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बेतिया धर्मप्रांत का निर्माण का 25 साल

 

बेतिया  धर्मप्रांत का निर्माण का 25 साल

बेतिया. पश्चिम चंपारण जिले में बेतिया है. 27 जून, 1998 को बेतिया  धर्मप्रांत का निर्माण किया गया.इसका श्रेय पोप जॉन पॉल II को जाता है.इस नए धर्मप्रांत में पांच जिले पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान और सारण को शामिल किया गया.रायपुर धर्मप्रांत के एक पुरोहित फादर विक्टर हेनरी ठाकुर को बेतिया का पहला बिशप नियुक्त किया गया.

       बता दें कि पटना धर्मप्रांत को विभक्त कर मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत 1980 में बनाया गया.पटना धर्मप्रांत के प्रथम बिहारी बिशप बनने का गौरव फादर बेनेडिक्ट जौन ओस्ता को प्राप्त हुआ.21 जून 1980 को बिशप बने.वहीं मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के बिशप जौन बापतिस्ट ठाकुर बने.24 जून 1980 को बिशप बने.दोनों जेसुइट है.

     बता दें कि बिहार राज्य के उत्तर-पश्चिमी भाग में पांच भोजपुरी भाषी जिलों को मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत से अलग कर 18 साल के बाद 27 जून, 1998 को बेतिया धर्मप्रांत का निर्माण किया गया.रायपुर धर्मप्रांत के एक पुरोहित फादर विक्टर हेनरी ठाकुर को बेतिया का पहला बिशप नियुक्त किया गया.11 नवंबर 1998 को कार्डिनल टेलेस्फोर टोप्पो के द्वारा बिशप अभिषेक हुआ.

      बिशप विक्टर हेनरी ठाकुर का जन्म और पालन-पोषण बेतिया धर्मप्रांत के चखनी में हुआ था, लेकिन उन्होंने रायपुर धर्मप्रांत में एक मिशनरी बनना चुना.इस प्रकार बिशप के रूप में धर्मप्रांत में उनकी वापसी काफी स्वाभाविक थी.इस बीच बेतिया के बिशप विक्टर हेनरी ठाकुर को रायपुर के आर्चबिशप के रूप में नियुक्त किया गया.इसके चलते बेतिया धर्मप्रांत बिशप विहीन 3 जुलाई 2013 तक था.

       बेतिया धर्मप्रांत में जन्म लेने वाले पुरोहितों को तरजीह न देकर परम पावन पोप फ्रांसिस ने भागलपुर के फादर पीटर सेबास्टियन गोवेस को बेतिया के नए बिशप के रूप में घोषित कर दिया.जिसकी घोषणा शनिवार, 22 जुलाई, 2017 को अपराह्न 3.30 बजे की गई. 19 अक्टूबर 2017 को पीटर सेबास्टियन गोवेस को बेतिया धर्मप्रांत के बिशप के रूप में नियुक्त कर दिया गया.

   इस समय मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के बिशप काजीटेन फ्रांसिस ओस्ता है.बेतिया धर्मप्रांत के बिशप पीटर सेबास्टियन गोवेस है.अब तक बिशप बीजे ओस्ता, बिशप काजीटेन फ्रांसिस ओस्ता, बिशप जेबी ठाकुर और बिशप विक्टर हेनरी ठाकुर ही धरती पुत्र बिशप बन पाए हैं.दो 'ओस्ता' और उतने ही 'ठाकुर' बिशप बने.


एकता परिषद बिहार के अध्यक्ष श्री विजय गोरैया सम्मानित

  


मुजफ्फरपुर.इस जिले के कुढ़नी प्रखंड में है एकता परिषद का कार्यालय.आज बुधवार को एकता परिषद,उत्तर बिहार की जिला स्तरीय बैठक जनहित आश्रम सकरी सरैया में की गई.एकता परिषद के जिलाध्यक्ष शिवनाथ पासवान ने बैठक की अध्यक्षता की. इसका संचालन राम लखींद्र प्रसाद जिला संयोजक ने किया.

   जिला संयोजक राम लखींद्र प्रसाद ने कहा कि इस बैठक की शुरुआत जय जगत गीत से शुरू की गई.गीत के प्रमुख गायक श्री विशेश्वर गुप्ता थे.इस बैठक में कुढ़नी एवं सरैया प्रखंड के साथियों ने भाग लिया. राजधानी पटना में स्थित एकता परिषद के प्रांतीय कार्यालय में एकता परिषद बिहार के अध्यक्ष श्री विजय गोरैया का चयन किया गया था.मुजफ्फरपुर जिला के सदस्यों ने एकता परिषद बिहार के अध्यक्ष श्री विजय गोरैया को शॉल एवं गांधी सूत्र देकर सम्मानित किया गया.

