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जनवरी 14, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का वह दुर्लभ उत्सव

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  मकर संक्रांति: जब सूर्य उत्तरायण होता है और जीवन में उजास उतरता है सर्द हवाओं के बीच जब आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है, तिल-गुड़ की मिठास हर रिश्ते में घुलने लगती है और सूर्य देव उत्तरायण की यात्रा शुरू करते हैं—तब आता है मकर संक्रांति, एक ऐसा पर्व जो केवल त्योहार नहीं, बल्कि परिवर्तन, सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक है. मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का वह दुर्लभ उत्सव है, जो धर्म, विज्ञान और प्रकृति—तीनों को एक सूत्र में पिरोता है. इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह समय दिन के बड़े होने और रातों के छोटे होने का संकेत है, जबकि सांस्कृतिक रूप से यह अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है. तिल-गुड़ क्यों कहते हैं ‘मीठा बोलो’? मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का विशेष महत्व है. तिल शरीर को गर्मी देता है और गुड़ ऊर्जा. लेकिन इन दोनों से जुड़ा संदेश केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं—यह सामाजिक सौहार्द का प्रतीक भी है। “तिल-गुड़ खाओ, मीठा बोलो” का अर्थ है कि पुराने गिले-शिकवे भूलकर रिश्तों में मिठास घोलो. पतंगों में उड़ते सपने छतो...