तरीका चर्च में बार-बार विमर्श का विषय बनता रहा है
पटना. परमप्रसाद (पवित्र कम्युनियन) केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह वह क्षण है जब ईसाई अनुयायी स्वयं प्रभु यीशु मसीह को ग्रहण करते हैं.यह संस्कार अनुयायियों को न केवल पवित्रता प्रदान करता है बल्कि उन्हें आध्यात्मिक शक्ति से परिपूर्ण करता है और परमेश्वर के निकट लाता है.इसी कारण, इसका महत्व और इसका तरीका चर्च में बार-बार विमर्श का विषय बनता रहा है. रोमन कैथोलिक परंपरा में पुरोहित “ख्रीस्त का शरीर और रक्त” कहकर लोकधर्मियों की जीभ पर कम्युनियन रखते थे.यह पद्धति पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे प्रभु के प्रति गहरी श्रद्धा का प्रतीक माना गया.परंतु कोरोना महामारी के दौरान सुरक्षा कारणों से प्रीस्ट ने कम्युनियन लोकधर्मियों के हाथ में देना आरंभ किया.अब जब महामारी का दौर थम चुका है, बेतिया धर्मप्रांत के बिशप पीटर सेबेस्टियन गोबियस ने पुराने तरीके को फिर से अपनाने का आदेश जारी किया है.उनके अनुसार पुरोहितों को लोकधर्मियों की जीभ पर ही परमप्रसाद रखना चाहिए. प्रसिद्ध प्रीस्ट और लेखक फादर जॉर्ज मैरी क्लैरेट ने भी अपने वीडियो संदेश में ...