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Bihar : सड़क बनती है, टूटती है और फिर बनती है

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सड़क बनती है, टूटती है और फिर बनती है—जवाबदेही किसकी? बिहार में सड़क निर्माण और मरम्मत पर हर साल बड़ी राशि खर्च होती है। नई सड़क बनती है, कुछ समय बाद उस पर गड्ढे दिखाई देने लगते हैं, बरसात में कई जगह सड़क की परत उखड़ जाती है और फिर मरम्मत के नाम पर सरकारी मशीनरी सक्रिय हो जाती है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सड़क क्यों टूटी। बड़ा सवाल यह है कि अगर निर्माण में कमी थी तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है और जनता के पैसे से बनी सड़क इतनी जल्दी खराब क्यों हुई? सड़क किसी भी राज्य के विकास की बुनियादी जरूरत है। यह गांव को बाजार से, किसान को मंडी से, मरीज को अस्पताल से और बच्चों को स्कूल-कॉलेज से जोड़ती है। सड़क मजबूत होगी तो परिवहन आसान होगा, समय बचेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। लेकिन जब सड़क की गुणवत्ता कमजोर हो, पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न हो और समय पर रखरखाव नहीं किया जाए, तो यही विकास का आधार लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। सड़क बनने के बाद उसकी उम्र कौन तय करता है? किसी सरकारी सड़क के निर्माण के दौरान सामग्री की गुणवत्ता, सड़क की मोटाई, बेस और सब-बेस, दबाव, जलनिकासी तथ...