यह नाम परंपरा और परिवर्तन—दोनों का संतुलित प्रतीक बनकर उभरता है
भारतीय जनसंघ से भाजपा तक: राष्ट्रीय अध्यक्षों की परंपरा और नितिन नबीन का उभार इतिहास की तस्वीरें तब बदलती हैं, जब संगठन ज़मीन से उठे नेतृत्व पर भरोसा जताता है. भारतीय जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक की यात्रा केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं, बल्कि एक सुदीर्घ संगठनात्मक परंपरा का विस्तार है. इस परंपरा में राष्ट्रीय अध्यक्षों की भूमिका केंद्रीय रही है—वे विचार, संगठन और अनुशासन के धुरी रहे हैं. भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय जनसंघ की स्थापना के साथ जिन नेताओं ने संगठन की वैचारिक नींव रखी, वे आज भी राजनीतिक इतिहास में स्मरणीय हैं— डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (1951–1952) मौलि चन्द्र शर्मा (1954)...