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आजकल मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत सुर्खियों में

 

मुजफ्फरपुर.आजकल मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत सुर्खियों में है.उत्तर प्रदेश में सिरो-मालाबार कैथोलिक गोरखपुर धर्मप्रांत मेंं धाक जमाने के बाद बिहार प्रदेश मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत में प्रवेश कर गया है.मालूम हो कि रोमन कैथोलिकों में 3 उपश्रेणियाँ है.लैटिन कैथोलिक, सिरो-मालाबार कैथोलिक और सिरो- मलंकारा कैथोलिक रीते है.

सिरो-मालाबार चर्च भारत के दो पूर्वी कैथोलिक चर्चों में से एक है, दूसरा सिरो-मलंकारा कैथोलिक चर्च है जो पुथेनकूर के गुट का प्रतिनिधित्व करता है जो 1930 में रोम के होली सी के साथ पूर्ण सहभागिता में लौट आया था.सिरो-मालाबार चर्च दूसरा सबसे बड़ा पूर्वी कैथोलिक चर्च है, जिसके दुनिया भर में चार मिलियन से अधिक सदस्य हैं. इसकी उत्पत्ति 52 ईस्वी में भारत के केरल में सेंट थॉमस के आगमन से मानी जाती है. भारत, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में सिरो-मालाबार अधिवेशन हैं.

कहा जाता है कि सिरो-मालाबार परिवारों का मानना ​​है कि वे उच्च जाति के ब्राह्मण परिवारों के वंशज हैं जिन्हें स्वयं सेंट थॉमस ने परिवर्तित किया था.ईसाई आमतौर पर अल्पसंख्यक समुदाय से हैं.अब केरल रोमन कैथोलिकों की 3 उपश्रेणियाँ हैं: लैटिन कैथोलिक, सिरो मालाबार कैथोलिक और सिरो मलंकारा कैथोलिक. इनमें से केवल लैटिन कैथोलिकों को अल्पसंख्यक लाभ मिलता है जबकि बाकी ओबीसी श्रेणी के हैं.

मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत में गोरखपुर धर्मप्रांत का प्रवेश हो गया है.इसका मतलब है कि यहां पर दो बिशपों का राज्य स्थापित हो गया है.फिलवक्त गोरखपुर धर्मप्रांत का बिशप का राज्य दरभंगा पल्ली में हो गया है.चर्चा है कि कुछ दिनों के बाद सिवान पल्ली में राज्य स्थापित होगा.

इस बीच गोरखपुर धर्मप्रांत में रहने वालों ने जानकारी दी है.बताया कि बेतिया धर्मप्रांत के बेतियान्वी गोरखपुर में रहते है.गोरखपुर उत्तर प्रदेश में है. यहां पर बेतिया के दर्जनों परिवार रहते हैं. उनमें इग्नासियुस माइकल भी रहते हैं,जो अपने आपको फादर अरुण और श्री पास्कल पीटर (बिशप काजिटन के बड़े भाई), सन्नू सर का करीबी रिश्तेदार कहते है.

उन्होंने कहा कि पटना सिटी में इन्फेंट जीसस स्कूल के डायरेक्टर पास्कल पीटर (सन्नू सर) है. जो कुर्जी क्रिश्चियन कॉलोनी में रहते हैं. वह मेरे समधि हैं.फादर अरुण अब्राहम मेरे अपने मौसेरे भाई हैं.स्व.फादर सुशील साह, मेरे मामा थे.यहां पर बेतिया वाले बहुत ज्यादा है.

आगे इग्नासियुस माइकल कहते है कि एक बड़े भू-भाग में सीएनआई (क्रिश्चियन)रहते हैं.ये है धर्मपुर, पादरी, चारगांव, गोलघर. रोमन कैथोलिकों का 95 घर होगा.कुल मिलाकर यहां दो सौ से अधिक घर है.

उन्होंने कहा कि गोरखपुर धर्मप्रांत है.यहां अधिकतर सीएनआई ईसाई रहते हैं.रोमन कैथोलिक भी आपस में जुड़े हुए हैं.हालांकि बिहार के लोग कम ही जानते हैं कि गोरखपुर धर्मप्रांत सीएसटी (केरल) के अंतर्गत है.इस समय भारत का कैथोलिक चर्च तीन धार्मिक चर्चों से बना है. लैटिन संस्कार (सीसीबीआई) और दो पूर्वी संस्कार - सिरो-मालाबार और सिरो-मलंकारा चर्च - मिलकर सीबीसीआई बनाते हैं, जो भारत में कैथोलिक चर्च की सर्वोच्च संस्था है.

बता दे कि सिरो-मालाबार की बुनियाद केरल में है.यहां से सिरो-मालाबार का प्रसार गुजरात,मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश के बाद बिहार में धड़ल्ले से हुआ है.इस समय गोरखपुर धर्मप्रांत का प्रसार मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के दरभंगा पल्ली में हो गया है.


