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Bihar : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से शिष्टाचार मुलाकात

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  बिहार के भविष्य की नई तस्वीर: जब शिक्षा और नेतृत्व एक मंच पर आए किसी भी राज्य की वास्तविक ताकत उसकी सड़कों, इमारतों या प्राकृतिक संसाधनों में नहीं, बल्कि उसके शिक्षित, जागरूक और सशक्त युवाओं में निहित होती है। जब शिक्षा जगत और शासन व्यवस्था भविष्य की दिशा तय करने के लिए एक साथ आते हैं, तब ऐसी मुलाकातें केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं रह जातीं, बल्कि विकास की नई संभावनाओं का आधार बनती हैं। पटना में ऐसा ही एक प्रेरणादायक अवसर देखने को मिला, जब पटना वीमेंस कॉलेज (स्वायत्त) के प्रतिनिधिमंडल ने  बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से शिष्टाचार मुलाकात की है। इस दौरान राज्य में शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और शैक्षणिक विकास के विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई।नेतृत्व से शिष्टाचार भेंट कर शिक्षा, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सिस्टर एम. रश्मि ए.सी. के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पदभार ग्रहण करने पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस प्रतिनिधिमंडल में उप-प्राचार्या डॉ. सिस्टर एम. तनिशा ए.सी. तथा श्री आलोक जॉन, डीन – नेशनल एंड...

India : 12 साल का इंतज़ार, हजार रुपये की पेंशन और बुजुर्गों की उम्मीदें

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 12 साल का इंतज़ार, हजार रुपये की पेंशन और बुजुर्गों की उम्मीदें: क्या 9 जुलाई की बैठक से निकलेगा कोई रास्ता? जिस उम्र में व्यक्ति को सम्मान, सुरक्षा और सुकून मिलना चाहिए, उस उम्र में यदि उसे दवा, भोजन और जीवनयापन के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता की भी परीक्षा है। देश के लाखों ईपीएस-95 (EPS-95) पेंशनभोगी पिछले एक दशक से अधिक समय से इसी चुनौती का सामना कर रहे हैं। एक ओर महंगाई लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर हजार से डेढ़ हजार रुपये मासिक पेंशन पाने वाले अनेक बुजुर्ग अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए सं घर्ष कर रहे हैं। न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपये प्रतिमाह करने, महंगाई भत्ता लागू करने तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर वर्षों से आंदोलन जारी है। 12 वर्षों से जारी है संघर्ष ईपीएफओ पेंशनभोगियों की विभिन्न मांगों को लेकर वर्ष 2013-14 के दौरान राष्ट्रीय संघर्ष समिति का गठन किया गया था। इसके बाद देशभर में पेंशनभोगियों ने धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन और जनजागरण अभियान चलाए। समिति के अध्यक्ष अशोक राउत के नेतृत्व में पेंश...

India : "हो गई है पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिए

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          "हो गई है पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिए,  इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए..." महान कवि दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियाँ "हो गई है पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिए..." — श्रीगंगानगर से उठी एक नई क्रिकेट क्रांति का नाम है मानव सुथार। उस युवा क्रिकेटर पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं, जिसने वर्षों की मेहनत, संघर्ष और धैर्य के बाद भारतीय क्रिकेट के दरवाजे पर ऐसी दस्तक दी कि पूरा देश उसकी ओर देखने लगा। जून 2026 की वह सुबह भारतीय क्रिकेट के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी, जब मुल्लांपुर (न्यू चंडीगढ़) के मैदान पर भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले जा रहे टेस्ट मैच में 23 वर्षीय मानव सुथार ने भारतीय टेस्ट टीम की कैप पहनकर अपने सपनों को हकीकत में बदल दिया। जब कुलदीप यादव ने उनके सिर पर भारत की 319वीं टेस्ट कैप सजाई, तब यह केवल एक खिलाड़ी का डेब्यू नहीं था, बल्कि भारतीय क्रिकेट को एक नए स्पिन ऑलराउंडर की सौगात मिलने का क्षण था। यह उस युवा की कहानी थी जिसने राजस्थान की धरती से निकलकर राष्ट्रीय टीम तक का सफर अपने प्रदर्शन के दम पर तय किया। डेब्यू मैच में ही बना दिया इतिहास अंतर...

India : ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक की पहुंच बढ़ाकर विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए

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भारत आज तेजी से डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा भारत आज तेजी से डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। इंटरनेट, मोबाइल तकनीक और डिजिटल सेवाओं ने देश के विकास को नई दिशा दी है। एक समय था जब डिजिटल सुविधाओं को केवल शहरों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब गांव भी इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं। डिजिटल भारत अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक की पहुंच बढ़ाकर विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। डिजिटल भारत अभियान का उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक को तकनीक से जोड़ना, सरकारी सेवाओं को सरल बनाना और डिजिटल माध्यमों के जरिए पारदर्शिता तथा सुगमता सुनिश्चित करना है। इसका प्रभाव अब ग्रामीण भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ-साथ लोगों की सोच और जीवनशैली में भी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कुछ वर्ष पहले तक ग्रामीण नागरिकों को सरकारी प्रमाण पत्र, पेंशन, बैंकिंग सेवाओं या अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए शहरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई बार एक छोटे से कार्य के लिए पूरा दिन खर्च हो जाता था। लेकिन आज डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता न...

Bihar : बिहार में बढ़ती गर्मी और जल संकट

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  बिहार में बढ़ती गर्मी और जल संकट: समय रहते चेतने की जरूरत जून का महीना शुरू होते ही बिहार के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी का असर दिखाई देने लगा है। कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। तेज धूप, गर्म हवाओं और उमस भरे मौसम ने लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित कर दिया है। शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां पेयजल की उपलब्धता और जल संरक्षण की व्यवस्था पहले से ही सीमित है। गर्मी बढ़ने के साथ-साथ जल संकट भी गहराता जा रहा है। गांवों में रहने वाले लोगों का जीवन खेती, पशुपालन और प्राकृतिक जल स्रोतों पर काफी हद तक निर्भर करता है। ऐसे में जब जलस्तर नीचे जाने लगता है और बारिश समय पर नहीं होती, तो इसका सीधा प्रभाव ग्रामीण जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। जलस्तर गिरने से बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी बिहार के कई गांवों में हैंडपंप और चापाकल गर्मी के दिनों में पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहे हैं। भूजल स्तर नीचे जाने के कारण लोगों को पीने और घरेलू उपयोग के लिए पानी जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर महिलाओं और ब...