारत को cashless नहीं बनाया है, लेकिन उसने भारत को तेजी से “less-cash” अर्थव्यवस्था की ओर जरूर धकेला है।

और शायद यही UPI की सबसे बड़ी कहानी है—इसने बैंकिंग को मोबाइल तक नहीं पहुंचाया, बल्कि मोबाइल को रोजमर्रा की बैंकिंग का हिस्सा बना दिया।

आलोक कुमार


Jharkhand : करौंदाबेड़ा हत्याकांड की त्रासदी

  करौंदाबेड़ा हत्याकांड की त्रासदी और आज के समाज के लिए चेतावनी जब शिक्षा के मंदिर से जुड़े विद्यार्थी ही हिंसा के रास्ते पर चल पड़ें, तो यह...