आलोक कुमार


हत्यारों की गिरफ्तारी को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से कैंडल मार्च निकाला

पटना.दीघा विधानसभा अंतर्गत पश्चिमी मैनपुरा ग्राम पंचायत के पूर्व मुखिया, सामाजिक कार्यकर्ता नीलेश मुखिया जी के हत्यारों की गिरफ्तारी को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से कैंडल मार्च निकाला गया. 

        राजधानी पटना में नीलेश मुखिया हत्याकांड के खिलाफ आज कैंडल मार्च निकाला गया.पत्नी सुचित्रा देवी के साथ सैकड़ों की संख्या में उनके समर्थक कैंडल मार्च में शामिल रहे. इस मार्च में दीघा के बीजेपी विधायक संजीव चौरसिया भी मौजूद रहे.वार्ड नं.22ए की वार्ड पार्षद सुशीला कुमारी भी मौजूद थी.अधिकांश समर्थकों के हाथों में तख्ती थी, जिस पर लिखा हुआ था. वी-वांट-जस्टिस.पप्पू, धप्पू, और गोरख को गिरफ्तार करो.नीलेश के समर्थकों और पत्नी की मांग है कि आरोपियों की गिरफ्तारी हो.

     नीलेश कैंडल मार्च पार्षद कार्यालय से शुरू होकर टेलीफोन एक्सचेंज होते हुए पॉलीटेक्निक मोड़ से होकर,कुर्जी मोड़, कुर्जी पुल, बालूपर तक जाकर पार्षद कार्यालय पहुंचा.वार्ड नं०  22 बी की वार्ड पार्षद सुचित्रा देवी और तमाम आम जनमानस के साथ कैंडल मार्च में शामिल हुआ.और सरकार से जल्द से जल्द दोषियों को पकड़ने का आदेश निर्गत करने को कहा गया. RJD से दोषियों की मिलीभगत होने के कारण दोषियों को संरक्षण देना कतई सही नहीं है.सरकार को जल्द से जल्द नीलेश मुखिया को इंसाफ दिलाना ही पड़ेगा.


पार्षद पति नीलेश मुखिया हत्या मामले को लेकर दीघा 22बी की पार्षद सुचित्रा सिंह और उनके हजारों समर्थकों ने शुक्रवार को प्रशासन और सरकार पर नामजद आरोपियों को बचाने का आरोप लगाते हुए कैंडल मार्च निकाला.इस मौके पर मृतक मुखिया के इंसाफ और न्याय की मांग को लेकर महिलाओं और पुरुषों ने दीघा पार्षद पति के आवास से कुर्जी स्थित कार्यालय तक हाथों में कैंडल और नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग के तख्ती को हाथो में लेकर समर्थक नजर आए .

     परिजनों ने कहना था कि  यूपी में यदि ऐसा होता तो आरोपियों के घर पर बुलडोजर चल जाता ,दरअसल नामजद आरोपी पप्पू राय, धप्पू राय और गोरख राय नामजद अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. घटना को एक महीना का वक्त बीत गया है,वही पुलिस इस मामले में एक  लाइनर ,एक शूटर को गिरफ्तार कर अपना पीठ थप थपा रही है.

       बता दें बीते 31 जुलाई को पार्षद पति सह बीजेपी नेता नीलेश मुखिया को अपराधियों ने ताबड़तोड़ 7 गालियां मार घायल किया था.1 अगस्त को उन्हें बेहतर इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से दिल्ली एम्स ले जाया गया था.जिनका पटना सहित दिल्ली के एम्स में लगभग 23 दिनों तक इलाज चला . 23 अगस्त को उन्होंने अंतिम सांस ली थी.उन्हें हार्ट अटैक भी आया था.24 अगस्त को पंचतत्व में विलीन हो गए.31सितंबर को डुगडुगी बजाकर नामजद पप्पू,धप्पू और गोरख के नाम से अलग इश्तेहार नामजद अभियुक्तों के मकान पर चस्पा किया.तीनों सहोदय भाई है.तीनों स्व.महेंद्र राय के पुत्र हैं.आज 1 सितंबर को कैंडल मार्च निकाला गया.

       पटना एसएसपी राजीव मिश्रा ने बताया है कि कोई भी अपराधी बच नहीं सकेगा. उन्होंने बताया कि इस मामले के नामजद आरोपियों को आत्मसमर्पण करने को लेकर पटना पुलिस ने न्यायालय से कुर्की जब्ती का वारंट लिया है, यदि आरोपी समर्पण नही करते उनके घरों पर कुर्की जब्ती की कार्रवाई की जाएगी.


आलोक कुमार

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