     


जिला संयोजक ने कहा कि प्रांतीय कार्यालय की बैठक में लिये गये निर्णयानुसार आज 10 मई 2023 को जिला स्तरीय बैठक की गयी.मौके पर  एकता परिषद बिहार के अध्यक्ष श्री विजय गोरैया अपने संबोधन में आवासीय भूमिहीनों का सर्वे करके आवासीय भूमिहीनों को भूमि देने पर बल दिया.युवा बेरोजगारों को वादों के अनुसार सरकारी नौकरी देने का आग्रह सरकार से किया गया.सभी को एक समान शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कानून बनाने के लिए जुझारू संघर्ष का ऐलान किया. समस्याओं के निदान करने के सिलसिले में एक दिवसीय प्रखंड मुख्यालय कुढ़नी पर धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया.

     

 इस अवसर पर कुढ़नी प्रखंड कमेटी क्या गठन किया गया.प्रांतीय प्रशिक्षण शिविर में जिले से 27  महिला और पुरुष का चयन किया गया.सरैया प्रखंड के संयोजक मनीष कुमार का चयन किया गया. अभिनंदन के लिए भावुक आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया. बैठक की चर्चा में सर्वश्री रामानुज राकेश, महादेव भाई, ब्रजकिशोर सिंह,विशेश्वर गुप्ता, विद्यानंद प्रसाद, नीतीश कुमार,बिगन  मंडल, रघुनाथ राम,शंकर मांझी, बच्चू राम, रामबाबू साहनी, अरुण सिंह, बसंत कुमार,पांचू शाह, शंभू शाह, मनीष कुमार, के अलावे प्रमिला देवी, राम शीला देवी, जोगी देवी आदि सदस्यों ने अपने-अपने विचार एवं सुझाव दिए.   

       एक अन्य खबर के अनुसार वर्तमान में कोसी प्रमंडल, सहरसा में तीन जिले क्रमशः सहरसा,सुपौल और मधेपुरा है.आज मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड में संचालित एकता परिषद की बैठक गोपाली टोला में की गयी.इस बैठक में ग्राम इकाई निर्माण का शुभारंभ किया गया. कुसुम लाल ऋषि देव की अध्यक्षता बैठक और चर्चा की गयी. नरेश जी ने अनाज कोष संग्रह, आवासीय भूमिहीन एवं मनरेगा पर वार्ता की वार्ता गई. इसी तरह की बैठक दीना पट्टी सखुआ पंचायत अंतर्गत गोपाली टोला मे की गई. ग्राम इकाई के अध्यक्ष सैनी ऋषि देव, सचिव मीना देवी एवं कोषाध्यक्ष संजुल देवी सर्वसम्मति से निर्वाचित की गई.


आलोक कुमार

ददन विश्वकर्मा ने अपने ठेले का नाम ‘पत्रकार पोहा वाला’ रखा

 पटना.पटना में 'ग्रेजुएट चायवाली' और  ‘पत्रकार पोहा वाला’ की खबर सुर्खियों में है. ग्रेजुएट चायवाली प्रियंका की चाय की दुकान पर विभिन्न किस्म की चाय मिल सकती है जैसे कि कुल्हड़ चाय, मसाला चाय, पान चाय और चॉकलेट चाय.उसी तरह  ‘पत्रकार पोहा वाला’ ददन विश्वकर्मा के पास कुल दो तरह के पोहा हैं, एक रिपोर्टर स्पेशल और एक एडिटर स्पेशल.

ग्रेजुएट चायवाली के नाम से मशहूर प्रियंका गुप्ता

ग्रेजुएट चायवाली के नाम से मशहूर प्रियंका गुप्ता बिहार के पूर्णिया जिले की रहने वाली है. प्रियंका ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक किया है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने सामान्य प्रतियोगिता के क्षेत्र में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भी भाग लिया था. 

     पटना की ग्रेजुएट चायवाली प्रियंका गुप्ता आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है. प्रियंका बताती हैं कि उसे पहचान दिलाने में मीडिया का अहम योगदान है. वे बताती है कि जब उन्होंने चाय का स्टॉल लगाया तो मीडिया ने उसे जमकर कवर किया. इसका परिणाम यह हुआ कि उसे दूर-दूर तक के लोग जानने लगे. लेकिन उसकी चाय के कार्ट को अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत निगम ने कई बार उठा लिया. इसके बाद वह सोशल मीडिया पर रोती हुई भी नजर आई थी. लेकिन एक बार फिर वह नए क्लेवर में वापस आ गई है.

