India : दो जून की रोटी का संघर्ष: भारत के मेहनतकश वर्ग की कड़वी हकीकत
दो जून की रोटी का संघर्ष: भारत के मेहनतकश वर्ग की कड़वी हकीकत “दो जून की रोटी” केवल एक मुहावरा नहीं है, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष है। इसका अर्थ है दिन में दो समय भरपेट भोजन की व्यवस्था करना। सुनने में यह एक सामान्य आवश्यकता लगती है, लेकिन भारत के असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों, भूमिहीन किसानों, प्रवासी श्रमिकों और गरीब परिवारों के लिए यह आज भी एक कठिन चुनौती बनी हुई है। वर्ष 2026 में भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी रोज़ी-रोटी की चिंता में अपना जीवन गुजार रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र पर आधारित है। निर्माण कार्य, कृषि, ईंट-भट्ठे, घरेलू कामकाज, रिक्शा-चालन, छोटे दुकानों और कारखानों में काम करने वाले करोड़ों लोग इसी क्षेत्र से जुड़े हैं। इन श्रमिकों की सबसे बड़ी समस्या अनियमित आय है। दिहाड़ी मजदूरों को काम मिलने पर ही मजदूरी मिलती है। यदि किसी दिन काम नहीं मिला, बारिश हो गई या तबीयत खराब हो गई, तो उस दिन परिवार के चूल्हे पर संकट खड़ा ह...