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UP: सीएनआई के भूमाफिया ने मुर्दों को भी नहीं छोड़ा

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ईसाई समुदाय से पत्रकार निर्दोष मोजेस हैं ईसाई समुदाय से पत्रकार निर्दोष मोजेस हैं.इनके द्वारा खोजी पत्रकारिता की जाती है.प्रोटेस्टेट मिशन के पास काफी जमीन है.इन जमीनों को व्यवस्थित रखने की व्यवस्था सीएनआई के पास नहीं है.नतीजा जिसको हाथ लगता है वह जमीन बेचकर मालामाल हो जा रहा है. नवीनतम खोज निर्दोष मोजेस का है.वे बताते है कि ये हैं गोरखपुर का ईसाई कब्रिस्तान जिसको गोरखपुर के प्रॉपर्टी ऑफिसर मॉरिस क्लाइमेंट ने बेच खाया,,आरोप है कि सीएनआई के इस भूमाफिया ने मुर्दों को भी नहीं छोड़ा और लगभग डेढ़ करोड़ रुपया एडवांस ले लिया है ऐसा आरोप इन पर है,,अरे भाई जिंदा लोगों को तो परेशान करते ही रहते हो मुर्दों को तो चैन से सोने दो,. हाल के दिनों में चर्च संपत्तियों, मिशनरी संस्थाओं की जमीनों और कब्रिस्तानों को लेकर कई तरह के विवाद सामने आते रहे हैं। विशेष रूप से उत्तर भारत के कई शहरों में ईसाई संस्थाओं की जमीनों पर कब्जा, बिक्री, फर्जी दस्तावेज और प्रशासनिक लापरवाही जैसे आरोप लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसी क्रम में ईसाई समुदाय से जुड़े खोजी पत्रकार निर्दोष मोजेस ने एक गंभीर मामला उठाया है, जिसम...

Bihar : इन दिनों पेट्रोल की कालाबाजारी का एक नया और खतरनाक तरीका

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यह पूरा खेल बेहद खतरनाक होने के बावजूद तेजी से फैलता जा रहा है। राजधानी पटना के दीघा इलाके में इन दिनों पेट्रोल की कालाबाजारी का एक नया और खतरनाक तरीका सामने आया है। कभी मुख्य सड़क पर खुलेआम कोल्ड ड्रिंक्स की बोतलों में पेट्रोल बिकता दिखाई देता था, लेकिन प्रशासन की सख्ती और पेट्रोल पंपों पर प्लास्टिक के जार में तेल देने पर रोक लगने के बाद अब धंधेबाजों ने नया रास्ता निकाल लिया है। वे मोटरसाइकिल और अन्य वाहनों की टंकी को ओवरफुल कराकर पेट्रोल लाते हैं और फिर दुकानों या गुप्त ठिकानों पर पाइप की सहायता से उसे बोतलों में निकालकर बेचते हैं। यह पूरा खेल बेहद खतरनाक होने के बावजूद तेजी से फैलता जा रहा है। दीघा और आसपास के क्षेत्रों में कई जगहों पर पान दुकानों, गुमटियों और छोटे ठेलों पर कोल्ड ड्रिंक्स की बोतलों में पेट्रोल छिपाकर रखा जाता है। ग्राहकों की पहचान के लिए दुकानदार बोतल के ढक्कन या टीप को ऊपर की ओर रखते हैं ताकि सामान्य लोगों को पता न चले, लेकिन जरूरतमंद ग्राहक आसानी से पहचान सकें। यह अवैध कारोबार अब गुप्त संकेतों और पहचान के आधार पर चलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पेट्रोल 120 से...

