राजस्थान में स्किल इंडिया और RSLDC: क्या कौशल विकास से मिलेगा स्थायी रोजगार या अभी बाकी हैं कई चुनौतियां?
भारत आज दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। यह जनसांख्यिकीय शक्ति देश के लिए एक बड़ा अवसर भी है और चुनौती भी। यदि युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो वे देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। लेकिन यदि यह विशाल युवा वर्ग बेरोजगार या अल्परोजगार की स्थिति में रहता है तो यह सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से चिंता का विषय बन सकता है। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार ने स्किल इंडिया मिशन की शुरुआत की, जबकि राजस्थान सरकार ने राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम (RSLDC) के माध्यम से राज्य के लाखों युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने का अभियान चलाया।
पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान के विभिन्न जिलों में हजारों प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से युवाओं को इलेक्ट्रिकल, प्लंबिंग, कंप्यूटर, हेल्थकेयर, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, ब्यूटी एंड वेलनेस, ऑटोमोबाइल सहित अनेक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र देना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार योग्य बनाना था। हालांकि, इस प्रयास के बावजूद यह सवाल लगातार उठता रहा है कि क्या प्रशिक्षण वास्तव में स्थायी रोजगार और बेहतर आय में बदल पा रहा है?
सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षण के बाद रोजगार यानी प्लेसमेंट की रही है। सरकारी रिपोर्टों में बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षित और नियोजित दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति हमेशा इतनी संतोषजनक नहीं दिखती। अनेक युवाओं को प्रशिक्षण के बाद निजी कंपनियों में कम वेतन वाली नौकरियां मिलती हैं, जहां कार्य परिस्थितियां भी अपेक्षाकृत कठिन होती हैं। कई बार शुरुआती वेतन इतना कम होता है कि रहने, आने-जाने और अन्य खर्चों के बाद बचत लगभग नहीं के बराबर रह जाती है। परिणामस्वरूप अनेक युवा कुछ महीनों के भीतर नौकरी छोड़ देते हैं और फिर बेरोजगारी की स्थिति में लौट आते हैं। इससे प्रशिक्षण पर खर्च किए गए सरकारी संसाधनों का अपेक्षित लाभ भी नहीं मिल पाता।
दूसरी गंभीर चुनौती प्रशिक्षण केंद्रों में पारदर्शिता और गुणवत्ता की रही है। समय-समय पर ऐसे आरोप सामने आए हैं कि कुछ संस्थानों ने केवल कागजों पर प्रशिक्षण दिखाकर सरकारी अनुदान प्राप्त किया। कहीं डमी छात्रों के नाम पर फर्जी उपस्थिति दर्ज की गई तो कहीं प्रशिक्षण की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। यदि इस प्रकार की अनियमितताओं पर समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो पूरी कौशल विकास प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। इसलिए केवल नए केंद्र खोलना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनकी नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
एक अन्य महत्वपूर्ण समस्या उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं और प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के बीच बढ़ती दूरी है। आज वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ रही है। इसके विपरीत कई प्रशिक्षण केंद्रों में अब भी पुराने पाठ्यक्रमों पर अधिक जोर दिया जाता है। परिणामस्वरूप प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं के कौशल और उद्योगों की वास्तविक मांग के बीच अंतर बना रहता है। यह अंतर रोजगार की संभावनाओं को सीधे प्रभावित करता है।
इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार ने हाल के वर्षों में कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। नई राजस्थान स्किल डेवलपमेंट पॉलिसी के तहत आधुनिक तकनीकों को प्राथमिकता देने का प्रयास किया गया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, डेटा साइंस और उभरते तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। यदि इन पाठ्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप नियमित रूप से अपडेट किया जाता है, तो यह राज्य के युवाओं को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकता है।
राजस्थान सरकार ने विश्वस्तरीय स्किल हब और इंटरनेशनल स्किलिंग सेंटर विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की है। इन केंद्रों का उद्देश्य केवल राज्य या देश के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार के लिए भी तैयार करना है। खाड़ी देशों, यूरोप, जापान और अन्य विकसित देशों में कुशल श्रमिकों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह पहल रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। यदि प्रशिक्षण के साथ भाषा कौशल, अंतरराष्ट्रीय मानकों और कार्य संस्कृति की जानकारी भी दी जाए, तो राजस्थान के युवाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भागीदारी और मजबूत हो सकती है।
स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भी कई विशेष कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। उदाहरण के लिए 'सोलर दीदी' जैसी पहल के माध्यम से महिलाओं को सौर ऊर्जा उपकरणों की स्थापना और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है, बल्कि हरित ऊर्जा क्षेत्र में भी नए अवसर विकसित हो रहे हैं। इसी प्रकार पर्यटन की दृष्टि से समृद्ध राजस्थान में प्रशिक्षित टूरिस्ट गाइड, होटल प्रबंधन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक सेवाओं से जुड़े कौशलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यदि इन कार्यक्रमों का विस्तार जिला स्तर तक किया जाए, तो स्थानीय रोजगार सृजन को नई गति मिल सकती है।
हालांकि, केवल नई योजनाओं की घोषणा कर देना पर्याप्त नहीं होगा। सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता इनके प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित क्रियान्वयन की है। प्रशिक्षण केंद्रों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली, थर्ड पार्टी ऑडिट, डिजिटल मॉनिटरिंग, प्रशिक्षकों के नियमित मूल्यांकन और प्लेसमेंट के बाद युवाओं की वास्तविक स्थिति की समीक्षा जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य की जानी चाहिए। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और सरकारी धन का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा।
इसके साथ ही उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करना समय की मांग है। यदि उद्योग स्वयं पाठ्यक्रम निर्माण, प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और इंटर्नशिप कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करें, तो युवाओं को वास्तविक कार्य अनुभव मिलेगा और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। प्रत्येक जिले की स्थानीय अर्थव्यवस्था के अनुसार कौशल विकास कार्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए। जहां पर्यटन प्रमुख है वहां पर्यटन आधारित प्रशिक्षण, जहां खनन उद्योग विकसित है वहां तकनीकी और सुरक्षा प्रशिक्षण तथा कृषि प्रधान क्षेत्रों में कृषि प्रसंस्करण, डेयरी, खाद्य उद्योग और एग्री-टेक आधारित कौशल को प्राथमिकता दी जा सकती है।
आज के समय में केवल नौकरी ही सफलता का एकमात्र विकल्प नहीं है। कौशल विकास कार्यक्रमों को स्वरोजगार और उद्यमिता से भी जोड़ना आवश्यक है। यदि प्रशिक्षण के साथ आसान ऋण, स्टार्टअप सहायता, डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, वित्तीय प्रबंधन और व्यवसाय संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाए, तो अनेक युवा स्वयं उद्यमी बनकर दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
अंततः यह कहा जा सकता है कि राजस्थान में स्किल इंडिया मिशन और RSLDC ने कौशल विकास की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार किया है। अब आवश्यकता इस आधार को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उद्योगों की सक्रिय भागीदारी, पारदर्शिता, आधुनिक तकनीक और परिणाम आधारित निगरानी के माध्यम से और मजबूत बनाने की है। जब प्रशिक्षण सीधे सम्मानजनक रोजगार, बेहतर आय और स्थायी आजीविका में परिवर्तित होगा, तभी इन योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा। यदि राजस्थान इस दिशा में निरंतर सुधार करता है, तो वह न केवल अपने युवाओं के भविष्य को मजबूत करेगा, बल्कि देश के लिए कौशल विकास का एक प्रभावी और प्रेरणादायक मॉडल भी बन सकता है।
आलोक कुमार