पुण्य बृहस्पतिवार या Maundy Thursday कहा जाता है
आज का दिन ईसाई परंपरा में अत्यंत पवित्र और भावनात्मक महत्व रखता है, जिसे पुण्य बृहस्पतिवार या Maundy Thursday कहा जाता है। यह दिन सीधे तौर पर Jesus Christ के जीवन की उस अंतिम संध्या से जुड़ा है, जब उन्होंने अपने शिष्यों के साथ अंतिम भोजन किया और मानवता को प्रेम, सेवा और विनम्रता का अद्वितीय संदेश दिया। सबसे पहले, इस दिन का केंद्र बिंदु है अंतिम भोजन (Last Supper)। इसी अवसर पर प्रभु यीशु ने परमप्रसाद (Eucharist) की स्थापना की, जो आज भी ईसाई धर्म का एक महत्वपूर्ण संस्कार है। रोटी और दाखरस के माध्यम से उन्होंने अपने शरीर और रक्त का प्रतीक प्रस्तुत करते हुए यह सिखाया कि उनका बलिदान सम्पूर्ण मानवता के उद्धार के लिए है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि त्याग और प्रेम की गहरी अनुभूति है। लेकिन इस दिन की सबसे अनोखी और प्रेरणादायक घटना है – पैर धोने की क्रिया । Jesus Christ ने अपने शिष्यों के पैर धोकर यह दिखाया कि सच्चा नेतृत्व सेवा में है, न कि अधिकार में। उस समय यह कार्य सामान्यतः सेवकों द्वारा किया जाता था, लेकिन प्रभु ने स्वयं इसे करके सामाजिक और आध्यात्मिक मर्याद...