अंतिम रस्म अदायगी कर पार्थिव शरीर को मिट्टी को समर्पित

 

अंतिम रस्म अदायगी कर पार्थिव शरीर को मिट्टी को समर्पित

बेतिया धर्मप्रांत में है चुहड़ी पल्ली.इस पल्ली में स्थित गिरजाघर स्वर्ग में उदगृहीत मां मरियम को समर्पित है.गिरजाघर का इतिहास 254  साल पुराना है. जिसके प्रथम पल्ली पुरोहित फादर जॉन  ग्वालबर्ट हुए. जिन्होंने 30 वर्षों तक इस पल्ली की सेवा की.इसी गिरजाघर में वयोवृद्ध फिलिप लुइस का पार्थिव शरीर को रखकर अंतिम बार  पवित्र मिस्सा फादर हरमन रफाएल के द्वारा किया गया.

   चुहड़ी पल्ली के पल्ली पुरोहित फादर हरमन रफायल ने अपने उपदेश में कहा कि येसु कहते हैं कि मार्ग,सत्य और जीवन  मैं ही हूं, मुझ से होकर गए बिना कोई पिता के पास नहीं जा सकता है. भक्तों के लिए मृत्यु जीवन का विनाश नहीं विकास है.

इस दफन समारोह में लगभग 250 लोग शामिल थे.सभी के सहयोग से पार्थिव शरीर को ईसाई धर्म विधि के अनुसार कर दिया गया.मालूम हो कि कल शनिवार को उनका निधन हो गया था और उनका आज अंतिम संस्कार कर दिया गया.




आलोक कुमार


स्टाफ नर्स माया कुमारी के ससुर डेविड पीटर दम तोड़ दिये

39 दिनों के बाद सड़क दुर्घटना में घायल डेविड पीटर का निधन हो गया

डायसिस ऑफ इलाहाबाद के फादर राजेश साइमन के जीजाजी डेविड पीटर हैं


पटना.आज स्टाफ नर्स माया कुमारी के ससुर डेविड पीटर दम तोड़ दिये.पश्चिम चंपारण जिले के चखनी गांव से पटना आने के दरम्यान चौतरवा चौराहा के पास विपरित दिशा से आने वाली गाड़ी से सीघी टक्कर होने से डेविड पीटर, फ्रांसिस्का पूनम,रेनित ठाकुर,प्रवीण प्रसन्ना और माया कुमारी घायल हो गए. सभी घायलों को 01 जून को एशियन सिटी होस्पिटल पटना कुर्जी में भर्ती कराया गया.डेविड पीटर को छोड़कर इलाज के बाद हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गयी. आज 39 दिनों के बाद सड़क दुर्घटना में घायल डेविड पीटर का निधन हो गया.

विस्तार से बताया गया कि डेविड पीटर 68 साल के थे.वे आरा मिशन स्कूल भोजपुर, में शारीरिक शिक्षक के पद पर कार्यरत थे.शारीरिक शिक्षक के पिता का नाम स्व. पीटर जौन ठाकुर और माता का नाम अन्ना पीटर है.शारीरिक शिक्षक की पत्नी का नाम पुनम साइमन (शिक्षिका) है. पुत्र प्रवीण प्रसन्ना है.पुत्रियां का नाम डेजी रानी और प्रियंका रानी है.शारीरिक शिक्षक की बहु माया कुमारी है.जो एक स्टाफ नर्स हैं.पौत्र रेनित ठाकुर और रेयान ठाकुर है. वास्तव में मृतक के परिवार के लोग बेतिया पश्चिम चम्पारण के मूल निवासी हैं. परंतु वर्तमान में पटना फेयर फील्ड में घर बनाकर रहते हैं.

यह बताया गया कि शारीरिक शिक्षक डेविड पीटर ह्दय रोग से पीड़ित थे.उसी दौरान सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद इलाज के दरम्यान पता चला कि लग्स भी प्रभावित हुआ. इसके बाद किडनी भी काम करना बंद कर दिया.शारीरिक शिक्षक ने 39 दिनों तक बीमारियों से संघर्ष करने के बाद एशियन सिटी हॉस्पिटल पटना कुर्जी में दम तोड़ दिया.उनका पार्थिव शरीर को फेयर फिल्ड में रखा गया है.सोमवार को तीनपहर 3ः30 बजे से कुर्जी चर्च में मिस्सा होने के बाद अंतिम धार्मिक रीति से दफन कर दिया जाएगा.


आलोक कुमार


जोवाई धर्मप्रांत का नया धर्माध्यक्ष

 

मेघालय.भारत के मेघालय में रोमन कैथोलिक समुदाय का जोवाई धर्मप्रांत है.संत पापा फ्रांसिस ने माननीय फादर फर्डीनांड ड्खार  (61), को जोवाई धर्मप्रांत का नया धर्माध्यक्ष नियुक्त किया है.फादर फर्डिनेंड डखार जोवाई धर्मप्रांत के प्रेरितिक प्रशासक के रूप में अपनी सेवा प्रदान कर रहे थे.

