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बीमा क्लेम विवाद पर अदालत सख्त, नेशनल इंश्योरेंस की संपत्तियों की कुर्की का आदेश

 बीमा क्लेम विवाद पर अदालत सख्त, नेशनल इंश्योरेंस की संपत्तियों की कुर्की का आदेश


नई दिल्ली. सात वर्षों से लंबित बीमा दावे के मामले में अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए संपत्ति कुर्की का वारंट जारी करने का निर्देश दिया है. यह मामला 018 से पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली में लंबित था.

     वादी सुचिता डेविड, निवासी ए-ब्लॉक हट्स, धोबी घाट, किरबी प्लेस, नई दिल्ली, ने वाहन संख्या DL-ILS-5501 के लिए बीमा पॉलिसी संख्या 35101031176340031147 के तहत नेशनल इंश्योरेंस से बीमा कराया था। पॉलिसी 03 अप्रैल 2017 से 02 अप्रैल 2018 तक वैध थी. 23 जून 2017 की सुबह अकबर रोड, जिमखाना क्लब गोलचक्कर के पास उक्त वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया,वादी के अनुसार, वाहन का बीमा घोषित मूल्य ₹2,05,000/- था और दुर्घटना के बाद इसे मरम्मत से परे माना गया.

    बीमा कंपनी से क्लेम न मिलने पर वादी ने 26 अप्रैल 2018 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद सुचिता डेविड ने 06 जुलाई 2018 को सिविल वाद (CS SCJ No. 875/2018) दायर किया. 08 दिसंबर 2023 को सीनियर सिविल जज, पटियाला हाउस कोर्ट ने कंपनी को ₹2,05,447/- राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया. लेकिन आदेश के बावजूद नेशनल इंश्योरेंस ने भुगतान नहीं किया.वर्तमान में वादी ₹2,20,477/- राशि के साथ 24% वार्षिक ब्याज की मांग कर रही है.

अदालत ने पाया कि आदेश पालन में जिला मजिस्ट्रेट भी विफल रहे हैं। अब निर्देश दिए गए हैं कि चल संपत्तियों की कुर्की का नया वारंट जारी किया जाए.1 जुलाई 2025 को बेलीफ नियुक्ति के लिए उपस्थित होने का निर्देश.19 अगस्त 2025 को अगली कार्यवाही की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश.यह मामला भारतीय बीमा क्षेत्र में दावों के निपटान में देरी और आदेश अनुपालन की गंभीर समस्या को उजागर करता है.धारा 151 CPC (न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों) के तहत अदालत ने कुर्की की कार्रवाई का निर्देश दिया है.

कंपनी का आदेश पालन न करना अवमानना के दायरे में आ सकता है.यह केस उपभोक्ता संरक्षण कानूनों और बीमा अधिनियम, 1938 के तहत दावों के समय पर निपटान के महत्व को रेखांकित करता है.अगर नेशनल इंश्योरेंस आदेश का पालन नहीं करता, तो संपत्तियों की नीलामी और वादी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अगली कार्यवाही और कठोर दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं.

आलोक कुमार

दुकान लगाने से सड़क अतिक्रमण हो जाता



पटना.पटना नगर निगम,दीघा थाना और दीघा हाट में दुकान सजाने वालों के साथ छतीस का रिश्ता बन गया है.कई दशक से पटना- बांस घाट- दानापुर मुख्य मार्ग के दीघा के आसपास मुख्य मार्ग के दोनों तरफ बेरोजगार गरीब लोग दीघा हाट में दुकान सजाने का काम करते हैं. यहां सब्जी,फल और घरेलू सामान बेचते हैं.इन लोगों के द्वारा दुकान लगाने से सड़क अतिक्रमण हो जाता है.जिसके कारण जाम की स्थिति बन जाती है.
         बता दें कि पटना-  बांस घाट-  दानापुर मुख्य मार्ग के संपर्क में संत माइकल हाई स्कूल, हार्टमन हाई स्कूल,साईं शिवम पब्लिक स्कूल ,डॉन बोस्को एकेडमी, संत दोमनिक सावियों स्कूल के अलावे अन्य स्कूलों में 'साहब' लोगों के साहबजादे लोग पढ़ते हैं.जो स्कूल से घर और घर से स्कूल आते समय जाम में फंसकर बिलबिलाने लगते हैं.सभी स्कूलों का समय स्कूल लगने और छोड़ने का लगभग समान ही है.इन स्कूलों के पास लंबे और चौड़ी गाड़ी है.जो जाम को महाजाम बनाने में सहायक है.
     वहीं अधिकारियों की सरकारी गाड़ी और अधिकारियों के रौबदार चालक मनमर्जी से गाड़ी को पार्किंग कर रहे हैं.इन लोगों पर दीघा थाने की पुलिस व यातायात पुलिस का पुलिसिया कानून नहीं चलता है.इनका केवल दीघा हाट पर सब्जी,फल और घरेलू सामान बेचने पर पड़ता हैं.यहां सड़क अतिक्रमण कर दुकान सजाने वालों को सबक सिखाया जाती है.
           अब बताया जाता है कि दीघा थाना पुलिस और पटना नगर निगम के कर्मियों के बीच सांठगांठ हो गया है.सादे लिबास में आकर कुछ लोग दीघा हाट पर सब्जी बेचने वालों से कहा कि सरकार अन्यत्र दुकान बनाकर देगी. नाम,मोबाइल नंबर और पता लिखा लीजिए.ये लोग इस कहावत को जानकर भी अनजान बनकर लोभ में फंस गए."शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा" यह एक प्रसिद्ध कहावत है जिसका अर्थ है कि "धोखा देने वाला, फंसाने वाला आएगा, जाल फैलाएगा". यह लोगों को आगाह करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है कि वे किसी के बहकावे में न आएं या किसी के जाल में न फंसें. यह अक्सर राजनीति या सामाजिक मुद्दों में इस्तेमाल होता है, जहां किसी को फंसाने या धोखा देने की कोशिश की जाती है.इसमें पचास से अधिक लोग फंस गए.अब उनको कोर्ट से जमानत लेने के लिए कहा जा रहा है.यहां तो दुकान चलाने का मसला है.जो दशकों से मांग की जाती है.
      इस बीच पटना नगर निगम ने तुगलकी फरमान जारी कर दिया है.इस बेतुका या अव्यावहारिक आदेश में कहा गया कि सुबह आठ बजे के बाद दीघा हाट की सभी दुकानों को बंद कर देना है.ऐसा नहीं करने पर मोटी रकम वसूली और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.जो  बिना सोचे-समझे जारी कर दिया जाता है, जिससे बड़ा नुकसान होता है और अक्सर उसे बाद में वापस लेना पड़ता है. 
       पटना- बांस घाट- दानापुर मुख्य मार्ग के दीघा के आसपास मुख्य मार्ग के दोनों तरफ बेरोजगार गरीब लोग दीघा हाट में दुकान सजाने की मांग है कि सरकार हम लोगों को उपयुक्त जगह पर दुकान बनाकर दें.जिस दुकानदार पर केस किया गया है.वह केस वापस लिया जाए.

आलोक कुमार
           

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