       पटना के वीमेंस कॉलेज के सामने कभी चाय का स्टॉल लगाती थी. बाद में उसने अपना स्टॉल बोरिंग रोड में लगाया. अब ग्रेजुएट चाय वाली सिर्फ चाय ही नहीं बल्कि स्वादिष्ट पकवान भी खिला रही है. ग्रेजुएट चाय वाली ने कार्ट छोड़कर अब अपना एक रेस्त्रा खोल लिया है. इस नई जगह पर सिर्फ फ्लेवर्ड चाय ही नहीं, बल्कि खाने-पीने की कई और लजीज चीजें भी मिलती है.

       प्रियंका ने पटना के बोरिंग रोड में हरिहर चैंबर के सामने पंडूई पैलेस के बेसमेंट में अपना रेस्त्रा खोला है. शेफ बैजू कुमार की माने तो इस रेस्त्रा में फ्लैवर्ड चाय के अलावा मोमोज, बर्गर, रोल और बिरयानी जैसे तमाम फूड आइटम्स भी खिलाए जा रहे हैं. इस बार तिजोरी भी रखी गई है. दावा किया जा रहा है कि अगर किसी ग्राहक को खाना पसंद नहीं आया तो शत प्रतिशत पैसा वापस कर दिया जाएगा. शेफ बैजू कुमार इस रेस्त्रा के पार्टनर भी हैं. वे बताते हैं कि वे अपने फूड आइटम्स में विदेशी वेजिटेबल्स मिलाते हैं, जिससे स्वाद बढ़ जाता है.

पत्रकार ददन विश्वकर्मा ने नोएडा फिल्म सिटी में पोहे का ठेला लगा


ज़ी न्यूज़ से नौकरी से निकाले जाने के बाद पत्रकार ददन विश्वकर्मा ने नोएडा फिल्म सिटी में पोहे का ठेला लगा लिया है. तीन महीने पहले तक इसी फिल्म सिटी में ददन विश्वकर्मा ज़ी न्यूज़ में बतौर असिस्टेंट न्यूज़ एडिटर कार्यरत थे. फिलहाल उन्होंने फिल्म सिटी में आज तक के ऑफिस के ठीक सामने ठेले पर पोहा-जलेबी बेचने का नया व्यवसाय शुरू किया है.

        ददन विश्वकर्मा ने बताया, "दिसंबर 2022 में छटनी और ऑफिस पॉलिटिक्स की वजह से नौकरी से निकाल दिया गया. तीन महीने तक नौकरी ढूंढने के बावजूद जब नौकरी नहीं मिली तो आर्थिक मजबूरियों के कारण मैंने यह ठेला लगाया है."

           ददन विश्वकर्मा ने हमें बताया कि उन्हें 13 सालों का पत्रकारिता का अनुभव है. भारतीय जनसंचार संस्थान से वर्ष 2010-11 में हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद वह दैनिक भास्कर के साथ जुड़े. 2011 से लेकर 2014 तक दैनिक भास्कर में काम करने के बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स के साथ काम किया. यहां 2014 से 2016 तक काम करने के बाद वे आज तक चले गए. यहां उन्होंने चार सालों तक काम किया. इसके बाद 2020 में उन्होंने ज़ी न्यूज़ ज्वाइन कर लिया. हालांकि दिसंबर 2022 में ऑफिस पॉलिटिक्स और छंटनी का शिकार होने के कारण उन्हें अपनी नौकरी गंवानी पड़ी.

         ददन बताते हैं कि उन्होंने पत्रकारिता के जरिए समाज को कुछ देने के मकसद से बीएससी छोड़कर पत्रकारिता की पढ़ाई की थी. लेकिन आज आर्थिक मजबूरियों के चलते उन्हें ठेला लगाना पड़ रहा है. वह कहते हैं यह मत सोचिए कि पत्रकार ठेला लगा रहा है. ये ठेला कोई पत्रकार नहीं लगा रहा है बल्कि मजबूरियों और परिस्थितियों में जकड़ा हुआ इंसान ठेला लगा रहा है.

       पत्रकारिता छोड़ने के सवाल पर ददन कहते हैं कि एक पत्रकार हमेशा पत्रकार होता है, चाहे वह किसी संस्थान से जुड़ा हो या न जुड़ा हो. उन्होंने बताया कि ठेला इसलिए शुरू किया है ताकि परिवार गुजारा का हो सके. वे सोशल मीडिया के जरिए पत्रकारिता जारी रखने की बात कहते हैं. वह कहते हैं कि जब उन्हें जरूरत महसूस होगी कि तो मुद्दों पर बोलेंगे भी और लिखेंगे भी. 

       ददन विश्वकर्मा ने अपने ठेले का नाम ‘पत्रकार पोहा वाला’ रखा है. उनके पास कुल दो तरह के पोहा हैं, एक रिपोर्टर स्पेशल और एक एडिटर स्पेशल.


आलोक कुमार

Jharkhand : खूंटी में आखिर चल क्या रहा है?

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