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Bihar : छोटे किसानों के लिए सिंचाई आज भी बड़ी चुनौती क्यों? खेत तक पानी पहुंचने में कहां अटकती है व्यवस्था

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  छोटे किसानों के लिए सिंचाई आज भी बड़ी चुनौती क्यों? खेत तक पानी पहुंचने में कहां अटकती है व्यवस्था पटना। बिहार की कृषि व्यवस्था में छोटे और सीमांत किसान सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जमीन का आकार भले छोटा हो, लेकिन परिवार की आय, भोजन और रोजगार का बड़ा हिस्सा खेती से जुड़ा होता है। ऐसे किसानों के लिए खेती की सफलता केवल अच्छे बीज और खाद पर निर्भर नहीं करती। सबसे जरूरी जरूरत है— समय पर, पर्याप्त और किफायती सिंचाई । बारिश सामान्य रही तो किसान की उम्मीद बढ़ती है, लेकिन मानसून में देरी, लंबे सूखे अंतराल या जरूरत से ज्यादा बारिश पूरी फसल की योजना बिगाड़ सकती है। बड़े किसान किसी हद तक निजी नलकूप, पंपसेट या अन्य साधनों से इस जोखिम को संभाल लेते हैं। छोटे किसान के पास ऐसे विकल्प सीमित होते हैं। इसलिए सिंचाई का सवाल केवल खेत में पानी पहुंचाने का विषय नहीं है। यह किसान की लागत, फसल के चुनाव, उत्पादन, जोखिम और अंततः उसकी आय से सीधे जुड़ा हुआ है। बारिश पर निर्भरता अब भी बड़ी मजबूरी बिहार में मानसून कृषि के लिए महत्वपूर्ण है। खरीफ मौसम में धान सहित कई फसलों के लिए बारिश की भूमिका बड़ी होती है। लेक...

Bihar : बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि आज भी सबसे महत्वपूर्ण आधारों में शामिल

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बिहार के किसानों की लागत और बाजार भाव के बीच बढ़ती दूरी: खेत में मेहनत किसान की, कीमत तय करने की ताकत किसकी? पटना। बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि आज भी सबसे महत्वपूर्ण आधारों में शामिल है। गांवों कीबड़ी आबादी खेती, पशुपालन, कृषि मजदूरी, मंडी कारोबार और उससे जुड़े छोटे व्यवसायों पर निर्भर है। धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तेलहन, सब्जियां और फल जैसी फसलें किसानों की आय का प्रमुख साधन हैं। लेकिन कृषि की तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि फसल पैदा करने की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किसान को मिलने वाला बाजार भाव कई बार उसकी उम्मीद के अनुरूप नहीं होता। यही अंतर बिहार के किसान की सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती बनता जा रहा है। खेती में जोखिम किसान का है, मौसम का असर किसान झेलता है, उत्पादन की लागत किसान उठाता है, लेकिन फसल तैयार होने के बाद उसकी कीमत तय करने की ताकत अक्सर उसके हाथ में नहीं रहती। बीज से बाजार तक बढ़ता खर्च आज खेती पहले की तुलना में अधिक खर्चीली हो गई है। खेत की जुताई, बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी, डीजल, कृषि मशीनरी और फसल को बाजार तक पहुंचाने में पैसा खर्च होता है। जिन किसानों के पास अ...

Bihar : मानसून की दस्तक और किसानों की उम्मीदें: खेती की तैयारी में जुटा बिहार

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  बिहार में मानसून की आहट के साथ किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गए  बिहार में मानसून की आहट के साथ किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गए हैं। जानिए खेती, सिंचाई, बीज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर मानसून का प्रभाव। "आसमान में दिखने वाले हर बादल के साथ बिहार के किसानों की उम्मीदें भी उड़ान भरने लगती हैं। क्योंकि यहां मानसून सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि खेतों की हरियाली, घरों की खुशहाली और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई शुरुआत का संदेश लेकर आता है।" बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है। जून का महीना शुरू होते ही गांवों में खेती की तैयारियां तेज हो गई हैं। खेतों की जुताई, बीजों की व्यवस्था और सिंचाई संसाधनों की तैयारी के बीच किसानों की निगाहें अब मानसून पर टिकी हुई हैं। राज्य के अधिकांश किसान खरीफ फसलों, विशेष रूप से धान की खेती पर निर्भर हैं। धान उत्पादन का बड़ा हिस्सा समय पर होने वाली वर्षा पर आधारित होता है। यही कारण है कि मानसून की पहली बारिश किसानों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं मानी जाती। इन दिनों बिहार के विभिन्न जिलों मे...