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लोकतंत्र की जीत, अनुशासन की परीक्षा

 


लोकतंत्र की जीत, अनुशासन की परीक्षा — पटना प्रशासन की सख़्त निगरानी में मतगणना दिवस

पटना.बिहार विधान सभा चुनाव 2025 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है. 14 नवम्बर को ए.एन. कॉलेज, पटना में होने वाली मतगणना केवल नतीजों का दिन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की परिपक्वता की परीक्षा भी है. जिस तरह से पटना जिला प्रशासन ने मतगणना की तैयारियों को लेकर सतर्कता बरती है, वह यह संदेश देता है कि लोकतंत्र का उत्सव तभी सार्थक है जब उसमें अनुशासन की भावना जुड़ी हो.

    जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से की गई ब्रीफिंग में स्पष्ट कर दिया गया कि कानून-व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा.निषेधाज्ञा लागू रहेगी, विजय जुलूसों पर रोक रहेगी और मतगणना स्थल के आसपास किसी भी प्रकार का राजनीतिक प्रदर्शन, नारेबाजी या भीड़ जुटाने की अनुमति नहीं होगी. यह कठोरता केवल नियंत्रण नहीं, बल्कि नागरिक उत्तरदायित्व की याद दिलाती है — कि लोकतंत्र में उत्सव भी अनुशासन से ही खिलता है.

प्रशासन का यह निर्णय न केवल चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को सुरक्षित करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि किसी भी प्रकार की अफवाह या उत्तेजना से जन-शांति प्रभावित न हो. सीसीटीवी निगरानी, नियंत्रित यातायात व्यवस्था और नियंत्रण कक्ष की 24 घंटे सक्रियता इस बात का प्रमाण है कि पटना जिला प्रशासन इस बार कोई ढिलाई नहीं बताना चाहता.

सवाल यह नहीं कि कौन जीतेगा या कौन हारेगा; असली सवाल यह है कि क्या हम परिणाम आने तक संयम बनाए रखें. लोकतंत्र की असली पहचान केवल मतदान नहीं, बल्कि मतगणना के समय की शांति और मर्यादा से भी होती है.

ऐसे में यह प्रशासनिक पहल सराहनीय है — क्योंकि लोकतंत्र की रक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि नागरिक सजगता से भी होती है। परिणाम का इंतजार घर बैठे कीजिए, और मतगणना स्थल को अनुशासन और मर्यादा का प्रतीक बनने दीजिए.यही एक परिपक्व लोकतंत्र की पहचान है.

आलोक कुमार

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