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बेतिया चर्च से दुसैया के लिए पदयात्रा


दुसैया. ग्वादालूपे की मां मरियम का तीर्थस्थल है दुसैया पल्ली.यहां पर प्रत्येक साल ग्वादालूपे मां मरियम के आदर में वार्षिक पर्व मनाया जाता है.इस साल 02 दिसंबर,2022 शुक्रवार से धार्मिक कार्यक्रम शुरू होगी .इस अवसर पर 02 से 10 दिसंबर तक नोवेना, 03 से 05 दिसंबर तक आध्यात्मिक साधना/चुप्पी और 11 दिसंबर रविवार को पर्व दिवस है.मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल में स्थित रायगंज धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष फुलजेंस तिग्गा और बेतिया धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष पीटर सेबेस्टियन हैं.उनके दोनों अति मान्यवर धर्माध्यक्षों के नेतृत्व में 09ः00 बजे सुबह बेतिया चर्च से दुसैया के लिए पदयात्रा आयोजित की जाएगी.

ग्वादालूपे मां मरियम का वार्षिक पर्व दुसैया पल्ली में

02 दिसंबर,2022 शुक्रवार,संध्या 03ः00 बजे से बेतिया धर्मप्रांत के  धर्माध्यक्ष  पीटर  सेबेस्टियन  गोवियस के द्वारा झंडोत्तोलन,पवित्र मिस्सा एवं नोवेना प्रार्थना.

02 दिसंबर से 10 दिसंबर तक प्रतिदिन संध्या 03ः00 बजे से पवित्र रोजरी माला,मिस्सा एवं नोवेना प्रार्थना.

आध्यात्मिक साधना/चुप्पी

03 से 05 दिसंबर तक आध्यात्मिक साधना/चुप्पी,पवित्र रोजरी माला,मिस्सा एवं नोवेना प्रार्थना दोपहर 02ः30 बजे से 06ः00 बजे तक,ब्रदर जेम्स डी.रोजारियो द्वारा संचालित.

11 दिसंबर रविवार को पर्व दिवस है

06ः30 बजे सुबह पवित्र युख्रिस्तीय बलिदान.

09ः00 बजे सुबह बेतिया चर्च से दुसैया के लिए पदयात्रा

11ः00 बजे सुबह दुसैया पल्ली के द्वारा पदयात्रियों का औपचारिक स्वागत

11ः00 बजे से 01:00 बजे तक सभी पदयात्रियों के लिए प्रीतिभोज

12ः00 बजे से 01ः00 बजे तक चंगाई प्रार्थना एवं बीमारों पर आशीष

01ः30 बजे समारोही मिस्सा तत्पश्चात मां मरियम की शोभायात्रा

मुख्य पुरोहित पश्चिम बंगाल में रायगंज धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष फुलजेंस तिग्गा और बेतिया धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष पीटर सेबेस्टियन

फादर अल्फोंस जोजो,ओ.पी.फादर क्लोड कोर्दा,ओ.पी.पल्ली पुरोहित और फादर अंतुनी स्वामी,ओ.पी. 


आलोक कुमार

रोम के वैटिकन नगर के पोप को अपना धर्माध्यक्ष मानते हैं

 * आर्चबिशप फेलिक्स मचाडो, वसई के बिशप को सीबीसीआई के महासचिव के रूप में फिर से चुना गया

*अब सीबीसीआई के पूर्व अध्यक्ष हो गए बॉम्बे के आर्चबिशप कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस


मुंबई. कैथोलिक कलीसिया या रोमन कैथोलिक कलीसिया ईसाई धर्म में वैश्विक ईसाई कलीसिया की एक मुख्य शाखा, तथा सबसे बड़ी कलीसिया है, जिसके अनुयायी रोम के वैटिकन नगर के पोप को अपना धर्माध्यक्ष मानते हैं.

    देश में कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया ( सीबीसीआई) एक राष्ट्रीय निकाय है.इसमें लैटिन, सिरो-मालाबार और सिरो-मलंकारा धार्मिक संगठन( चर्च) के बीच  नेतृत्वकर्ता (बिशप) शामिल होते हैं. तीन धार्मिक संगठनों शीर्ष (बिशप )कार्यालयों को बारी-बारी से  साझा करते है.गत 10 नवंबर को बेंगलुरु में सेंट जॉन नेशनल एकेडमी ऑफ हेल्थ साइंसेज में कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) की चल रही 35 वीं आम सभा की बैठक में त्रिशूर के मेट्रोपॉलिटन प्रमुख आर्कबिशप मार एंड्रयूज थजथ को सीबीसीआई के नए अध्यक्ष के रूप में चुना गया. 