India : मणिपुर में गहरे जातीय और सामाजिक संकट का प्रतीक

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पूर्वोत्तर भारत का संवेदनशील राज्य Manipur एक बार फिर हिंसा और भय के साये में  मणिपुर में गहरे जातीय और सामाजिक संकट का प्रतीक   मणिपुर का संकट केवल दो समुदायों के बीच हिंसा की कहानी नहीं है। यह जमीन, पहचान, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सुरक्षा, विस्थापन और आपसी विश्वास के टूटने से पैदा हुआ ऐसा गहरा सामाजिक संकट है, जिसका असर आज भी राज्य के सामान्य जीवन पर दिखाई देता है। मणिपुर लंबे समय से अपनी विविध संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन मई 2023 से शुरू हुई व्यापक जातीय हिंसा ने राज्य की सामाजिक संरचना को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच हिंसा के बाद बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े, परिवार बिछड़े और अनेक इलाकों में सामान्य सामाजिक संपर्क तक प्रभावित हुआ। समय बीतने के साथ हिंसा की तीव्रता में उतार-चढ़ाव जरूर आया, लेकिन संकट केवल कानून-व्यवस्था का प्रश्न बनकर समाप्त नहीं हुआ। इसके पीछे जमीन और संसाधनों को लेकर चिंता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, जनजातीय अधिकार, सुरक्षा की धारणा और समुदायों के बीच बढ़ता अविश्वा...

India : राहुल गांधी ने पिछले 22 वर्षों में 54 विदेश यात्राएं कीं और इन पर लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च

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                           भारत की राजनीति में नेताओं की विदेश यात्राएं हमेशा चर्चा और विवाद का विषय रही हैं भारत की राजनीति में नेताओं की विदेश यात्राएं हमेशा चर्चा और विवाद का विषय रही हैं। हाल के दिनों में एक बार फिर यह बहस तेज हुई है कि आखिर विपक्ष के नेता Rahul Gandhi की विदेश यात्राओं पर कितना खर्च हुआ और प्रधानमंत्री Narendra Modi के विदेश दौरों पर सरकारी खजाने से कितना पैसा खर्च किया गया। सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर दोनों के आंकड़ों की तुलना की जा रही है, लेकिन इस तुलना को समझने के लिए तथ्यों और संदर्भ को अलग-अलग देखना जरूरी है। दावा किया जा रहा है कि राहुल गांधी ने पिछले 22 वर्षों में 54 विदेश यात्राएं कीं और इन पर लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च हुए। यह आंकड़ा मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और समर्थकों द्वारा प्रस्तुत किया गया है। कहा जाता है कि यह “bottom-up estimation” यानी अनुमानित गणना पर आधारित है। इन यात्राओं को निजी या पारिवारिक दौरे बताया जाता है। हालांकि, इन खर्चों का कोई आधिकारिक सरकारी रि...

World : परिवार, लोकतंत्र, विज्ञान, संस्कृति और मानव सभ्यता की प्रगति पर विचार करने का अवसर

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  15 मई : इतिहास, संघर्ष, संस्कृति और मानवता का विशेष दिन 15 मई का दिन विश्व इतिहास, भारतीय समाज, राजनीति, संस्कृति और मानव मूल्यों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष के अन्य दिनों की तरह यह तिथि भी कई ऐतिहासिक घटनाओं, महान व्यक्तित्वों की स्मृतियों और अंतरराष्ट्रीय महत्व के आयोजनों को अपने भीतर समेटे हुए है। 15 मई केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि यह हमें परिवार, लोकतंत्र, विज्ञान, संस्कृति और मानव सभ्यता की प्रगति पर विचार करने का अवसर भी प्रदान करती है। सबसे पहले यदि अंतरराष्ट्रीय महत्व की बात करें, तो 15 मई को पूरी दुनिया में “अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस” मनाया जाता है। इसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 1993 में की थी। इस दिवस का उद्देश्य परिवार संस्था के महत्व को समझाना और समाज में परिवार की भूमिका को मजबूत बनाना है। आधुनिक समय में जब भागदौड़, तकनीक और व्यक्तिगत जीवन की व्यस्तताओं ने रिश्तों में दूरी पैदा कर दी है, तब परिवार दिवस लोगों को यह याद दिलाता है कि जीवन की असली ताकत परिवार से ही मिलती है। माता-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी और बच्चों के बीच प्रेम, सहय...