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जून 1, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Bihar : मई माह के अंतिम दिन माता मरियम की आराधना से गूंज उठा बेतिया महागिरजाघर परिसर

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  मई माह के अंतिम दिन माता मरियम की आराधना से गूंज उठा बेतिया महागिरजाघर परिसर बेतिया धर्मप्रांत में मई माह का अंतिम दिन श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास का एक अद्भुत संगम लेकर आया।  Nativity of the Blessed Virgin Mary Cathedral  महागिरजाघर परिसर स्थित विश्व की मां मरियम के ग्रोटो (प्रतिमा स्थल) पर आयोजित विशेष प्रार्थना एवं यात्रा समारोह ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति से भर दिया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि विश्वास, सामुदायिक एकता और प्रकृति के साथ ईश्वरीय सामंजस्य का भी सुंदर उदाहरण बन गया। मई माह को कैथोलिक परंपरा में विशेष रूप से माता मरियम को समर्पित माना जाता है। पूरे महीने श्रद्धालु रोज़री (माला बिनती), प्रार्थना और विशेष आराधना के माध्यम से माता मरियम के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। इस माह के अंतिम दिन आयोजित समारोह का महत्व और भी अधिक था, क्योंकि यह पूरे महीने की भक्ति का समापन समारोह था। महागिरजाघर परिसर में स्थित माता मरियम के ग्रोटो को इस अवसर पर अत्यंत आकर्षक ढंग से सजाया गया था। ग्रोटो के चारों ओर रंग-बिरंगी रोशनियों,...

Bihar : अपराध सिद्ध हुआ और सजा सुनाई गई

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  34 साल बाद मिला न्याय या न्याय की विडंबना? एक समय बिहार सहित पूरे देश में अनौपचारिक शिक्षा के तहत प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम चलाया जाता था। जिन लोगों को बचपन और युवावस्था में पढ़ने का अवसर नहीं मिला, उन्हें सरकार बुढ़ापे में अक्षर ज्ञान देने का प्रयास करती थी। इसके लिए अलग विभाग था, पाठ्यक्रम तैयार होते थे और गांव-गांव में केंद्र संचालित किए जाते थे। जिनकी उम्र जीवन की सांध्य बेला में पहुंच चुकी होती थी, उन्हें भी शिक्षा के दायरे में लाने की कोशिश होती थी। उस समय यह माना जाता था कि शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती। अब कुछ ऐसा ही दृश्य न्याय व्यवस्था में भी दिखाई देने लगा है। फर्क सिर्फ इतना है कि वहां पढ़ाई नहीं, बल्कि न्याय का पाठ पढ़ाया जा रहा है। ऐसा लगता है कि व्यवस्था कह रही हो—"भले ही जीवन का अधिकांश हिस्सा बीत जाए, लेकिन न्याय अवश्य मिलेगा।" मामला वैशाली जिले का जुड़ावनपुर का है। वर्ष 1992 में आपसी विवाद के दौरान पांच लोगों ने घर के सामने बैठे व्यक्तियों पर गोलीबारी की थी। मामला अदालत पहुंचा और न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई। लेकिन न्याय की गाड़ी इतनी धीमी चली कि फ...

Bihar : कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल में वेतन समझौता: टकराव से सहमति तक का सफर

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  कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल में वेतन समझौता: टकराव से सहमति तक का सफर राजधानी पटना स्थित Kurji Holy Family Hospital बिहार के प्रमुख निजी और मिशनरी अस्पतालों में से एक माना जाता है। वर्षों से यह अस्पताल चिकित्सा सेवा, सामाजिक दायित्व और मानवता की सेवा के लिए अपनी पहचान बनाए हुए है। अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों के हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं को उठाने के लिए कुर्जी होली फैमिली अस्पताल कर्मचारी यूनियन भी सक्रिय रूप से कार्य करती रही है। समय-समय पर अस्पताल प्रबंधन और यूनियन के बीच विभिन्न मुद्दों पर बातचीत होती रही है, लेकिन हाल के वर्षों में वेतन वृद्धि को लेकर जो घटनाक्रम सामने आया, उसने श्रम संबंधों और संवाद की एक दिलचस्प मिसाल पेश की। किसी भी संस्थान में कर्मचारी यूनियन का प्रारंभिक स्वरूप प्रायः संघर्षशील होता है। कर्मचारियों की मांगों को मजबूती से रखने के लिए यूनियन को कई बार आक्रामक रुख अपनाना पड़ता है। कुर्जी होली फैमिली अस्पताल कर्मचारी यूनियन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। शुरुआती दौर में यूनियन के तेवर काफी सख्त दिखाई देते थे, लेकिन समय के साथ उसने अस्पताल और कर्मचारियों ...

India : दो जून की रोटी का संघर्ष: भारत के मेहनतकश वर्ग की कड़वी हकीकत

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  दो जून की रोटी का संघर्ष: भारत के मेहनतकश वर्ग की कड़वी हकीकत “दो जून की रोटी” केवल एक मुहावरा नहीं है, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष है। इसका अर्थ है दिन में दो समय भरपेट भोजन की व्यवस्था करना। सुनने में यह एक सामान्य आवश्यकता लगती है, लेकिन भारत के असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों, भूमिहीन किसानों, प्रवासी श्रमिकों और गरीब परिवारों के लिए यह आज भी एक कठिन चुनौती बनी हुई है। वर्ष 2026 में भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी रोज़ी-रोटी की चिंता में अपना जीवन गुजार रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र पर आधारित है। निर्माण कार्य, कृषि, ईंट-भट्ठे, घरेलू कामकाज, रिक्शा-चालन, छोटे दुकानों और कारखानों में काम करने वाले करोड़ों लोग इसी क्षेत्र से जुड़े हैं। इन श्रमिकों की सबसे बड़ी समस्या अनियमित आय है। दिहाड़ी मजदूरों को काम मिलने पर ही मजदूरी मिलती है। यदि किसी दिन काम नहीं मिला, बारिश हो गई या तबीयत खराब हो गई, तो उस दिन परिवार के चूल्हे पर संकट खड़ा ह...