सीबीसीआई के नए अध्यक्ष आर्चबिशप मार एंड्रूज़ थज़थू

  जब त्रिशूर के पहले आर्चबिशप मार जोसेफ कुंडुकुलम ने केरल के दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री के करुणाकरण के साथ दोस्ती शुरू की. यह आरोप लगाया जाता है कि आर्च डीओसीज ने केरल विधानमंडल के लिए अपनी उम्मीदवारी में के . करुणाकरण का समर्थन किया . यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और त्रिशूर के सिरो-मालाबार कैथोलिक आर्च डीओसीज के बीच संबंध की शुरुआत थी. कुडनकुलम की मृत्यु के बाद, मार जैकब थूमकुझी को अगले आर्चबिशप के रूप में चुना गया था. लेकिन थूमकुझी की केरल की राजनीति में कम दिलचस्पी थी . बाद में मार्च एंड्रूज़ थज़थू को आर्चडीओसीज के प्रमुख के लिए चुना गया था.2007 में, उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन शासित सरकार के खिलाफ चर्च और उसके संस्थानों के प्रति अपनी नीतियों के खिलाफ अभियान चलाया . उन्होंने कम्युनिस्ट के नेतृत्व वाली सरकार को यह कहते हुए धमकी भी दी कि चर्च 1950 के दशक के उत्तरार्ध के ‘मुक्ति संघर्ष‘ को फिर से लागू कर सकता है.2007 वर्तमान एंड्रूज़ थज़थू त्रिशूर के तीसरे महानगर महाधर्माध्यक्ष.

मेट्रोपॉलिटन आर्चबिशप सीबीसीआई के पहले उपाध्यक्ष चुने गए

सेंट थॉमस कैथेड्रल बासिलिका और सेंट थॉमस के राष्ट्रीय तीर्थ के रूप में जाना जाता है , भारत के चेन्नई ( मद्रास ) शहर में, सैन्थोम में एक रोमन कैथोलिक नाबालिग बासिलिका   है.यह 1523 में पुर्तगाली खोजकर्ताओं द्वारा सेंट थॉमस की कब्र के ऊपर बनाया गया था , जो येसु के बारह प्रेरितों में से एक था. 1896 में, इसे अंग्रेजों द्वारा फिर से बनाया गया था. ब्रिटिश शैली का चर्च आज भी खड़ा है.इसे नियो-गॉथिक शैली के रूप में डिजाइन किया गया था , जिसे ब्रिटिश वास्तुकारों ने पसंद किया था19वीं सदी के अंत में. यह चर्च दुनिया के केवल तीन ज्ञात चर्चों में से एक है जो येसु के एक प्रेरित की कब्र पर बना है, अन्य दो वेटिकन सिटी में सेंट पीटर की बेसिलिका और गैलिसिया, स्पेन में सैंटियागो डी कंपोस्टेला कैथेड्रल हैं.आर्चबिशप जॉर्ज एंटोनीसैमी, मद्रास-मायलापुर (लैटिन) के मेट्रोपॉलिटन आर्चबिशप सीबीसीआई के पहले उपाध्यक्ष चुने गए हैं. वे 2012 आर्चबिशप हैं.

बिशप मार जोसेफ थॉमस को सीबीसीआई के दूसरे उपाध्यक्ष 

 मलंकारा सीरियन कैथोलिक चर्च का गठन 20 सितंबर 1930 को बिशप मार गीवर्गीस इवानियोस के नेतृत्व में पुनर्मिलन आंदोलन के परिणामस्वरूप किया गया था , जब यह भारतीय रूढ़िवादी चर्च से अलग हो गया और कैथोलिक चर्च के साथ सहभागिता में प्रवेश किया. 17 वीं शताब्दी के सेंट थॉमस ईसाई समुदाय के भीतर विभाजन से ही मलंकारा चर्च उभरा था ; 1653 में कूनन क्रॉस शपथ के बाद , मलंकारा चर्च उस गुट के रूप में उभरा जो लैटिन कैथोलिक पुर्तगाली पद्रोडो के अधिकार का विरोध करने के लिए शपथ ग्रहण में आर्कडेकॉन मार थोमा के साथ खड़ा था. इस गुट ने एंटिओक के सिरियन ऑर्थोडॉक्स चर्च के साथ एक रिश्ते में प्रवेश किया और पश्चिम सिरियेक संस्कार को अपनाया (भारत के सेंट थॉमस ईसाइयों ने इस बिंदु तक पूर्व के ऐतिहासिक चर्च से विरासत में मिली पूर्वी सिरियेक संस्कार का इस्तेमाल किया था ). सिरो -मलंकरा कैथोलिक चर्च इस मलंकारा गुट के उस समूह का प्रतिनिधित्व करता है जो 20 वीं शताब्दी (1930) में रोम के साथ फिर से मिला.बथेरी (मलंकारा) के अधिवेशन के बिशप मार जोसेफ थॉमस को सीबीसीआई के दूसरे उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया.

आलोक कुमार

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