लेखक की रचनाएं रहती हैं स्मृतियों मे
पद्मश्री उषा किरण खान स्मृति कार्यक्रम संपन्न भोपाल। हिन्दी एवं मैथिली की वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री श्रीमती उषा किरण खान को स्मरण करने के लिए गांधी भवन में आयोजित सभा में आज वरिष्ठ साहित्यकार विजय बहादुर सिंह ने कहा कि लेखक की रचनाओं को स्मृतियों में रखकर उसे याद करना चाहिए। लेखक की पहचान उसके रचनाकर्म से होती हैं। बहुत कम लेखक होते हैं, जिनका व्यक्तित्व भी अनुकरणीय होता है उषा किरण जी का व्यक्तित्व एवं कृतित्व दोनों अनुकरणीय है। उषा किरण जी लेखनी एवं व्यक्तित्व दोनों पर भारतीयता की छाप है। उन्होंने अपनी जिंदगी में स्त्रियों की स्थिति को अनुभव किया है, जिसे उनकी रचनाओं में देखा जा सकता है। स्मृति सभा की शुरुआत कबीर गायन से किया गया। सीमा बजाज ने कबीर की रचनाओं को प्रस्तुत किया। अपने वीडियो संदेश में नम्रता कार्तिक ने उषा किरण के साथ के अपनी यादों को साझा किया। पत्रकार निवेदिता ने बताया कि साहित्य से अलग अन्य विषयों में भी उनकी गहरी रुचि थी। वरिष्ठ रंगकर्मी संजय उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने कई नाटक भी लिखे थे, जिसका मंचन उन्होंने कई बार किया। एकता परिषद के संस्थापक राजगोपाल पी.व्ही. न...