        बता दें कि शिलांग महाधर्मप्रांत को विभाजित करके जोवाई धर्मप्रांत की स्थापना 28 जनवरी, 2006 को पोप बेनेडिक्ट  XVI   द्वारा की गई थी, और फादर विंसेंट किम्पैट को जोवाई धर्मप्रांत का पहला बिशप नियुक्त किया गया था. उन्हें 2 अप्रैल, 2006 को भारत के अपोस्टोलिक नुनसियो, आर्चबिशप पेड्रो लोपेज़ क्विंटाना द्वारा नियुक्त किया गया था.

      बता दें कि जोवाई धर्मप्रांत के प्रथम धर्माध्यक्ष विंसेंट किम्पैट (2006-2011) हैं.इस धर्मप्रांत के द्वितीय धर्माध्यक्ष बी.पी. विक्टर लिंगदोह (2016-2020) हैं. 28 दिसंबर, 2020 को बिशप विक्टर लिंगदोह को शिलांग महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप के रूप में नियुक्त किया गया. इसके बाद जोवाई धर्मप्रांत का प्रेरितिक प्रशासक फादर फर्डीनांड ड्खार को नियुक्त किया गया. 921 दिनों के बाद प्रेरितिक प्रशासक फादर फर्डीनांड ड्खार को पदोन्नत कर जोवाई धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष  नियुक्त किया गया है.वे इस धर्मप्रांत के तीसरे धर्माध्यक्ष होंगे.इस तरह जोवाई धर्मप्रांत में 17 वर्षों में तीन धर्माध्यक्ष बने है.

  तीसरे धर्माध्यक्ष  फादर फर्डीनांड ड्खार का जन्म 26 फरवरी 1962 को जोवाई धर्मप्रांत के लोंगकलुह में हुआ था.मेघालय के ऊपरी शिलांग में माइनर सेमिनरी में भाग लेने के बाद, उन्होंने क्राइस्ट किंग कॉलेज में दर्शनशास्त्र और शिलांग के महाधर्मप्रांत में ओरिएंस थियोलॉजिकल कॉलेज में धर्मशास्त्र. शिलांग   में ईशशास्त्र और दर्शनशास्त्र की पढ़ाई के बाद उनका पुरोहिताभिषेक 23 जनवरी 1994 को जोवाई धर्मप्रांत के लिए हुआ.           

      उन्होंने निम्नलिखित कार्यालय संभाले हैं शिलांग के माइनर सेमिनरी में अध्ययन के डीन (1994-1995); एनाउंसमेंट चर्च, नामडोंग के सहायक पल्ली पुरोहित (1995-2000); चर्च ऑफ द होली स्पिरिट, उम्मूलोंग के सहायक पल्ली पुरोहित (2000-2002) और फिर पल्ली पुरोहित (2002-2007); एनाउंसमेंट चर्च के पल्ली पुरोहित और नामडोंग में एक हाई स्कूल के प्रिंसिपल (2007-2009); जोवाई धर्मप्रांत के प्रोक्यूरेटर (2009-2021). 2021 से अब तक वह जोवाई धर्मप्रांत के  प्रेरितिक प्रशासक रहे हैं.

      जोवाई धर्मप्रांत 2006 में शिलांग महाधर्मप्रांत को विभाजित करके बनाया गया था. यह जयंतिया हिल्स में, खासी हिल्स के पूर्व में, बांग्लादेश के उत्तर में, उत्तरी कछार हिल्स के पश्चिम में और मेघालय में कार्बी आंगलोंग के दक्षिण में स्थित है. यह शिलांग से 64 किलोमीटर दूर है.इसमें 1,20,275 कैथोलिक आबादी, 23 पैरिश, 30 धर्मप्रांतीय पुरोहित, 41 रिलीजियस पुरोहित, 83 रिलीजियस  सिस्टर्स और 313 शैक्षणिक संस्थान हैं.

       फादर फर्डीनांड ड्खार का जन्म 26 फरवरी 1962 को जोवाई धर्मप्रांत में हुआ.इस धर्मप्रांत में पुरोहित बने.921 दिनों के बाद प्रेरितिक प्रशासक रहे.अब जोवाई धर्मप्रांत का बिशप बनने जा रहे है.ऐसे  ही बिहार में भी होना चाहिए. बिहार के पुरोहित भी मांग करते हैं. पर होता ही नहीं हैं. जिसके कारण पुरोहित फूफा बन बैठे हैं.स्थानीय पुरोहितों को धर्माध्यक्ष बनाने पर ईसाई समुदाय के लोग भी मांग करते हैं.


आलोक कुमार

Bihar : पवित्र मिस्सा और आठ बच्चों के प्रथम परमप्रसाद के साथ मनाया गया पल्ली दिवस

  बेतिया पल्ली में मरियम के जन्मोत्सव पर आस्था का उत्सव प्रार्थना, पवित्र मिस्सा और आठ बच्चों के प्रथम परमप्रसाद के साथ मनाया गया पल्ली दिवस...