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मार्च 18, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पुरोहिताभिषेक का शानदार पचास साल मुबारक हो पुरोहित

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पटना.विख्यात येसु समाज के पुरोहित हैं फादर हेनरी रेबेलो. अभी 84 साल का हैं. उनका जन्म 28 अक्टूबर 1938 हुआ था. जब 21 साल के थे,तब उन्होंने येसु समाज में 8 जून 1959 में प्रवेश किए. अभी प्रवेश के 63 साल हो गया. जब वे 34 साल के थे,तब उनका पुरोहिताभिषेक 18 मार्च 1972 को हुआ.अभी 50 साल हो गया. आज फादर हेनरी रेबेलो का स्वर्णिम दिवस है.भला क्यों हो उन्होंने येसु समाज के पुरोहित के रूप में 50 वर्ष पूरा कर लिये हैं.आज 18 मार्च 2022 को पचास साल हो गया.पुरोहिताभिषेक का शानदार पचास साल मुबारक हो.   उत्तर बिहार के ईसाइयों का उद्गम स्थल बेतिया पल्ली के पल्ली पुरोहित थे फादर हेनरी रेबेलो.कई जगहों पर शानदार कार्य करने के बाद कुर्जी पल्ली के भी पल्ली पुरोहित थे.जब पल्ली पुरोहित थे,तब विश्व विख्यात संत विंसेंट डी पौल सोसाइटी की स्थापना में कुर्जी पल्ली में की थी.संत विंसेंट डी पौल समाज के आध्यामिक सलाहकार बनकर सोसाइटी को आगे बढ़ाने का काम किया.कोलकाता के अधीन सोसाइटी रहने के बाद पटना पार्टिकुलर काउंसिल बनने के बाद सेंटल काउंसिल बना.इसके बाद आज विभिन्न पल्लियों में संचालित है.शानदार पचास वर्ष पूरा...

पटना प्रोविंश यूथ कमीशन के द्वारा यूथ संगोष्ठी 20 मार्च को आत्मदर्शन में

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पटना.आजकल ईसाई समुदाय का दुःखभोग चल रहा है. ईसाई धर्मावलम्बियों ने 02 मार्च को राख बुधवार मनाया. इस दिन चर्च के पुरोहितों के द्वारा विश्वासियों की ललाट पर पवित्र राख से क्रूस का चिन्ह बनाकर स्मरण दिलवाया कि हे ! मनुष्य तुम मिट्टी हो और मिट्टी में मिल जाओंगे. इस दिन ईसाई समुदाय ने उपवास और परहेज रखा. शाम के समय उपवास तोड़ा जाता है.आज दुःखभोग का 17 वां दिन है. आज शुक्रवार है.होली का दिन है. होली के पकवान से परहेज कर रहे हैं. पवित्र दुःखभोग की अवधि में ईसाई समुदाय उपवास और परहेज रखते हैं.हालांकि इसमें माता कलीसिया ने 18 साल से नीचे और 60 साल से ऊपर वालों को छूट दे रखी है. बहरहाल ईसाई समुदाय शिद्ददत से ईसा मसीह के दुःखभोग में स्वयं को शामिल कर रहे हैं. उपवास और परहेज रखते हैं. बुधवार और शुक्रवार के दिन में चर्च जाते हैं और ईसा मसीह के दुःखों पर आधारित 14 मुकाम में बड़ी भक्ति से शामिल होते हैं. इसके बाद पवित्र धार्मिक अनुष्ठान में सशरीर उपस्थित होकर परमप्रसाद ग्रहण करते हैं. इस बीच पटना प्रोविंश यूथ कमीशन के द्वारा यूथ संगोष्ठी 20 मार्च को आत्मदर्शन में किया गया है.यूथ संगोष्ठी चालीस...

केरल को 'ईश्वर का अपना घर' कहा जाता है

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मलयट्टूर. ईसाई मिशनरियों के द्वारा ऐसा कहा जाता है कि “भारत मे ईसाइयत का आगमन ईसा मसीह के बारह प्रेरितों (शिष्यों) में से एक थोमस के द्वारा अरब की खाड़ी पार कर भारत में आने के साथ ही शुरु हो गया था. सन् 52 ईं. मे केरल के क्रान्गानोर नामक जगह पर पहुँचे, जहाँ से उन्होंने भारत के तटीय इलाकों में सुसमाचार प्रचार किया. सर्वप्रथम मालावार तट के ब्राह्मणों के बीच उसने प्रचार किया और उनके प्रभाव से कई ब्राह्मणों ने ईसाइयत को ग्रहण किये . संत थॉमस चर्च, मलयट्टूर के विकर जनरल का कहना है कि मलयट्टूर में स्थित पहाड़ पर संत थोमस चढ़े थे.वहां पर संत थोमस का पैरों का निशान है.जो पवित्र स्थान और दर्शनीय स्थल बन गया है.केरल एवं अन्य राज्यों के भक्तगण दर्शन करने आते हैं.जमीन से लेकर पहाड़ की चोटी तक प्रकाश की व्यवस्था कर दी गयी है.रात में आसानी से दर्शन किया जा सकता है.यहां संत थोमस चर्च भी है. बताते चले कि प्रत्येक दिन भक्तगण पहाड़ की चोटी तक जाते हैं. इस समय यानी प्रभु येसु ख्रीस्त के दुखभोग अवधि में भक्तों की संख्या अधिक हो जाती है. पहाड़ पर चढ़ते समय भक्तगण कूस का रास्ता तय करते चलते जाते हैं. नीचे से चोटी ...