India : अटल जी की प्रतिमा पर कथित छल: भ्रष्टाचार ने आदर्शों को भी नहीं छोड़ा
अटल जी की प्रतिमा पर कथित छल: क्या भ्रष्टाचार ने आदर्शों को भी नहीं छोड़ा? भारतीय राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बन जाते हैं। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे ही नेताओं में गिने जाते हैं। वे केवल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता या देश के पूर्व प्रधानमंत्री भर नहीं थे, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, राजनीतिक शालीनता, संवाद की संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक माने जाते हैं। उनके व्यक्तित्व का सम्मान राजनीतिक मतभेदों से परे जाकर किया जाता है। ऐसे नेता की प्रतिमा के निर्माण में यदि भ्रष्टाचार या अनियमितता के आरोप सामने आते हैं, तो यह केवल आर्थिक गड़बड़ी का मामला नहीं रह जाता, बल्कि यह समाज की नैतिक संवेदनाओं को भी झकझोर देता है। भारतीय जनता पार्टी स्वयं को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल होने का दावा करती है। उसकी सबसे बड़ी शक्ति उसके लाखों समर्पित कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने में वर्षों का परिश्रम लगाया है। इन्हीं कार्यकर्ताओं के समर्पण और जनता के विश्वास के आधार पर पार्टी ...